गुरुवार, 26 जनवरी 2023

ज्योतिष हम सभी के लिए है

                                     

यह सच है कि ज्योतिष पर सबसे ज़्यादा ध्यान देने वाले लोगों की सबसे बड़ी संख्या वयस्क - आयु वर्ग की महिलाओ की हैं । अधिकांश महिलाएं खुद को "रक्षक" के रूप में देखती हैं, जो अपने जीवन में अन्य सभी लोगों और उनके साथ अपने संबंधों के लिए जिम्मेदार है साथ ही यह महसूस करने की महिलाओ की आमतौर से  विशेषता रहती है कि उका जीवन चाहे अच्छा है या बुरा, परंतु जीवन मे सकारात्मक परिवर्तनों को प्रभावित करने की स्थिति में उका स्थान अवश्य है । इन्हीं कारणों से ज्योतिष - साधकों में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक रहती है ।

ज्योतिष के माध्यम से महिलाएं अपने, अपने जीवन, अपने सहयोगियों और अपने भविष्य के बारे में अधिक जान सकती है और, इस तरह के ज्ञान को प्राप्त कर अपनी व्यक्तिगत शक्तियों और कमजोरियों का आंकलन करने की बहुत लाभकारी स्थिति प्राप्त कर सकती हैं जिससे उन्हे बदले में किसी के भी जीवन को नियंत्रित करने के कई अवसर भी प्राप्त हो जाते हैं

बहुत ही कम पुरुषों को ज्योतिष में गंभीर रुचि होती है । जब वे ऐसा करते हैं, तो आमतौर पर विशिष्ट प्रश्नों या समस्याओं के लिए विशिष्ट विवरणों और उत्तरों की आवश्यकता के बजाय उनके जीवन का सामान्य अवलोकन कम होता है ।

पुरुष ज्योतिष में अपनी रुचि ऐसे विषयों पर केंद्रित करने की अधिक संभावना रखते हैं जैसे कि कोई विशेष नौकरी कैसे प्राप्त करें, व्यावसायिक निर्णय कैसे लें अथवा किसी भिन्न क्षेत्र में स्थानांतरित होने या न होने के बारे में जानकारी प्राप्त करना । इन सभी विषयों को एक ज्योतिषीय दृस्टिकोण में लाकर इससे उन उत्तरों या समाधानों को ढूंढा जा सकता है जिनकी उसे बेहतर जानकारी देने और निर्णय लेने के लिए सबसे अच्छा परिणाम मिलने की संभावना रहती है ।

किशोर और युवा वयस्क अक्सर ज्योतिष के बारे में उत्सुक होते हैं । दुर्भाग्य से, अगर उन्हें ठीक से सूचित नहीं किया जाता है, तो वे ये विश्वास करते हैं कि ज्योतिष मूल रूप से भविष्य की भविष्यवाणी करने के बारे में है और कुछ नहीं । किशोरों को ज्योतिष द्वारा यह समझकर सबसे अच्छी सहायता मिल सकती है कि ज्योतिष का दायरा साधारण भविष्यवाणियों से कहीं आगे जाता है और, इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि भविष्यवाणियां भी केवल "संभावित" होने की बात है कि व्यक्ति स्वयं या स्वयं घटनाओं के अपने स्वयं के प्रतिक्रियाओं से वास्तव में क्या होता है, समे भावी जीवन प्रभावित करने की एक बड़ी क्षमता है जो हर दिन घटित होता रहता है । संभावना को नक्शे के रूप में देखे जाने पर ज्योतिष सबसे अच्छा काम करता है, जिस पर व्यक्ति का बहुत प्रभाव होता है ।

यह किसी भी किशोर या युवा वयस्क के लिए एक अद्भुत संपत्ति हो सकती है जो जीवन के उस चरण में है जहां वह भविष्य के लिए ठोस निर्णय और योजना बनाना चाहता है । पहला भाग भविष्य की भविष्यवाणियों को देखने में है कि क्या होने की संभावना है, और सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने के लिए किसी की कार्रवाई के पाठ्यक्रम में परिवर्तनों को कैसे प्रभावित किया जाए, इस पर एक समझ हासिल करना है । यह सीखना कि कोई असहाय नहीं है, न ही किसी पूर्व निर्धारित नियति से बंधा है, सभी के लिए एक अद्भुत भावना है, लेकिन विशेष रूप से युवा लोगों के लिए !

ज्योतिष का दूसरा भाग जो युवाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, वह है अपने विशिष्ट चरित्र लक्षणों और व्यक्तित्वों को अपने आप में गहराई से समझने में सक्षम होना । यह जानना एक अच्छा अहसास हो सकता है कि कई अन्य लोग भी समान गुण साझा करते हैं और, एक युवा व्यक्ति के लिए जो अपने व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं के साथ पूरी तरह से सहज नहीं है, यह महसूस करते हुए कि कम वांछनीय लक्षणों को बदलने और उन लक्षणों को मजबूत करने के लिए यह उनकी अपनी शक्ति के भीतर है, जो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद करते हैं ।

एक किशोर या युवा वयस्क को यह जानने की स्थिति के लिए एक लंबा रास्ता तय करना होता कि वे जो सुधार करना चाहते हैं उसे कैसे सुधारे और उन लक्षणों पर अधिक भरोसा करे जो भविष्य मे उन्हें एक खुशहाल, अच्छी तरह से समायोजित जीवन के लिए सबसे अधिक क्षमता प्रदान कर सकते हैं ।

 

 

मंगलवार, 24 जनवरी 2023

मुंथा व उसके फल

जन्म कुण्डली में मुन्था सदैव लग्न में स्थित रहती है और प्रत्येक वर्ष मुंथा एक राशि आगे बढ़ जाती है |

मुंथा नव ग्रहों के समान ही महत्व रखती है |

मुंथा विचार द्वारा कुण्डली के अनेक प्रभावों का वर्णन किया जा सकता है |

वर्ष कुण्डली में मुंथा का अत्यधिक उपयोग किया जाता है |

मुंथा को वर्ष कुण्डली में गणना कर जातक के जीवन में उस वर्ष घटने वाली घटनाओं को जाना जा सकता है |


मुन्था और इसका फल

वर्षफल तभी शुभ होगा जब मुंथेश उच्च राशि या स्वराशि मे हो |

मुन्थेश शुभ ग्रहों से युक्त या उनसे प्रभावित है तो अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं |

2, 9, 10 11 भाव में मुंथा होने पर आर्थिक पक्ष मजबूत होता है |   

भाव 4, 6, 8, 12 और सप्तम भाव में मुन्था शुभ नहीं मानी जाती, इसी प्रकार मुन्था यदि षष्ठेश, अष्टमेश अथवा द्वादशेश युक्त हो तो भी अशुभ परिणाम प्रदान करने वाली होती है |

मुंथा शुभ स्थिति तथा शुभ प्रभाव से युक्त होने पर जिस भाव में स्थित हो उसे बल प्रदान करने वाली बनती है |

मुंथा सामान्यत: कुण्डली के बारह भावों अलग-अलग प्रभाव उत्पन्न करने वाली होती है,परंतु इसके यह प्रभाव ग्रहों के योग एवं प्रभाव से बदल भी सकते हैं |

 

बारह भावों में मुंथा का प्रभाव

प्रथम भाव (लग्न)

प्रथम भाव में अर्थात लग्न में मुंथा स्थित होने पर शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है | उच्च पद प्राप्ति एवं व्यवसाय में वृद्धि प्राप्त होती है,नौकरी में उच्च अधिकारियों का सहयोग मिलता है, आर्थिक लाभ और उत्तम स्वाथ्य की प्राप्ति होती है |

द्वितीय भाव

दूसरे भाव में मुंथा होने पर आयु में वृद्धि होती है, आर्थिक संपन्नता एवं खुशहाली के साथ साथ समृद्धि भरा जीवन एवं भोग विलास के सभी साधन प्राप्त होते हैं |

तृतीय भाव

तीसरे भाव में मुंथा हो तो विजय प्राप्त होती है, भाई बंधुओं द्वारा सहायता मिलती है और जीवन मे आनंद की अनुभूति के साथ धार्मिक यात्राएं करने के अवसर मिलते हैं |

चतुर्थ भाव

चौथे भाव में मुंथा होने से रोग एवं अस्वस्थता मिलती है,शाररिक सुख में कमी आती है,संबंधों में तनाव एवं गलतफहमी उत्पन्न होने लगती है | कार्यों में अनेक प्रकार की बाधाओं का सामना भी करना पड़ता है |

पंचम भाव

पांचवें भाव में मुंथा होने पर संतान सुख की प्राप्ति, धर्म कर्म के कार्यों को करने अवसर,सरकार से लाभ एवं सम्मान की प्राप्ति के अतिरिक्त विद्या एवं नए कार्यों से लाभ मिलता है |

षष्ठम भाव

छठे भाव में मुंथा चोरी का भय एवं शाररिक कष्ट देती है,शत्रु,कर्ज़,दुर्घटना या कोर्ट कचहरी का भय प्रदान कर मानसिक चिंताओं का कारण बनती है |

सप्तम भाव

सातवें भाव में मुंथा शुभ नहीं होती,यह भार्या से गलतफहमी,बन्धुओं से कलह-क्लेश उत्पन्न कराने वाली,  साझेदारी में नुकसान प्रदान कर असफलता, रोग तथा मानसिक चिंता दे सकती है |

अष्टम भाव

आठवें भाव में मुंथा होने से दुर्घटनाओं का भय,निराशावादी सोच,वाद - विवाद,रोगो का भय और मुकद्दमेंबाजी कारण अपव्यय प्रदान करती है |

नवम भाव

नौवें भाव में मुंथा शुभ फल प्रदान कर जातक के भाग्य में वृद्धि,आर्थिक लाभ,नौकरी में उन्नति, व्यापार में लाभ और पारिवारिक सुख प्रदान करती है |

दशम भाव

दसवें भाव में मुंथा उच्च पद प्रदान करती है तथा जातक की मनोकामनाएं पूर्ण कर नाम एवं प्रतिष्ठा प्रदान करती है |

एकादश भाव

इस भाव में मुंथा हो तो पारिवारिक सुख की प्राप्ति,मित्रों द्वारा सहायता व राजनीति में सफलता मिलती है,जातक विशेष को सभी प्रकार की इच्छापूर्ति, सुख एवं व्यापार कार्यो से लाभ प्राप्त होती है |

द्वादश भाव

बारहवें भाव में मुंथा होने से रोग, दुर्घटना होने का डर,कारावास एवं कानूनी कार्यवाही का भय बना रहता है, धन का बड़ा अपव्यय होता है |

 

 

रविवार, 22 जनवरी 2023

बाज़ार फरवरी (सन् 2023 ई.)

मासा के आरम्भ में व्यापारिक वस्तुओं में कुछ अस्थिरता का दौर रहेगा लेकिन 3 फरवरी तक प्रायः उठा पटक के साथ तेजी प्रधान रहेगी ।

4 फरवरी शनिवार को बुध उषा. नक्षत्र में आएगा, मंगल की बुध पर दृष्टि भी है । तेल, तिलहन, गुड़, घी तेज होंगे, लेकिन अनाजों का भाव मन्दा रह सकता हैं |

6 फरवरी को सूर्य धनिष्ठा नक्षत्र में आकर व्यापारियों को अच्छी तेजी से लाभ देगा । 15 दिन में सोना, चांदी, मूंग, मसूर, गेहूं आदि अनाज, अलसी, रुई, है घी आदि में तेजी करेगा ।

7 फरवरी को मकर राशि में बुध आता है । जब मकर राशि में अकेला ये बुध प्रसार करता है तो प्रायः मन्दी के व्यापार से लाभ देता है । अनुभव के अनुसार यहां रुई, सोना, चांदी में मकरस्थ बुध तेजी करेगा । सभी अनाजों का भाव कुछ तेजी के बाद स्थिर रहेगा । इसी दिन अर्थात् 7 फरवरी को व ही शुक्र पू. भा. में आकर चांदी और रुई में तेजी और अनाजों में मन्दी करेगा ।

8 फरवरी को गुरु उ.भा के चतुर्थ चरण में आकर सोना, रुई व गेहूं आदि के अनाजों में तेजी करेगा । यह तेजी उत्तम - मध्यम रूप से 12 फरवरी तक चलेगी । चांदी में कुछ मन्दी का झटका आएगा ।

13 फरवरी को सूर्य कुम्भ राशि में आकर शनि के साथ मेल करेगा यह योग अच्छी तेजी का है | घी, तेल, सरसों, मूंगफली आदि तिलहन, नमक एवं राई में अच्छी तेजी रहे । चावल, चीनी, गुड़, शक्कर, खाण्ड में भी तेजी से लाभ मिलेगा ।

14 फरवरी को बुध श्रवण नक्षत्र में आकर बाजारों में चल रही तेजी को ही बल देगा । श्रवण का बुध गुड़, खाण्ड, अलसी आदि तिलहन, घी, चना, चावल आदि अनाजों को तेजी की तरफ ले जाएगा ।

15 फरवरी को शुक्र मीन राशि में आकर बृहस्पति के साथ मेल करेगा । 15 फर को शनि धनिष्ठा 4 में भी आ रहा है । अनाज, सरसों, तेल, तिलहन, अलसी, एरण्ड, गुड़, खाण्ड, घी, रुई में तेजी प्रधान रहे, तेजी से पहले कुछ मन्दी भी आ सकती है, लेकिन तेजी प्रधान रहेगी । चांदी में जोरदार मन्दी संभव है, सोना तेज रहे ।

18 फरवरी को शुक्र उ.भा नक्षत्र में आकर चाँदी, चावल, नमक, खाण्ड, रुई, कपास, घी में मन्दी का झटका ला सकता है ।

19 फरवरी को सूर्य शतभिषा नक्षत्र में आ जाता है । सूर्य-शनि एकत्र हैं । अत: 14 दिन में सोना, चांदी, रुई, सूत, सण, कपड़ा, तिल, तेल, एरण्ड, सरसों, हींग, दाख, छुहारा, सोंठ, हल्दी, गेहूं एवं गुड़ में तेजी का प्रभाव रहेगा । यह तेजी लगभग 22 फरवरी तक (गोचर ग्रहस्थिति के अनुसार) चल सकती है ।

20 फरवरी को राहु अश्विनी 4 में आएगा । गुड़, लाख, कांसी, रुई, चांदी, को कपास, तिलहन, कालीमिर्च, घी एवं मूंगफली आदि में तेजी ही रहेगी ।

21 फरवरी को रुई, गुड़, कपास एवं पशमीना तेज रहेंगे । सोने में घटाबढ़ी के बाद तेजी रहे ।

23 फरवरी को बुध धनिष्ठा में एवं मंगल मृगशिरा नक्षत्र में दाखिल होंगे । बुध का योग सूर्य-शनि के साथ होने से  चावल, स्वांक, तिल, चांदी, दालवाना,गुड़, सोना आदि तेज रहे । रुई एवं अन्य व्यापारिक वस्तुओं में घटाबढ़ी रहे ।

24 फरवरी को गुरु रेवती नक्षत्र में आकर रुई, चांदी, तेल, तिलहन और घी में जोरदार तेजी-मन्दी के झटके लाएगा । मन्दी प्रधान रहेगी ।

27 फरवरी को बुध कुम्भ राशि में आकर शनि एवं सूर्य के साथ मेल करेगा । अनुभव के अनुसार जब भी बालग्रह बुध का क्रूर ग्रहों के साथ मेल होता है, तो बाजारों में जोरदार तेजी आती है, तेजी से व्यापारी लाभान्वित होते हैं । इन दिनों मासान्त तक अलसी, रुई, चांदी में कुछ मन्दी आकर अच्छी तेजी बनेगी । घी, तेल, तिलहन, गुड़, खाण्ड, चावल, दालें, चना आदि अनाज एवं सोना, चांदी तेज रहेंगे ।

 

गुरुवार, 19 जनवरी 2023

छठी इंद्रिय क्या होती हैं |

 


हमारे शरीर मे मस्तिष्क के भीतर, कपाल के नीचे एक छिद्र होता है,जिसे ब्रह्मरन्ध्र कहा जाता है । वहां से सुषुम्ना नाड़ी रीढ़ के अन्दर से होती हुई मूलाधार तक जाती है । मुख्य दो नाड़ियां होती हैं । इड़ा (चन्द्र, ठंडी) नाड़ी शरीर के बायीं तरफ स्थित है तथा पिंगला (सूर्य,गर्म) नाड़ी शरीर के दायीं ओर स्थित है । ये हर घंटे में बदलती रहती हैं । जब श्वास दोनों नासिकाओं से बहता है, तब चेतना अन्तर्मुखी होती है । तब ध्यान करना उपयोगी होता है जिससे मन शांत बना रहता हैं शून्यता का अनुभव होने लगता हैं हम इसे दिव्य दृष्टि प्राप्त करना भी कह सकते हैं ।

छठी इन्द्रिय की उपयोगिता -

1)अतीत में जाकर घटना की सच्चाई का पता लगाया जा सकता है

2)व्यक्ति को भविष्य में झांकने की क्षमता प्राप्त हो जाती है

3)मीलों दूर बैठे व्यक्ति की बात सुनी जा सकती है

4)किसके मन में क्या चल रहा है, वह आसानी से जाना जा सकता है

5)किसी के मन में अपने अनुकूल विचार उत्पन्न किए जा सकते हैं

6)दूर से ही रोगी को ठीक किया जा सकता है

7)स्मृति तेज बनी रहती है

 

छठी इन्द्रिय जागरण विधिः

1) सुषुम्ना चलाना पश्चिमोत्तानासन, जानुशिरासन, सिद्धासन के अभ्यास से दोनों नासिकाओं से श्वास प्रवाहित होने लगता है । काकी मुद्रा अर्थात् दाएं हाथ के अंगूठे को बायीं काख में तथा बाएं हाथ के अंगूठे को दायीं काख (बगल) में रखने से भी सुषुम्ना चलने लगती है । भस्त्रिका, कपालभाति तथा अनुलोम - विलोम प्राणायाम करने से भी सुषुम्ना सक्रिय हो जाती है

2) ध्यान - आज्ञाचक्र ज्ञान का केन्द्र है । भ्रूमध्य (दोनों भौहों के बीच ध्यान) प्रातः - सायं ध्यान करें । सहस्रार चक्र भी छठी इन्द्रिय जागरण में सहायक है । ध्यान का नियमित अभ्यास करते रहें । श्वासप्रश्वास पर भी ध्यान कर सकते हैं । श्वास के साथ सोऽहं मंत्र का जाप कर सकते हैं । प्रकाश या नाद प्रकट होगा । मन को स्थिर व नीरव करना आवश्यक है । अभ्यास 40 मिनट तक करें ।

3) त्राटक - एकाग्रता व मन को स्थिर करने के लिए आन्तरिक व बाहरी त्राटक काफी मददगार सिद्ध होता है । किसी त्राटक यंत्र या सर्दी में दीपक मोमबत्ती पर अथवा शाम्भवी मुद्रा पर त्राटक करने का अभ्यास करें । दो मिनट से 45 मिनट तक बढ़ाएं । मेरा शाम्भवी मुद्रा का अभ्यास 45 मिनट रहा । जिसके नेत्र कमजोर हों, वे बाहरी त्राटक न करें

4)गायत्री मंत्र का जाप - यह महामंत्र प्रज्ञा - प्रदायक है, सुप्त शक्तियों को जगाता है । साधना व सिद्धियों को प्राप्त करने में सहायक है । मन की शक्ति को बढ़ाता है । तीन से तीस माला तक जपें

5)दिनचर्या के उल्टे क्रम का चिंतन करें - सोने से पहले नींद आने से लेकर सवेरे तक की घटनाओं का स्मरण करें। इसी तरह पीछे ही पीछे स्मरण करें । यहां तक कि पिछले जन्म के संकेत मिलने लगेंगे । सोई शक्ति व प्रज्ञा जागेगी

जब सपनो मे अनायास ही पूर्वाभ्यास होने लगे, तरल कंठ से स्वतः ही कोई बात मुख से फूटना चाहे, तो जानें कि जो कुछ अनुभव हो रहा है, यदि वह सच हो रहा है तो आपकी छठी इन्द्रिय जाग रही है

यदि लगे कि संकल्प मन में उठते ही मनचाही बात पूरी हो रही है तो मानें कि आपकी सिक्स्थ सेंस जाग्रत होने वाली है

 साधना शुद्ध वातावरण में, नियमित, दृढ़ संकल्प के साथ निष्ठापूर्वक सम्पन्न करें ।