शुक्रवार, 31 जुलाई 2009

अगस्त २००९ का आंकलन

अगस्त २००९ के इस महीने में ५ शनिवार ,५ रविवार,तथा ५ सोमवार आ रहे हैं महीने का पहला दिन शनिवार से आरम्भ होगा चूँकि यह महिना अंक ज्योतिष के आधार पर आठवा पड़ता हैं तथा आठ अंक शनि से सम्बंधित हैं ऑर जल्द ही शनि का राशिः परिवर्तन भी होने वाला हैं अतः यह महिना कई मायनो में ज्योतिषीय दृष्टी से खास महत्व रखता हैं

इस माह का ग्रह गोचर (विचरण)-सूर्य व मंगल १६ तारीख से सिंह व मिथुन राशियों में प्रवेश करेंगे ,बुध २० तारीख से कन्या राशिः में प्रवेश करेंगा ,शुक्र २१ तारीख को कर्क राशिः में प्रवेश करेगा तथा शनि ३१ तारीख को अस्त हो जाएगा

माह में ५ शनिवार होने से पूर्वी राज्यों में कष्टप्रद स्थिति बनेगी तथा महंगाई जबरदस्त तरीके से बढेगी

रविवार होने से कही तख्तापलट जैसे हालत बनेंगे तथा कही बाढ़ तो कही सुखा पड़ेगा

५ सोमवार होने से इन सभी प्रभावों में कुछ कमिया भी मिल सकती हैं

१६ अगस्त तक शनि,मंगल का दृष्टी सम्बन्ध ,सूर्य केतु व गुरु राहू का समसप्तक योग प्राकतिक प्रकोपों की सुचना दे रहा हैं जिससे बाढ़ सुखा तथा बड़ी दुर्घटनाए हो सकती हैं व १६ तारीख से सूर्य शनि का योग किसी प्रसिद्ध व्यक्ति (राजनेता ) को कष्ट दर्शा रहा हैं

सोना चांदी का हाल -पहले दो सप्ताह दोनों तेजी में रहेंगे, तीसरे सप्ताह शुरुआत में मंद फिर तेज होकर चौथे सप्ताह से पुरे माह मंदा ही रहेंगे

शेयर मार्केट का हाल -२० अगस्त तक मामूली तेजी के आसार रहेंगे २४ तारीख से विदेशी बाजारों के प्रभावों के चलते शेयर बाज़ार कुछ सेक्टर्स को छोड़ मंदा ही रहेगा

राशिः विचार-यह माह कन्या,वृश्चिक,धनु,कुम्भ व मीन राशियों हेतु उन्नतिदायक मेष,सिंह,तुला हेतु मिला जुला तथा वरिश ,मिथुन,व मकर हेतु उतार चढाओ वाला रहेगा अतः सावधानी से ही शेयर्स आदि में निवेश करे

गुरुवार, 30 जुलाई 2009

हनुमान भी थे ज्योतिषी

हनुमान जी रामभक्त ,बलवान ,बुधिवान ,विद्यावान सिध्धिवान तो है ही परन्तु बहुत कम लोग ही जानते हैं की वह एक प्रकांड ज्योतिषी भी they ज्योतिष का ज्ञान उन्हें स्वयं भगवान् सूर्य ने अन्य शिक्षाओ के साथ दिया था भगवान् सूर्य स्वयं भी ज्योतिष शिक्षा को सर्वश्रेष्ठ शिक्षाओ में से एक मानते थे
रामायण के एक प्रसंग में जब श्रीराम रिस्मुक पर्वत पर पहुच हनुमान जी से उन्हें सूर्य देव से प्राप्त शिक्षाओ के विषय में पूछते हैं तो हनुमान जी उन्हें बताते हैं की" मैं समस्त वेदों व शास्त्रों को विधिवत
जानताहूँ परन्तु इनमे से ज्योतिष शास्त्र सर्वथा सर्वफल दायक हैं आप ही कहे मैं किस शास्त्र पर आपको अपना ज्ञान बताऊ"
हनुमान जी इस उत्तर पर श्रीराम उन्हें ज्योतिष विषय पर ही प्रकाश डालने को कहते हैं की "हे हनुमान अन्य सभी केवल वाद विवाद को ही जन्म देते हैं जबकि भविष्य के अर्थ का भान तो ज्योतिष ही दे सकता हैं अतः तुम मुझे उसी पर अपना ज्ञान बताओ"
"अन्यत्र शास्त्रं विवादाय पदार्थानाम विकाधिकम
भाविश्यदाथिद्हाय जयोति शास्त्रं वधादुना"
श्री राम के कहने हनुमान जी ने ज्योतिष की जिस शाखा को बताया कालांतर में उसे ही हनुमान ज्योतिष व महावीर प्रश्नावली के नाम से जाना जाता हैं अनेको ग्रंथो में इस ज्योतिष विद्या को हनुमान द्वारा अन्य विद्वानों को भी दिए जाने का उल्लेख मिलता हैं
हनुमान ज्योतिष मूलत प्रशन ज्योतिष जैसा ही हैं जिसमे विभिन्न चक्रो के आधार पर प्रशनो के उत्तर बताये गए हैं पूछे गए सभी प्रशनो के उत्तर चक्रो में दिए गए हैं जिनमे लगभग सभी विषयो में अपने प्रशनो के उत्तरों को जाना जा सकता हैं
हनुमान ज्योतिष के अर्न्तगत चक्रो की संख्या ४० हैं जिनमे से प्रत्येक चक्र में राम, लक्ष्मण, हनुमान, विभीषण, नल, नील, दुर्वासा, सुग्रीव, महादेव, गणेश, कामदेव, जनक, नारद, औगुस्त्य, गरुड़, वशिस्थ, गोरखनाथ आदि नामो में से किन्ही दस के नाम होते हैं प्रशन विशेष हेतु चक्र विशेष के आगे अंक विशेष के आधार पर प्रशनकर्ता अपना फलित उत्तर ज्ञात करता हैं सभी नामो के फलित की सूचि अलग दी हुई होती हैं
इस ज्योतिष में ४० सूत्र संस्कृत में लिखे हुए हैं ये सूत्र परीक्षाओं से सबंधित हैं इन्ही सूत्रों में निबद्ध चक्रो से जातक अपने फलित उत्तरों को ज्ञात करते हैं
पहला सूत्र गमन परीक्षाओं सम्बंधित हैं जिससे कब कहाँ जाना चाहिए इस विषय में पता चलता हैं
दूसरा चक्र आगमन परीक्षाओं से सम्बंधित हैं जिससे घर से गए व्यक्ति के आने के विषय में पता चलता हैं
तीसरा चक्र कृषि कर्म परीक्षाओं से ,
चौथा व्यापार परीक्षाओं से ,
पांचवा गंगा प्राप्ति से,
छठा मृत्यु चिंता से,
सातवा देव सेवा से,
आठवा सहायता से,
नवा वास निरूपण से,
दसवा मंत्री से ,
ग्यारवा धन चिंता से,
बारहवा मन : काम से,
तेरहवा रोग से ,
चौदहवा धन आगम से ,
पन्द्रवा वाद से ,
सोलहवा विवाद से,
सतरहवा विवाह से ,
अठारवा युद्घ से,
१९वा मिलन से,
२०वा याचना से
२१वा प्राप्ति से
२२वा पीछा पड़ने से
२३वा ग्राहक से
२४वा द्रव्य से
२५वा दंड से
२६वा भीती(भय)से
२७वा गर्भ से
२८वा चिंता से
२९वा बंधन से
३०वा विशवास से
३१वा विद्या से
३२वा दूत से
३३वा पित्र से
३४वा राज्य से
३५वा संतान से
३६वा संचय से
३७वा संतान कष्ट से
३८वा विक्रय से
३९वा पटाने से
४०वा कुशल परीक्षा से
वस्तुत हनुमान ज्योतिष के इन चक्रो से सभी प्रशनो के उत्तर जाने जा सकते हैं जिन्हें फलित के आधार पर उपयोग में लाया जा सकता हैं यह अपेक्षाकृत सरल परन्तु गूढ़ विज्ञानं हैं जिससे भारतीय ज्योतिष हनुमान जी का सदा आभारी रहेगा

राशिः मंत्र व लक्ष्मी मंत्र

प्राय:हम ज्योतिषियों के पास लोग यह शिकायत लेकर आते हैं की पंडितजी आप लोगो के द्वारा बताये गए मंत्र व विधान बड़े लंबे व कठिन होते हैं अतः कोई आसान मंत्र बताये जिससे ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले और कम से कम वक्त लगे! प्रस्तुत लेख में चंद्र राशिः के अनुसार सभी राशियो के राशिः व लक्ष्मी मंत्र दिए गए हैं जिनको नित्य प्रात:काल एक माला जप करने से तमाम समस्याओं का निराकरण के साथ साथ आरोग्यता ,चित्त्प्रसनता,व धन की प्राप्ति भी होगी
जन्मपत्री में जिस राशिः में चंद्रमा होता हैं वहीजातक की राशिः होती हैं जैसे यदि चंद्र मेष राशिः (संख्या नम्बर १ )पर हो तो मेष राशिः तथा चंद्रमा मीन राशिः (संख्या नम्बर १२) पर हो तो मीन राशिः होगी इसी के आधार पर अपनी अपनी राशियों के मंत्र व लक्ष्मी मंत्र नित्य जपे व प्रभाव कुछ ही समय में महसूस करे -


मेष राशिः मंत्र -"ॐ ह्रीम श्रीम लक्ष्मिनारायानाय नमः "
लक्ष्मी मंत्र -"ॐ क्लीं सौ :"


वृषा राशिः मंत्र -"ॐ गोपालाय उत्तर ध्व्जाये नमः "
लक्ष्मी मंत्र -"ॐ एम् क्लीं श्रीम "


मिथुन राशिः मंत्र -"ॐ क्लीं क्रिश्नाये नमः "
लक्ष्मी मंत्र - "ॐ क्लीं एम् सौ : "


कर्क राशिः -"ॐ हिरन गर्भाये अवयक्त रुपिने नमः "
लक्ष्मी मंत्र -"ॐ एम् क्लीं श्रीम "


सिंह राशिः -"ॐ क्लीं ब्रह्माने जग्धाधाराए नमः "
लक्ष्मी मंत्र -"ॐ ह्रीम श्रीम सौ :"


कन्या राशिः मंत्र -"ॐ नमो प्रिम पिताम्ब्राए नमः "
लक्ष्मी मंत्र -"ॐ श्रीम एम् सौ :"


तुला राशिः -"ॐ तत्त्व निरंजनाय तारक शमाए नमः "
लक्ष्मी मंत्र -"ॐ ह्रीम क्लीं श्रीम "


वृश्चिक राशिः -"ॐ नाराए धाये सुर सिन्हाये नमः "
लक्ष्मी मंत्र -"ॐ एम् क्लीं सौ:"


धनु राशिः -"ॐ श्रीम देव क्रिनाये उर्ध्वार्श्ताये नम "
लक्ष्मी मंत्र -"ॐ ह्रीम क्लीं सौ:"


मकर राशिः -"ॐ श्रीम वत्स्लाये नमः"
लक्ष्मी मंत्र -"ॐ एम् क्लीं ह्रीम श्रीम सौ "


कुम्भ राशिः -"ॐ श्रीम उपेंद्राए अच्युताये नमः "
लक्ष्मी मंत्र -"ॐ ह्रीम एम् क्लीं श्रीम "


मीन राशिः -"ॐ कलौ उद्घ्रित्याये उध्वरिने नमः "
लक्ष्मी मंत्र -"ॐ ह्रीम क्लीं सौ:"

रविवार, 26 जुलाई 2009

बदल रहे है शनि

दिनांक 9 सितंबर को रात्रि ११:५४ में जैसे ही शनि उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे चरण में प्रवेश करेंगे उनका राशि परिवर्तन सिंह राशिः से कन्या राशि में हो जाएगा आमजन शनि ग्रह से कितना खौफज़दा हैं यह बताने की आवश्कता नहीं हैं शनि न्याय करने वाला, संसार की हर चल व अचल संपत्ति से सम्बन्ध रखने वाला, मंदगति से चलनेवाला बुजुर्ग ग्रह हैं जो एक राशि पर ३० महीने तक रहता हैं अतः इसका प्रभाव हर ग्रह से ज्यादा ही होता हैं शनि के इस राशि परिवर्तन से सिंह, कन्या व तुला राशि पर साडेसाती तथा कुंभ और मिथुन राशिः पर ढैया शुरु होजायेगी

शनि का गोचर (विचरण) - शनि चन्द्र राशि से ३ ,६ व ११ वे भावः में शुभ व शेष भावः में मुझे अशुभ फल पर्दान करते हैं परन्तु ऐसा कदापि नही हैं की जिनकी भी चंद्र राशि के ३ ,६ , ११ वे भावो से ये गुजरेंगे उन्हें शुभ फल ही प्राप्त होंगे उनपर दशाओ व अपने कर्मो का प्रभाव भी असर डालेगा पर कुछ प्रभाव शनि का अवस्य प्रभाव पड़ेगा

शनि की दृष्टि -शनि जहा बैठते हैं उस भावः की वृध्दि करते हैं ऐसा माना जाता हैं परन्तु शनि जिस भावः को देखते हैं उसका हराश करते हैं यह निश्चित हैं ज्योतिष शास्त्र में शनि ३ ,७ ,१० वे घर को पूर्ण दृष्टि से देखते हैं जिनपर अधिकाधिक प्रभाव पढता हैं

शनि द्वारा पाया जानना -जिस दिन शनि राशि बदले उस दिन चंद्रमा जिस राशि पर हो उसके आधार पर सोना, चांदी, लोहा, ताम्बा आदि का पाया देखकर शनि की ढैया या साडेसाती का फल कहा जाता हैं चूँकि ९ सितंबर २००९ को चंद्रमा मेष राशि भरनी नक्षत्र पर भ्रमण करेगा अतः १ ,३ ,८ राशियो पर स्वर्णपाया २ ,६ ,१० राशियों पर लोह पाया ४ ,७ ,११ पर ताम्र पाया तथा ५ ,९ ,१२ पर चांदी का पाया होगा

आइये देखते हैं प्रतेक रशिपर शनि के इस राशि परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ेगा -


१: मेष : इस राशिः से शनि छठे गोचर करेंगे जोकि शुभ गोचर होगा जिसके प्रभाव से आर्थिक हालात मज़बूत, शत्रु परास्त, परीक्षाओं में सफलता, प्रतिष्ठा मिलेगी, धार्मिक आयोजन होंगे परन्तु स्वस्थ पर ध्यान देना होगा



२: वृषा : ५ व गोचर होने के कारन असुभ गोचर काम में कठिनाई, संतान का स्वस्थ प्रभावित, आमदनी में बाधा, राज्य से बढ़ा, साझेदारी व शेयर से लाभ, अधिकारिओं से मतभेद, लें देन में सावधानी रखनी पड़ेगी

३: मिथुन : चतुर्थ गोचर होने से ढैया लगेगी जिसके प्रभाव से माता का स्वस्थ ख़राब, कठिनाईया व अच्छे वर्ताव में कमी, कार्यो से लाभ, आय के श्रोत बढेंगे व विदेश यात्राएं होंगी


४ : कर्क : अत्यंत शुभ तीसरा गोचर, साडेसाती समाप्त , उन्नति, कार्य सफल, संम्पत्ति व वाहन मिलेंगे, धार्मिक आयोजन, विदेश यात्रा एवं विवाह योग बनेंगे


५ : सिंह : साडेसाती का अन्तिम चरण, आमदनी में कमी, मानसिक अशांति, परिवार सुख में तनाव, मतभेद, बेकार की यात्राएं व बाधा


६ : कन्या : साडेसाती का दूसरा चरण, स्वस्स्थ ख़राब, संबंधो में मतभेद, मानसिक अशांति व वायु जनित रोग


७ : तुला : साडेसाती सुरु, स्थानान्तर के योग, पत्नी व बच्चो के स्वस्थ की चिंता, शारीरिक व मानसिक कष्ट, रोग, भाग्य में रुकावट


८ : वृश्चिक : शुभ ग्यारवा गोचर जिससे लोकप्रियता व दायरा बढेगा आमदानी बढेगी उन्नति होगी


९ : धनु : परिवारिक सुख में कमी, अति उत्साह विदेश यात्रा योग व व्यापारिक उन्नति


१०: मकर : कार्य स्थल में परेशानी, नौकरी जाने का योग, खर्च बड़े, अपयश व dhokha हो सकता है


११: कुम्भ : अष्टम शनि ढैया लगेगी मानसिक परेशानी आमदनी कम मान सम्मान में कमी होगी


१२: मीन : खर्च आय अधिक, पत्नी को रोग व मानसिक कष्ट समझोता करना पड़ सकता है



ढैया व साडेसाती के उपाए -


१ - भोजन ज़मीन पें बैठकर करें


- काला जूता दान करें


३ - घर मन्दिर में सफाई करें


४ - शनि वस्तुए दान करें


५ - लोहे का रिंग धारण करें


६ - चांदी की थाली में गंगा जल घर पे रखे


ये लेख अक्टूबर २००९ के " आपका भविष्य " नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है

शनिवार, 18 जुलाई 2009

खिलाड़ियों पर हमला

३ मार्च २००९ को खेल इतिहास के बुरे दिनों में गिना जायेगा कारण इस दिन पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने गयी श्रीलंका टीम पर कातिलाना हमला किया गया वैसे तो खिलाड़ियों पर हमले पहले भी होते आए हैं परन्तु भारतीय उपमहाद्वीप में तथा क्रिकेट खिलाड़ियों पर हमला पहली बार हुआ आइये देखते हैं की किन परिस्तिथियों में यह हमला हुआ और क्यों

इस हमले में सर्वप्रथम अंको की काफी समानताये पाई गई दिनाक ३/३/२००९ का योग =८ टीमो के नामाक्षर (श्रीलंका ,पाकिस्तान )=८
खिलाड़ियों समेत घायलों की संख्या =८ (६ खिलाड़ी,कोच ,इम्पायर ) बचाने वाले ड्राईवर के नामाक्षर के अंको का योग =८ टीमो के नामाक्षर अंक शास्त्र अनुसार जोड़ श्रीलंका=९,पाकिस्तान=७ स्टेडियम के अक्षर अंको का योग =९ समस्त घटनाक्रम ८ और ९ अंको के ईर्द गिर्द ही हैं

घायलों की सूची :
महिला जयवर्धने
चामिंडा वास
अजन्ता मेंडिस
कुमार संगकारा
थारंगा पर्नाविताना
थिलन समरविताना (सभी खिलाड़ी )
पाल फाब्रेस कोच
अहसान रजा इम्पायर

टीमो के नामाक्षर अंक श्रीलंका ३+२+१+३+१+५+२+१=१८=९
पाकिस्तान ८+१+२+१+३+४+१+५=२५=७
ड्राईवर का नामाक्षर अंको में मेहर मोहम्मद खालिद ४+५+५+१+२+४+७+५+१+४+४+१+४+२+५+१+३+१+३=६२=८
गद्दाफी स्टेडियम ३+१+४+४+१+८+१+३+४+१+४+१+६+४=४५=९

आएये अब देखते हैं इस घटना का ज्योतिषीय विवरण ३/३/२००९ घटना के समय की कुंडली
  • घटना के समय मेष लग्न था सूर्य ३ मार्च को शतभिषा नक्षत्र से ४ मार्च को पूर्व भाद्रपद को तथा १४ मार्च को मीन राशिः में जाने वाला था तथा पंचम भावः के शनि से द्रष्ट तथा राशिः परिवर्तित भी था
  • खेल से सम्बंधित ३ व ६ भावः का स्वामी बुध धनिस्था नक्षत्र मकर राशिः में मंगल गुरु व राहू संग चंडाल योग के प्रभाव में था व ५ मार्च से कुम्भ राशिः में जा रहा था
  • मंगल धनिस्धा नक्षत्र में मकर राशिः बुध गुरु राहू संग तथा ७ मार्च से कुम्भ राशिः में जाने वाला था
  • चंद्र वृसभ राशिः में ऊच बना ही था तथा शुक्र मीन में ऊच तथा ६ मार्च से वक्री होने वाला था
  • शनि ,राहू,केतु क्रमश सिंह,मकर व कर्क में वक्री थे तथा गुरु शनि राशिः चंद्रनक्षत्र में नीच का होकर बैठा था
इस प्रकार चार ग्रहों का नक्षत्र व राशिः परिवर्तन ,गुरु का नीच राशिः में होना,३ ग्रहों का वक्री होना तथा खेल व पराक्रम स्वामी बुध का बुरे ग्रहों से प्रभावित होना खेल व खिलाड़ियों को खतरा बता रहा था

अब देखते हैं की घटना पाकिस्तान में क्यों हुई :

पाकिस्तान का लग्न व घटना का लग्न मेष तथा स्वामी मंगल घटना समय अंगारक व चंडाल योग के प्रभाव में ऊच राशिः पर केतु को जो की चतुर्थ भावः पुष्य नक्षत्र (पाकिस्तान का चंद्र कालिक नक्षत्र )पर दृष्टी दाल रहा था चतुर्थ भावः स्वामी तथा जन्मकालिक चंद्र अपनी ऊच राशिः में द्वितीय भावः पर था
पाकिस्तान की दशा शुक्र में केतु की २५/२/२०१० तक की हैं शुक्र मारक ग्रह बनकर पाकिस्तान की कुंडली में बैठा हैं तथा केतु अष्टम भावः में हैं तथा मंगल कुरूर स्वाभाव रखता हैं जबकि मंगल खेल सम्बन्धी भावः में बैठा हैं वर्तमान समय पाकिस्तान पर साडेसाती शनि का तृतीय चरण चल रहा हैं जिसके कारण गृहकलेश ,बदनामी व अपयश भुगतना पढता हैं इस हमले की वजह से विश्वकप की मेजबानी व भविष्य में पाकिस्तान की ज़मीन पर क्रिकेट ना करवाने का फरमान आईसीसी ने जारी कर ही दिया हैं
इस तरह से हम कह सकते हैं की ज्योतिष बहुत सी घटनाओ को पहले से ही ज्ञात कर जनसामान्य की परेशानियों को सुलझा सकता हैं

(यह लेख आप का भविष्य नामक पत्रिका में जुलाई २००९ में प्रकाशित हुआ हें)