शुक्रवार, 27 मार्च 2015

किस्मत बड़ी .....चीज़ हैं .....कभी भी पलट सकती हैं |



किस्मत बड़ी .....चीज़ हैं .....कभी भी पलट सकती हैं |

कल जब भारतीय क्रिकेट टीम सेमी फाइनल मे औस्ट्रेलिया से हारी तो हमें शाहरुख खान की बहुचर्चित फिल्म “हैपी न्यू ईयर” का यह संवाद याद आया हमने अपने लेख मे कहाँ था की भारत विश्वकप का खिताब बचा नहीं पाएगा तब सब हमें भला बुरा कह रहे थे तथाकथित ज्योतिष के ठेकेदार हमें ज्योतिष का चरित्र हनन करने का जिम्मेदार बना रहे थे टी वी पर आने वाले एक गुरुदेव के शिष्य ने हमें धमकी देकर कहा की हमें ज्योतिष नहीं करना चाहिए क्यूंकी उनके गुरुदेव ने सितंबर 2014 मे कहा हैं की धोनी भारत को विश्वकप दिलाएँगे हमने इस विषय मे इतना ही कहा था की हम भी देख लेंगे कल जब भारत हारा हमने उनके गुरुदेव से बात करनी चाही तो उन्होने हमसे बात करने से मना कर दिया उस दिन तो वह टी वी पर बहस का निमंत्रण दे रहे थे | अब फोन भी नहीं उठा रहे हैं अब चूंकि हमारा कहा सही हुआ हैं हमें फिर से बधाई देने का सिलसिला आरंभ हो गया हैं कल से अब तक लगभग 33 फोन व 11 मेसेज हमें प्राप्त हुये जिन्होने हमें हमारे सही आंकलन के लिए बधाई दी हैं हम मानते हैं की हमारा कहा पूर्णतया सही नहीं हुआ परंतु हमने ऐसा होने का कभी कोई दावा भी नहीं किया था हम अपने आप को ज्योतिष का एक छोटा सा छात्र मानते हैं गुरु कदापि नहीं,अब आप ही सोचिए फिल्म का यह संवाद हमारे लिए तो बिलकुल सही साबित हुआ हैं साथ ही साथ भारत के लिए भी सही साबित हुआ हैं |

शुक्रवार, 13 मार्च 2015

विक्रम संवत 2072(21/3/2015 -7/4/2016)



विक्रम संवत 2072(21/3/2015 -7/4/2016)

शुक्रवार दिनांक 20/3/2015 15:06 मिनट पर हिन्दू नववर्ष आरंभ होगा जो विक्रम संवत 2072 कहलाएगा जिसमे कर्क लग्न,मीन राशि व अश्लेषा नक्षत्र उदय होगा चूंकि तिथि अगले दिन प्रात:  शनिवार को बदलेगी इस वर्ष का राजा शनि बनेगा जिसके विषय मे विद्वान वराहमिहिर अपने ग्रंथ बृहद जातक मे लिखते हैं |

“जिस वर्ष शनि राजा बनता हैं उस वर्ष धरती के देशो को बहुत से युद्धो का सामना करना पड़ता हैं जिससे लुटेरो द्वारा आम जनता भयाक्रांत होती हैं भूख,बीमारी व अपनों के नष्ट होने से प्रजा त्राहि त्राहि करती हैं | आकाश मे बादल हवा से उडा दिये जाते हैं पेड़ गिरकर टूट जाते हैं धरती पर प्रकाश नहीं आ पाता जिससे कोहरा सा छाया रहता हैं नदिया व तालाब इत्यादि सुख जाते हैं अर्थात वर्षा बहुत कम होती हैं” | 

शनि मंगल की राशि मे हैं और मंगल इस वर्ष के मंत्री हैं इस वृश्चिक राशि से शनि मकर,वृष व सिंह राशि को दृस्टी दे रहे हैं अर्थात इस नाम राशियो से जुड़े देशो जैसे जर्मनी,जापान,ईरान,इराक,नाइजीरिया आदि मे युद्ध व महामारी जैसे हालत बनेंगे वैसे इस शनि पर गुरु की दृस्टी उसे कुछ हद तक मर्यादित भी करेगी |

आइए कुंडली द्वारा इस विक्रम संवत 2072 मे भारत मे क्या होगा यह जानने का प्रयास करते हैं |

लग्न मे ऊंच के गुरु वक्री अवस्था मे षष्ठेश नवमेश होकर स्थित हैं जिससे शिक्षा,कला,खेल,मनोरंजन,शेयर बाज़ार,अंतर्राष्ट्रीय व विदेशी मामलो,समझौतो,धार्मिक स्थानो इत्यादि के क्षेत्र मे देश खूब तरक्की करेगा इनसे संबन्धित कई कानून,नीतिया व बदलाव सरकार अवश्य करेगी जनता मे गुरुता अर्थात ज्ञान व जगकल्याण की भावना का होना देश मे सुख समृद्दि व तरक्की कराएगा | लग्नेश चन्द्र व गुरु मे परिवर्तन योग बना हैं जिससे देश धर्म की और ज़्यादा बढ़ेगा व धर्म से संबन्धित कई कार्य होंगे,गुरु की दशमेश मंगल पर दृस्टी सरकार को अपना काम बेहतरीन तरीके से करने मे मजबूर करेगी गुरु शिक्षा व धार्मिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता हैं जो देश मे प्राचीन तरीक़े से शिक्षा का रुझान अर्थात गुरुकुल प्रणाली व गुरु शिष्य परंपरा बढ़ा सकता हैं|

द्वितीय भाव जो धन,अर्थ व्यवस्था,खज़ाना व मुद्रास्फीति बताता हैं जिसपर  तृतीयेश व द्वादशेश बुध की दृस्टी स्पष्ट रूप से विदेश से देश को धन लाभ दर्शा रही हैं वही द्वितीयेश सूर्य की नवम भाव मे स्थिति सपष्ट रूप से देश की आर्थिक स्थिती मे बढ़ोत्तरी ही बता रही हैं |

तृतीय भाव मे राहू होना,तृतीय भाव मे बहुत से ग्रहो का प्रभाव होना तथा तृतीयेश का अष्टम भाव मे होना भारत को पड़ोसी देशो से चौकन्ना रहने की और इशारा कर रहा हैं पड़ोसी देश भारतीय सीमा पर अवश्य ही घुसपैठ करने का प्रयास करेंगे चूंकि तीसरा भाव संचार माध्यम,यात्रा के साधन व प्रकार भी बताता हैं दूर दराज़ के सीमावर्ती राज्यो,इलाको तथा प्रदेशों मे सरकार सुख सुविधाओ व विकास हेतु प्रचार प्रसार करेगी (अरुणाचल प्रदेश मे 6 हवाई अड्डे बनाने का प्रस्ताव सरकार दे ही चुकी हैं ) परंतु राहू मंगल का संबंध रेल,हवाई,अग्नि व जल संबंधी दुर्घटनाओ का ज़्यादा होना भी बता रहा हैं |         

चतुर्थ भाव का पापकर्तरी मे होना तथा चतुर्थेश-एकादशेश शुक्र व पंचमेश–दशमेश मंगल का उस पर दृस्टी प्रभाव कृषि योग्य ज़मीन,खनिज पदार्थ,भूमि संबन्धित लाभ,जनता का सामान्य सुख आदि पर मिलाजुला प्रभाव बता रहे हैं कुछ फसले अच्छी तो कुछ बुरी रहेंगी,होटल उद्योगो मे व्यभिचार संबंधी घोटाले पकड़े जाएंगे,भूमि उद्योग थोड़ा संभलेगा साथ ही वाहन क्षेत्र बहुत तरक्की करेगा |

पंचम भाव मे शनि(वक्री) का होना तथा पंचमेश मंगल का नवम भाव मे पीड़ित होना जन्मदर मे गिरावट दर्शा रहा हैं गर्भपात अथवा गर्भ से संबन्धित घटनाए बढ़ेंगी जिनसे कई नामी अस्पताल व स्वस्थ्य केंद्र शक के घेरे मे आएंगे परंतु इसी संतान व जन्म क्षेत्र मे कई नए शोध भी प्रगत होंगे कुछ नई दवाए भी जन्म ले सकती हैं |

छठे भाव पर कोई प्रभाव ना होना व षष्ठेश गुरु का लग्न मे वक्री होकर द्वितीयेश सूर्य व सप्तमेश शनि पर दृस्टी डालना वित्तीय व शैक्षिणीक संस्थानो पर गुप्त व छद्म रूप से आक्रमण अथवा दबाव बनाना दर्शा रहा हैं |

सप्तम भाव पर शनि सप्तमेश व गुरु की दृस्टी जो नवम भाव पर भी हैं के होने से विदेश संबंधी मामलो मे देश को पड़ोसी विदेशी देश जैसे पाकिस्तान,बांग्लादेश,श्रीलंका व चीन आदि से किसी ना किसी मुद्दे व समझौते मे धोखा भी हो सकता हैं तथा कुछ मामलो  मे देश को विदेशो से लाभ भी प्राप्त हो सकता हैं |   

अष्टम भाव मे बुध द्वादशेश का होना विपरीत राजयोग बना रहा हैं वही अष्टमेश शनि पर व लग्नेश चन्द्र पर गुरु प्रभाव सरकार की आयु पर कोई खतरा नहीं दर्शा रहे हैं सरकार विदेश मे जमा काला धन,जासूसी संबंधी घोटाले,गुप्त समझौते,विदेश मे संपत्ति इत्यादि का खत्म करने पर मजबूर होगी कई बड़े घोटाले इस समय दम तोड़ेंगे |

नवम भाव मे ज़्यादा गृह प्रभाव होने से तथा इसके शुभकर्तरी मे होने से सरकार कोई धर्म संबंधी नया कार्य व नीति पारित कर सकती हैं संभवत: सरकार राम मंदिर का अजेंडा फिर से शुरू कर दे सरकार का भाव (दशम) का स्वामी अपने से बरहवे हैं तथा दशम मे चतुर्थ(जनता) भाव का स्वामी शुक्र बैठा हैं जो स्पष्ट रूप से दर्शा रहा की सरकार जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर सकती हैं | नवम भाव मे मंगल राहू का संबंध देश मे धर्म संबंधी तनाव पैदा कर सकते हैं धार्मिक उन्मान्द व सांप्रदायिक दंगा फैला सकते हैं जिससे धार्मिक जगहो,न्यायिक परिसरो इत्यादि मे अराजकता का माहौल जन्म ले सकता हैं |

दशम भाव पर शुक्र का होना स्पष्ट रूप से देश व सरकार मे स्त्रियो का वर्चस्व बढ्ना बता रहा हैं (26 जनवरी मे हम ऐसा देख ही चुके हैं ) स्त्रियाँ सरकार व देश मे महत्वपूर्ण पद संभालेंगी,सरकार महिलाओ हेतु कोई नया कानून व आरक्षण की घोषणा कर सकती हैं पुरुषो के मुक़ाबले महिलाए इस वर्ष ज़्यादा पद व सम्मान पाएँगी ऐसा प्रतीत होता दिखता हैं |

एकादश भाव का स्वामी अपने से द्वादश होने से तथा दशमेश स्वयं से द्वादश होने से सरकार अपना लाभ अपने कार्यो पर तथा सरकार के कर्म उनके भाग्य पर असर डालेंगी अर्थात सरकार पूरी ईमानदारी से अपना कार्य करेगी जिससे उनको भविष्य मे भी जनता का प्यार मिलता रहेगा नए नए कार्यो के लिए नए आर्थिक क्षेत्र खोले जाएंगे जो देश मे रोजगार को बढाएंगे |

द्वादश भाव मे मंगल(इस वर्ष का मंत्री ) का दृस्टी प्रभाव होना तथा द्वादशेश बुध का अष्टम मे होना हवाई दुर्घटनाओ मे हानी होना दर्शा रहा है जो विशेषकर ग्रहणों के आसपास ज़्यादा हो सकती हैं जिनसे काफी जनहानी होने की संभावना नज़र आती हैं |

इस संवत मे पड़ने वाले ग्रहणों पर नज़र डालने पर निम्न तथ्य प्राप्त होते हैं |

इस नववर्ष मे 6 ग्रहण पड़ेंगे जो 20/3/2015,4/4/2015,13/9/2015,28/9/2015,9/3/2016 तथा 23/3/2016 को पड़ेंगे | पहले ग्रहण के दिन ही नववर्ष आरंभ हो रहा हैं चूंकि यह सूर्य ग्रहण मीन राशि मे पड रहा हैं जिसके विषय मे शास्त्र बताते हैं की इस ग्रहण से समुद्र किनारे रहने वाले,समुद्र से संबन्धित कार्य करने वाले लोगो को अशुभता प्राप्त होती हैं अर्थात भारत के तटीय राज्यो मे इस ग्रहण से हानी हो सकती हैं | इस मीन राशि मे सूर्य चन्द्र मंगल केतू जैसे ग्रहो के होने से शास्त्र  राजा व राज्य का विनाश बताते हैं संभवत: किसी देश के राजा अथवा शीर्ष नेता की मृत्यु भी हो सकती हैं | दूसरा ग्रहण चन्द्र ग्रहण होगा जो कन्या राशि मे 4/4/2015 को पड़ेगा जिसके विषय मे शास्त्र नर्तको,धनुर्धरो,कृषि कार्य करने वालों के लिए इसे अशुभ बताते हैं संभवत: देश के किसी बड़े कलाकार की मृत्यु इस दौरान होगी |

अन्य ग्रहणों का प्रभाव भारत मे कुछ खास नहीं पड़ेगा |

ग्रह गोचर –गुरु ग्रह का जुलाई माह मे सिंह राशि मे प्रवेश देश मे जल,वर्षा व दुग्ध हेतु शुभता बता रहा हैं संभवत: अगस्त माह मे वर्षा अच्छी होगी जिससे कुछ एक राज्यो मे बाढ जैसे हालात भी बन सकते हैं जिनमे दिल्ली,मध्य प्रदेश,गुजरात व उत्तर प्रदेश प्रमुख हैं | सितंबर से नवंबर के मध्य भारत के किसी बड़े कलाकार को कोइ एक विश्वस्तरीय सम्मान भी मिल सकता हैं | शनि इस पूर्ण वर्ष वृश्चिक राशि मे ही रहेंगे परंतु 2 नक्षत्रो मे भ्रमण करेंगे शास्त्र बताते हैं की जब शनि वृश्चिक मे भ्रमण करते हुये एक वर्ष गुजार लेते हैं तो इंद्रप्रस्थ मे भारी तबाही होती हैं चूंकि शनि अपने अनुराधा नक्षत्र मे काफी समय तक वक्री रहेंगे व मई माह मे इनका मंगल से अंशानुसार विपरीत संबंध बनेगा अवश्य ही कोई विनाशकारी घटना जैसे भूकंप राजधानी दिल्ली के आस पास घट सकती हैं साथ ही भारतीय राजनीति मे भी कोई तनाव आ सकता हैं | शनि दिसंबर माह मे ज्येष्ठा नक्षत्र मे प्रवेश करेंगे परंतु सितंबर माह मे पड़ने वाले 2 ग्रहणों के कारण उनका प्रभाव पहले ही मिलने लगेगा जिससे अक्तूबर व नवंबर माह मे विश्वपटल मे भारी उठापटक होने का अंदेशा लगता हैं कोई बड़ा भूकंप चीन,भारत,अमरीका,जापान व नेपाल मे तबाही मचा सकता हैं कई देशो मे प्राकृतिक दुर्घटनाए हो सकती हैं जिनसे काफी जान माल की हानी होगी ऐसा प्रतीत होता हैं | 

इस नववर्ष के दौरान भारत वर्ष पर सूर्य मे शुक्र मे गुरु तथा शनि का प्रत्यंतर चलेगा जिससे भारत की पत्रिका का तीसरा भाव प्रभावित होगा और भारत को ना चाहते हुये भी अपने पड़ोसी मुल्को से परेशानी झेलनी पड़ेगी देश की सीमा पर घुसपैठ व टकराव जैसे हालात जन्म लेंगे जिससे देश को एक छद्म युद्ध का सामना भी करना पड सकता हैं |

सितंबर माह से देश मे चन्द्र की महादशा लगेगी जो भारत का राशीनाथ हैं साथ ही साथ इस हिन्दू वर्ष का लग्नेश भी हैं जिससे भारत विश्वपटल मे अपना प्रभाव बढ़ाने की और कदम रखने लगेगा |

डॉ॰ किशोर घिल्डियाल

शनिवार, 7 मार्च 2015

ज्योतिष व स्वाइन फ्लू



ज्योतिष व स्वाइन फ्लू

मार्च 2009 मे पूरी दुनिया मे एक नई बीमारी का जन्म हुआ जिसे “स्वाइन फ्लू”का नाम दिया गया कुछ समय बाद ही यह बीमारी बड़ी तेजी से फैली व महामारी के रूप मे देखी जाने लगी | वैज्ञानिको व डोक्टरों ने इसके इलाज़ हेतु दावा तो खोज ली परंतु तब तक इसने पूरी दुनिया मे 10,000 लोगो को संक्रमित कर डाला व 2500 से ज़्यादा व्यक्ति मौत के घाट उतार दिये | 
आइए इस बीमारी का ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं |

सर्वप्रथम यह देखते हैं की हमें ग्रहो के द्वारा रोग होते कैसे हैं | ज्योतिष मे ग्रहो को निम्न तत्वो मे बांटा गया हैं |
अग्नि तत्व-सूर्य,मंगल व केतू

वायु तत्व-शनि व राहू

जल तत्व-चन्द्र शुक्र व राहू

पृथ्वी तत्व-बुध 

आकाश तत्व-गुरु व केतू

स्पष्ट हैं की कुछ गृह दो तत्वो मे बटें हैं तथा इन तत्वो का परस्पर संबंध भी विविध प्रकार का होता हैं अग्नि तत्व हेतु पृथ्वी व वायु तत्व मित्र किन्तु जल तत्व शत्रु हैं | पृथ्वी तत्व हेतु अग्नि व जल तत्व मित्रा किन्तु वायु तत्व शत्रु हैं जल तत्व के लिए पृथ्वी व वायु मित्र तथा अग्नि तत्व शत्रु हैं |
इन्ही तत्वो मे विराजित ग्रहो के प्रतिकूल होने पर उस गृह से संबन्धित तत्व गड़बड़ा जाता हैं जिससे उसका प्रकोप व प्रतिकूलता होने से रोग जन्म ले लेता हैं | चूंकि धरती पर ग्रहो का प्रभाव उनकी गति,पृथ्वी से निकटता व दूरी पर भी निर्भर करता हैं अत: उन्ही अवस्थाओ मे रोगो का जन्म होता हैं और मनुष्य प्रभावित होते हैं |

स्वाइन फ्लू का जन्म –इस भयंकर रोग की शुरुआत मेक्सिको नामक देश के एक सूअर पालन केंद्र से हुयी जहां 18 मार्च 2009 को इस बीमारी का पहला मरीज मिला इससे पहले की इस बीमारी का कोई ठोस इलाज़ मिल पाता इसने अमरीका व एशिया मे अपने पाँव तेजी से फैला दिये और जुलाई के महीने मे इसने भारतवर्ष पर अपना पहला शिकार पुना शहर की एक 14 वर्षीय बालिका को बनाया जिससे भारत मे इस बीमारी की शुरुआत हो गयी | वास्तव मे यह बीमारी सूअर मे पाये जाने वाले इंफ्लुएंज़ा नामक बीमारी के वाइरस "एच वन एन वन" का ही बदला हुआ रूप हैं जिसे स्वाइन फ्लू का नाम दे दिया गया हैं |

ज्योतिष शास्त्र व रोग-ज्योतिष शस्त्र मे छठा भाव रोग का माना जाता हैं जिसके कारक शनि व मंगल गृह हैं यह भी इत्तेफाक ही हैं की इस बीमारी का संबंध भी मंगल व शनि से ही हैं |

यह बीमारी इंफ्लुएंज़ा नामक बीमारी का ही विकृत रूप हैं जिसका संबंध मंगल व शनि से हैं मंगल हमारे शरीर  मे कान,आँख,नाक,खून,फेफड़े व मस्तिष्क पर नियंत्रण रखता हैं तथा बुखार,अग्नि,रक्तचाप,पीलिया,चेचक,दुर्घटना,चोट व सर्जरी का पता बताता हैं | वही शनि शरीर मे वायु पित ,सिर,गरदन,दाँत व हड्डियों पर नियंत्रण तथा प्रदूषण से होने वाले संक्रमित बीमारियो वायु विकार गठिया तथा जोड़ो का दर्द का पता बताता हैं |

जब भी आकाश मे भ्रमण करते समय मंगल व शनि का संबंध किसी भी प्रकार से बनता हैं पृथ्वीवासियो पर महामारी,दुर्घटनाए,व प्रकृतिक आपदाए आती हैं ऐसा हम पहले से जानते हैं कारण इन दोनों मे आपस मे शत्रुता का व्यवहार होना मार्च 2009 की कुंडली देखे तो पता चलता हैं की उस समय मंगल कुम्भ राशि मे तथा शनि सिंह राशि मे विराजित थे जिससे उनका संबंध बना हुया था (इसी दौरान मेक्सिको मे इस बीमारी का पता चला )22 जुलाई 2009 को जब स्वतंत्र भारत की राशि कर्क पर सूर्य ग्रहण पड़ा जब इस बीमारी ने भारत मे दस्तक दी परंतु तब तक यह अन्य पूर्वी आसियाई देशो मे फैल चुकी थी | यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह हैं की इस दौरान भी कर्क राशि नक्षत्र पुष्य पर मंगल शनि का दृस्टी संबंध बना हुआ था |

जुलाई महीने से ही मंगल भारतीय जन्म राशि कर्क के नजदीक आ रहा हैं जिससे इस बीमारी को बढ्ने का पूरा अवसर मिला परंतु कर्क राशि मे ही मंगल नीच का हो जाता हैं (पृथ्वी से दूर चला जाता हैं )जिससे इस रोग की त्रिवता मे ज़बरदस्त रूप से कमी आएगी |

कब तक रहेगा स्वाइन फ्लू -अक्तूबर माह तक शनि व मंगल का संबंध बना रहेगा अक्तूबर 5 तारीख को जब मंगल कर्क राशि मे प्रवेश करेगा तब इस बीमारी मे कमी देखी जाएगी परंतु असली छुटकारा 13 अक्तूबर (गुरु के मार्गी होने के कारण ) से मिलेगा | गुरु स्वतंत्र भारत की राशि कर्क से समसप्तक मकर राशि मे राहू संग चांडाल योग बना रहा हैं जो भारत केलिए कुछ ना कुछ परेशानियाँ लगाकर रखे हुये हैं |

प्रस्तुत लेख हमने 2009 मे लिखा था जो आप का भविष्य नामक ज्योतिष पत्रिका मे दिसंबर 2009 मे प्रकाशित हुआ था |

वर्तमान परिदश्य मे देखे तो मंगल गृह ने 27 नवंबर 2014 को मकर राशि मे तथा 4 जनवरी को कुम्भ राशि मे प्रवेश किया जिससे मंगल व शनि का संबंध बना तथा 8 दिसंबर 2014 को गुरु गृह वक्री हुआ जिनके समस्त प्रभाव से इस बीमारी ने भारत वर्ष मे अपना भयानक प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया हैं परंतु 12 फरवरी 2015 को मंगल ने मीन राशि मे प्रवेश कर लिया हैं जिससे इस रोग मे कमी तो आ गयी हैं परंतु जब 8 अप्रैल 2015 को गुरु मार्गी होंगे तब इस बीमारी का अंत भारतवर्ष मे हो जाएगा | 
     

रविवार, 1 मार्च 2015

कुछ इस तरह मनाए इस बार होली




कुछ इस तरह मनाए इस बार होली

दिनांक 6 मार्च 2015 को होली का पावन पर्व मनाया जाएगा प्रस्तुत लेख मे हम अपने पाठको के लिए उनकी राशि के अनुसार होली के दिन किए जाने वाले कुछ प्रयोगो के विषय मे जानकारी दे रहे हैं | पाठक इन्हे होली खेलने से पहले अथवा बाद मे करे जिनसे सालभर उन्हे होली की शुभता प्राप्त होती रहेगी |

मेष राशि-नए वस्त्र पहनकर मंदिर जाये तथा भगवान से आशीर्वाद ले |

वृष राशि-गणेश भगवान के दर्शन करे |

मिथुन राशि-जुराबे पहनकर रखे |

कर्क राशि-केसर का सेवन करे |

सिंह राशि-माथे पर लाल टीका लगाए |

कन्या राशि-पुजा का कपूर सूंघ कर ही कोई काम करे |

तुला राशि-कोई हरा फल जैसे अमरूद इत्यादि खाये |

वृश्चिक राशि –सर पर पग़डी बांधे |

धनु राशि-बाएँ आँख मे चाँदी स्पर्श कराये |

मकर राशि-घर से कलम अथवा पेन लेकर ही बाहर जाए |

कुम्भ राशि-कपड़ो पर परफ्यूम अथवा इत्र लगाए |

मीन राशि-गेहूं के 5 दाने चबाकर खाये |

हमारे व्यापारी भाई अपना व्यापार बढ़ाने के लिए होली दहन से एक दिन पहले फिटकरी के 6 टुकड़े अपनी दुकान अथवा व्यापारिक स्थल मे रख दे अगले दिन सभी टुकड़ो को कपूर,अलसी व गेहूं के साथ मिलाकर जलती होली मे डाल दे | ऐसा करने से व्यापार मे नज़र भी नहीं लगेगी |