सोमवार, 25 सितंबर 2017

अपेंडिसाइटिस

अपेंडिसाइटिस

आम तौर से पेट के रोगो मे होने वाली बीमारी को लोग ज़्यादा महत्व नहीं देते परंतु पेट मे होने वाली यह बीमारी अपेंडिसाइटिस ना सिर्फ भयानक होती हैं बल्कि कभी कभी जानलेवा भी साबित हो जाती हैं |

अपेंडिक्स मानव के शरीर मे स्थित बड़ी आंत के निचले हिस्से मे दायी तरफ स्थित एक छोटा सा अवयव होता हैं ( जिसे अब विज्ञान किसी भी काम मे ना आने वाला अंग अर्थात वेस्टेगेयल ऑर्गन की श्रेणी मे रखता हैं ) जो पेट के अंदर किसी भी दिशा मे घूम सकता हैं भोजन का कोई अंश जब इस हिस्से मे अटक जाता हैं तो इसमे सूजन आ जाती हैं इसके अतिरिक्त अपेंडिक्स मे संक्रमण होना,चोट लगना,अपेंडिक्स का सिकुड़ जाना,कब्ज की अधिकता रहना जैसे कई अन्य कारण हैं जिससे इस अपेंडिक्स मे भयंकर रूप से दर्द होता हैं जिसे आम भाषा मे अपेंडिसाइटिस रोग कहा जाता हैं | इस रोग के कारण नाभि के आसपास निरंतर दर्द सा बना रहता हैं व्यक्ति को भूख नहीं लगती तथा आंतों मे जलन  महसूस होती हैं और सही समय पर उपचार ना हो पाने से यह अपेंडिक्स जब फूलकर फट जाता हैं तो जातक की मौत भी हो सकती हैं |

ज्योतिषीय दृस्टी से देखे तो इस रोग के लिए हमें जातक की कुंडली के निम्न अवयवो को देखना चाहिए |

1)छठा भाव चूंकि पेट व आंतों का होता हैं इसलिए इस भाव का किसी भी रूप से पीड़ित होना |

2)षष्ठेश का पीड़ित होना

3)छठे भाव का पाप कर्तरी मे होना |

4)चन्द्र का कन्या,वृश्चिक व कुम्भ राशि मे पाप प्रभाव मे होना |

5)सूर्य का सिंह व कुम्भ राशि मे पीड़ित होना |

6)शुक्र का छठे भाव मे पीड़ीत अवस्था मे होना

7)छठे भाव पर शनि मंगल व चन्द्र का गोचरीय प्रभाव होना |

आइए अब कुछ कुंडलियाँ देखते हैं |

1)7/11/1982 3:45 दिल्ली कन्या लग्न की इस पत्रिका मे छठे भाव पर गुरु व राहू की दृस्टी,षष्ठेश शनि का शुक्र संग कई ग्रहो से पीड़ित होना इस रोग की पुष्टि कर रहा हैं जातिका का अपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ हैं |

2)26/8/1960 5:00 दिल्ली कर्क लग्न छठे भाव मे शनि षष्ठेश गूरु संग हैं वही शुक्र भी राहू केतू से पीड़ित हैं |

3)23/7/1973 3:30 दिल्ली वृष लग्न की इस पत्रिका मे छठे भाव पर मंगल की दृस्टी हैं षष्ठेश शुक्र पर शनि व राहू की दृस्टी हैं |

4)2/7/1945 6:30 गढ़वाल स्त्री धनु लग्न की इस पत्रिका मे छठा भाव पाप कर्तरी मे हैं जहा शुक्र स्थित हैं जो स्वयं ही षष्ठेश हैं |

5)10/2/1971 12:00 दिल्ली मे जन्मी इस मेष लग्न की स्त्री की इस रोग से संबन्धित 29/9/1993 मे शल्य चिकित्सा हुई |

6)25/9/1983 6:45 दिल्ली

7)29/10/1950 3:30 मद्रास

8)3/8/1983 6:30 चंडीगढ़ |

9)21/12/193 5:00 मद्रास

10)5/9/1895 4:00 मद्रास

11)10/2/1971 23:30 दिल्ली स्त्री


शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

शेयर बाज़ार के शेर



वर्तमान जगत मे धन,मुद्रा,पैसो का अत्यधिक महत्व हैं इसलिए आजकल के इस मौद्रिक युग मे प्रत्येक व्यक्ति येन केन प्रकारेण कम से कम समय मे ज़्यादा से ज़्यादा धन कमाना चाहता हैं | जबसे व्यापार के लिए कंपनियो का जन्म हुआ हैं तबसे कंपनिया शेयर इश्यू कर जनता से धन संग्रह कर उसे शेयर बाज़ार मे पंजीकृत करती हैं इन शेयरो के दाम बाज़ार के चलन के हिसाब से रोजाना घटते बढ़ते रहते हैं इन शेयरो को जानकार लोग खरीद व बेच कर कम समय मे ज़्यादा धन कमा सकते हैं परंतु इसके लिए आपको बाज़ार व कंपनीयो की जानकारी के अतिरिक्त स्वयं के भाग्य की भी जानकारी होनी चाहिए जिसमे आकस्मिक धन प्राप्ति के योग हैं की नहीं यदि आपकी पत्रिका मे धन प्राप्ति के योग नहीं हैं तो आप अवश्य ही शेयर बाज़ार मे हानी का सामना करेंगे |

प्राचीन शास्त्रो मे इस शेयर बाज़ार से संबंध मे कोई विवरण नहीं मिलता हैं परंतु आधुनिक ज्योतिष के विद्वानो ने कुछ योगो को ढूँढने का प्रयास किया हैं हम अपने इस लेख मे कुछ ऐसे योगो की जानकारी दे रहे हैं जिनके होने पर जातक शेयर बाजार मे कामयाब हो सकता हैं |

1) कुंडली मे पंचम,नवम व एकादश भाव का संबंध होना तथा इनके स्वामियों का मजबूत होना शेयर बाज़ार से लाभ करवाता हैं |

2) मंगल पंचमेश होकर लग्न,नवम अथवा एकादश भाव मे होतो जातक शेयर बाज़ार से लाभ प्राप्त करता हैं |

3) धन भाव मे मंगल राहू स्थित होकर पंचमेश,नवमेश या लाभेष से संबंध करे |

4) लाभ भाव मे राहू स्थित होकर पंचम मे धनेश लाभेष व भाग्येश को देखे |

5) राहू लग्नेश पंचमेश संग केंद्र मे हो तथा लाभेष का संबंध शनि/मंगल से हो |

6) सूर्य चन्द्र की युति कर्क अथवा सिंह राशि मे लग्न या पंचम भाव मे हो |

7) एकादश भाव मे वृष अथवा कर्क राशि मे गुरु चन्द्र हो |

आइए अब कुछ कुंडलियाँ देखते हैं |

1)15/7/1958 4:30 मिथुन लग्न की इस पत्रिका मे पंचम भाव मे राहू लाभेष मंगल व लाभ भाव पर दृस्टी दे रहा हैं धनेश चन्द्र व लग्नेश बुध मे परिवर्तन हैं तथा मंगल लाभेष की लग्नेश बुध पर धन भाव मे तथा नवमेश शनि पर भी दृस्टी हैं | इन्ही सब कारणो से जातक शेयर बाज़ार मे ब्रोकर अथवा दलाल का काम करते हुये धनार्जन करता हैं |

2)10/11/1961 22:02 कर्क लग्न की इस पत्रिका मे लग्नेश चन्द्र पंचमेश मंगल संग राहू से दृस्ट हैं केंद्र मे लाभेष शुक्र व धनेश सूर्य की युति हैं गुरु नवमेश की लाभ भाव व लग्न पर दृस्टी हैं जिनके समस्त प्रभाव से जातक शेयर बाज़ार से अच्छा धन लाभ प्राप्त कर लेता हैं |

3)7/9/1990 6:00 सिंह लग्न की इस पत्रिका मे लग्नेश सूर्य कर्मेश शुक्र व धनेश लभेष बुध की युति लग्न मे ही हैं जिनपर नवमेश मंगल की दृस्टी हैं इसी मंगल की पंचम भाव पर भी दृस्टी हैं वही पंचमेश गुरु ऊंच राशि मे होकर राहू से प्रभावित हैं राहू की धन भाव पर भी दृस्टी हैं इन्ही सब कारणो से जातक 12 वी फेल होने के बावजूद भी शेयर बाज़ार का बेहतरीन खिलाड़ी हैं जिसने डेढ़ वर्षो मे अपने मालिक को 20 करोड़ का लाभ शेयर बाज़ार से दिलाया हैं यह स्वयं 6 लाख प्रतिमाह कमाता हैं |

4)28/8/1986 6:14 सिंह लग्न मे जन्मे इस जातक की पत्रिका मे पंचमेश गुरु की लग्नेश सूर्य व धनेश लाभेष बुध पर दृस्टी हैं पंचम भाव मे मंगल नवमेश हैं जिसकी अष्टम भाव राहू व लाभ भाव पर दृस्टी हैं राहू की दृस्टी धन भाव पर भी हैं | इन्ही सब कारणो से जातक ने अपने पिता को शेयर बाज़ार द्वारा 5 लाख रुपये से 80 करोड़ कमा कर दिये |

5)16/1/1913 3:10 मुंबई मेष लग्न के इस जातक ने नौकरी छोड़ 1942 मे अपना व्यापार आरंभ किया उसके बाद इन्होने शेयर बाज़ार मे धन लगाकर खूब धन कमाया इनकी गिनती अपने समय के धनमान्य लोगो मे होती थी | पत्रिका मे पंचमेश लग्नेश नवमेश का संबंध हैं तथा शनि लाभेष होकर धन भाव से लाभ भाव को देख रहा हैं अष्टम भाव पर लग्नेश मंगल के अलावा राहू की भी दृस्टी हैं |

6)5/8/1993 8:00 दिल्ली सिंह लग्न के इस जातक ने शेयर बाज़ार से अपने पिता का 52 लाख का कर्ज़ मात्रा 40 दिनो मे चुका दिया आजकल यह एम॰बी॰ए भी कर रहा हैं |

7)19/4/1983 11:15 हैदराबाद मिथुन लग्न की इस पत्रिका मे लाभेष मंगल की पंचम व धन भाव पर दृस्टी हैं साथ ही सप्तमेश दशमेश गुरु की भी धन भाव पर दृस्टी हैं |

8)30/1/1965 9:15 दिल्ली कुम्भ लग्न की इस पत्रिका मे लाभ भाव पर धनेश-लाभेष गुरु की दृस्टी हैं साथ ही मंगल की भी लाभ भाव पर दृस्टी हैं |

अन्य पत्रिकाएँ जो शेयर बाज़ार से संबन्धित हैं |

9)3/2/1944 11:30 मुंबई मेष लग्न

10)24/12/1945 5:30 बिल्लिमोरा तुला लग्न

11)15/6/1952 12:50 इटावा कन्या लग्न  

12)26/6/1959 20:30 दिल्ली

13)18/7/1983 20:15 नरनौल मकर लग्न

14)7/11/1981 9:21 दिल्ली वृश्चिक लग्न

15)16/1/1985 4:30 दिल्ली मिथुन लग्न

16)10/1/1961 22:30 दिल्ली कर्क लग्न

17)29/7/1954 10:20 मुंबई कन्या लग्न (हर्षद मेहता)


18)5/7/1960 12:00 मुंबई कन्या लग्न (राकेश झुनझुनवाला)

बुधवार, 20 सितंबर 2017

कुंडली मे तिथि का महत्व



फलित अधिकतर लग्न व चन्द्र लग्न से ग्रहो की स्थिति,दृस्टी के अनुसार किया जाता हैं परंतु ऐसा पाया जाता हैं की कई बार फलकथन सही नहीं होता यहाँ तक की सबसे बली ग्रह की दशा भी अपना शुभ प्रभाव नहीं दे पाती | यदि हम पंचांग की दृस्टी से देखे तो तारीख,वार के अतिरिक्त तिथि का एक अपना ही महत्व होता हैं यह तिथि जन्मपत्रिका मे अपना एक विशेष स्थान रखती हैं जिसे आमतौर से ज्योतिष के विद्वान ज़्यादा महत्व नहीं देते हैं जिस कारण अक्सर फलकथन मे ग़लती  हो जाती हैं | हमारे प्राचीन विद्वान तिथियो को कितना महत्व देते थे यह हमारे त्योहारो को देखकर जाना जा सकता हैं जो किसी ना किसी तिथि से संबन्धित अवश्य होते हैं जैसे राम नवमी,जन्माष्टमी,गणेश चतुर्थी,विजय दशमी आदि |

फलित सूत्रो के अतिरिक्त पंचांग के सभी अंगो को देखकर भी यदि कुंडली का फलित किया जाये तो फलित मे सटीकता काफी हद तक पायी जा सकती हैं | पंचांग पाँच अंगो वार,तिथि,नक्षत्र,योग व करण से मिलकर बनता हैं जिसका निर्धारण हर प्रकार के मुहूर्त आदि के लिए हमारे शास्त्र व विद्वान करते आए हैं |

प्रत्येक तिथि किसी एक राशि विशेष को नियंत्रित करती हैं ( जिसके विषय मे वर्षादी नूल जातक अलंकार मे लिखा गया हैं ) जिसके प्रभाव से किसी विशेष तिथि मे जन्मे जातक के लिए कुछ राशियाँ शून्य प्रभाव रखने वाली हो जाती हैं जिससे वह राशियाँ व उनके स्वामी जातक विशेष हेतु प्रभावहीन हो जाते हैं अर्थात उनका कोई भी अच्छा या बुरा प्रभाव जातक को उसके जीवन मे प्राप्त नहीं होता हैं | अब ऐसे मे यदि वह राशि अथवा ग्रह जातक की पत्रिका मे शुभ भावो का स्वामी भी होतो फल प्रदान नहीं करेगा जिससे जातक को कोई भी फल प्राप्त नहीं होगा जबकि कुंडली यह दर्शा रही होगी की उस ग्रह की दशा जातक को बहुत प्रगति प्रदान करेगी यह एक ऐसी चूक हैं जो किसी ज्योतिषी को भी फलित मे परेशानी मे डाल सकती हैं |

आइए जानते हैं कौन सी तिथि किस किस राशि को नियंत्रित करती हैं |

1)प्रथमा(तिथि) –मकर,तुला(राशियाँ)-शनि-शुक्र (स्वामी)

2)द्वितीय-धनु,मीन-गुरु

3)तृतीया–मकर,सिंह-शनि-सूर्य

4)चतुर्थी-कुम्भ,वृष-शनि-शुक्र

5)पंचमी-मिथुन,कन्या-बुध

6)षष्ठी-मेष,सिंह-मंगल-सूर्य


7)सप्तमी-धनु,कर्क-गुरु-चन्द्र

8)अष्टमी-मिथुन,कन्या-बुध

9)नवमी-सिंह,वृश्चिक-सूर्य-मंगल

10)दशमी-सिंह,वृश्चिक-सूर्य-मंगल

11)एकादशी-धनु,मीन-गुरु

12)द्वादशी-मकर,तुला-शनि-शुक्र

13)त्रयोदशी-वृष,सिंह-शुक्र-सूर्य

14)चतुर्दशी-मिथुन,कन्या-बुध

पुर्णिमा व अमावस्या तिथियो के लिए कोई राशि शून्य नहीं होती हैं |

इस प्रकार देखे तो जो जातक षष्ठी को जन्म होगा उसके लिए मेष व सिंह राशियाँ शून्य राशियाँ होगी जिनसे इनके स्वामी मंगल व सूर्य जातक के जीवन मे कोई भी प्रभाव नहीं देंगे जबकि यह दोनों ग्रह कर्क व सिंह लग्न हेतु शुभ ग्रह माने जाते हैं ऐसे मे यदि यह दोनों ग्रह 3,6,8 व 12 भाव मे हो,पाप ग्रह संग हो,वक्री होतो जातक को राजयोग प्रदान अवश्य करेंगे परंतु यदि ये ग्रह 1,2,4,5,7,9,10,और 11 भाव मे हो,उनके स्वामियों संग हो तो उनके भावो की हानी ही करेंगे   


मंगलवार, 19 सितंबर 2017

पथरी


पथरी 

हमारे शरीर मे होने वाले रोगो मे पथरी अथवा स्टोन होना बहुत साधारण सी बात हैं मूत्र रोगो मे होने वाले रोगो मे से एक यह पथरी रोग बहुत  ही कष्टकारी होता हैं जिसमे पेशाब अथवा मूत्र मे घुले हुये महीन कण धीरे धीरे जमा होकर पथरी का रूप ले लेते हैं |

शरीर मे पथरी बनने के कई कारण हो सकते हैं जिनमे से प्रमुख 2 कारण अवश्य होते हैं |

1)मेटाबोलिक कारण- इसमे शारीरिक चयापचय की गड़बड़ी अथवा भोजन मे असंतुलन होने के कारण पथरी का निर्माण होता हैं |

2)ऐसे भोजन का सेवन जिसमे मांस,प्रोटीन,अमलोत्पादक,तीक्ष्ण व शर्करा मसालो का प्रयोग ज़्यादा हो जो गुर्दो मे पहुँचने पर अधिक होने के कारण धीरे धीरे जमा होकर पत्थर का रूप ले लेते हैं जो पथरी कहलाता हैं |

पत्थर अथवा कंकड़ के रूप मे जमे यह भोज्य पदार्थ वैसे तो गुर्दो मे शांत पड़े रहते हैं परंतु जब यह मूत्र प्रवाह के साथ मूत्र नली मे फंस जाते हैं तो अंदरूनी त्वचा को छील देते जिससे दर्द,जलन व मूत्र मे रक्त आने लगता हैं |

मुख्यरूप से पथरी तीन प्रकार की होती हैं |

1)ओक्सिलेट पथरी-भोजन मे टमाटर,पालक इत्यादि के अधिक सेवन से ओक्सिलेट पदार्थ मूत्र मे एकत्र होने से यह पथरी बनती हैं |

2)कैल्सियम या फॉस्फेट पथरी-अधिक कैल्सियम पदार्थो को लेने से और पेराथाइराइड ग्रंथि की गड़बड़ी के कारण तथा लंबे समय तक आराम करने से एवं बुढ़ापे मे हड्डियों के घुलने से रक्त मे कैल्सियम बढ़ जाता हैं जिससे यह पथरी हो जाती हैं |

3)यूरिक अम्ल तथा यूरेटर पथरी-अत्यधिक प्रोटीन युक्त भोजन करने से इस प्रकार की पथरी होती हैं |

आइए ज्योतिषीय दृस्टिकोण से यह जानने का प्रयास करते हैं की यह पथरी रोग क्यू व कैसे होता हैं | जिसके लिए हमें निम्न भाव व ग्रहो को देखना चाहिए |

भाव–लग्न,छठा भाव

साधारणत: पथरी पेट मे पायी जाती हैं जिसका प्रतिनिधित्व कालपुरुष की पत्रिका मे छठा भाव करता हैं इसके अतिरिक्त लग्न भाव को भी देखा जाना चाहिए जो सम्पूर्ण शरीर के बारे मे बताता हैं |

ग्रह-सूर्य,बुध व शनि

कुंडली मे सम्पूर्ण शरीर का कारक सूर्य माना गया हैं तथा पत्थर का कारक शनि ग्रह हैं शनि का लग्न,षष्ठम,षष्ठेश व सूर्य से संबंध के अतिरिक्त काल पुरुष की पत्रिका मे छठे भाव का स्वामी बुध होने के कारण इस बुध ग्रह को भी देखना चाहिए |

राशि-कालपुरुष की पत्रिका मे पेट हेतु छठे भाव की राशि कन्या को देखा जाना चाहिए   

आइए अब कुछ कुंडलियाँ देखते हैं |

1)18/8/1944 21:55 कानपुर मेष लग्न मे जन्मे इस जातक के पेट मे पथरी हैं | सूर्य,बुध (षष्ठेश) पर शनि का दृस्टी प्रभाव हैं वही कन्या राशि मे मंगल पापग्रह स्थित हैं जो पत्रिका मे छठे भाव की ही राशि हैं |

2)3/4/1930 10:30 कोटा मिथुन लग्न की इस पत्रिका मे लग्न व षष्ठेश मंगल तथा कन्या राशि (चतुर्थ भाव) पर शनि की दृस्टी हैं छठा भाव पापकर्तरी मे हैं तथा बुध अस्त अवस्था मे हैं |

3)5/1/1978 15:08 दिल्ली वृष लग्न की इस पत्रिका मे शनि की लग्न व षष्ठ भाव पर दृस्टी हैं छठे भाव मे मंगल की भी दृस्टी हैं कन्या राशि मे राहू हैं व बुध शत्रु राशि मे हैं | षष्ठेश शुक्र अष्टम भाव मे हैं |

4)20/4/1958 13:00 अलवर कर्क लग्न की इस पत्रिका मे शनि छठे भाव मे ही हैं जिसकी तीसरे भाव कन्या राशि पर दृस्टी हैं इसी भाव पर मंगल का प्रभाव भी हैं तथा षष्ठेश गुरु राहू संग चतुर्थ भाव मे वक्र अवस्था मे हैं |

5)20/10/1948 2:45 नारनौल सिंह लग्न की इस पत्रिका मे षष्ठेश शनि लग्न मे स्थित होकर सूर्य को प्रभावित कर रहा हैं वही कन्या राशि पापकर्तरी मे हैं तथा बुध राहू केतू अक्ष मे हैं |

6)11/4/1966 18:15 श्रीमाधोपुर कन्या लग्न इस पत्रिका मे शनि षष्ठेश होकर सूर्य व बुध (नीच) संग सप्तम भाव से लग्न कन्या राशि को देख रहा हैं |

7)22/5/1979 17:45 गाजियाबाद तुला लग्न इस पत्रिका मे शनि की लग्न व शुक्र दोनों पर दृस्टी हैं षष्ठेश ऊंच राशि का हैं बुध मंगल से पीड़ित हैं तथा कन्या द्वादश भाव की राशि हैं |

8)11/6/1938 20:00 इटावा धनु लग्न की इस पत्रिका मे शनि की लग्न व छठे भाव मे स्थित बुध पर दृस्टी हैं कन्या राशि पर मंगल शनि दोनों का प्रभाव हैं |

9)22/2/1965 5:00 बरेली मकर लग्न मे जन्मे इस जातक को गुर्दे मे पथरी थी | इस पत्रिका मे शनि छठे भाव के स्वामी बुध व सूर्य के संग हैं तथा कन्या राशि मे मंगल वक्री होकर स्थित हैं | इस जातक की 11/6/1992 को शल्य चिकित्सा भी हुई |

10)30/3/1973 5:15 दिल्ली कुम्भ लग्न इस पत्रिका मे शनि की छठे भाव व लग्न दोनों पर दृस्टी हैं लग्न मे बुध हैं तथा कन्या राशि मे नीच के गुरु की भी दृस्टी हैं |

11)9/2/1975 22:36 दिल्ली कन्या लग्न मे जन्मी इस जातिका के गाल ब्लेडर मे पथरी थी |

12)1/11/1985 3:50 रुड़की कन्या लग्न मे जन्मे इस जातक के गुर्दे मे पथरी थी |

13)9/7/1981 21:45 गया कुम्भ लग्न मे जन्मे इस जातक की 12/8/2008 को चिकित्सा के द्वारा पथरी निकाली गयी |

14)22/2/1965 16:00 आगरा मे मिथुन लग्न मे जन्मे इस जातक को पथरी थी |

15)21/3/1960 8:35 मेरठ मेष लग्न मे जन्मे इस जातक की 15/3/2015 को शल्य चिकित्सा द्वारा पथरी निकाली गयी |

पथरी की अन्य कुंडलीयां

16)13/10/1970 21:55 कानपुर मिथुन लग्न
17)1/11/1984 3:50 दिल्ली कन्या लग्न
18)19/8/1959 11:00 आगरा तुला लग्न
19)20/9/1938 13:10 लखनऊ धनु लग्न
20)3/12/1978 16:00 दिल्ली मेष लग्न
21)6/9/1990 2:00 दिल्ली मिथुन लग्न
22)8/2/1971 3:20 देहरादून वृश्चिक लग्न
23)1/11/1984 3:45 गढ़वाल कन्या लग्न
24)22/5/1979 17:45 मथुरा तुला लग्न
25)5/1/1978 15:08 दिल्ली वृष लग्न
26)18/10/1988 9:15 दिल्ली वृश्चिक लग्न   
27)17/12/1965 2:00 फोरबेसगंज बिहार तुला लग्न      
28)23/8/1982 6:00 दिल्ली सिंह लग्न
29)17/10/1981 00:25 दिल्ली कर्क लग्न
30)6/4/1991 11:30 दिल्ली मिथुन लग्न
31)1/4/1977 00:30 दिल्ली धनु लग्न स्त्री
32)5/1/1978 15:08 दिल्ली वृष लग्न
33)10/11/1989 8:15 शहडोल वृश्चिक
34)3/1/1990 5:00 रुड़की वृश्चिक लग्न
35)27/7/1967 11:30 रोहतक कन्या लग्न
36)12/7/1991 13:30 गुड़गाँव तुला लग्न
37)16/2/1978 22:06 दिल्ली कन्या लग्न