गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

कितना सफल होगा केजरीवाल का “ईवन ऑड़ फॉर्मूला"

कितना सफल होगा केजरीवाल का ईवन ऑड़ फॉर्मूला"

दिल्ली मे 1 जनवरी 2016 से केजरीवाल सरकार द्वारा गाड़ियो के लिए ईवन ऑड़ फॉर्मूला लागू किया जा रहा हैं जिससे दिल्ली के आम आदमी को आम आदमी की सरकार द्वारा तकलीफ मिलने की प्रबल उम्मीद हैं और ऐसा होना भी चाहिए आखिर उसने ही तो यह आम आदमी की सरकार चुनी हैं प्रदूषण घटाने का यह फॉर्मूला कितना सफल होगा आज हम यही प्रश्न कुंडली से जानने का प्रयास कर रहे हैं  |
प्रश्न के समय लग्नेश का छठे भाव मे चन्द्र संग होना इस प्रश्न से जुड़े विवादो की और संकेत कर रहा हैं और विवाद हो भी रहे हैं आगे भी अवश्य होंगे | छठे भाव के स्वामी सूर्य का दशम भाव मे होकर लग्नेश-षष्ठेश गुरु द्वारा दृस्ट होना सरकार से संबन्धित प्रश्न व विवाद स्पष्ट बता रहा हैं वही जनता का कारक शनि शुक्र संग नवम भाव मे स्थित होकर जनता की भविष्य की चिंता बता रहा हैं इस शनि की छठे भाव स्थित गुरु चन्द्र दोनों पर दृस्टी हैं जो जनता के प्रभाव को स्पष्ट कर रही हैं जनता अवश्य ही कोई न कोई विवाद खड़ा करेगी यह भी हो सकता हैं की जनता सरकार के इस फैसले के खिलाफ कोर्ट मे भी जाए ( प्रश्न मे जनता का स्वामी बुध एकादश भाव से कुछ दिनो बाद द्वादश भाव मे जा रहा हैं ) वही सरकार का कारक सूर्य 15 दिन बाद दशम से एकादश भाव मे जाएगा जिससे सरकार अपने इस फैसले से खुद ही पलटकर मुकर जाएगी |

लग्न मे केतू राहू का अक्ष होना इस योजना का बेमेल होना बता रहे हैं केतू जहां बहस करवाने को तैयार हैं वही राहू विरोधीयो द्वारा सरकार को घेरने की तैयारी बता रहा हैं |

स्पष्ट हैं की यह योजना कामयाब नहीं होने वाली हैं सरकार को अपने कदम वापस लेने पड़ेंगे और कोई नयी योजना बनानी पड़ेगी   

गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

शनि शांति के सरल उपाय

शनि शांति के सरल उपाय
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यह लेख 2011 मे लिखा गया था 

रविवार, 13 दिसंबर 2015

मंगल का अमंगल क्यू

मंगल का अमंगल क्यू

संस्कृत भाषा मे मंगल शब्द का शाब्दिक अर्थ “उन सभी वस्तुओ से होता हैं जो आस्तित्व व सृजन हेतु आवशयक होती हैं“ इसी कारण सभी सृजनात्मक कार्यो को मांगलिक कार्य भी कहा जाता हैं मंगल ग्रह नैसर्गिक व प्राकृतिक रूप से सृजनात्मक हैं किन्तु जब इसकी यही सृजनात्मक विशेषताएँ ग़लत रूप से प्रयुक्त होने लगती हैं तो यह विध्वंशक रूप ले लेता हैं  और इसे मंगल की जगह अमंगल समझा जाने लगता हैं |

सभी ज्योतिषीय ग्रंथो मे मंगल ग्रह के कारकत्व दिये गए हैं परंतु इसके आंतरिक चरित्र के विषय मे किसी भी ग्रंथ मे कोई भी उल्लेख नहीं किया गया हैं जिससे इसका वास्तविक रूप समझ मे नहीं आ पाता हैं यह कोई भी ग्रंथ अथवा विद्वान नहीं बता पाता की इसे क्रूर ग्रह होने पर भी मंगल नाम क्यू दिया गया हैं |

मंगल शब्द संस्कृत के मूल शब्द मांग से बना हैं जिसका अर्थ चलने वाला अर्थात गति करने वाला होता हैं यह वह ऊर्जा हैं जो स्थिर अथवा जड़त्व वस्तुओ को हिलाती हैं हम सभी जानते हैं की ब्रह्मांड मे सभी शक्तिओ का श्रोत सूर्य होता हैं परंतु यह भी सत्य हैं की सूर्य स्वयं गति नहीं करता हैं सूर्य का वाहन मंगल हैं तथा इस मंगल की गति के कारण ही धरती पर जीवन होता हैं इसी गति अथवा बहाव को पुराणो मे गंगा कहा गया हैं यह गंगा शंब्द गम धातु से बना हैं जिसका शाब्दिक अर्थ भी मंगल की भांति चलने वाला अथवा गति करने वाला होता हैं इस प्रकार देखे तो मंगल व गंगा का अर्थ समान होता हैं | यहाँ यह भी ध्यान दे की मकर राशि का मंगल ग्रह व गंगा से संबंध हैं मंगल मकर राशि मे ऊंच होता हैं  वही मकर राशि का प्रतीक मकर को पुराणो के अनुसार गंगा का वाहन कहाँ गया हैं |

मंगल की किरणों का धरती पर आना गंगा के बहाव के समान ही होता हैं राशियो मे यह सर्वप्रथम मेष राशि अर्थात कालपुरुष के सिर का स्पर्श सबसे पहले करती हैं जिसका प्रथम नक्षत्र अश्विनी होता हैं जिसके प्रतीक दो घोड़े होते हैं यह घोड़े गति का प्रतिनिधित्व करते हैं जो मंगल की विशेषता होती हैं |

पुराणो के अनुसार जब गंगा के रूप मे ऊर्जा धरती पर आई तो उसके आक्रामक बहाव अथवा वेग को शिव (कालपुरुष) ने अपने सिर (मेष राशि) से नियंत्रित किया था जिससे यह सिर पर विराजित हो गयी सिर का यह वो स्थान होता हैं जो की परम शिव का स्थान माना जाता हैं प्रयोगिक अथवा विज्ञान के रूप मे देखे तो सिर का यह हिस्सा सेरेबेलम कहलाता हैं जिससे शरीर मे होने वाली सभी क्रियाओ का नियंत्रण होता हैं  | मंगल की सकारात्मक ऊर्जा शरीर के ऊपरी हिस्से अर्थात सिर मे तथा नकारात्मक ऊर्जा शरीर के निचले हिस्से अर्थात कुंडलिनी शक्ति के रूप मे सर्पाकार अवस्था मे रहती हैं मंगल की यह नकारात्मक ऊर्जा भावानुसार वृश्चिक राशि मे पड़ती हैं जो ज्योतिष मे कुंडलिनी शक्ति को ही दर्शाती हैं यही वह शक्ति हैं जो धरती पर सभी जीवो को जन्म देती हैं (वृश्चिक राशि प्रजनन अंगो व काम संबंधो से संबन्धित होती हैं )

इस प्रकार यह मंगल भौतिक जगत मे दो प्रकार से कार्य करता हैं तथा इसके दो भाव बनते हैं जो बाहरी शक्ति व भीतरी शक्ति को दर्शाते हैं इसका सकारात्मक व बाहरी शक्ति का भाव मेष (अग्नि ) राशि को दर्शाता हैं जो कालपुरुष के जन्म,सिर,चेहरे आदि को बताता हैं तथा इसका नकारात्मक व भीतरी शक्ति का भाव वृश्चिक (जलीय)राशि को बताता हैं जो कालपुरुष के गुप्त व उत्सृजन अंग,मृत्यु अथवा जीवन की निकासी को बताता हैं | जिससे इस मंगल के कारण धरती पर जीवन के संचालन का पता चलता हैं संभवत; इसी कारण इसे मंगल नाम दिया गया हैं |

मंगल कर्क राशि मे नीच का हो जाता हैं अर्थात प्रभावहीन हो जाता हैं कर्क का स्वामी ग्रह  चन्द्र होता हैं व कर्क जलीय राशि भी हैं जहां मंगल की ऊर्जा जल प्रभाव के कारण निष्प्रभावी हो जाती हैं और अपना सम्पूर्ण प्रभाव नहीं दे पाती | वही मकर राशि मे जाने पर यह मंगल ऊंच का प्रभाव देते हैं क्यूंकी मकर राशि का स्वामी शनि होता हैं जो की ठड़कता एवं किसी भी वस्तु को जमाना (जड़त्वता) का प्रतीक हैं जो जल को भी जमा सकता हैं  जिस कारण इस राशि मे मंगल की ऊर्जा ठोस शक्ति का आकार ले लेती हैं जिससे मंगल अपना पूर्ण प्रभाव इस राशि मे दे पाता हैं यहाँ यह भी ध्यान रखे की मकर शब्द का शाब्दिक अर्थ “शक्ति का होना अर्थात जिसके पास शक्ति हैं” होता हैं |

आत्मा “लिंग“ से परे होती हैं परंतु मंगल के प्रभाव से उसमे जन्म लेने पर लिंग निर्धारण होता हैं इस प्रकार मंगल पृथ्वी पर भोग सुख अथवा यौन सुख का कारक बन पृथ्वी पर जीवन चलाता हैं जिससे सम्पूर्ण सृष्टि चलती हैं |भारतीय ज्योतिष मंगल के इस प्रभाव से भली भांति परिचित थे इसी कारण वर वधू चयन के समय वह सबसे पहले इस मंगल गृह की दोनों पत्रिकाओ मे स्थिति देखते थे वह यह जानते थे की यदि मंगल की स्थिति ठीक ना हुई तो यह वैवाहिक अथवा भोग सुख मे अवश्य ही तनाव उत्पन्न करेगा जिससे वह मंगल ना होकर अमंगल हो जाएगा |

जब मंगल पत्रिका मे 1,4,7,8 व 12 भाव मे होता हैं तो वह जातक को जुनूनी,आक्रामक,गुस्सेबाज़,ऊर्जावान व अधिक कामी बनाता हैं ऐसे मे यदि उसका जीवन साथी भी उस प्रकार का ना हुआ तो उसके सांसारिक जीवन मे अवश्य ही परेशानियाँ हो जाएंगी | सभी वैवाहिक स्त्रीयों मे इस मंगल की संवेदन तरंग पायी जाती हैं जिस कारण उन्हे माथे अथवा मांग मे सिंदूर लगाया जाता हैं जो इस मंगल का ही प्रतीक होता हैं संभवत: इसी कारण विवाह आदि मांगलिक कारणो मे लाल रंग का प्रयोग ज़्यादा किया जाता हैं |

मंगल सृजनकर्ता हैं हमारा जन्म इसी मंगल के प्रभाव से होता हैं स्त्रीयों मे मासिक धर्म मंगल के कारण ही होता हैं जबकि मासिक चक्र चन्द्र से होता हैं यदि मंगल की स्थिति स्त्री की पत्रिका मे ठीक ना होतो उसे मासिक धर्म संबंधी रोग होते हैं और यदि इसी मंगल की खराब स्थिति के कारण उसे मासिक धर्म ही ना होतो वह संतान उत्पन्न करने मे असमर्थ होती हैं यही वह तथ्य हैं जो मंगल को सृजन करने वाला बनाता हैं इसी मंगल की दूसरी राशि वृश्चिक द्वारा ही स्त्री पुरुष के यौन अंगो अथवा जननांगो का निर्धारण होता हैं |

मंगल भूख व तृष्णा का ग्रह हैं हमारा खान पान इसी मंगल की अग्नि (जठराग्नि) से प्रभावित होता हैं जब भोजन अथवा पानी लाल रंग का प्रयोग किया जाता हैं तब हमारी भूख प्यास बढ़ जाती हैं ऐसा विज्ञान भी मानता हैं मुख्यत: देखे तो हमारी सभी पसंद-नापसंद इस मंगल पर ही निर्भर करती हैं जो भी वस्तु हमें पसंद अथवा आकर्षित करती हैं मंगल के कारण ही करती हैं इसी मंगल के कारण ही हम कुछ पैदा करते हैं नष्ट करते हैं फिर कुछ नया पैदा करते हैं सृजन करते हैं |


मंगल हमारी ऊर्जा हैं जो शुभ होने पर चन्द्र संग मिलकर हमारा रक्त संचालन करता हैं मंगल जहां रक्त व मज्जा का प्रतिनिधित्व करता हैं वही साहस,पुरुषार्थ,आत्मविश्वास हेतु भी देखा जाता हैं जो सभी प्राणियों मे पाया जाता हैं और बिना इन सबके कोई भी जीवन मे कुछ प्राप्त नहीं कर सकता इसी मंगल के अशुभ होने पर यह अहम,क्रोध,धैर्यहीनता,झगड़ने की प्रवृति,कमजोर का शोषण करने की इच्छा,रक्तपात हेतु प्रेम,भोग प्रवृति,चौर्यक्रम व हत्या जैसे फल भी प्रदान करता हैं |       

शुक्रवार, 11 दिसंबर 2015

बाजीराव मस्तानी ........ कितनी सफल होगी

बाजीराव मस्तानी ........ कितनी सफल होगी

संजय लीला भंसाली की बहुचर्चित फिल्म बाजीराव मस्तानी 18 दिसंबर 2015 को आ रही हैं 300 वर्ष पूर्व रहे एक मराठा योद्धा बाजीराव पेशवा पर बनी यह फिल्म भंसालीजी का एक बड़ा सपना रही हैं जो उन्होने अपनी चर्चित फिल्म “हम दिल चुके सनम” के वक़्त देखा था वह चाहते थे की इस फिल्म मे सलमान खान व ऐश्वर्या राय काम करे परंतु ऐसा नहीं हो सका अब उन्होने अपनी पिछली फिल्म “रामलीला” के ही मुख्य कलाकार रणबीर सिंह व दीपिका पादुकोण को लेकर यह फिल्म बनाई हैं जिस मे एक अहम किरदार प्रियंका चोपड़ा का भी हैं भंसाली हमेशा से ही बड़े पैमानो पर फिल्मे बनाते रहे हैं साथ साथ उन्हे इतिहास से छेड़छाड़ कर फिल्म बनाने का बड़ा शौक रहा हैं अपनी फिल्म देवदास के एक गाने मे उन्होने चन्द्रमुखी व पारो का नृत्य दिखाया जो की असली देवदास मे नहीं हुआ था वही इस फिल्म बाजीराव मस्तानी मे भी उन्होने मस्तानी व काशिबाई के बीच एक नृत्य फिल्माया हैं जो वास्तव मे नहीं हुआ था संभवत: ऐसा वह अपनी फिल्मों को विवाद व चर्चा मे लाने के लिए करते हैं जिससे उनकी फिल्म सफल हो जातीं हैं | इनकी फिल्मों की एक विशेषता गीत-संगीत भी होता हैं जो बड़े पैमाने मे होने के कारण पहले से ही काफी सफल हो चुका होता हैं इस फिल्म मे भी ऐसा ही हैं |


आइए ज्योतिषीय दृस्टी से यह जानने का प्रयास करते हैं की यह फिल्म कितना सफल हो पाती हैं प्रश्न कुंडली के आधार पर देखे तो लग्नेशद्वितीयेश का लाभ स्थान मे बैठना फिल्म की कामयाबी निश्चित दिखा रहा हैं वही धन भाव व विदेश भाव पर गुरु की दृस्टी इसे विदेशो से भी लाभ बता रही हैं सप्तम भाव के स्वामी (पार्टनर) का लाभ भाव मे होना उन्हे भी लाभ बता रहा हैं अत: स्पष्ट  हैं की फिल्म घाटे का सौदा नहीं बनने वाली वही फिल्मों के कारक ग्रह शुक्र को देखे तो वह कर्म भाव मे पंचमेश व करमेश होकर स्थित हैं जो बता रहा हैं की यह फिल्म जनता विशेषकर युवा वर्ग को बेहद पसंद आने वाली हैं रणबीर और दीपीका के प्रेम संबंध सारी दुनिया को पता ही हैं संभवत: आने वाले समय मे यह फिल्म ऐसी अन्य एतिहासिक फिल्मों के निर्माण का रास्ता खोलेगी जो हमें इतिहास के कई किरदारो के विषय मे बताएँगी | अत: ज्योतिष द्वारा देखे तो यह फिल्म अवश्य ही नाम व दाम दोनों कमा पाने सफल रहेगी भले ही यह फिल्म जगत की कमाई का एक नया इतिहास न लिख पाये | हमारा ऐसा मानना हैं की यह फिल्म धीरे धीरे जनता मे अपनी पकड़ बनाती जाएगी और अच्छा व्यवसाय करेगी जो लगभग 100-200 करोड़ का हो सकता हैं | वैसे इसी दिन आ रही शाहरुख खान की फिल्म “दिलवाले” से भी इसका दिलचस्प मुक़ाबला होता दिख रहा हैं |

गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

दिलवाले................ किंग खान का डर

दिलवाले................ किंग खान का डर

18 दिसंबर 2015 को शाहरुख खान की दिलवाले फिल्म आ रही हैं पिछले कुछ दिनो से शाहरुख व आमिर के द्वारा देश मे बढ़ रहे असहिष्णुता संबंधी बयानो ने इन दोनों खानो की मुश्किले बढ़ा दी हैं सोशल साइट्स पर इनके व इनकी फिल्मों के बारे मे बहिष्कार करने की बात कहीं जा रही हैं | ऐसे मे यह जानना दिलचस्प होगा की इनकी आगामी फिल्मों का क्या हश्र होगा वैसे कहा जा रहा हैं की शाहरुख खान ने सभी न्यूज़ चैनल्स को पैसा दिया हैं की वह उनकी इस फिल्म को पहले ही दिन सुपरहिट करार दे दे वही यह भी खबर फैलाई जा रही हैं की शाहरुख अपनी इस फिल्म की पहले दिन की कमाई चेन्नई बाढ़ राहत कोष मे दान देंगे जहां तक हमारा मानना हैं वो ऐसा कुछ नहीं करने वाले हैं | यह सिर्फ फिल्म को हिट कराने की अफवाह मात्र हैं |


आइए ज्योतिषीय दृस्टी से देखते हैं की फिल्म का क्या हश्र होगा चूंकि फिल्म निर्माण से जुड़े सभी व्यक्तिओ की कुंडली मिल पाना असंभव हैं अत: हम इस प्रश्न का जवाब प्रश्न कुंडली के आधार पर देखते हैं | लग्नेश का छठे भाव से संबंध आ रहा हैं अत: फिल्म से संबन्धित कोई विवाद ज़रूर होगा (जो की हो चुका हैं )छठे भाव से लग्नेश का संबंध विदेश भाव व धन भाव से बना हैं जो इस फिल्म को विदेश मे ज़्यादा लोकप्रिय कर रहा हैं तथा लाभ भी बता रहा हैं | वही देश मे देखे तो लग्न भाव केतू से पीड़ित हैं अर्थात फिल्म बड़बोले पन का शिकार ज़्यादा होगी इतनी चलेगी नहीं जितनी बताई जाएगी वही धन का मालिक मंगल राहू से पीड़ित होकर सप्तम भाव मे हैं तथा धन भाव को देख रहा हैं जो शाहरुख के अपने भाइयो अर्थात मुस्लिम वर्ग द्वारा फिल्म को हिट किए जाने की संभावना बता रहे हैं वही फिल्मों का कारक ग्रह शुक्र आठवे भाव से धन भाव को देख रहा हैं स्पष्ट हैं की फिल्म अच्छा व्यवसाय करेगी जो की लगभग 100-150 करोड़ के आस पास होता दिख रहा हैं परंतु बहुत बड़ी हिट (ब्लॉकबस्टर) साबित नहीं हो पाएगी जिसकी एक वजह इसी दिन आ रही फिल्म बाजीराव मस्तानी भी हैं |

देहरादून मे ज्योतिष सम्मेलन का सफल आयोजन

देहरादून मे ज्योतिष सम्मेलन का सफल आयोजन

दिनांक 29 नवंबर 2015 को देहरादून उत्तरांचल मे एक ज्योतिष सम्मेलन का आयोजन गुरु कृपा ज्योतिष धाम के संस्थापक डॉ पी॰पी॰एस राणा के द्वारा किया गया इस सम्मेलन मे भारत वर्ष के नामी गिरामी ज्योतिषियो जिनमे प्रमुख श्री ललित कुमार जोशी,श्री रमेश सेमवाल,श्री विनायक,श्री संजीव अग्रवाल,श्री लेखराज शर्मा,श्री गौतम ऋषि पाराशर,श्री के के शर्मा,श्री राहुल शर्मा,श्री गोपाल राजू,श्री रतन वशिष्ठ,श्रीमती रश्मि चौधरी,कुमारी हरलीन कौर,श्री अजित रघुवंशी आदि ने अपने ज्योतिषीय ज्ञान का परिचय दिया व ज्योतिष पर अपने विचार प्रकट किए तथा समान्यजन की ज्योतिषीय समस्यायों का समाधान किया देहरादून मे यह अपनी तरह का तीसरा आयोजन था जो डॉ राणा के नेत्रत्व मे किया गया था ज्ञात रहे डॉ राणा पहले भी इस तरह के दो ज्योतिषीय सम्मेलनों का आयोजन देहरादून मे कर चुके हैं | इस बार का यह सम्मेलन पिछली दोनों बार से अलग था इस बार मुख्य अतिथि के रूप मे राज्य के मुख्य मंत्री जी आने से इस सम्मेलन मे जहां चार चंद लगे वही जनता की अतुलनीय भागीदारी होने से पूरे उत्तरांचल व ज्योतिष जगत मे इस सम्मेलन की चर्चा रही |

ज्योतिष जगत मे डॉ राणा का नाम प्रश्न शास्त्र व चिकित्सा ज्योतिष मे बड़े सम्मान के साथ लिया जाता हैं डॉ राणा ने जहां इस तरह के तीन सफल आयोजन करके ज्योतिष का मान बढ़ाया हैं वही इन तीनों सम्मेलनों को निशुल्क कर उन आयोजको को भी यह बताने का प्रयास किया हैं की यदि ज्योतिष सम्मेलनों को व्यावसायिक सम्मेलन ना बनाया जाये तो न सिर्फ ज्योतिष जगत का भला होगा बल्कि जनता को भी इससे लाभ मिलेगा (आए दिन देश भर मे ऐसे कई ज्योतिष सम्मेलन आयोजित होते हैं जिनमे सहभागिता शुल्क 1000 से 5000 रुपये तक होता हैं जो ना सिर्फ ज्योतिषी का बल्कि ज्योतिष जगत का अपमान ही करता हैं सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए ऐसे ज्योतिषी जो ज्योतिष के विषय मे कुछ नहीं जानते वहाँ अपनी शेख़ी बघारते हैं ) हम यह मानते हैं की ऐसे सम्मेलनों मे खर्चा अवस्य होता हैं परंतु यदि यह खर्च ज्योतिषियो से केवल भोजन इत्यादि हेतु लिया जाये तो वाजिब जान पड़ता हैं सिर्फ अपने महिमामंडन करवाने के लिए इतना धन व समय लिया जाना ठीक नहीं लगता और ना ही इससे कुछ हासिल ही होता हैं | अभी कुछ दिन पहले अंबाला मे हुये ऐसे ही आयोजन मे हम सबने देखा की एक टीवी अदाकारा के साथ फोटो खिचवाने के लिए ज्योतिषियो का क्या हाल रहा अब कोई आयोजक से पूछे की एक टीवी अदाकारा को ज्योतिष सम्मेलन मे मुख्य अतिथी बनाने का क्या प्रयोजन हैं सिर्फ सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए ज्योतिष का व ज्योतिषियो का इस तरह से व्यवहार करना कहाँ तक उचित हैं |

यहाँ हम यह भी बताते चले की ऐसे हमारे कई ज्योतिष विद्वान मित्र हैं जो समय समय पर ज्योतिष के सम्मेलन,गोष्ठिया आदि करते रहते हैं जिनमे ना सिर्फ ज्योतिष के विषय मे गुढ़ चिंतन व शोध होता हैं बल्कि आम जनता की ज्योतिषीय समस्याओ का समाधान भी होता हैं जिनमे प्रमुख नाम मोदिनगर के श्री विनायक जी व अखिलेश कौशिक,मेरठ के संजीव अग्रवाल,रुड़की के श्री रमेश सेमवाल,दिल्ली के श्री अरुण बंसल (फ्यूचर पॉइंट),के॰के॰ शर्मा (ज्योतिष गुरु एस्ट्रो पॉइंट) आदि प्रमुख हैं यह सभी ना सिर्फ ज्योतिष जगत मे अपना बेहतरीन काम कर रहे हैं बल्कि सच्चे मायनो मे ज्योतिष आम जनता तक पहुंचा रहे हैं |  

यह हमारा दुर्भाग्य रहा की अस्वस्थ होने के कारण हम इस सम्मेलन मे भाग नहीं ले पाये पर हम व हमारा ज्योतिष गुरु परिवार डॉ राणा की इस बेहतरीन ज्योतिष सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई देता हैं व हमेशा की भांति उन्हे अपना सहयोग देते रहने के अपने प्रण को दोहराता हैं और साथ साथ यह कामना भी करता हैं भविष्य मे भी डॉ राणा ऐसे ही सफल आयोजन कर ज्योतिष का मान बढ़ाएँगे |


यदि आप भी ज्योतिष,धर्म,कर्मकांड आदि से जुड़े हुये हैं और अपने राज्य मे ज्योतिष का सम्मेलन करवाना चाहते हैं तो “ज्योतिष गुरु एस्ट्रो पॉइंट” परिवार आपकी इसमे सहायता कर सकता हैं अधिक जानकारी के लिए पत्रिका के दिल्ली कार्यालय मे संपर्क करे |      

गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

शुक्र ग्रह अस्त

शुक्र ग्रह अस्त

शुक्र ग्रह को ग्रह मण्डल मे शुभता की श्रेणी मे गुरु ग्रह के बाद दूसरे पायदान मे रखा गया हैं | शुक्र काल पुरुष की इच्छाओ का प्रतीक माना जाता हैं जिसे मानव शरीर मे कुंडली शक्ति मे स्थित रखा गया हैं कुंडली मे शुभ शुक्र जातक विशेष को सभी प्रकार की सांसारिक वस्तुए प्रदान कर आनंद व भोग से परिपूर्ण करता हैं ( इसीलिए इसे द्वितीय व सप्तम भाव का स्वामी बनाया गया हैं ) यह शुक्र इतना प्रभावशाली होता हैं की अस्त अवस्था मे भी यह जातक विशेष के जीवन पर अपना प्रभाव रखता हैं | प्रस्तुत लेख मे हम शुक्र के इसी अस्तावस्था के प्रभाव की चर्चा कर रहे हैं जिसके लिए हमने कुछ कुंडलियों का अध्ययन भी करने का प्रयास किया हैं |

जब कोई ग्रह सूर्य के नजदीक आ जाता हैं तो उसे अस्त माना जाता हैं प्रत्येक ग्रह के अस्त होने के कुछ अंश निर्धारित होते हैं जिसमे शुक्र ग्रह के 10 अंश सामान्य अवस्था मे तथा 8 अंश वक्र अवस्था माने गए हैं | अस्त ग्रह के विषय मे यह माना जाता हैं की वह अपने कारकत्व ठीक से प्रदान नहीं करता हैं अर्थात वह जिन जिन वस्तुओ का कारक होता हैं उन वस्तुओ को सही प्रकार से प्रदान नहीं करता |

सारावली के 36वे अध्याय रश्मि चिंता मे कल्याण वर्मा कहते हैं की शुक्र व शनि को छोड़कर जो भी ग्रह अस्त होता हैं वह अपनी रश्मि अर्थात किरणे प्रदान नहीं करता हैं जिससे उसके कारकत्व वाली वस्तुए जातक को ठीक से प्राप्त नहीं हो पाती | जातक पारिजात मे बैधनाथ पंडित अध्याय 5 के 7वे श्लोक आयुर्दाय मे कहते हैं की शुक्र व शनि अस्त होकर भी अपना प्रभाव प्रदान करते हैं ( इसमे संदेह नहीं हैं की ग्रहो की रश्मियों का प्रभाव महत्वपूर्ण होता हैं क्यूंकी ग्रहो की अस्तावस्था व ग्रसितावस्था मे उन्हे विकल अर्थात कमजोर माना जाता हैं ) चूंकि शुक्र शनि दोनों ग्रहो को अस्तावस्था के बावजूद रश्मि प्रदाता माना गया हैं और ऐसा कुंडलियों का अध्ययन करने पर पाया भी गया हैं की जब कुंडली मे शुक्र अस्तावस्था मे होता हैं तो जातक सादा जीवन ऊंच विचार वाली सोच रख अपनी इच्छाओ को दमित कर जीवन को ऊंच स्तर पर ले जाता हैं | शुक्र का अस्त होना जातक के सांसारिक जीवन को संतुलित कर उसे दार्शनिकता की और बढाता हैं जिससे व्यक्ति के महान बनने की शुरुआत होती हैं सांसारिकता का कारक शुक्र अस्त होकर जातक को सांसारिक वस्तुओ से मोह भंग कर उसे ईश्वर के करीब लाने मे सहायक सिद्द होता हैं |

किसी भी कार्य को करने हेतु इच्छा होनी ज़रूरी होती हैं यह इच्छा ही अच्छी बुरी वस्तुओ से हमारा परिचय कराती हैं इच्छा ना हो तो जीवन नीरस हो जाता हैं और इच्छाओ का स्वामी व कारक यह शुक्र ही होता हैं | शुक्र जब भी किसी ग्रह के संपर्क मे आता हैं तब वह परिशुद्ध होकर उस ग्रह से संबन्धित तत्वो पर अपना प्रभाव डाल देता हैं गुरु जहां देवताओ के गुरु माने जाते हैं वही शुक्र दानवो के गुरु कहे गए हैं जो प्रत्येक वस्तुओ और इच्छाओ पर अपना अधिकार रखना चाहते हैं और ऐसे मे जब यही शुक्र सूर्य से अस्त हो जाते हैं तो अपनी सारी राजसिकता को सात्विक्ता मे बदल जीवन को ईश्वर से जोड़ने का कार्य करा मोह माया के बंधनो से मुक्त करते हैं परंतु ऐसा भी नहीं हैं की शुक्र के अस्त होने पर जातक विशेष को संसार का सुख नहीं मिलता मिलता अवश्य हैं परंतु एक सही व मर्यादित रूप मे जिससे जातक स्वर्ण की भांति तपकर इस धरती पर अपना नाम रोशन करता हैं महान ऋषिओ,आचार्यो,संतो,व विद्वानो की पत्रिका मे शुक्र का अस्त होना तो यही सिद्द करता हैं |

आइए कुछ कुंडलियों मे शुक्र अस्त का प्रभाव देखते हैं |

1)भारत 15/8/1947 00:00 दिल्ली वृष लग्न की इस पत्रिका मे शुक्र तृतीय भाव मे अस्त हैं और हमारा भारत वर्ष विश्व मे धर्म व अध्यात्म के क्षेत्र मे क्या स्थान रखता हैं सब जानते ही हैं |

2)आदि शंकराचार्य व रामानुजाचार्य की कर्क लग्न की इस पत्रिकाओ मे शुक्र दशम भाव मे ऊंच के सूर्य से अस्त हैं और इनके विषय मे प्रत्येक भारतवासी सब जानते ही हैं |

3) सरस्वती पुत्र रवीन्द्रनाथ टैगोर 7/5/1861 मीन लग्न तथा अरविंद घोष 15/8/1872 मेष लग्न दोनों पत्रिका मे शुक्र दूसरे भाव मे अस्त हैं और इनका जीवन किस प्रकार का था यह बताने की आवशयकता ही नहीं हैं |

4)स्वामी विवेकानंद 12/1/1863 धनु लग्न इनकी पत्रिका मे भी शुक्र अस्त हैं | इनका जीवन कैसा था हम सब भली भांति जानते हैं |


5)नरसिंह भारती 11/3/1858 तुला लग्न,मोतीलाल नेहरू 6/5/1861 धनु लग्न,जगमोहन डालमिया 7/4/1893 वृष लग्न,हरगोविंद खुराना 9/1/1922 वृष लग्न,मुंशी प्रेमचंद 31/7/1880 6:00 कर्क लग्न,सरदार पटेल 18/10/1875 मेष लग्न,जज ब्रजेश कुमार 1/9/1915 कुम्भ लग्न,लेखक बर्नार्ड शाह 26/7/1856 वृष लग्न की पत्रिकाओ मे शुक्र अस्त हैं |     

सोमवार, 23 नवंबर 2015

बताइये ज्योतिषी कहाँ ग़लत हैं |

बताइये ज्योतिषी कहाँ ग़लत हैं |

2005  –पंडितजी बेटे ने 10 पास कर ली हैं बताए कौन सा क्षेत्र इसके लिए अच्छा रहेगा
पंडित जी-इसकी पत्रिका मे सी ए बनने के योग हैं इसे सी ए बनाए |
पंडित जी का शुल्क 200/ परंतु दक्षिणा 51/रु दी गयी

2010 –पंडित जी बेटा सी ए बन गया हैं आपने तो कहा ही था अब ज़रा नौकरी के विषय मे भी बता दे
पंडितजी –इसे आगामी माह मे नौकरी मिल जानी चाहिए बस एक छोटा सा उपाय करवा दीजिएगा |
पंडितजी का शुल्क -500/परंतु दक्षिणा 101 रु दी गयी
अगले माह 30,000 रु प्रति माह की नौकरी भी प्राप्त हो गयी

2013 –पंडितजी बेटा विवाह नहीं कर रहा हैं ?
पंडितजी -इसकी पत्रिका मे प्रेमविवाह की संभावना हैं संभवत: इसी कारण विवाह करने मे आना कानी कर रहा हो प्यार से बैठा कर पूछिये कोई लड़की पसंद होगी जिस कारण ऐसा हो रहा हैं |
पंडित जी लड़की पसंद बताता तो हैं क्या करे
उसी कन्या से उसका विवाह कर दीजिये सही रहेगा,हो सके तो उस कन्या की पत्रिका दिखा दीजिएगा
पंडितजी का शुल्क 1001/ परंतु दक्षिणा 200 रु दी गयी |

2015 –पंडितजी आपकी दया से बेटा 70,000 रु प्रति माह कमा रहा हैं शादी भी हो गयी हैं | एक बेटी भी हैं बेटा कब होगा यह बताए |

पंडितजी इसकी पत्रिका मे गुरु ग्रह का श्राप हैं जिस कारण बेटे का होना मुश्किल जान पड़ता हैं |
हैं ऐसा कैसे पंडितजी हमने या हमारे किसी भी बुजुर्ग ने कभी भी किसी ब्राह्मण,विद्वान तथा गुरु का अपमान  नहीं किया हैं गुरु ग्रह का श्राप कैसे लग सकता हैं “

पंडितजी –इसके पूर्वजो ने अपने पंडित को कभी भी पंडित के कार्य का शुल्क नहीं दिया जिस कारण ऐसा हैं
नहि-नहीं पंडितजी आपसे देखने मे ग़लती हो रही हैं |


पंडितजी –सही कह रहे हैं आप हमसे देखने मे ही ग़लती हो रही होगी यह बेटा जब 10वी मे था और अब 70,000 रुपये प्रति माह कमा रहा हैं शादी,बच्चा भी हो गया परंतु पंडित जी को अबतक आपने 352 रुपये ही दिये हैं शायद आपके पिता ने भी आपके लिए ऐसा ही किया होगा जिस कारण ऐसा हो रहा हैं |

शीघ्र विवाह हेतु शाबर मंत्र


शीघ्र विवाह हेतु शाबर मंत्र

प्रस्तुत मंत्र का जाप करने से विवाह होने मे किसी भी प्रकार की आ रही रुकावट,अडचन  अथवा समस्या का समाधान हो जाता हैं |

ॐ नमः शिवाय नम: महादेवाय |
जैसे गोरा को तुम,जैसे सीता को राम ||
जैसे इंद्र को शची,जैसे राधा को श्याम |
ऐसी ही जोड़ी हमारी बने महादेव ||
तुझे इस गुरु मंत्र की आन |

इस मंत्र को भगवान शंकर के चित्र के सामने धूप,दीप प्रज्ज्वलित कर नियमित रूप से एक निश्चित समय पर 108 बार करने से विवाह होने मे आ रही सभी बाधाए नष्ट हो जाती हैं यह मंत्र स्त्री-पुरुष कोई भी कर सकता हैं इस मंत्र का प्रभाव 6 माह मे प्राप्त होता हैं |





शनिवार, 21 नवंबर 2015

घरो मे मूर्तियो की पुजा करना क्यू मना किया जाता हैं ?

घरो मे मूर्तियो की पुजा करना क्यू मना किया जाता हैं ?

प्राचीन समय मे मंदिर घरो मे ना होकर गाँव आदि के बाहर हुआ करता था जहां मूर्ति पूजन किया जाता था कालांतर मे समय अभाव के चलते लोगो ने मंदिर घर पर बनाने आरंभ कर दिये तथा जिससे मूर्ति पूजन घर पर ही होने लगा घर चूंकि ग्रहस्थ जीवन का परिचायक हैं जहां हम अपनी संतान को जन्म देने हेतु भोग जीवन जीते हैं वहाँ पर देवताओ इत्यादि की मूर्ति रखना हमारे शश्त्रानुसार भी वर्जित माना गया हैं इसी कारण मूर्तियो का पूजन घर पर मना किया जाता हैं ज्योतिष अनुसार किसी भी प्रकार का पूजन करना गुरु गृह से संबन्धित होता हैं जो ज्ञान इत्यादि का कारक हैं जिससे शुक्र अथवा ग्रहस्थ जीवन की हानी होती हैं इसलिए घर पर पुजा इत्यादि करना मना किया जाता हैं |


गुरुवार, 19 नवंबर 2015

हमारे शास्त्रो मे निरापद निवास के लिए क्या करने को कहा गया हैं ?

हमारे शास्त्रो मे निरापद निवास के लिए क्या करने को कहा गया हैं ?

निरापद निवास के लिए निम्न बातें हमारे शास्त्रो मे कही गयी हैं |
पाँच नामो का स्मरण –राजा भोज कृत समरांगण सूत्रधार के दूषण भूषण अध्याय मे ऐसे कई कर्तव्यो का उल्लेख हैं जो प्रत्येक ग्रहस्थ के लिए ज़रूरी हैं वस्तुमंडन के रचयिता सूत्रधार मंडन ने भी वस्तु नियम के पालन के बाद परिवार को घर मे नियमित पुजा,तीनों काल की संध्या,अतिथि सेवा,गौ सेवा आदि यज्ञों का निर्देश दिया हैं |

वस्तुपूजन मे सुग्रीव को देवतुल्य आदर दिया गया हैं | राम स्वभुजबल और आत्मविकास के पर्याय हैं सीता शक्ति हैं और लक्ष्मण व हनुमान निष्काम सहयोगी भाई समान मित्र का बोध कराते हैं | सुग्रीव जीवन मे होने वाले तमाम समझौतो व संधियो की पूर्णता करवाने वाले हैं | चौसठ व इक्यासी वास्तु पुरुष चक्र से लेकर सहस्त्रपद तक वास्तुपद मे सुग्रीव को एक देव के रूप मे स्थापित किया जाता हैं
इसी क्रम मे पद्मपुरान मे कहा गया हैं –

रामलक्ष्मणों सीता च सुग्रीवों हनुमान कपि: |
पंचेतान स्मरतों नित्यं महाबाधा प्रमुच्यते ||

2)इसी प्रकार किसी भी प्रकार की व्याधियों के विनाश के लिए निम्न श्लोक का प्रतिदिन स्मरण करने से व्याधियो का शमन हो जाता हैं |

सोमनाथों वैधनाथों धन्वन्तरिरथाश्वनौ |
पंचेतान य: स्मारेनित्यं व्याधिस्तस्य न जायते ||

3)प्रतिदिन हनुमान के 12 नामो का स्मरण करने से भी दुखो का अंत होता हैं

अंजनी सुत,वायु पुत्र,फाल्गुन सख,महाबली,अमित विक्रम,सीता शोक विनासन,रामेष्ट,उदधि क्रमण,लक्ष्मण प्राणदाता,हनुमान,दशग्रीव दर्पहा,पिंगाक्ष 

मंगलवार, 17 नवंबर 2015

शास्त्रानुसार किस नक्षत्र मे व्यापार आरंभ करना चाहिए ?

शास्त्रानुसार किस नक्षत्र मे व्यापार आरंभ करना चाहिए ?

प्राय: देखने मे आता हैं की जब कोई जातक स्वयं का व्यापार करना चाहता हैं तो उसके सामने दो बड़ी समस्याए आती हैं पहली की कौन सी वस्तु का व्यापार करे व दूसरी की व्यापार कब आरंभ करे ज्योतिष द्वारा यह जाना जा सकता हैं किस जातक के लिए कौन सी वस्तु का व्यापार लाभकारी रहेगा जिसके लिए प्रत्येक जातक की कुंडली का अध्ययन करना पड़ता हैं | व्यापार कब आरंभ करे इसके लिए गोस्वामी तुलसीदास अपने रचित ग्रंथ दोहावली मे लिखते हैं की  श्रव ण,धनिष्ठा,शतभीषा,हस्त,चित्रा,स्वाति,पुष्य,पुनर्वसु,मृगशिरा,अश्विनी,रेवती तथा अनुराधा नक्षत्रो मे आरंभ किया गया व्यापार व दिया गया धन हमेशा धनवर्धक होता हैं जो किसी भी अवस्था मे डूब नहीं सकता अर्थात इन नक्षत्रो मे आरंभ किया गया व्यापार कभी भी जातक को हानी नहीं दे सकता हैं | इसी प्रकार शेष अन्य नक्षत्रो मे दिया गया,चोरी गया,छीना हुआ अथवा उधार दिया धन कभी भी वापस नहीं आता हैं अर्थात जातक को हानी ही प्रदान करता हैं |

एक अन्य श्लोक् मे कहा गया हैं की यदि रविवार को द्वादशी,सोमवार को एकादशी,मंगलवार को दशमी,बुधवार को तृतीया,गुरुवार को षष्ठी,शुक्रवार को द्वितीया तथा शनिवार को सप्तमी तिथि पड़े तो यह तिथिया सर्व सामान्य हेतु हानिकारक बनती हैं अर्थात आमजन को इन तिथियो मे नुकसान ही होता हैं | अत: इन तिथियो मे कोई बड़ा सौदा अथवा लेन-देन नहीं करना चाहिए |