बुधवार, 11 फ़रवरी 2026

चतुर्थांश कुंडली और स्त्री विवाह

 

हिंदू  धर्म के अनुसार भारतीय परिपेक्ष में विवाह देखने की बहुत सारी विधियां शास्त्रों में बताई गई है परंतु देखने में आता है कि कोई भी विधि सटीकता से काम नहीं करती |

भारतीय समाज विशेषकर हिन्दुओ मे स्त्री विवाह के समय एक बात रोचक बात नजर आती है | हिंदू धर्म के अनुसार मान्यता है कि विवाह के पश्चात लड़की अथवा जातिका अपने पिता का घर छोड़कर पति के घर अर्थात ससुराल जाना होता है इसका सीधा मतलब है निवास में बदलाव, जो चतुर्थांश (D-4) चार्ट के दायरे में आता है । हम सब जानते ही हैं की कुंडली में घर अथवा संपत्ति आदि के लिए चतुर्थांश कुंडली को वर्ग कुंडली के अनुसार देखा जाना चाहिए |

चतुर्थांश न केवल घर को दर्शाता है, बल्कि उससे जुड़े घरेलू आराम और खुशी को भी दर्शाता है। इसके लिए घर में एक गृहिणी का होना ज़रूरी है, यहां मैं आपको स्पष्ट कर दूं कि हम यहां जातिका हेतु विवाह की बात कर रहे हैं जो जातिका का घर से दूर जाना तथा ससुराल जाना ही निश्चित करता है |

इसलिए लेखक का मानना है कि शादी के समय के लिए, चतुर्थांश का भी विश्लेषण किया जाना चाहिए । इसी को आधार बनाकर जब बहुत सी स्त्री पत्रिकाओं में लगाया तो पाया कि विवाह के समय स्त्री पत्रिका का चतुर्थांश वर्ग बहुत ज्यादा प्रभावशाली बन जाता है |

विवाह का समय ज्ञात करने के लिए स्त्री की कुंडली में विवाह की योग्यता को देखने के साथ-साथ 18 वर्ष से 35 वर्ष के बीच की समय आने वाली दशाओं को भी देखना होगा क्योंकि भारतीय परिपेक्ष में अधिकतर इन्हीं वर्षों में विवाह होने का प्रावधान देखा व रखा गया है |

चतुर्थांश कुंडली में देखें की स्त्री पत्रिका में इस आयु के बीच 1,3,7 और 10 भाव से संबंधित ग्रहों की दशा अथवा इन में स्थित ग्रहों की दशा चलनी चाहिए यदि ऐसा होगा तो हम विवाह के समय की सटीक आकलन कर पाएंगे |

हमने लगभग 200 से अधिक स्त्री पत्रिकाओं का अध्ययन किया और पाया कि विवाह के समय स्त्री पत्रिका के   ज़्यादातर यही सब भाव प्रभावित होते हैं |

पहला भाव जैसा कि हम सब जानते हैं लग्न अथवा जातिका के शरीर के विषय में बताता है |

तीसरा भाव चतुर्थ भाव से द्वादश होने के कारण घर का व्यय अर्थात घर से दूर होना बताता है |

सातवां भाव पति अथवा जीवन साथी का होता है तथा दसवां भाव पति का घर अर्थात जातिका हेतु ससुराल का माना जाता है |

हमने अपने अध्ययन में यह भी पाया कि इस दौरान विवाह कारक शुक्र और बंधन कारक राहू को भी देखा जाना चाहिए क्योंकि जहां विवाहकारक शुक्र की स्थिति अथवा उसकी दशा से संबंधित होना विवाह करवा सकता हैं वहीं राहु जो की काम भावो से संबन्धित होने के कारण विवाह बंधन मे ला सकता हैं |

आईये इन्हीं सब कारकत्वों को देखते हुए विवाह की तिथि ज्ञात करने की सटीक विधि की जांच करते हैं |

1 सानिया नेहवाल का जन्म 17 मार्च 1990 12:19 हिसार मिथुन लग्न व कन्या चतुर्थांश का है चतुर्थांश कुंडली मे देखे तो 1,3,7,व 1 भावो के स्वामी बुध,मंगल,गुरु,हैं तथा इनमे मे स्थित ग्रह शनि,गुरु,चन्द्र,सूर्य व बुध हैं | राहू व शुक्र हमे कारक के रू मे देखने ही हैं |

इनकी 18 वर्ष की आयु से 35 वर्ष की आयु के बीच इन्हे मुख्य रू से बुध व केतू की दशाए मिलेगी जिनमे बुध चतुर्थांश कुंडली मे लग्नेश होकर सतम भाव मे हैं जो विवाह करवाने मे सक्षम नज़र आता हैं | इनकी बुध की दशा 3/9/2020 तक रही हैं जो इसी दशा से अहले विवाह की उषटि करती हैं | इस दशा मे जब भी सूर्य,चन्द्र,गुरु व शनि का अंतर आएगा विवाह हो सकता हैं | 2008 से देखे तो इन्हे बुध की सभी दशाए विवाह वाली मिली इनका विवाह 14 दिसंबर 2018 को हुआ जब पत्रिका में बुध शनि शुक्र सूर्य की अंतर्दशा चल रही थी |

चतुर्थांश कुंडली में देखें तो बुध लग्नेश है शनि पंचमेश होकर लग्न मे है जो रेम विवाह बता रहा हैं शुक्र कारक होकर 11वें भाव में राहू बंधन कारक के संग स्थित है और विवाह के दिन सूर्य सप्तम भाव मे लग्नेश बुध संग ही स्थित है |

इस प्रकार से देखें तो यह स्पष्ट होता है कि विवाह वाले दिन 1,3,7,10 भाव व ग्रहो से संबंधित दशाएं चल रही होती है !

2 बेनजीर भुट्टो 23 जून 1953 16 22 कराची में तुला लग्न व कर्क चतुर्थांश में जन्मी बेनजीर भुट्टो को 18 वर्ष से 35 वर्ष मे मध्य शनि व बुध की महा दशाए मिली,जिनमे शनि दशा मे गुरु को छोड़कर सभी ग्रह विवाह करवाने मे सक्षम हैं इनकी कुंडली मे सतमेश मंगल और शनि व सूर्य का रभाव विवाह मे विलंबता दर्शा रहे हैं जिस कारण इनका विवाह शनि महादशा अर्थात 1984 तक नहीं हुआ | इसके बाद की दशा बुध की हैं बुध तृतीयेश होने के कारण विवाह करवा आने मे सक्षम हैं बुध मे भी गुरु को छोड़कर सभी ग्रह विवाह करवा सकते हैं |   

इनका विवाह 18 दिसंबर 1987 को बुध केतु बुध केतू दशा में हुआ | बुद्ध चतुर्थांश कुंडली में तीसरे भाव का स्वामी होकर लग्न में है केतु चौथे भाव में शुक्र की राशि मे हैं शुक्र विवाह का कारक होकर सतम भाव मे स्थित होकर विवाह की पुष्टि कर रहा है !


3 मेनका गांधी की पत्रिका 26 अगस्त 1956  16 04 मिनट दिल्ली कर्क लग्न व तुला चतुर्थांश की है |

इनके विवाह की आयु समय मे इन्हे मुख्य रू से शुक्र की दशा मिली हैं जो इनकी चतुर्थांश कुंडली का लग्नेश हैं तथा चतुर्थांश के अनुसार गुरु,मंगल चन्द्र तथा इन भावो से संबन्धित ग्रह विवाह करवा सकते हैं हम जानते हैं की इनका विवाह 29/ 9/1974 को शुक्र गुरु बुध बुध दशा में हुआ |

यहां चतुर्थांश कुंडली में देखें तो शुक्र लग्नेश होकर छठे भाव मे हैं गुरु तृतीयेश होकर अंचम भाव मे राहू संग तथा  बुध द्वादश भाव से लग्नेश शुक्र को देख रहा है ! लग्नेश शुक्र व विवाह कारक के छठे भाव मे होने से तथा उस आर द्वादशा स्वामी बुध की दृस्टी व दशा होने से विवाह मे विवाद भी रहा |

गुरुवार, 22 जनवरी 2026

धन भाव पर विभिन्न ग्रहो की दृष्टि का फल

 ‎धन भाव पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि का फल

यदि धन भाव पर सूर्य की दृष्टि हो तो दृष्टिमन्दता का दोष उत्पन्न होता है। दूसरा स्थान नेत्र स्थान भी है और सूर्य उग्र प्रकृति होने के साथ साथ विच्छेदात्मक भाव भी अपने में रखता है, इसलिए इसकी दृष्टि से नेत्र-ज्योति कम हो जाए तो क्या आश्चर्य? सूर्य आत्मा का कारक है, राजग्रह है, इसकी धन भाव पर दृष्टि जातक को सहनशील बना देती है। ऐसा जातक भाग्यहीन होता है ! वह जितना श्रम करता है, उतना फल नहीं मिलता, सहयोगियों से विरोध हो जाता है और जातक उपार्जित है । धन को परिस्थितिवश नष्ट कर डालता है, फलतः उसे विपन्न होना पड़ता

‎यदि चन्द्रमा धन भाव को देख रहा हो तो जातक का बाल्यकाल रुग्णावस्था में व्यतीत होता है। ऐसा चन्द्रमा लग्न से अष्टम भाव में होगा। अष्टम चन्द्र अरिष्टप्रद रहता है। ऐसे जातक के जल में डूबने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। ऐसा जातक कामातुर भी होता है। परदारगमन की इच्छा बनी रहने से द्रव्य को उनके पीछे व्यय कर डालता है । बहुत ही शुभ सम्बन्ध में आया चन्द्रमा शुभ फलदाता होता है ।

धन स्थान पर मंगल की दृष्टि प्रायः शुभ मानी जाती है। सप्तम भाव में स्वराशिस्थ भौम यदि धन भाव को देख रहा हो तो जातक प्राय सम्पत्तिवान् होता है। उसे ससुराल से भी धन की प्राप्ति होती है तथा पत्नी भी पढ़ी-लिखी और कमाऊ मिलती है।

‎एकादश भाव से उच्च का मंगल धन भाव को देखे तो अटूट सम्पत्ति मिलती है। इसमें दो हेतु होते हैं। एक तो धनेश एकादश में होकर स्वगृह (मेष) को देखेगा, दूसरे धनेश उच्च का होकर आय स्थान में होगा।

‎अष्टम भाव में पड़े मंगल की धन भाव पर दृष्टि शुभ नहीं रहती, भले वह स्वयं धनेश ही क्यों न हो।ऐसे जातक को अर्श-भगन्दर जैसे रोग होते हैं तथा उसके दाम्पत्य जीवन में गत्यवरोध उत्पन्न होता है। अधिक परिश्रम करने पर भी जातक को अल्प लाभ ही मिलता है। ऐसा जातक शत्रुहन्ता होता है।

‎यदि धन भाव को बुध अपनी दृष्टि द्वारा प्रभावित कर रहा हो तो जातक व्यापारी होता है और इस माध्यम से धनार्जन करता है। जातक इतना अधिक स्वाभिमानी होता है कि हठी प्रतीत होने लगता है। इस स्वभाव के कारण उसे अपने जीवन में अनेक प्रकार से हानि वहन करनी पड़ती है। ऐसा जातक स्वतन्त्र विचारों वाला होता है तथा स्वतन्त्रता की प्राणपण से रक्षा करता है। यदि बुध कन्या राशि का होकर धन भाव को देख रहा हो तो जातक को दिवालिया बना देता है, क्योंकि अपने आपको आवश्यकता से अधिक चतुर मानने वाला ऐसा व्यक्ति बिना विचारे बड़ी योजनाओं या उद्योगों में पैसा फंसा देता है।

यदि धन भाव पर गुरु की दृष्टि हो तो जातक शत्रुकृत कृत्यों के कारण दुःखी रहता है। शत्रु उसके प्रत्येक कार्य अथवा योजना को नष्ट कर देते हैं। ये फल गुरु के रिपु भाव में होने से मिलते हैं।

यदि गुरु अष्टम में होकर धन भाव पर दृष्टि डाल रहा हो तो जातक अच्छे मार्ग से धन प्राप्त करता है। ऐसे जातक को पारिवारिक और सामाजिक सुख की कमी नहीं होती। मित्र, सम्बन्धी सभी सहायक होते हैं तथा ससुराल से भी उसे धन मिलता है। ऐसा जातक राज्य सेवा में भी उच्च पद प्राप्त कर लेता है। जिस समुदाय में वह रहता है तथा जहां वह नौकरी करता है वहां भी उसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति समझा जाता है। धन की ऐसे जातक को कभी कमी नहीं होती। यदि गुरु नीच, पापाक्रान्त व वक्री (स्वराशिस्थ या उच्च का होकर) हो तो विपरीत फल मिलते हैं।

धन भाव पर शुक्र की दृष्टि होने से जातक भौतिक सुखों का दास होता है तथा कामवासना के वशीभूत होकर परदारगमन करता है। ऐसा व्यक्ति स्त्रीलोलुप होकर धन का व्यय तो करता ही है, शरीर को भी क्षीण कर लेता है। ऐसे में यदि रतिजन्य रोग और दूसरे यौन रोग हो जायें तो क्या आश्चर्य? यौवनकाल में ही जातक धन और शरीर दोनों का नाश कर लेता है। पारिवारिक जनों तथा मित्रों का सहयोग तो उसे मिलता रहता है, आय के साधन भी बने रहते हैं, लेकिन कुकृत्यों के कारण क्षीणशरीर होकर वह दुःख ही भोगता है।

धन भाव पर पंचम भाव स्थित शनि की दृष्टि होने से जातक वैद्य, डाक्टर, वैज्ञानिक या इंजीनियर बनता है तथा जीवन में सफलता प्राप्त करता है। ऐसे जातक चिकित्सा के क्षेत्र में भी अच्छा धन-सम्मान अर्जित कर लेते हैं।

‎यदि शनि अष्टम भाव में स्थित होकर धन भाव पर दृष्टि डाल रहा हो तो जातक का जीवन-स्तर सामान्य ही होता है। ऐसा जातक जुआ, सट्टा, लाटरी या अस्त्र-शस्त्र के व्यवसाय से सम्बन्धित होकर जीविका चलाता है तथा वात-व्याधि से पीड़ित होता है।

‎व्ययगत शनि की धन भाव पर दृष्टि प्रायः अधिक अशुभ प्रभाव दिखाती है। जातक इतनी विपन्नावस्था में होता है कि उसे पराये अन्न पर जीवन यापन करना पडता है। नाना प्रकार की व्याधियां उसके शरीर को बेकार कर डालती हैं। स्वगृही या उच्च का शनि हो तो शुभ फल भी मिलते रहते हैं। इतने पर भी जातक आयु के 36 वर्षों तक कष्ट भोगता है।

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

2026 राशिफल तुला राशि से मीन राशि

तुला राशि

यह वर्ष 2026 भाग्य, बाधाओं, अचानक लाभ और रचनात्मक प्रतिभाओं से भरा एक रोलर कोस्टर राइड जैसा होगा । इस वर्ष आपको नई चीजें आजमाने की प्रेरणा मिलेगी और आप अपनी छिपी प्रतिभाओं को खोज सकते हैं । राहु के पंचम भाव में होने के कारण आप इन प्रतिभाओं से धन कमा सकते हैं या प्रसिद्धि और पहचान हासिल कर सकते हैं, हालांकि, इससे प्रेम संबंधों और बच्चों के साथ गलतफहमियां भी पैदा हो सकती हैं । शनि के छठे भाव में होने के कारण आपके स्वास्थ्य और नौकरी में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं । यदि जन्म कुंडली में शनि पीड़ित है तो आपको पीठ दर्द भी हो सकता है । वर्ष के अंत के आसपास आपके पंचम भाव में सिंह युति बनने के कारण आपको अचानक लाभ और मित्रों एवं सामाजिक दायरे से सहयोग मिल सकता है | करियर के लिहाज से यह वर्ष आपके लिए भाग्यशाली रहेगा और कुछ उतार - चढ़ाव के बाद आप निरंतर प्रगति करेंगे । आपको  खासकर इस के उत्तरार्ध मेंपदोन्नति मिल सकती है या आप अपने व्यवसाय के विस्तार की योजना बना सकते हैं |

वृश्चिक राशि

वर्ष 2026 आपके करियर और पारिवारिक जीवन दोनों में परिवर्तन से भरा रहेगा । बेहतर नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए आप अपने परिवार से दूर जा सकते हैं, या राहु और केतु के प्रभाव के कारण आप अचानक अपना करियर बदलने का निर्णय ले सकते हैं। यह वर्ष शोध और अपनी छिपी प्रतिभाओं को खोजने के लिए आदर्श है, क्योंकि बृहस्पति 2 जून तक आठवें भाव में रहेगा। बृहस्पति के नौवें भाव में उच्च होने पर आपका भाग्य चमकेगा और आपकी बाधाएं दूर होंगी। इससे आपको काम या अवकाश के लिए यात्रा के अवसर भी मिल सकते हैं। आपकी रचनात्मक प्रतिभा और जुनून इस वर्ष एक पूर्णकालिक व्यवसाय में परिवर्तित हो सकते हैं, जिससे आपको नए अवसर और समृद्धि प्राप्त होगी। आपको सलाह दी जाती है कि वर्ष के अंत तक घर और कार्यालय में गलतफहमी से बचें ।

धनु राशि

वर्ष 2026 में कड़ी मेहनत की आवश्यकता होगी और आपके व्यवसाय से संबंधित नए अवसर मिलेंगे । वर्ष के पहले छह महीनों में आप या तो अपने कौशल को निखारेंगे या महत्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त करेंगे और दूसरे छह महीनों में इन कौशलों का लाभ उठा सकेंगे क्योंकि 2 जून के बाद बृहस्पति उच्च स्थिति से आपके धन भाव पर दृष्टि डालेगा। शनि के चौथे भाव में स्थित होने के कारण आपको अचल संपत्ति में निवेश करने या नई संपत्ति बनाने में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। शनि आपके करियर से संबंधित कड़ी मेहनत की भी मांग करता है, जिसमें राहु आपके तीसरे भाव में रहकर आपका साथ देता है। आप आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्राप्त कर सकते हैं और अन्य धर्मों का भी अध्ययन कर सकते हैं। केतु के नौवें भाव में होने के कारण आपकी लंबी दूरी की यात्रा की योजना में देरी हो सकती है या वह रद्द हो सकती है । इस दौरान आपको सावधान रहना चाहिए और अपने भाई-बहनों और पड़ोसियों से झगड़ों से बचने का प्रयास करना चाहिए ।

मकर राशि

2026 में राहु के द्वितीय भाव में होने से आपको धन-संपत्ति बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी, जिससे नए लक्ष्य और उपलब्धि की इच्छा जागृत होगी। हालांकि, इसका आपके संचार कौशल और खान-पान की आदतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कुंभ राशि का यह संयोजन विरासत, उपहार और निवेश सहित कई स्रोतों से धन प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करेगा। वर्ष के पूर्वार्ध में आपको विदेश में नौकरी के अवसर भी मिल सकते हैं। 2 जून के बाद आपको नए अवसर प्राप्त होंगे और आप कोई नया व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं। केतु के आठवें भाव में होने से आपके भय और दुर्घटनाएं बढ़ सकती हैं, लेकिन इससे आपको सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए अंतर्ज्ञान शक्ति भी मिलेगी। इस दौरान अर्जित धन को निवेश या बचत के माध्यम से निवेश करने का प्रयास करें ताकि अनावश्यक खर्चों और नुकसान से बचा जा सके ।

कुम्भ राशि

कुंभ राशि वालों के लिए 2026 का साल भाग्यशाली रहेगा क्योंकि राहु आपके प्रथम भाव में आकर आपकी ऊर्जा और रचनात्मकता को बढ़ाएगा। आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम होंगे और इस वर्ष मिलने वाले अवसरों का भरपूर लाभ उठाएंगे । बृहस्पति के आपके लाभ भाव पर दृष्टि डालने से वर्ष की शुरुआत से ही आपकी आय में काफी वृद्धि होगी। हालांकि, अनावश्यक खर्चों के कारण आपको उस धन को बनाए रखने और बचाने में कठिनाई होगी। फिर भी, ऐसी स्थिति से बचने के लिए निवेश किया जा सकता है। आपके वैवाहिक जीवन और रिश्तों पर काफी ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है और आपको अपने जीवनसाथी के साथ कई मतभेदों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन वर्ष के अंत तक स्थिति शांत हो जाएगी क्योंकि बृहस्पति 31 अक्टूबर 2026 को आपके सातवें भाव में प्रवेश करेगा ।

मीन राशि

इस वर्ष शनि के प्रथम भाव में होने के कारण गंभीरता और संयम का भाव बना रहेगा। आपके छिपे हुए भय उभर सकते हैं, और उनका समाधान पाने के लिए आपको उनका सामना करना होगा । आपकी गति थोड़ी धीमी हो जाएगी और आप सहजता के बजाय पूर्णता को प्राथमिकता देंगे । केतु और शनि के संयुक्त प्रभाव के कारण आपका स्वास्थ्य उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है । हालांकि, आप अपनी संपत्ति बढ़ा सकेंगे और शायद नया घर खरीद सकेंगे या अपने मौजूदा घर का नवीनीकरण करा सकेंगे । आपकी मेहनत और धैर्य के कारण आपका करियर और आय दोनों में वृद्धि होगी । यदि आप अविवाहित हैं, तो आपको 2 जून के बाद अपना जीवनसाथी मिल सकता है और यदि आप छात्र हैं, तो आप अपनी परीक्षाओं में बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे । आपकी रचनात्मकता और प्रतिभा में वृद्धि होगी जिससे आपको पहचान और लाभ प्राप्त होंगे । इस वर्ष आपको अनावश्यक खर्चों से बचना चाहिए और अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि राहु आपके बारहवें भाव में है । यदि आप अपने जीवन में अनुशासन और धैर्य अपनाते हैं तो यह वर्ष आपके लिए अत्यंत फलदायी होगा ।

 

शुक्रवार, 9 जनवरी 2026

2026 मे राशिफल मेष से कन्या

मेष राशि के लिए

वर्ष 2026 आपको गहन और सार्थक व्यक्तिगत विकास की ओर प्रेरित करेगा । वर्ष की शुरुआत में बन रही कुंभ राशि की युति आपके ग्यारहवें भाव को सक्रिय कर रही है, जिससे आपका सामाजिक दायरा बढ़ेगा और आपकी इच्छाएं पूरी होंगी । ग्रहों की वर्तमान स्थिति के कारण इस वर्ष आपको भारी लाभ की भी उम्मीद है । आपका संचार कौशल बेहतर होगा और नए अवसर आपके द्वार खोलेंगे । आपको भावनात्मक संतुष्टि मिलेगी और आपका घरेलू जीवन सुचारु होगा । आपका परिवार आपका साथ देगा, वहीं शनि आपके बारहवें भाव से आपकी आस्था और समर्पण की परीक्षा लेगा । यदि आपकी जन्म कुंडली में शनि पीड़ित है तो आपके खर्चे बढ़ सकते हैं, लेकिन जिनकी जन्म कुंडली में शनि बलवान है, उनके लिए विदेश से अवसर प्रतीक्षा कर रहे होंगे । वर्ष के अंत में बन रही युति आपके प्रेम जीवन में हलचल पैदा कर सकती है या आपकी संतान पर प्रभाव डाल सकती है । जो लोग लंबे समय से अपने परिवार को बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए खुशखबरी आएगी ।

वृष राशि

इस वर्ष आपके करियर में बदलाव पर विशेष ध्यान दिया जाएगा क्योंकि कुंभ राशि में पांच ग्रहों की युति आपके दसवें भाव को सक्रिय करेगी. जिससे आप अधिकारिक स्थिति में आ जाएंगे और आपकी सार्वजनिक छवि में निखार आएगा । आप अत्यधिक महत्वाकांक्षी महसूस कर सकते हैं, लेकिन अपने लक्ष्यों की ओर काम करते समय विनम्र और ज़मीनी बने रहना आवश्यक है । बृहस्पति का आशीर्वाद वर्ष के पहले छह महीनों में आपकी आर्थिक स्थिति और आत्मसम्मान दोनों को बढ़ाएगा। वर्ष के दूसरे छह महीनों में आपका ध्यान परिवार की ओर केंद्रित होगा और आप अपने संचार कौशल को भी निखारने का प्रयास करेंगे। शनि उन मित्रों से आपकी दूरी बढ़ा सकता है जो आपके विकास में योगदान नहीं देते । यह आपको उन लोगों के साथ जुड़ना सिखाता है जो आपके दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में आपकी मदद करेंगे और आपके मार्गदर्शक बनेंगे । वर्ष के अंत में सिंह राशि की युति पारिवारिक मामलों से संबंधित तनाव के कारण आपको बेचैन कर सकती है, हालांकि चीजें जल्द ही सुलझ जाएंगी और 5 दिसंबर 2026 को केतु के आपके चौथे भाव (परिवार) से निकलने के साथ ही आपका घरेलू जीवन सामान्य हो जाएगा |

मिथुन राशि

यह वर्ष कई जिम्मेदारियां लेकर आएगा और साथ ही आपके जीवन में वृद्धि और विस्तार भी लाएगा । वर्ष की शुरुआत में बृहस्पति आपके प्रथम भाव में स्थित होगा, जिससे आंतरिक ज्ञान प्राप्त होगा, आपके कौशल और ज्ञान में वृद्धि होगी और आपका भाग्य भी फलेगा-फूलेगा । जैसे ही यह आपके संचित धन के भाव में उच्च स्थान पर प्रवेश करेगा, यह आपकी बचत को बढ़ाएगा और आपको धन संबंधी उपहार, विरासत, त्रुटिहीन वाणी क्षमता और एक शांतिपूर्ण घरेलू जीवन प्रदान करेगा । कुंभ राशि का युति आपके नौवें भाव में बनेगा, जिससे आपको आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होगा और अपने करियर को आगे बढ़ाने या अवकाश के लिए अन्य देशों की यात्रा करने का अवसर मिलेगा । पूरे वर्ष शनि आपके दसवें भाव में स्थित रहेगा, जिससे आपके करियर में चुनौतियां और विलंब आएंगे, हालांकि, एक बार जब आप इन चुनौतियों से पार पा लेंगे, तो आप अधिक मजबूत और कुशल बनकर उभरेंगे । वर्ष के अंत में सिंह राशि में बनने वाला युति आपके संचार कौशल को सक्रिय करेगा, लेकिन आपको बोलते समय सावधान रहना चाहिए क्योंकि आपके शब्दों का बहुत महत्व है, इसलिए आपक उनका बुद्धिमानी से उपयोग करना चाहिए ।

कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए वर्ष 2026 ज्ञान और परिवर्तन लेकर आएगा; इस वर्ष के अंत तक आपका आंतरिक और बाहरी जीवन दोनों ही नए सिरे से परिभाषित होंगे । 2 जून 2026 को जब बृहस्पति आपके प्रथम भाव में प्रवेश करेगा, तो यह आपको आत्मविश्वास और ज्ञान प्रदान करेगा और आपके जीवन के सभी क्षेत्रों में विस्तार का आशीर्वाद देगा । आपके आठवें भाव में पांच ग्रहों की युति के कारण, आर्थिक परिवर्तन, विरासत में संपत्ति का लाभ या मानसिक उथल-पुथल जैसी कुछ अप्रत्याशित घटनाएं हो सकती हैं । यह अवधि समय के साथ आपके विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी और आप अधिक मजबूत और स्वतंत्र बनेंगे । इस बीच, शनि आपके आध्यात्मिक उत्थान में सहयोग देगा, हालांकि उच्च शिक्षा या कानूनी मामलों से संबंधित कुछ बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं । इस वर्ष के अंत तक, सिंह राशि में ग्रहों की युति आपके आर्थिक लाभ में सहायक होगी और साथ ही आपको भौतिक वस्तुओं से विरक्त होना सिखाएगी ।

सिंह राशि

यह वर्ष आके लिए अप्रत्याशित परिवर्तन लेकर आएगा,क्योंकि लगभग पूरे वर्ष केतु आपकी चंद्र राशि में मौजूद रहेगा । केतु की विपरीत ऊर्जा आपको वर्ष के अंत तक मौन रहने और अपनी भावनाओं को भीतर दबाए रखने के लिए प्रेरित करेगी। सिंह राशि के होने के कारण, यह आपकी स्वाभाविक प्रवृत्ति के बिल्कुल विपरीत है, और इसलिए आप पूरे वर्ष आंतरिक संघर्ष से जूझते रहेंगे । कर्मिक संघर्ष आपकी पहचान, अहंकार और उद्देश्य के बीच होगा। मार्च में ग्रहों की युति से आपको व्यापार में साझेदारी के प्रस्ताव मिलेंगे; हालांकि, आपको प्रस्ताव को स्वीकार करते समय व्यक्ति के चरित्र का सावधानीपूर्वक आकलन करना चाहिए, क्योंकि आपके सातवें भाव में राहु गलत प्रकार के लोगों को आकर्षित करने की प्रवृत्ति रखता है । इस वर्ष आप अपनी अंतर्ज्ञान शक्ति में वृद्धि का अनुभव करेंगे, जिसका उपयोग आपको महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए करना चाहिए । आपको अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए और सावधानी से गाड़ी चलानी चाहिए, क्योंकि आपके आठवें भाव में शनि अप्रत्याशित दुर्घटनाओं को जन्म दे सकता है |

कन्या राशि 

वर्ष 2026 आपके स्वभाव में उदारता लेकर आएगा क्योंकि वर्ष के पूर्वार्ध में बृहस्पति आपके दसवें भाव में रहेगा । बृहस्पति 2 जून तक आपके करियर में विस्तार लाएगा और उसके बाद 31 अक्टूबर तक आपकी आय और सामाजिक दायरे को बढ़ाएगा। बृहस्पति के आपके बारहवें भाव में रहने के कारण अंतिम दो महीनों में आपको विदेश में नौकरी का अवसर भी मिल सकता है । शनि के पूरे वर्ष आपके सातवें भाव में रहने के कारण आपका वैवाहिक जीवन और व्यवसाय नीरस लगने लग सकता है और कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है । इससे आप अपने काम के प्रति अत्यधिक उत्साही होंगे और अपने काम में लंबे समय तक समर्पित रहेंगे, जिससे वर्ष के अंत तक अपार लाभ प्राप्त होगा । यह वर्ष आपके करियर की दिशा में, मुख्य रूप से आपके द्वारा पर्दे के पीछे किए गए प्रयासों के कारण महत्वपूर्ण परिवर्तन लाएगा आपको गहन और सार्थक व्यक्तिगत विकास की ओर प्रेरित करेगा । वर्ष की शुरुआत में बन रही कुंभ राशि की युति आपके ग्यारहवें भाव को सक्रिय कर रही है, जिससे आपका सामाजिक दायरा बढ़ेगा और आपकी इच्छाएं पूरी होंगी । ग्रहों की वर्तमान स्थिति के कारण इस वर्ष आपको भारी लाभ की भी उम्मीद है । आपका संचार कौशल बेहतर होगा और नए अवसर आपके द्वार खोलेंगे । आपको भावनात्मक संतुष्टि मिलेगी और आपका घरेलू जीवन सुचारु होगा । आपका परिवार आपका साथ देगा, वहीं शनि आपके बारहवें भाव से आपकी आस्था और समर्पण की परीक्षा लेगा । यदि आपकी जन्म कुंडली में शनि पीड़ित है तो आपके खर्चे बढ़ सकते हैं, लेकिन जिनकी जन्म कुंडली में शनि बलवान है, उनके लिए विदेश से अवसर प्रतीक्षा कर रहे होंगे । वर्ष के अंत में बन रही युति आपके प्रेम जीवन में हलचल पैदा कर सकती है या आपकी संतान पर प्रभाव डाल सकती है । जो लोग लंबे समय से अपने परिवार को बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए खुशखबरी आएगी ।


2026 राशिफल

वर्ष 2026 मानवता के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा, क्योंकि बृहस्पति के गोचर के कारण ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं भौतिक प्रगति और आंतरिक विकास का अनूठा संतुलन लाएंगी । बृहस्पति की ऊर्जा इस वर्ष अपने चरम पर है क्योंकि बृहस्पति 2 जून को उच्च राशि में होगा और शनि भी बृहस्पति की राशि मीन में धीरे - धीरे गोचर कर रहा है । इसके अतिरिक्त, बृहस्पति इस वर्ष के पूर्वार्ध में और फिर अंतिम दो महीनों में अपनी दूसरी राशि धनु पर दृष्टि डालेगा । यह 2026 में मानव जाति के लिए कर्मिक परिवर्तन, आंतरिक जागृति और आध्यात्मिक उत्थान का संकेत देता है । इस वर्ष आपको आंतरिक ज्ञान, आर्थिक विकास, व्यापार विस्तार, पारिवारिक सहयोग और रचनात्मक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होगा ।

वृषभ, मिथुन और धनु राशि वालों के लिए धन प्राप्ति और समृद्धि के नए अचानक अवसर दस्तक देंगे, क्योंकि बृहस्पति ऊंच राशि में गोचर कर रहा हैं

कन्या, तुला और कुंभ राशि के नौकरीपेशा लोगों को 2026 में पदोन्नति मिलने की संभावना है क्योंकि उच्च स्थिति में स्थित बृहस्पति का गोचर उनके करियर और लाभ के घर पर प्रभाव डालेगा ।

मिथुन, कर्क और मकर राशि के चंद्र चिन्ह वाले अविवाहित लोगों को उनके विवाह भाव में गोचर कर रहे उच्च बृहस्पति के प्रभाव के कारण अपना जीवनसाथी मिलने की संभावना है ।

कन्या, तुला और वृश्चिक राशि के चंद्र राशि वाले लोग जो किसी प्रतिबद्ध रिश्ते में हैं, उन्हें राहु और शनि के उनके विवाह और संबंध भाव पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण रिश्ते में संघर्ष, गलतफहमी और यहां तक कि कुछ मामलों में ब्रेकअप का भी सामना करना पड़ सकता है ।

मेष राशि वाले जातकों के लिए 2026 विशेष रूप से भाग्यशाली रहेगा क्योंकि जून में राहु ग्यारहवें भाव में और बृहस्पति चौथे भाव में आ रहे हैं, जिससे उनकी धन - संपत्ति में वृद्धि होगी और मनोकामना पूर्ति को बढ़ावा मिलेगा ।

शनि पूरे वर्ष मीन राशि में गोचर करेगा, जिससे आपको अपने करियर और बौद्धिक विकास के लिए महत्वपूर्ण जीवन सबक मिलेंगे । वर्ष के पूर्वार्ध में किया गया धैर्यपूर्ण परिश्रम वर्ष के अंत तक फल देने लगेगा । इस वर्ष राहु-केतु अक्ष कुंभ और सिंह राशियों के बीच स्थित है, इसलिए ब्रह्मांड आपको संकेत दे रहा है कि आप अपने अहंकार को त्यागकर विनम्रता अपनाएं ताकि आपकी आत्मा का विकास हो सके । राहु के प्रभाव से इस वर्ष आपकी आय में वृद्धि होगी और आपका सामाजिक दायरा बढ़ेगा। इस वर्ष आप जो संबंध बनाएंगे, वे आपको अपने लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त करने में सहायक होंगे । इस वर्ष के अवसरों का भरपूर लाभ उठाने के लिए आपको समुदाय से जुड़ना होगा और नवाचार एवं परिवर्तन को अपनाना होगा ।

फरवरी-मार्च के बीच कुंभ राशि में सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और राहु का पंचग्रह संयोजन इस वर्ष की सबसे दुर्लभ और प्रभावशाली घटनाओं में से एक होगा । यह संयोजन आपके भीतर नई ऊर्जा का संचार कर सकता है और आपके दृष्टिकोण के साथ- साथ आपके लक्ष्यों और उपलब्धियों में भी क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है । आपके विचार  अधिक भविष्योन्मुखी होंगे और आप घर और कार्यस्थल दोनों जगह अधिकारपूर्ण पद की आकांक्षा रखेंगे । आप अपनी परंपराओं को अपनाएंगे और आपका दृष्टिकोण आशावादी और विकासोन्मुखी होगा । सिंह राशि में मंगल, केतु और बृहस्पति का एक और महत्वपूर्ण त्रिग्रह संयोजन आपको अपनी ऊर्जा को बौद्धिक विकास की ओर लगाने और अपनी झूठी पहचान को त्यागने के लिए प्रेरित करेगा । ये गोचर आपको अपनी सीमाओं को पार करने और व्यक्तिगत रूप से और वैश्विक स्तर पर एक बेहतर और कर्मिक रूप से जागरूक मार्ग चुनने के लिए प्रेरित करेंगे ।

शनि के 27 जुलाई से 11 दिसंबर 2026 के बीच वक्री होने से आप गहन आत्मनिरीक्षण के माध्यम से आध्यात्मिक अनुशासन प्राप्त करेंगे और अपने छिपे हुए भय का सामना करेंगे । यह अवधि आपको अपने कर्मों के पैटर्न को पहचानने और अपने आंतरिक आधारों को पुनर्गठित करने का अवसर प्रदान करेगी। बृहस्पति भी 11 मार्च तक वक्री रहेगा, जिससे आपको अपनी भविष्य की योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन करने और अपने विचारों को निखारने की प्रेरणा मिलेगी । इससे आपके निर्णयों में स्पष्टता आएगी और आपका समग्र विकास होगा। बृहस्पति वर्ष के अंत में लगभग 13 दिसंबर को फिर से वक्री होगा, जिससे आपको अपनी महत्वाकांक्षाओं और नेतृत्व शैली का पुनर्मूल्यांकन करने की प्रेरणा मिलेगी । आप अपनी रचनात्मकता को अनोखे तरीके से व्यक्त करने का मार्ग भी खोजेंगे, जिससे आपका व्यक्तिगत विकास होगा और आप सफलता के एक कदम और करीब पहुंचेंगे ।

शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

कुंडली में आजीविका का निर्धारण

 

आजीविका का निर्धारण हमारे समाज एवं ज्योतिष जगत के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है । वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हमारी युवा पीढ़ी और उनके अभिभावक भी इसी चिंता में दर-दर भटक रहे हैं कि उनके होनहार बेटे या बेटी को आजीविका का कोई साधन मिल जाए

आइए ज्योतिषीय दृष्टि से इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए कुंडली में आजीविका का निर्धारण कैसे करते हैं, इसके सूत्रों को देखते हैं

सर्वप्रथम किसी जातक की जन्म कुंडली में आजीविका के निर्धारण पर विचार करते समय हमें अपने वैदिक शास्त्रों में वर्णित नियमों के अनुसार लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली तथा सूर्य कुंडली का विस्तृत अध्ययन करना होगा । तत्पश्चात् इन तीनों कुंडलियों में अंशात्मक दृष्टि से कौन सी कुंडली अधिक बलवान है, उसे सर्वश्रेष्ठ मानकर उसके आधार पर ही हम आजीविका का निर्धारण कर सकते हैं

अब दूसरा चरण आता है, जिसमें हम सर्वश्रेष्ठ कुंडली के दशम भाव पर विचार करते हैं तथा दशम भाव में जो ग्रह स्थित होता है, उसी के अनुसार हम जातक की आजीविका निर्धारित करते हैं एवं जातक को उस ग्रह सम्बंधी कारक कार्यों में ही धनोपार्जन होता है ।  

अब तीसरे चरण की ओर बढ़ते हैं । यहाँ पर एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण प्रश्न उभर कर सामने आता है कि यदि दशम भाव में कोई भी ग्रह स्थित न हो, तो ऐसी स्थिति में क्या करना होगा ?

इस बारे में वृहत पाराशर होरा शास्त्र, आचार्य वाराहमिहिर द्वारा विरचित बृहज्जातकम, श्री कल्याण वर्मा द्वारा रचित सारावली श्री मंत्रेश्वर द्वारा रचित फलदीपिका जैसे प्रामाणिक ग्रंथों का एक ही मत है कि यदि सर्वश्रेष्ठ चुनी गई कुंडली के दशम भाव में कोई भी ग्रह स्थित न हो तो उस स्थिति में दशम भाव में विद्यमान राशि का विचार करते हैं और फिर उस राशि के स्वामी का विचार करते हैं |

अब यहां से इसका चतुर्थ चरण प्रारंभ होता है । यहां से हमें जातक की नवांश कुंडली का आकलन करना होगा । नवांश कुंडली का आकलन करते हुए हमें पुनः सर्वश्रेष्ठ कुंडली के दशम भाव में स्थित राशि का स्वामी नवमांश कुंडली में किस राशि में स्थित है तथा उस राशि का स्वामी कौन है, इस पर विचार करना होगा । यदि कुंडली के दशम भाव में कन्या राशि है और उसमें कोई ग्रह विद्यमान नहीं है, तो हम उस राशि के स्वामी बुध पर विचार करेंगे और देखेंगे कि नवमांश कुंडली में बुध किस राशि में स्थित है?  मान लीजिए बुध नवमांश कुंडली में तुला राशि में स्थित है, तो तुला राशि का स्वामी शुक्र हैं । इस प्रकार आजीविका का कारक ग्रह शुक्र हुआ । अतः इस प्रकार हम जातक अथवा जातिका की आजीविका का निर्धारण शुक्र से सम्बंधित कार्यों को आजीविका के लिए चुन सकते हैं |

अब हमें यदि महर्षि पाराशर द्वारा प्रतिपादित नियमों के अंतर्गत कारक ग्रहों के आधार पर आजीविका का निर्धारण करना हो तो कैसे करेंगे, इस पर भी विचार कर लेते हैं । पाराशर जी कहते हैं कि दशमेश जिस राशि के नवांश में हो, उस नवांशेश में भी मनुष्य की आजीविका का विचार किया जाना चाहिए |

1. यदि सूर्य दशमेश का नवांशेश हो, तो दवाई की बिक्री एवं निर्माण, स्वर्ण बिक्री, पेय पदार्थों की बिक्री, सरकारी नौकरी तथा उच्च पद की प्राप्ति, सम्पर्क अधिकारी, ऊन का उत्पादन, धन विनियोग आदि कार्य लाभकारी होते हैं । अतः इन कार्यों पर भी आजीविका के संदर्भ में विचार किया जा सकता है ।

2. चन्द्रमा के बारे में पाराशर जी का मत है कि यदि दशमेश का नवांशेश चन्द्रमा हो तो पानी से उत्पन्न पदार्थ जैसे शंख, मोती, मंगा व मछली आदि का व्यापार, कृषि कार्य, प्लास्टर आफ पेरिस,क्रॉकरी, मनोविनोद के कार्य, निजी सचिव, जन सम्पर्क अधिकारी आदि कार्य पर विचार किया जा सकता है |

3. मंगल यदि दशमेश मंगल के नवांशेश में हो, तो पाराशर जी का कहना है कि ऐसे जातक के लिए धातु व्यवसाय अर्थात् ताँबा सोना आदि का कार्य, मुकदमों में गवाही देने का कार्य, वकालत, दंडाधिकारी, पुलिस, मजिस्ट्रेट, युद्ध में सैनिक का कार्य, अग्नि कर्म से संबंधित व्यवसाय, अति साहसिक कार्य आदि विचारणीय हैं ।

4. बुध के बारे में पाराशर जी का कहना है कि यदि दशमेश बुध के नवांशेश में हो, तो जातक वेद शास्त्रों में, वेद का अध्यापन कार्य, जप तप का कार्य, पुरोहित का कार्य, काव्य रचना, लेखन एवं प्रकाशन कार्य, ज्योति शास्त्र, वैद्य चिकित्सा तथा पूंजी निवेश आदि का कार्य करने में निपुण होता है ।

5. बृहस्पति देव के बारे में पाराशर जी का कहना है कि यदि बृहस्पति उक्त नवांशेश में हो, तो देवता, ब्राह्मणों की उपासना, अध्यापन, शास्त्र विशेषज्ञता, पुराण शास्त्र, नीति आदि का अध्ययन, धार्मिक कार्य, ग्रह निर्माण, फर्नीचर सजावट आदि के कार्य तथा अन्य मांगलिक कार्यों आदि से जातक अपनी आजीविका चलाता है ।

6. दानव गुरु शुक्राचार्य के बारे में पाराशर जी एवं मंत्रेश्वर जी का कहना है कि यदि नवांशेश शुक्र हो तो स्त्री के आश्रय द्वारा अर्थात् उन्हें बहला - फुसला कर दुरुपयोग करना, सोना - चाँदी, माणिक और हीरों का व्यवसाय वा इनके तकनीकी ज्ञान से जीविका, हाथी घोड़ों द्वारा, गाने-बजाने के उपायों द्वारा तथा सुगंधित वस्तुओं के द्वारा भी जातक धन अर्जित करता है ।

7. शनि के बारे में वृहत पाराशर होरा शास्त्र तथा मंत्रेश्वर जी द्वारा रचित फलदीपिका में भी यही स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि नवांशेश शनि हो तो जातक निम्न स्तरीय कार्य, शिल्प कला, दस्तकारी, मरम्मत टूट-फूट के कार्य, शारीरिक परिश्रम, दुष्टों के धन से धनी, रिश्वत लेकर कार्य करना, अनपढ़ होगा, जमीन खोदेगा, यदि पढ़ा-लिखा होगा, तो दिन भर कुर्सी पर परिश्रम कराएगा ।