शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

धार्मिक आस्था


वैदिक ज्योतिष पर आधारित यह लेख मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि ग्रहों की स्थिति किसी व्यक्ति के धार्मिक झुकाव और इष्ट देव (किस देवता की पूजा करनी चाहिए) को कैसे प्रभावित करती है ।

1.शनि जब नौवें भाव (धर्म और भाग्य का स्थान) में होता है, तो एक विशिष्ट आध्यात्मिक स्थिति उत्पन्न करता है । यह बताता है कि ऐसा व्यक्ति पारंपरिक विचारों से थोड़ा अलग (सर्वदर्शनविमुख) हो सकता है, लेकिन वह गहराई से धार्मिक होता है और राजा होकर भी धार्मिक विचारो मे अग्रसर होकर एक सच्चा उपासक बनता है ।

​2. पंचम भाव में पुरुष ग्रह यदि पंचम भाव (बुद्धि और भक्ति का स्थान) में कोई पुरुष ग्रह बैठा हो और उस पर किसी अन्य पुरुष ग्रह की दृष्टि होतो जातक किसी पुरुष देवता का उपासक बनता है ।

​3. पंचम भाव पर स्त्री प्रभाव यदि पंचम भाव की राशि स्त्री राशि (जैसे वृष, कर्क आदि) हो और उसमें चंद्रमा या शुक्र बैठा होतो जातक किसी देवी (शक्ति) का उपासक होता है ।

​सूर्य जातक को स्वयं सूर्य की उपासना में अग्रसर करता है ।

​चंद्रमा माता पार्वती का उपासक बनाता है ।

​मंगल कुमार कार्तिकेय की उपासना की ओर झुकाव पैदा करता है ।

​बुध भगवान विष्णु की उपासना में दृढ़ बनाता है ।

​गुरु भगवान शिव (शंकर जी) की उपासना में निष्ठा देता है ।

​शनि, राहु या केतु: यदि ये पंचम भाव में हों या इनकी दृष्टि हो, तो जातक "अन्य देवों" या कुछ अलग पद्धतियों की उपासना करता है ।

​5वे या नौवें भाव में शनि एक "विचित्र" धार्मिक प्रवृत्ति पैदा करता है । उदाहरण के लिए, ऐसा व्यक्ति धर्म परिवर्तन कर सकता है या अवधूत (सांसारिक बंधनों से मुक्त फकीर) बन सकता है ।

​​नवम भाव का प्रभाव: यदि नौवें घर (भाग्य) का स्वामी बलवान होकर लग्न (पहले घर), चौथे, सातवें या दसवें घर में बैठा हो और उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो ऐसा व्यक्ति बहुत धनवान होने के साथ-साथ कट्टर धार्मिक भी होता है ।

​उच्च का नवमेश: यदि नौवें घर का स्वामी अपनी उच्च राशि में हो, उस पर गुरु की दृष्टि हो और नौवें घर में भी शुभ ग्रह बैठे हों, तो व्यक्ति धार्मिक कार्यों में अग्रणी रहता है ।

​गुरु और नवमेश का संबंध: यदि नौवें घर का स्वामी (नवमेश) पूरी तरह बलवान हो और उस पर तथा लग्न के स्वामी (लग्नेश) पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो, तो जातक महान धार्मिक व्यक्तित्व वाला होता है ।

​​दानी होने की स्थिति: यदि नौवें घर का स्वामी लग्न या लग्नेश पर पूर्ण दृष्टि डालता हो और वह केंद्र या त्रिकोण भावों में स्थित हो, तो जातक धार्मिक होने के साथ-साथ बहुत दानी भी होता है ।

​सिंहासनांश योग: यदि नौवें घर का स्वामी 'सिंहासनांश' (एक विशिष्ट ज्योतिषीय गणना) में हो और उस पर लग्नेश या दशमेश (दसवें घर का स्वामी) की दृष्टि हो, तो व्यक्ति पूर्णतः धर्मात्मा और दानवीर होता है ।

​परोपकारी स्वभाव: यदि ग्रहों के योग के साथ चंद्रमा भी उच्च का हो और उस पर नवमेश की दृष्टि हो, तो जातक धार्मिक और दूसरों का उपकार करने वाला (उपकारी) होता है ।

​​गुरु, बुध और मंगल: यदि कुंडली में गुरु, बुध या मंगल के साथ बैठा हो, तो ऐसा व्यक्ति धर्म-कर्म के कार्यों में हमेशा आगे रहता है ।

​दशम भाव (कर्म) की भूमिका: यदि दसवें घर का स्वामी (दशमेश) अपने ही घर में हो, या केंद्र/त्रिकोण में स्थित हो, तो व्यक्ति धर्म के मार्ग पर अडिग रहता है ।

​दशमेश बुद्ध हो और जातक के गुरु भी बली हो या चंद्रमा तीसरे भाव में हो तो जातक धर्मशील होकर यश प्राप्त करता है |

मेश यदि बृहस्पति के साथ हो और षडवर्गों में बली हो या लग्नेश पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो तो जातक धर्म परायण होता है |

बुद्ध दशमस्थ होकर गुरु के साथ हो तो जातक धर्मात्मा होकर यश प्राप्त करता है |

दशमेश के साथ बुद्ध भी दशम भाव में हो तो जातक धर्म में तत्पर हो जाता है |

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

चतुर्थांश कुंडली और स्त्री विवाह 2

4]19/11/1917 रात्रि 23:11 मिनट कर्क लग्न और मेष चतुर्थांश में जन्मी इंदिरा गांधी की पत्रिका में देखे तो इनकी पत्रिका में मंगल बुध शुक्र शनि और चंद्र विवाह कारक दशा में आते हैं जैसा कि हम सब जानते ही हैं इन के अतिरिक्त हमें शुक्र और राहु को भी देखना है 26 मार्च 1942 को जब इनका विवाह हुआ तब इन पर राहु शनि शनि चंद्र की दशा चल रही थी |

चतुर्थांश कुंडली मे देखे तो राहु बंधन कारक होकर 12 वे भाव में है शनि चतुर्थांश कुंडली का दशमेश होकर दशम भाव में ही है तथा चंद्रमा भी दशम भाव में ही है इस प्रकार दिए गए सभी पैरामीटर लागू होते हैं !

5]30/11/1977 22:35 पौड़ी गढ़वाल कर्क लग्न मेष चतुर्थांश में जन्मी जातिका की पत्रिका में मंगल बुध चंद्र शुक्र और शनि विवाह कारक दशा में आते हैं 22 जून 2003 को जब विवाह हुआ तब इनकी पत्रिका में बुध में शनि में बुध में बुध दशा चल रही थी ! 

चतुर्थांश कुंडली में देखें तो बुध तीसरे भाव का स्वामी होकर 9वेभाव से तीसरे भाव को देख रहा है शनि दशमेश होकर लग्नेश मंगल द्वारा दृष्ट है तथा बुध तीसरे भाव का स्वामी है जो घर से दूर जाने की पुष्टि कर रहा है ! इस प्रकार हमारे सभी पैरामीटर लागू होते हैं !

6]18 जुलाई 1982 11.47 जमशेदपुर में जन्मी प्रियंका चोपड़ा कन्या लग्न एवं मिथुन चतुर्थांश में जन्मी है इनका विवाह 1 नवंबर 2018 को हुआ जब इन पर गुरु मंगल राहु राहु की दशा चल रही थी |

चतुर्थांश कुंडली में देखें तो गुरु सप्तमेश होकर पंचम भाव में बैठा है तथा लगन को दृष्टि दे रहा है मंगल लग्न में स्थित होकर सप्तम भाव को देख रहा है राहु सप्तम भाव में ही स्थित है |

7]23/7/1962 1735 बिजनौर में धनु लग्न मिथुन चतुर्थांश में जन्मी जातिका का विवाह 15 फरवरी 1985 को हुआ जब दशा शुक्र शनि शनि बुध की थी |

चतुर्थांश कुंडली में शुक्र विवाह कारक होकर तीसरे भाव को देख रहा है शनि तीसरे भाव के स्वामी के संग है तथा बुध लग्नेश होकर दसवें भाव में है |

8]29 जुलाई 1988 1935 मुजफ्फरनगर में मकर लग्न कर्क चतुर्थांश में जन्मी जातिका का विवाह 23 फरवरी 2017 को हुआ जब उसे पर गुरु गुरु शनि चंद्र की दशा चल रही थी|

चतुर्थांश पत्रिका में गुरु राहु के संग है शनि सप्तमेश होकर छठे भाव मे दशम भाव के स्वामी से दृष्ट है तथा चंद्रमा लग्नेश होकर लग्न में स्थित है तथा सप्तम भाव को देख रहा है |

9]18 जुलाई 1990 10:20 मुजफ्फरनगर में कन्या लग्न कन्या चतुर्थांश में जन्मी जातिका का विवाह 21 जुलाई 2018 को हुआ जब उस पर राहु बुध शनि शुक्र की दशा चल रही थी |

चतुर्थांश कुंडली मे राहु बंधनकारक होकर अष्टम भाव में है बुध लग्नेश होकर पंचम भाव में तीसरे भाव के स्वामी से दृष्ट है शनि पंचमेश लग्न में है तथा शुक्र विवाह कारक होकर दसवें भाव में है |

1o]14 जुलाई 1982 रात्रि 8:09 दिल्ली में मकर लग्न मेष चतुर्थांश में जन्मी जातिका का विवाह 2 मार्च 2006 को हुआ जब उसकी शुक्र बुध शनि राहु की दशा चल रही थी |

चतुर्थांश कुंडली में देखें तो शुक्र सप्तमेश बुध तृतीयेश शनि दशमेष तथा राहु तीसरे भाव के स्वामी संग नवे भाव में है !

11]26/1/1988 525 मथुरा धनु लग्न,मिथुन चतुर्थांश में जन्मी जातिका का विवाह 19/5/2005 को हुआ जब शुक्र बुध शुक्र शनि की दशा चल रही थी |

चतुर्थांश कुंडली में देखें तो शुक्र तीसरे भाव में बैठा है बुध लग्नेश है शुक्र तीसरे भाव में ही है तथा शनि सप्तम भाव में ही बैठे हैं !

12]4/6/1973 5:05 बेंगलुरु में वृष लग्न व वृष चतुर्थांश मे जन्मी जातिका की पत्रिका में विवाह के दिन 30 जून 1994 को शनि राहु सूर्य राहु की दशा चल रही थी |

चतुर्थांश कुंडली में शनि दशमेश राहु दूसरे भाव में लग्नेश संग सूर्य सप्तम भाव में चतुर्थेश होकर तथा राहु शुक्र संग ही बैठा है जो स्पष्ट कर रहा है की जातिका इस दौरान अपने घर से दूर विवाह हेतु जाएगी !

13]ऐश्वर्या राय की पत्रिका में देखें तो 1/11/1973 4:05 मंगलौर कन्या लग्न व धनु चतुर्थांश की है | इनका विवाह 20/4/2007 को हुआ जब इन पर मंगल चंद्र शुक्र शुक्र की दशा चल रही थी |

चतुर्थांश कुंडली में देखे तो मंगल पंचमेष होकर लग्नेश संग अंचम भाव मे स्थित हैं चंद्रमा सप्तम भाव में बैठे हैं शुक्र लग्न में विवाह कारक होकर बैठे हैं |

बुधवार, 11 फ़रवरी 2026

चतुर्थांश कुंडली और स्त्री विवाह

 

हिंदू  धर्म के अनुसार भारतीय परिपेक्ष में विवाह देखने की बहुत सारी विधियां शास्त्रों में बताई गई है परंतु देखने में आता है कि कोई भी विधि सटीकता से काम नहीं करती |

भारतीय समाज विशेषकर हिन्दुओ मे स्त्री विवाह के समय एक बात रोचक बात नजर आती है | हिंदू धर्म के अनुसार मान्यता है कि विवाह के पश्चात लड़की अथवा जातिका अपने पिता का घर छोड़कर पति के घर अर्थात ससुराल जाना होता है इसका सीधा मतलब है निवास में बदलाव, जो चतुर्थांश (D-4) चार्ट के दायरे में आता है । हम सब जानते ही हैं की कुंडली में घर अथवा संपत्ति आदि के लिए चतुर्थांश कुंडली को वर्ग कुंडली के अनुसार देखा जाना चाहिए |

चतुर्थांश न केवल घर को दर्शाता है, बल्कि उससे जुड़े घरेलू आराम और खुशी को भी दर्शाता है। इसके लिए घर में एक गृहिणी का होना ज़रूरी है, यहां मैं आपको स्पष्ट कर दूं कि हम यहां जातिका हेतु विवाह की बात कर रहे हैं जो जातिका का घर से दूर जाना तथा ससुराल जाना ही निश्चित करता है |

इसलिए लेखक का मानना है कि शादी के समय के लिए, चतुर्थांश का भी विश्लेषण किया जाना चाहिए । इसी को आधार बनाकर जब बहुत सी स्त्री पत्रिकाओं में लगाया तो पाया कि विवाह के समय स्त्री पत्रिका का चतुर्थांश वर्ग बहुत ज्यादा प्रभावशाली बन जाता है |

विवाह का समय ज्ञात करने के लिए स्त्री की कुंडली में विवाह की योग्यता को देखने के साथ-साथ 18 वर्ष से 35 वर्ष के बीच की समय आने वाली दशाओं को भी देखना होगा क्योंकि भारतीय परिपेक्ष में अधिकतर इन्हीं वर्षों में विवाह होने का प्रावधान देखा व रखा गया है |

चतुर्थांश कुंडली में देखें की स्त्री पत्रिका में इस आयु के बीच 1,3,7 और 10 भाव से संबंधित ग्रहों की दशा अथवा इन में स्थित ग्रहों की दशा चलनी चाहिए यदि ऐसा होगा तो हम विवाह के समय की सटीक आकलन कर पाएंगे |

हमने लगभग 200 से अधिक स्त्री पत्रिकाओं का अध्ययन किया और पाया कि विवाह के समय स्त्री पत्रिका के   ज़्यादातर यही सब भाव प्रभावित होते हैं |

पहला भाव जैसा कि हम सब जानते हैं लग्न अथवा जातिका के शरीर के विषय में बताता है |

तीसरा भाव चतुर्थ भाव से द्वादश होने के कारण घर का व्यय अर्थात घर से दूर होना बताता है |

सातवां भाव पति अथवा जीवन साथी का होता है तथा दसवां भाव पति का घर अर्थात जातिका हेतु ससुराल का माना जाता है |

हमने अपने अध्ययन में यह भी पाया कि इस दौरान विवाह कारक शुक्र और बंधन कारक राहू को भी देखा जाना चाहिए क्योंकि जहां विवाहकारक शुक्र की स्थिति अथवा उसकी दशा से संबंधित होना विवाह करवा सकता हैं वहीं राहु जो की काम भावो से संबन्धित होने के कारण विवाह बंधन मे ला सकता हैं |

आईये इन्हीं सब कारकत्वों को देखते हुए विवाह की तिथि ज्ञात करने की सटीक विधि की जांच करते हैं |

1 सानिया नेहवाल का जन्म 17 मार्च 1990 12:19 हिसार मिथुन लग्न व कन्या चतुर्थांश का है चतुर्थांश कुंडली मे देखे तो 1,3,7,व 1 भावो के स्वामी बुध,मंगल,गुरु,हैं तथा इनमे मे स्थित ग्रह शनि,गुरु,चन्द्र,सूर्य व बुध हैं | राहू व शुक्र हमे कारक के रू मे देखने ही हैं |

इनकी 18 वर्ष की आयु से 35 वर्ष की आयु के बीच इन्हे मुख्य रू से बुध व केतू की दशाए मिलेगी जिनमे बुध चतुर्थांश कुंडली मे लग्नेश होकर सतम भाव मे हैं जो विवाह करवाने मे सक्षम नज़र आता हैं | इनकी बुध की दशा 3/9/2020 तक रही हैं जो इसी दशा से अहले विवाह की उषटि करती हैं | इस दशा मे जब भी सूर्य,चन्द्र,गुरु व शनि का अंतर आएगा विवाह हो सकता हैं | 2008 से देखे तो इन्हे बुध की सभी दशाए विवाह वाली मिली इनका विवाह 14 दिसंबर 2018 को हुआ जब पत्रिका में बुध शनि शुक्र सूर्य की अंतर्दशा चल रही थी |

चतुर्थांश कुंडली में देखें तो बुध लग्नेश है शनि पंचमेश होकर लग्न मे है जो रेम विवाह बता रहा हैं शुक्र कारक होकर 11वें भाव में राहू बंधन कारक के संग स्थित है और विवाह के दिन सूर्य सप्तम भाव मे लग्नेश बुध संग ही स्थित है |

इस प्रकार से देखें तो यह स्पष्ट होता है कि विवाह वाले दिन 1,3,7,10 भाव व ग्रहो से संबंधित दशाएं चल रही होती है !

2 बेनजीर भुट्टो 23 जून 1953 16 22 कराची में तुला लग्न व कर्क चतुर्थांश में जन्मी बेनजीर भुट्टो को 18 वर्ष से 35 वर्ष मे मध्य शनि व बुध की महा दशाए मिली,जिनमे शनि दशा मे गुरु को छोड़कर सभी ग्रह विवाह करवाने मे सक्षम हैं इनकी कुंडली मे सतमेश मंगल और शनि व सूर्य का रभाव विवाह मे विलंबता दर्शा रहे हैं जिस कारण इनका विवाह शनि महादशा अर्थात 1984 तक नहीं हुआ | इसके बाद की दशा बुध की हैं बुध तृतीयेश होने के कारण विवाह करवा आने मे सक्षम हैं बुध मे भी गुरु को छोड़कर सभी ग्रह विवाह करवा सकते हैं |   

इनका विवाह 18 दिसंबर 1987 को बुध केतु बुध केतू दशा में हुआ | बुद्ध चतुर्थांश कुंडली में तीसरे भाव का स्वामी होकर लग्न में है केतु चौथे भाव में शुक्र की राशि मे हैं शुक्र विवाह का कारक होकर सतम भाव मे स्थित होकर विवाह की पुष्टि कर रहा है !


3 मेनका गांधी की पत्रिका 26 अगस्त 1956  16 04 मिनट दिल्ली कर्क लग्न व तुला चतुर्थांश की है |

इनके विवाह की आयु समय मे इन्हे मुख्य रू से शुक्र की दशा मिली हैं जो इनकी चतुर्थांश कुंडली का लग्नेश हैं तथा चतुर्थांश के अनुसार गुरु,मंगल चन्द्र तथा इन भावो से संबन्धित ग्रह विवाह करवा सकते हैं हम जानते हैं की इनका विवाह 29/ 9/1974 को शुक्र गुरु बुध बुध दशा में हुआ |

यहां चतुर्थांश कुंडली में देखें तो शुक्र लग्नेश होकर छठे भाव मे हैं गुरु तृतीयेश होकर अंचम भाव मे राहू संग तथा  बुध द्वादश भाव से लग्नेश शुक्र को देख रहा है ! लग्नेश शुक्र व विवाह कारक के छठे भाव मे होने से तथा उस आर द्वादशा स्वामी बुध की दृस्टी व दशा होने से विवाह मे विवाद भी रहा |