बुधवार, 23 सितंबर 2026

वास्तु व फेंगशुई टिप्स

 


1)नकद पैसे व धन संबंधी कागजात उत्तर दिशा मे रखे |

2)मुख्य द्वार के सामने रसोई नहीं होनी चाहिए |

3)घर पर टूटा दर्पण व कैक्टस का पौधा नहीं रखना चाहिए |

4)दरवाजे के समीप कूड़ा दान व जूते नहीं रखना चाहिए |

5)बच्चो का कोना जाग्रत करने के लिए पश्चिम दिशा मे धातु के बने बक्से मे कंचे,सिक्के व रत्न इत्यादि रखे |

6)कार्यक्षेत्र मे हमेशा सकारात्मक सोचे जैसे “आज का दिन मेरा बहुत अच्छा गुजरेगा,मैं अपने काम से बहुत प्रेम करता हूँ“ इससे आपके कार्यक्षेत्र का वातावरण सकारात्मक होगा |

7)जिन कार्यो व वस्तुओ मे बदलाव चाहते हो उन्हे उत्तर पश्चिम मे रखे |

8)स्त्रीया अपने पैसे लाल रंग के पर्स मे रखे |

9)कभी भी उपहार स्वरूप घड़ी ना किसी से ले ना दे,बच्चो को भी अपने बड़ों कि घड़ी प्रयोग करने ना दे |

10)उत्तरपूर्व दिशा ज्ञान व शिक्षा की हैं इसे जगाने हेतु क्रिस्टल का ग्लोब इस दिशा मे रखे |

11)उत्तर पश्चिम दिशा दोस्तों व सहायता प्रदान करने वालो की होती हैं इसे जाग्रत करने के लिए धातु के बने सिक्के इस दिशा मे रखे |

12)दक्षिण दिशा प्रसिद्दि व मान्यता प्रदान करने वाली होती हैं इसे जगाने के लिए 9 लाल रंग की मोमबत्ती इस दिशा मे रखे |

13)पश्चिम दिशा स्रजनात्मकता से जुड़ी हैं इसे जाग्रत करने के लिए अपने कलम इत्यादि इस दिशा मे रखे |

14)दक्षिण पूर्व दिशा धन से संबन्धित होती हैं इसे जाग्रत रखने हेतु लकड़ी के फ्रेम वाला बड़ा दर्पण यहाँ लगाए |

15)स्वास्थ्य व धन के लिए काँच के पात्र मे 6 तांबे के व 1 चाँदी का सिक्का रखकर उसे आधा नमक से भरे और बाकी हिस्से को पानी से भर कर इस पत्र को छेद किए हुये कपड़े से ढक दे इसे पूर्व दिशा मे रखे, ठीक 3 माह बाद नमक व पानी बदल दे इसे जब तक चाहे कर सकते हैं

16)संबंधो को मधुर बनाने के लिए दक्षिण पश्चिम मे रोशनी ज़रूर रखे जो कम से कम 3 घंटे तक रोज़ शाम को प्रदर्शित हो |

17)व्यापार बढ़ाने हेतु दक्षिण दिशा मे दुनिया का नक्शा रख उस पर उन देशो मे जहां आप व्यापार चाहते हैं लाल निशान लगा दे |

18)भोजन की मेज(डायनिंग टेबल)के केंद्र मे क्रिस्टल की कटोरी मे फल हमेशा भरकर रखे |

19)बीमारी से छुटकारा पाने हेतु पूर्व दिशा मे लकड़ी की बनी चकोर कटोरी मे पानी भर कर रखे पानी रोजाना बदलते रहे ध्यान रखे की कोई नुकीली वस्तु जैसे चाकू,छुरी,केची इत्यादि इस दिशा मे ना रखी हो |

शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

वास्तु अनुसार भूमि के चार प्रकार

 

वास्तु शास्त्रों के अनुसार भूमि के मुख्यतः चार प्रकार बताये गये हैं-

1. गजपृष्ठ भूमि,

2. कूर्म पृष्ठ,

3. दैत्य पृष्ठ

4. नाग पृष्ठ भूमि

1. दक्षिण/पश्चिम में ऊंची हो उत्तर/ पूर्व में नीची हो ऐसी भूमि को गज पृष्ठ कहते है, यह भूमि शुभ मानी गई है। ऐसी भूमि पर निवास करने वाले लोग आज्ञाकारी बड़ों का सम्मान करने वाले, धन लाभ एवं आयु वृद्धि प्राप्त करने वाले होते हैं

2. चारों ओर से झुकी हुई तथा मध्य भाग से उठी हुई भूमि को कूर्म पृष्ठ भूमि माना गया है। इस भूमि को ईश्वर का अंश बताया गया है। ऐसी भूमि पर निवास करने वाले लोगों में त्याग की भावना अधिक रहती है, उत्साहवर्द्धक, धन- धान्य एवं सुख प्रदाय होते हैं

3. उत्तर / पूर्व से ऊंची दक्षिण/ पश्चिम में नीची हो । ऐसी भूमि को दैत्य पृष्ठ माना गया है । यह भूमि अशुभ मानी गई है। ऐसी भूमि स्त्री, पुत्र पशुओं का नाश करती है।

4. पूर्व/ पश्चिम की ओर लम्बाई लिये और उत्तर दक्षिण में ऊंचाई लिये मध्य भाग से नीची भूमि नाग पृष्ठ कहलाती है। इस प्रकार कि भूमि अशुभ मानी गयी है। ऐसी भूमि पर निवास करने वाले लोगों में षड्यंत्र अधिक होता है, बालारिष्ट योगारिष्ट इस भूमि के कारण होता है ।

दो प्रकार की भूमि सामान्य चर्चा में रहती है - सिंहमुखी गौमुखी आमतौर पर  गौमुखी को लोग शुभ मानकर उस पर निर्माण कार्य कर लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। गौमुखी होने पर दिशाओं का कटना और दिशाओं का बढ़ना दोनों ही ऐसी स्थिति में होता है जो कि ठीक नहीं है। ईशान कोण बढ़ने के कारण अगर अंतर आता है तो शुभ हो सकता है

चयन कैसे करें -

जिस भूखण्ड को खरीदना है, उसके मध्य स्थान में एक हाथ चौड़ा एक हाथ गहरा गड्ढा खोदना चाहिये, फिर उसी गड्ढे से निकली मिट्टी से उस भर देना चाहिये यदि मिट्टी बच जाये तो भूखण्ड उत्तम है। यदि मिट्टी बराबर बैठे तो मध्यम है तथा मिट्टी बचे तो भूखण्ड शुभ नहीं है। ऐसे भूखण्ड पर मकान नहीं बनाना चाहिये

एक और विधि का उल्लेख शास्त्रों में मिलता है ।

गृहस्वामी के एक हाथ लम्बा गड्ढा खोदकर उसमें पानी भर दें। फिर 100 कदम आगे जाकर लौट आने पर यदि गड्ढे में पानी आधे से अधिक बचे तो भूमि शुभ है, आधे से कम हो तो मध्यम चौथाई से कम पानी बचे तो भूमि अशुभ है ।

शास्त्रों में कई विधियों के उल्लेख हैं भूमि परीक्षण के यह नियम सामान्य है जिससे आम व्यक्ति भी निर्णय ले सकता है ।

भूखण्ड का भी कोई हिस्सा कटा या बढ़ा नहीं होना चाहिये,यदि भूखण्ड सब तरह से शुभता की गिनती में आता है और केवल भूखण्ड को कोई हिस्सा बढ़ा या कटा हुआ है तो वह ठीक हो सकता है ।