मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट आदि हमारे आसपास मौजूद डिवाइसेज जितनी सहूलियत हमें देती हैं उतना ही सेहत को नुकसान भी पहुंचाती हैं। क्या आप जानते है कि समय समय पर डिजिटल डिटॉक्स से इस नुकसान को कम भी किया जा सकता है।
क्या है डिजिटल डिटॉक्स
अपने आसपास की सभी डिजिटल डिवाइसेज को स्विच ऑफ करने या कुछ वक्त के लिए उन्हें इस्तेमाल न करने को डिजिटल डिटॉक्स कहते हैं। यह वक्त 24 घंटे से 72 घंटे तक हो सकता है।
क्यों करें डिटॉक्स
सोशल साइट्स और तेज कम्युनिकेशन के इस दौर में हम अक्सर मोबाइल या कंप्यूटर से चिपके रहते हैं। इनसे दूर रहने से भले ही आप कुछ वक्त के लिए बाकी दुनिया से कट जाएं, लेकिन ऐसा करके आप खुद और अपने परिवार के और करीब आ सकते हैं। यह मानसिक रूप से भी काफी सुकून देने वाला होता है। डिजिटल डिटॉक्स आपको रिफ्रेश करता है और नई एनर्जी देता है।
कैसे करें शुरुआत
इसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। डिजिटल डिटॉक्स को तमाम लोग अपनाना चाहते हैं, लेकिन बिना सही प्लानिंग के यह करना मुश्किल साबित हो सकता है। कुछ लोग मोबाइल से दूरी तो बना लेते हैं, लेकिन कंप्यूटर पर ईमेल आदि चेक करते रहते हैं। कुछ सिर्फ सोशल मीडिया पर जाना छोड़ देते हैं। वैसे, अपनी सहूलियत के हिसाब से कोई भी तरीका अपनाया जा सकता है। ये तरीके मददगार साबित हो सकते हैं:
सबको दें जानकारी:** किसी भी तरह के डिजिटल डिटॉक्स पर जाने के लिए अपने करीबियों और सहकर्मियों के एडवांस में बताना बेहतर रहता है। वरना वह आप तक पहुंचने के लेकर परेशान हो सकते हैं। डिटॉक्स पर जाने के तकरीबन 12 घंटे पहले ही सोशल मीडिया के जरिए लोगों के बता सकते हैं कि आप कितने वक्त तक डिजिटल डिटॉक्स पर जा रहे हैं।
बनाएं रूटीन:** अक्सर हमें सुबह उठते ही मोबाइल नोटिफिकेशन या ईमेल चेक करके दिन को प्लान करने की आदत होती है। इनके न होने पर अजीब महसूस हो सकता है। ऐसे में सुबह उठ कर वॉक पर जा सकते हैं या कुछ लिखने-पढ़ने का काम कर सकते हैं। पेट्स के साथ वक्त बिता सकते हैं। बच्चों के साथ पार्क में खेलने जा सकते हैं। कुछ लोग सुबह उठ कर मेडिटेशन भी करते हैं। इससे दिमाग काफी फ्रेश होता है।
चुनें सही वक्त:** इसकी शुरुआत कब करनी है इसलिए लिए सही वक्त को चुनना बहुत जरूरी है। मिसाल के तौर पर हफ्ते के शुरुआती दिनों में पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ काफी बिजी होती है। बेहतर होगा कि वीकेंड या लंबी छुट्टी वाले दिनों में डिजिटल डिटॉक्स आजमाएं।
ऑन करें एरोप्लेन मोड:** अगर फोन पर म्यूजिक सुनते हैं तो इसके लिए एरोप्लेन मोड इस्तेमाल करें। इससे फोन की सभी सर्विसेज बंद हो जाएगी, लेकिन आप म्यूजिक सुन पाएंगे। अगर कोई प्लेलिस्ट ऑन-लाइन है तो उसे ऑफ-लाइन सुनने के लिए डाउनलोड कर लें।
अलार्म घड़ी खरीदें:** अब मोबाइल ही हमारी अलार्म क्लॉक बन चुका है। मोबाइल को दूर रखें और अलार्म घड़ी को ही सुबह का साथी बनाएं। सुबह उठने के लिए उसे बेड से दूर रखें जिससे उठ कर अलार्म बंद करने जाना पड़े और नींद खुल जाए।
स्क्रीन से दूरी:** मोबाइल और कंप्यूटर का स्क्रीन आंखों को तनाव देता है। रात में सोने से पहले और सुबह उठते ही मोबाइल स्क्रीन से मुलाकात आंखों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। इसी तरह से ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट से कुछ घंटे दूर रह कर ही आप खुद को तरोताजा महसूस करने लगेंगे।
प्लान करें एक्टिविटी:** मोबाइल और बाकी डिवाइसेज हमारा बहुत सा वक्त लेती हैं। इनके आसपास न होने से आप बोरियत का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि कोई एक्टिविटी प्लान की जाए। मिसाल के तौर पर आप किसी किताब को पढ़ने का टारगेट रख सकते हैं। अगर इंस्टाग्राम के शौकीन हैं तो किसी आर्ट गैलरी में घूम कर आ सकते हैं। फिटनेस रूटीन प्लान कर सकते हैं।
बार-बार लगातार:** साल में एक बार डिजिटल डिटॉक्स से कुछ नहीं होगा। साल में इसे कई बार करने की जरूरत है। शुरुआत साल में तीन बार 24 घंटे, 48 घंटे और 72 घंटे के टारगेट के साथ कर सकते हैं। आने वाले सालों में इसे बढ़ा भी सकते हैं।