मंगलवार, 15 सितंबर 2026

शकुन व इसका आधार


शकुनो में कोई ना कोई विशेष शक्ति होती है जो मनुष्यों को सावधान करने के लिए तथा शुभाशुभ फल प्रदान करने हेतु पूर्व सूचना देती है।

'शकुन' विषय पर विभिन्न व्यक्तियों के विभिन्न विचार होते हैं किसी के लिए 'शकुन' ऐसा परिणाम सूचक है जो निकट भविष्य में होने वाला है। किसी के लिए शकुन दैवीय प्रेरणा या कृपा है जो शुभाशुभ फल के रूप में प्राप्त होती है।

अनेक विद्वान 'शकुन' को अंग विद्या का एक हिस्सा मानते हैं जो मानव जीवन को पक्षियों की गतिविधियों को आधार बनाकर फलकथन कर अपना कल्याण करने की प्रेरणा देते हैं। शकुन का अर्थ पक्षी होता है जिससे पता चलता है कि यह विद्या मानव ने पक्षियों की गतिविधियों से देखकर तथा अनुभव की कसौटी पर कस कर अपने भावी जीवन हेतु अपनाई

शकुन का वैज्ञानिक आधार

शकुनों का आधार ज्योतिष के साथ-साथ वैज्ञानिक भी रहा है। जो शुभ सिद्ध होने पर लाभदायक तथा अशुभ होने पर सावधान करने वाला भी है। पक्षियों की विशेष गतिविधियों को निश्चत समय पर करते देख विज्ञान ने समय के साथ इस पर शोधकर नए-नए विषयों पर काम किया जिससे मनुष्य जीवन की बहुत सी कठिनाइयों परेशानियों का अंत भी हुआ, जैसे मोर पक्षी का नाचना आज भी बरसात आगमन की सूचना दे देता है और इसे विज्ञान भी मानता है भूकंप आदि आने से पहले सांप-बिच्छु आदि अपने बिल से बाहर आकर इधर-उधर दौड़ने लगते हैं।

शकुनों की सार्थकता

आज के युग में कुछ बुद्धिजीवी शकुन विज्ञान पर विश्वास कर इन्हें व्यर्थ का मनोविकार बताते हैं वहीं कुछ लोग इन्हें सार्थक तथा व्यर्थ दोनों ही परिपेक्ष्य में गिनते हैं।

जो व्यक्ति अनुभव प्राप्त कर लेते हैं (जैसे बिल्ली के रास्ता काट जाने पर इच्छित कार्य का ना होना) वो शकुनों के प्रति विश्वासी हो जाते हैं जिससे आज के युग में भी इन शकुनों की सार्थकता बनी हुई है

इसके विपरित जब कभी किसी मनुष्य को कोई शकुन अशुभफल प्रदान करता है तो शकुनों की विश्वसनीयता पर संदेह हो जाता है। उदाहरण हेतु यदि किसी की छत पर कौआ बोलने लगे तो यह मेहमान के आगमन की सूचना माना जाता है। परंतु यदि उस व्यक्ति की कोई कीमती वस्तु उस दिन खो जाए तो वह कौओ के इस कॉव-कांव को ही उसका कारण मानेंगें। ऐसे में शकुन विचार विपरीत दृष्टिकोण को दर्शाएगा

इस प्रकार ऐसे कई विवरण हो सकते हैं जिनसे यह समझा माना जाता है कि शकुनो में कोई ना कोई विशेष शक्ति होती है जो मनुष्यों को सावधान करने के लिए तथा शुभाशुभ फल प्रदान करने हेतु पूर्व सूचना देती है।

Published in future samachar june 2010 written by Acharya kishore ghildiyall 

शनिवार, 12 सितंबर 2026

अनिंद्रा मुक्ति के सूत्र

 


रात्रि के भोजन के पश्चात् रात्रि को टहलने से मांसपेशियां सुदृढ़ होती हैं तथा आपको नींद शीघ्र आती है। टहलते वक्त बहुत जोर लगाने की आवश्यकता नहीं है,अपने घर की चारदीवारी में ही कुछ चक्कर लगाने से आपका लक्ष्य पूरा हो जाएगा । व्यायाम करने से भी नींद आती है।

जब आप विद्यार्थी थे तब आपने देखा होगा कि रात्रि को जैसे ही आप पढ़ने बैठते थे, आपको नींद जाती थी । यदि आप अनिद्रा रोग से पीड़ित हैं तो अपने विद्यार्थी जीवन के उस अनुभव को जिंदगी के सोपान में भी अनुसरण कर सकते हैं। सोने के लिए बिस्तर पर तब जाइए जब आपको झपकी आने लगे। यदि आपको बिस्तर पर लेटने के पश्चात् 15-30 मिनट के पश्चात् भी नींद नहीं आए, तो कोई पत्रिका, पुस्तक उठाकर पढ़ना शुरू कर दीजिए। इसके विकल्प पर आप रेडियो भी चालू कर सकते हैं या टेपरिकार्डर पर कोई हल्का-फुल्का संगीत बजाकर सुन सकते हैं।

ज्यादातर प्राकृतिक चिकित्सकों की मान्यता है कि सोने से पूर्व एक प्याला गर्म दूध पीने से नींद शीघ्र आती है लेकिन वृद्ध व्यक्तियों को दूध अधिक नहीं पीना चाहिए क्योंकि रात्रि को सोते समय उन्हें तमाम बार पेशाब करने के लिए उठना पड़ सकता है जिससे उनकी नींद बाधित हो सकती है ।

रात को सोने से पूर्व गर्म जल से स्नान आपको जल्द बढ़िया नींद सकती है । स्नान करने से स्फूर्ति का अहसास करते हैं तथा आपको जल्द बढ़िया नींद सकती है।

यदि अनिद्रा की परेशानी आपको यदा-कदा होती है तो आपको नींद की गोलियां लेने की जरूरत नहीं है। विकल्प रूप में आप गर्म जल से स्नान, गर्म दूध पीना या तेज टहलने सरीखे दूसरे उपाय अपना सकते हैं।

आमतौर पर एक मनुष्य अपनी नींद का अधिकतर भाग रात्रि की नींद में ही बिताता है। स्वप्न वाली नींद और प्रगाढ़ नींद का समय बराबर होता है ।