हिंदू
धर्म के अनुसार भारतीय परिपेक्ष में विवाह देखने की बहुत सारी
विधियां शास्त्रों में बताई गई है परंतु देखने में आता है कि कोई भी विधि सटीकता
से काम नहीं करती |
भारतीय समाज विशेषकर हिन्दुओ मे स्त्री विवाह के समय एक बात
रोचक बात नजर आती है | हिंदू धर्म के अनुसार मान्यता है कि विवाह के पश्चात लड़की अथवा जातिका
अपने पिता का घर छोड़कर पति के घर अर्थात ससुराल जाना होता है इसका सीधा मतलब है
निवास में बदलाव, जो
चतुर्थांश (D-4)
चार्ट के दायरे में आता है । हम सब जानते ही हैं की कुंडली में घर अथवा संपत्ति
आदि के लिए चतुर्थांश कुंडली को वर्ग कुंडली के अनुसार देखा जाना चाहिए |
चतुर्थांश न
केवल घर को दर्शाता है, बल्कि
उससे जुड़े घरेलू आराम और खुशी को भी दर्शाता है। इसके लिए घर में एक गृहिणी का
होना ज़रूरी है, यहां
मैं आपको स्पष्ट कर दूं कि हम यहां जातिका हेतु विवाह की बात कर रहे हैं जो जातिका
का घर से दूर जाना तथा ससुराल जाना ही निश्चित करता है |
इसलिए लेखक का
मानना है कि शादी के समय के लिए, चतुर्थांश का भी विश्लेषण किया जाना चाहिए । इसी को आधार
बनाकर जब बहुत सी स्त्री पत्रिकाओं में लगाया तो पाया कि विवाह के समय स्त्री
पत्रिका का चतुर्थांश वर्ग बहुत ज्यादा प्रभावशाली बन जाता है |
विवाह का समय
ज्ञात करने के लिए स्त्री की कुंडली में विवाह की योग्यता को देखने के साथ-साथ 18 वर्ष से 35 वर्ष के बीच की
समय आने वाली दशाओं को भी देखना होगा क्योंकि भारतीय परिपेक्ष में अधिकतर इन्हीं
वर्षों में विवाह होने का प्रावधान देखा
व रखा गया है |
चतुर्थांश
कुंडली में देखें की स्त्री पत्रिका में इस आयु के बीच 1,3,7 और 10 भाव से संबंधित
ग्रहों की दशा अथवा इन में स्थित ग्रहों की दशा चलनी चाहिए यदि ऐसा होगा तो हम
विवाह के समय की सटीक आकलन कर पाएंगे |
हमने लगभग 200 से अधिक स्त्री
पत्रिकाओं का अध्ययन किया और पाया कि विवाह के समय स्त्री पत्रिका के ज़्यादातर यही सब भाव प्रभावित होते हैं |
पहला भाव जैसा
कि हम सब जानते हैं लग्न अथवा जातिका के शरीर के विषय में बताता है |
तीसरा भाव
चतुर्थ भाव से द्वादश होने के कारण घर का व्यय अर्थात घर से दूर होना बताता है |
सातवां भाव पति
अथवा जीवन साथी का होता है
तथा दसवां भाव पति का घर अर्थात जातिका हेतु ससुराल का माना जाता है |
हमने अपने
अध्ययन में यह भी पाया कि इस दौरान विवाह कारक शुक्र और बंधन कारक राहू को भी देखा जाना
चाहिए क्योंकि जहां विवाहकारक
शुक्र की
स्थिति अथवा उसकी दशा से संबंधित होना विवाह करवा सकता हैं वहीं राहु जो की काम भावो से संबन्धित होने के कारण
विवाह बंधन मे ला सकता हैं |
आईये इन्हीं सब कारकत्वों को देखते हुए विवाह की तिथि ज्ञात करने की सटीक विधि की जांच करते हैं |
1 सानिया नेहवाल का जन्म 17 मार्च 1990 12:19 हिसार मिथुन लग्न व कन्या चतुर्थांश का है | चतुर्थांश कुंडली मे देखे तो 1,3,7,व 10 भावो के स्वामी बुध,मंगल,गुरु,हैं तथा इनमे मे स्थित ग्रह शनि,गुरु,चन्द्र,सूर्य व बुध हैं | राहू व शुक्र हमे कारक के रू मे देखने ही हैं |
इनकी 18 वर्ष की आयु से 35 वर्ष की आयु के बीच इन्हे मुख्य रू
से बुध व केतू की दशाए मिलेगी जिनमे बुध चतुर्थांश कुंडली मे लग्नेश होकर सतम भाव
मे हैं जो विवाह करवाने मे सक्षम नज़र आता हैं | इनकी बुध की दशा 3/9/2020 तक रही हैं जो इसी दशा से अहले विवाह
की उषटि करती हैं | इस दशा मे जब भी सूर्य,चन्द्र,गुरु व शनि का अंतर आएगा विवाह हो सकता हैं | 2008 से देखे तो इन्हे बुध की सभी दशाए विवाह वाली मिली इनका विवाह
14 दिसंबर 2018 को हुआ जब पत्रिका में बुध शनि शुक्र सूर्य की अंतर्दशा चल
रही थी |
चतुर्थांश
कुंडली में देखें तो बुध लग्नेश है शनि पंचमेश होकर लग्न मे है जो रेम विवाह बता रहा हैं शुक्र कारक होकर
11वें भाव में राहू बंधन
कारक के संग स्थित है और विवाह के दिन सूर्य सप्तम भाव मे लग्नेश बुध संग ही स्थित है |
इस प्रकार से
देखें तो यह स्पष्ट होता है कि विवाह वाले दिन 1,3,7,10 भाव व ग्रहो से संबंधित
दशाएं चल रही होती है !
2 बेनजीर भुट्टो 23
जून 1953 16 22 कराची में तुला लग्न व कर्क चतुर्थांश में जन्मी बेनजीर भुट्टो को 18 वर्ष से 35 वर्ष मे मध्य शनि व बुध की महा
दशाए मिली,जिनमे शनि दशा मे गुरु को छोड़कर सभी ग्रह विवाह
करवाने मे सक्षम हैं इनकी कुंडली मे सतमेश मंगल और शनि व सूर्य का रभाव विवाह मे
विलंबता दर्शा रहे हैं जिस कारण इनका विवाह शनि महादशा अर्थात 1984 तक नहीं हुआ | इसके बाद की दशा बुध की हैं बुध तृतीयेश होने के कारण विवाह
करवा आने मे सक्षम हैं बुध मे भी गुरु को छोड़कर सभी ग्रह विवाह करवा सकते हैं |
इनका विवाह 18 दिसंबर 1987 को
बुध केतु बुध केतू दशा
में हुआ | बुद्ध
चतुर्थांश कुंडली में तीसरे भाव का स्वामी होकर लग्न में है केतु चौथे भाव में शुक्र की राशि मे हैं शुक्र विवाह
का कारक होकर सतम भाव मे स्थित
होकर विवाह की पुष्टि कर रहा है !
3 मेनका गांधी की पत्रिका 26 अगस्त 1956
16 04 मिनट दिल्ली
कर्क लग्न व तुला चतुर्थांश की
है |
इनके विवाह की आयु समय मे इन्हे मुख्य रू से शुक्र की दशा मिली
हैं जो इनकी चतुर्थांश कुंडली का लग्नेश हैं तथा चतुर्थांश के अनुसार गुरु,मंगल चन्द्र तथा इन भावो से संबन्धित ग्रह विवाह करवा सकते हैं
हम जानते हैं की इनका विवाह 29/ 9/1974 को
शुक्र गुरु बुध बुध दशा
में हुआ |
यहां चतुर्थांश कुंडली में
देखें तो शुक्र लग्नेश होकर
छठे भाव मे हैं गुरु तृतीयेश होकर अंचम भाव मे राहू संग तथा बुध द्वादश भाव से लग्नेश शुक्र को देख रहा है
! लग्नेश शुक्र व विवाह कारक के छठे
भाव मे होने से तथा उस आर द्वादशा स्वामी बुध की दृस्टी व दशा होने से विवाह मे
विवाद भी रहा |
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