गुरुवार, 3 सितंबर 2026

स्त्री सुख

यदि किसी कारणवश स्त्री सुख में बाधा मिल रही हो तो लालकिताब ज्योतिष के अनुसार उपाय करने से बाधा दूर हो जाती है और सुख मिलने लगता है | लाल किताब ज्योतिष के अनुसार सप्तम भाव के अनुसार ग्रह की वास्तु को कच्ची जमीन में दबाने से ये माना जाता है कि उस ग्रह को उसके नियत स्थान पर स्थापित कर दिया गया है।

‎1. मेष लग्न वाले शुक्रवार को सफेद चमेली का फूल जमीन में दबाएं।

‎2. वृष लग्न वाले मंगलवार  को लाल पत्थर का गोल टुकड़ा या लाल अकीक जमीन में दबाएं।

‎3. मिथुन लग्न वाले गुरुवार को पीली हल्दी की गांठ जमीन में दबाएं।

‎4. कर्क लग्न वाले शनिवार शाम को काले तिल अंधेरे स्थान पर भूमि में दबाएं।

‎5. सिंह लग्न वाले शनिवार को सुबह काले तिल वृक्ष की छाया में भूमि में दबाएं।

‎6. कन्या लग्न वाले गुरुवार को पीली हल्दी की गांठ धर्मस्थान (मंदिर) के अंदर दबाएं।

‎7. तुला लग्न वाले मंगलवार को लाल पत्थर (अकीक) छायादार स्थान में जमीन में दबाएं।

‎8. वृश्चिक लग्न वाले शुक्रवार को चमेली के फूल जमीन में शुक्रवार को दबाएं।

‎9. धनु लग्न वाले बुधवार को हरे मूंग जमीन में दबाएं।  

‎10. मकर लग्न वाले सोमवार को सीप सफेद गोमती चक्र जलीय स्थान (पानी) में दबाएं।

‎11. कुंभ लग्न वाले गेहूं रविवार को नम भूमि में दबाएं।

‎12. मीन लग्न वाले बुधवार को हरे मूंग मंदिर की भूमि/जमीन में दबाएं।

बुधवार, 26 अगस्त 2026

रक्षाबंधन का महत्व

 

भारतीय संस्कृति इतनी विशाल एवं लचीली है कि इसमें हर संस्कृति समाहित होती चली जाती है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक  यहां के लोग लगभग प्रतिदिन कोई कोई त्योहार मनाते मिलेंगे। इन त्योहारों के मूल में आपसी रिश्तों के बीच मधुरता घोलने एवं सरसता लाने की भावना गहनता से रची-बसी है। भाई-बहन के बीच प्यार, मनुहार तकरार होना एक सामान्य सी बात है लेकिन रक्षा बंधन के दिन बहन द्वारा भाई के हाथ में बांधे जाने वाले रक्षा सूत्र में भाई के प्रति बहन के असीम स्नेह और बहन के प्रति भाई के कर्तव्यबोध को पिरोया गया है। प्रेम कर्तव्य का यही भाव भाई-बहन के संबंधों को आजीवन मजबूती देता है।

इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है. कलाई पर रक्षा सूत्र बांध उसकी आरती कर उसके दीर्घ जीवन की कामना करती है। भाई भी बहन की झोली उपहारों से भरते हुए संकट की हर घड़ी में सहायता के लिए तत्पर रहने का वचन देता है।

इतिहास साक्षी है जब दुःशासन भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण कर रहा था तब द्रौपदी ने कृष्ण को अपनी रक्षा के लिए पुकारा तो वे नंगे पांव दौड़े चले आए और भरी सभा में उसकी लाज बचाई। भले ही कृष्ण और द्रौपदी के बीच सखा भाव का संबंध हो परंतु कहा जाता है कि द्रौपदी कृष्ण पूर्व जन्म में भाई-बहन थे। उसकी राखी के प्रति अपनी वचनबद्धता को कृष्ण कैसे भूल सकते थे।

भारतीय संस्कृति में कथा, पूजा एवं विभिन्न संस्कारों के समय रक्षा सूत्र बांधने का विशेष महत्व है। रक्षा के तीन सूत्र होते हैं जिन्हें तीन बार लपेट कर अधोलिखित मंत्र के साथ बांधा जाता है।

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः

तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ।।

इसका भावार्थ है कि जिस प्रकार लक्ष्मी जी ने राजा बली के हाथ में रक्षा सूत्र बांध कर अपने वचन से उन्हें बांध लिया उसी तरह मैं भी आपको अपनी रक्षा के लिए बांधती हूं।

इस रक्षा मंत्र के मूल में जो कथा आती हैं वह इस प्रकार हैं-

दैत्यराज राजा बलि विष्णु का अनन्य भक्त था। एक बार देवराज इंद्र जब युद्ध में बली को नहीं हरा पाए तो वे मदद के लिए विष्णु भगवान के पास गए। विष्णु ने इंद्र बलि के बीच समझौता कराते हुए बलि को इंद्र की ही तरह पाताल लोक का एकछत्र राज्य सौंपा और उसे अमरता का वरदान देते हुए पाताल लोक में उसके राज्य की रक्षा करने के लिए अपने वैकुठ के राजपाट को छोड़कर स्वयं आने का वचन दिया। माता लक्ष्मी चाहती थी. कि विष्णु वैकुंठ वापस जाएं। इसी मंशा को लेकर माता लक्ष्मी भी एक ब्राह्मणी का देश बनाकर राजा बलि के पास गई और उनसे अनुरोध किया कि मेरे पति किसी जरूरी काम से बाहर देश की यात्रा पर गए हैं जब तक वह लौट नहीं आते. मैं आपकी शरण में रहना चाहती हूं। बली ने ब्राह्मणी का प्रस्ताव खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर लक्ष्मी जी ने बलि की सुख समृद्धि की कामना के लिए उसकी कलाई में राखी बांधी। ब्राह्मणी का आत्मीय व्यवहार बलि के अंतरतम को छू गया और उसने मन से ब्राह्मणी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया तथा राखी के बदले में उपहार स्वरूप कुछ मांगने को कहा। तब माता लक्ष्मी ने अपनी असली पहचान बताई और अपने वहां रुकने का कारण बताते हुए कहा कि वह अपने पति के साथ बैकुंठ वापस जाना चाहती है। बलि ने उसी समय विष्णु से वैकुंठ जाने का अनुरोध कर अपनी बहन को दिए वायदे को पूरा किया। कहा जाता है कि इसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनों को घर में आमंत्रित कर राखी बंधवाने का प्रचलन चल पड़ा।

रक्षा बंधन की पावनता से यमलोक भी अछूता नहीं है। इस दिन मृत्यु के देवता यम को उनकी बहन यमुना ने राखी बांधी और अमर होने का वरदान दिया। यम ने इस पावन दिन के महत्व को अक्षुण्ण रखते हुए घोषणा की कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से राखी बंधवाएगा और उसे रक्षा का वचन देगा वह हमेशा अमर रहेगा।

एक दूसरे को स्नेह, सद्भावना एवं कर्तव्य के सूत्र में पिरोने वाले इस त्योहार के पीछे यह भाव है कि समाज में रहने वाले लोग एक दूसरे के साथ मिलजुल कर रहे और जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की रक्षा के लिए आगे आएं।

यह त्योहार भाइयों को शक्तिशाली होने का बोध कराता है।

यह त्योहार सर्वधर्म समभाव का भी प्रतीक है। देश भर के हिंदू मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी बहने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री अपने मित्र बंधुओं को राखी बांधती हैं। जिन भाइयों की बहनें नहीं होती वे भी मुंहबोली बहन, चाहे वह किसी भी धर्म की हो, से बड़े प्रेम से राखी बंधवाते हैं।

इस त्योहार में भारतीय संस्कृति की अनूठी छवि के दर्शन होते हैं। सभी विश्व संस्कृतियों में केवल भारतीय संस्कृति ही ऐसी है जो पुरुषों को अपने विपरीतलिंगियों को मां और बहन की नजर से देखने की दृष्टि प्रदान करती है। इस भाव को सभी को नमन करना चाहिए।