बुधवार, 26 जुलाई 2017

ज्योतिष मे समय निर्धारण (गोचर)



ज्योतिष से किसी भी घटना के विषय मे फलित करना जितना आसान प्रतीत होता हैं उतना ही मुश्किल यह बताना होता हैं की घटना कब होगी ज्योतिष मे यह हमेशा से जोखिम भरा कार्य समझा जाता हैं | इसके लिए ज्योतिषी का विद्वान होने के अतिरिक्त अनुभवी भी होना ज़रूरी होता हैं |

हिन्दू ज्योतिष मे किसी भी कार्य को होने के लिए दशा व गोचर को महत्व दिया गया हैं जिसमे गोचर का अर्थ आकाश मे ग्रहो के भ्रमण से रखा गया हैं जबकि दशा कुंडली मे चन्द्र की स्थिति के द्वारा निर्धारित होती हैं वैसे तो दशाए बहुत सी हैं परंतु कलयुग मे विशोन्तरी दशा को ज़्यादा प्रभाव शाली माना व देखा गया हैं |

हम देखते हैं गोचर का प्रभाव व्यक्ति विशेष के मानसिक स्तर पर ज़्यादा पड़ता हैं इसलिए हमारे विद्वानो ने गोचर प्रभाव को चन्द्र लग्न से देखने की उपयोगिता बताई हैं फलदीपिका के 26वे अध्याय मे स्पष्ट रूप से कहाँ गया हैं की सभी लग्नों मे गोचर प्रभाव हेतु चन्द्र लग्न श्रेष्ठ होता हैं |चन्द्र को लग्न मानकर ही अन्य ग्रहो की स्थिति अनुसार गोचर प्रभाव देखना चाहिए |

दीर्घकालीन कालीन ग्रह शनि व गुरु का प्रभाव विशेष रूप से देखा जाना चाहिए गुरु का गोचर विशेषकर अपनी दशा मे बहुत शुभता प्रदान करता हैं जन्मकालीन चन्द्र से गुरु का 5,7,9,11 भावो मे गोचर जातक को आशावादी दृस्टिकोन प्रदान करता हैं यदि गुरु गोचर मे सप्तमेश से त्रिकोण मे हो तो विवाह करवा सकता हैं तथा पंचमेश से त्रिकोण मे होतो संतान जन्म का करवा सकता हैं |

शनि की सादेसाती भी गोचर मे विशेष प्रभाव दर्शाती हैं जन्मचन्द्र से शनि का 12वे पहले व 2रे गोचर जो की साढ़ेसात वर्ष का होता हैं सादेसाती कहलाता हैं जातक को जीवन मे विशेष महत्व रखता हैं चन्द्र से 12वे गोचर होने पर शनि सगे सम्बन्धियो की हानी,चिड़चिड़ापन,लडाई इत्यादि,चन्द्र लग्न से शनि का गोचर होने पर शारीरिक कमजोरी,नौकरी छूटना तथा विदेश यात्रा तथा चन्द्र लग्न से 2रे भाव मे शनि का गोचर होने पर धनसंपत्ती की हानी,व्यर्थ भ्रमण जैसे फल प्रदान करता हैं ऐसे मे दशा शुभ होतो इन फलो मे कमी तथा दशा अशुभ होने पर इन फलो मे अधिकता भी देखि जाती हैं 2.7.10.11 लग्नों मे शनि अशुभता प्रदान नहीं करता कुल मिलकर साढ़ेसाती जातक का घमंड तोड़ उसे आध्यात्मिकता प्रदान करती हैं |

गुरु शनि के अतिरिक्त अन्य ग्रहो का गोचरीय प्रभाव इतना महत्व नहीं रखता परंतु फिर भी कुछ अन्य ग्रह जैसे सूर्य,मंगल,का प्रभाव भी आकस्मिक रूप से देखा जाना चाहिए जैसे यदि षष्ट भाव प्रभावित हो दशा अंतर्दशा भी उससे संबन्धित चल रही होतो जिसे ही मंगल का गोचर षष्ट भाव से होगा स्वास्थ्य की हानी अवश्य होगी | इसी प्रकार यदि दशा सही हो और पद प्राप्ति का समय चल रहा हो तो जैसे ही सूर्य का गोचर जन्मकालीन चन्द्र से 3,6,11 भाव से होगा तब पद प्राप्ति होगी ऐसा समझना चाहिए |

राहू केतू का गोचर ध्यान से देखा जाना चाहिए राहू घमंड अथवा अकड़ को तोड़ता हैं वही केतू हमारी सोच पर प्रभाव डालता हैं राहू जब जन्म कालीन सूर्य पर से गोचर करे तब राजनीतिक गिरावट का सामना घमंड के कारण करना पड़ता हैं जबकि केतू का सूर्य से गोचर साथियो द्वारा आप पर भरोसा ना किए जाने के कारण आपको हटाया जाना होता हैं जिस कारण जातक मानसिक रूप से भयभीत रहने लगता हैं इसी प्रकार राहू का संवेदनशील भावो से गोचर जातक को विदेशी प्रभाव का अंधा लगाव तथा केतू का गोचर अपने ही सामाजिक दायरे मे लगाव प्रदर्शित करता हैं |
कई मायने मे ग्रहो का गोचर जातक विशेष पर अपना शुभाशुभ प्रभाव डालता हैं यहाँ गोचर से भी ज़्यादा जातक की सोच ही किसी भी कार्य को संपादित करती-कराती हैं |

फलदीपिका के अनुसार ग्रहो का गोचर प्रभाव-

1)ग्रह जो अशुभ प्रभाव दे रहा हो यदि शुभ ग्रह से देखा जा रहा हो अथवा ग्रह जो शुभ प्रभाव दे रहा हो यदि अशुभ ग्रह से देखा जा रहा हो अपना प्रभाव दे पाने मे असमर्थ हो जाता हैं |

2)अशुभ भाव का स्वामी यदि गोचर मे ऊंच,स्वग्रही होतो बुरा प्रभाव नहीं देता शुभ राशि व शुभ भाव मे ग्रह अपना शुभफल देता हैं |

3)ग्रह अपने शुभ भाव से गुजरते हुये यदि नीच,शत्रु राशि या ग्रहण मे होतो अपना फल नहीं दे पाता परंतु अशुभ भाव मे होतो अशुभ फल ज़रूर देता हैं |

4)गोचर प्रभाव दशा अंतर्दशा के ग्रहो के संबंध मे देखना चाहिए दशनाथ के 6,8,12 भावो से  पाप ग्रहो का गोचर अशुभ प्रभाव तथा गुरु का दशा नाथ से संबंध शुभफल देता हैं |

5)दशा अंतर्दशा मे ग्रह अपने स्थित भावो से संबन्धित ही फल प्रदान करता हैं जैसे दशम भाव मे स्थित ग्रह अपने गोचर से पद प्राप्ति,नौकरी अथवा सम्मान दिलवा सकता हैं |

6)ग्रहो के प्राकृतिक कारकत्वों का फल भी दशा अंतर्दशा मे मिल सकता हैं जैसे शुक्र सप्तमेश होने पर अपनी दशा अंतर्दशा मे मे विवाह करवा सकता हैं चाहे वह सप्तम भाव से सीधा संबन्धित हो या ना हो |

7)ग्रह अपने नक्षत्र स्वामी के द्वारा भी अपने फल प्रदान कर सकते हैं विशेषकर राहू केतू ऐसा ही करते हैं |


     

मंगलवार, 18 जुलाई 2017

राशि विशेष



1)1,5,9, राशि मे जन्मे जातक कर्मशील,दृढनिश्चयी व गतिमान होते हैं |

2)2,6,10 राशि मे जन्मे जातक मेहनती,धैर्यवान,संतोषी स्वभाव से रूखे होते हैं |

3)3,7,11 राशि मे जन्मे जातक कल्पनाशील,बुद्दिमान,विचरवान व अनुशासनप्रिय होते हैं |

4)4,8,12 राशि मे जन्मे जातक बातुनी,स्वाभिमानी,मित्रप्रेमी,संदेही पृवृति के होते हैं |

5)1,4,7,10 राशि वाले चंचल व परिवर्तन को चाहने वाले होते हैं |

6)2,5,8,11 राशि वाले स्थिर व परिवर्तन विरोधी होते हैं |

7)3,6,9,12 राशि वाले एक समय मे एक से अधिक कार्य करते हैं तथा अनिर्णय के शिकार रहते हैं |


8)1,2,4,9,10 राशि मे पाप कर्म करने चाहिए तथा इन राशियो मे ग्रह अपनी दशा के अंत मे अपना प्रभाव देता हैं | जबकि 3,5,6,7,8,11 राशि मे शुभ कर्म करने चाहिए तथा ग्रह इन राशियो मे अपनी दशा के आरंभ मे ही अपना प्रभाव देता हैं |

रविवार, 16 जुलाई 2017

अनुभव ....7



11/7/2017 मंगलवार आज हमने 18 कुंडलियाँ देखी जिनमे से कुछ इस प्रकार थी |

6/5/1983 21:15 बुलंदशहर उत्तर प्रदेश वृश्चिक लग्न मे जन्मे इस जातक की कुंडली मे लग्नेश मंगल व कर्मेश सूर्य पर चतुर्थेश शनि का प्रभाव हैं तथा शनि ऊंच का भी हैं सूर्य शुक्र के नक्षत्र मे हैं जो स्पष्ट रूप से जातक का कैरियर लोहे से संबन्धित तथा वाहन आधारित बता रहा हैं हमने जातक के घर से आई बड़ी बहन से पूंछा की क्या जातक रेलवे मे हैं तो उसने हाँ मे जवाब दिया,हमने कहा की इसके विवाह की क्या स्थिति हैं तो बहन ने कहा की विवाह अभी तक हुआ नहीं हैं सीलिए तो आपसे मिलने आए हैं | हमने उसे कुछ उपाय तो दिये ही साथ साथ यह भी बताया की इसके खानदान मे शुक्र ग्रह का पित्रदोष हैं उसका निवारण अवश्य करे अन्यथा स्त्री संबन्धित परेशानियाँ लगी रहेगी |

28/11/1980 8:15 पटना धनु लग्न मे जन्मी इस जातिका की पत्री मे पंचमेश मंगल लग्न मे हैं तथा लग्नेश गुरु शनि (द्वितीयेश तृतीयेश) संग कर्म स्थान मे हैं जिससे जातिका का शिक्षा व वाणी से संबन्धित व्यसाय स्पष्ट नज़र आता हैं साथ ही साथ सप्तमेश बुध मृत अवस्था मे शुक्र संग एकादश भाव हैं सप्तम भाव मे मंगल और शनि की दृस्टी भी हैं तथा भोग कारक शुक्र राहू के नक्षत्र मे हैं जिससे जातिका के विवाह ना होने की पुष्टि होती हैं | ज्ञात करने पर पता चला की जातिका पेशे से शिक्षिका हैं तथा अब तक उसका विवाह नहीं हुआ हैं | हमने बताया की जैसे ही गुरु तुला राशि मे प्रवेश करेगा जातिका के विवाह की संभावना प्रबल हो जाएगी क्यूंकी गुरु जब पत्रिका के एकादश भाव अर्थात तुला राशि मे गोचर करेगा तो वह सप्तमेश बुध व भोग कारक शुक्र के ऊपर से गुजरेगा तथा सप्तम भाव पर दृस्टी भी प्रदान करेगा जिससे जातिका का विवाह निश्चित होता दिख रहा हैं वही यदि दशा को देखे तो जातिका को अक्तूबर 2017 से मई 2018 के बीच चन्द्र मे मंगल की दशा आरंभ होगी मंगल की सप्तम भाव पर दृस्टी हैं तथा चन्द्र अष्टमेश होकर राहू संग अष्टम भाव मे ही हैं |

   

शुक्रवार, 14 जुलाई 2017

किशोर फलित


1)कोई ग्रह अपने से आठवे भाव मे हो तो अपने भाव के शुभ फल नहीं देता हैं जैसे मेष लग्न की कुंडली मे शुक्र (सप्तमेश) यदि दूसरे भाव (अपने से अष्टम) मे हो तो दाम्पत्य जीवन मे कुछ न कुछ परेशानी अवश्य होती हैं |

2)ग्रह तीन प्रकार से अपना फल प्रदान करते हैं प्रकृति अनुसार,कारक अनुसार तथा कुंडली मे स्थित अपने भाव अनुसार जैसे यदि मंगल लग्न मे हो तो व्यक्ति गुस्सेवाला व उत्तेजित (प्रकृति अनुसार),भाईयो व मित्रो वाला (कारक अनुसार) तथा कुंडली मे जिन भावो का स्वामी हैं उन भावो के अनुसार फल देने वाला होगा |

3)जिस भाव का स्वामी छह,आठ या बारहवे भाव मे हो या जिस भाव मे इन भावो का स्वामी बैठा हो उस भाव से संबन्धित वस्तु प्राप्त भी हो जाये तो उससे सुख की अनुभूति नहीं होती हैं जैसे पंचमेश यदि अष्टम भाव मे हो या अष्टमेश पंचम भाव मे हो तो संतान होने पर उससे कष्ट भी प्राप्त होते हैं |

4)यदि द्वितीयेश व दूसरा भाव शुभ अवस्था मे हो तो जातक अपने कुटुंब वासियो अर्थात माता-पिता,भाई-बहन,पत्नी व संतान सभी को सहयोग देगा व उनसे सहयोग भी प्राप्त करेगा भले ही इन सब से जुड़े हुभाव निर्बल ही क्यू ना हो |

5) यदि दूसरा भाव व उसका स्वामी कमजोर हो तो जातक माँ-बाप, भाई-बहन,संतान,पत्नी इत्यादि का सुख सहयोग नहीं प्राप्त कर पाता हैं भले ही इन सबसे जुड़े भाव व भावेश शुभ अवस्था मे ही क्यू ना हो इन सभी से उसे वैचारिक या देशकालज परिस्थितियो के कारण दूर रहने पड़ता हैं और वह भी संकीर्ण दायरे मे रहने के कारण इन सबसे सुख सहयोग नहीं प्राप्त कर पाता |

6)लग्नेश जिस भाव मे जाएगा उसकी वृद्दि करेगा |

7)3,6,11 भावो मे पाप ग्रह शुभफल प्रदान करते हैं |

8)एकादश भाव मे सभी ग्रह शुभ फल देते हैं |

9)किसी भी भाव मे स्थित ग्रह के मुक़ाबले उस भाव पर दृस्टी देने वाले ग्रह का प्रभाव अधिक होता हैं |


10)पाप ग्रह की दृस्टी से पाप ग्रह का दुष्प्रभाव अधिक व शुभ ग्रह का शुभ प्रभाव कम हो जाता हैं |

शनिवार, 8 जुलाई 2017

मंगल चन्द्र केतू ...........आत्महत्या


1)16/3/2017 दिल्ली के द्वारका इलाके मे एक फौजी ने अपने खिलाफ जांच पड़ताल होने के कारण फांसी लगाई इस दिन मंगल की चन्द्र पर दृस्टी हैं चन्द्र राहू के नक्षत्र मे हैं राहू केतू के सामने हैं |

2)19/3/2017 भुवनेश्वर उड़ीसा मे एक कोबरा कमांडो ने अवसाद कारण स्वयं को गोली मार ली | धनबाद मे एक पुलिस कांस्टेबल ने पत्नी से विवाद होने से अपना गला काटकर आत्महत्या करी वही हैदराबाद मे एक छात्र ने पढ़ाई के दवाब के कारण अपने हॉस्टल की इमारत से कूदकर आत्महत्या करी इस पूरे दिन मंगल केतू के नक्षत्र मे स्थित होकर चन्द्र को देख रहा हैं |

3)20/3/2017 दिल्ली के आजादपुर मे एक 50 वर्षीय नौकरीपेशा व्यक्ति ने अपने मालिक से परेशान होकर मेट्रो से कटकर अपनी जान दी इस दिन मंगल व चन्द्र केतू के नक्षत्र मे हैं |

4)6/5/2017 मोदी नगर मे प्रेम प्रसंग कारण जहां एक युवक ने फांसी लगाई वही एक अन्य युवक ने ग्रहकलेश कारण फांसी लगाई इस दिन केतू मंगल के नक्षत्र मे हैं वही मंगल चन्द्र के नक्षत्र मे हैं |

5)12/5/2017 को अशोकनागर दिल्ली मे एक गार्ड ने तीन लोगो को मारने के बाद स्वयं भी खुद को गोली मार ली इस दिन मंगल चन्द्र आमने सामने हैं तथा केतू मंगल के नक्षत्र मे हैं |

6)13//2017 जयपुर मे एक प्रेमी जोड़े ने पेड़ से फांसी लगाकर अपनी जा दी वही कोटा मे एक युवक ने खाई मे कूदकर आत्महत्या करी इस दिन भी  मंगल चन्द्र आमने सामने हैं तथा केतू मंगल के नक्षत्र मे हैं |

7)15/5/2017 को मोदिनगर मे एक मजदूर ने रेल से कटकर अपनी जान दी इस दिन मंगल की चन्द्र पर दृस्टी हैं तथा केतू मंगल के नक्षत्र मे हैं |

8)18//2017 को रेवरी मे प्रेमी जोड़े ने रेल से कटकर अपनी जान दी इस दिन मंगल चन्द्र व केतू तीनों मंगल के ही नक्षत्र मे हैं |

9)2/7/2017 को मध्य प्रदेश के 2 किसानो ने आत्महत्या करी इस दिन चन्द्र व केतू दोनों मंगल के ही नक्षत्र मे हैं |




गुरुवार, 6 जुलाई 2017

अनुभव ...6



1/7/2017 शनिवार का दिन आज हमने 35 कुंडलियाँ देखी जिनमे से कुछ इस प्रकार से थी |

20/1/1988 14:55 दिल्ली मे वृष लग्न मे जन्मे इस जातक की कुंडली देखते ही हमने कहा की क्या कोई गुप्त काम करते हो तो जातक ने कहा की मैं एक्साइज़ विभाग मे हूँ हमने जानना चाहा की क्या पिता का न्याय अथवा धर्म के क्षेत्र से कोई संबंध हैं तो उसने बताया की उसके पिता सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो चुके हैं | सप्तम भाव मे मंगल होने से तथा मंगल की शुक्र लग्नेश पर दृस्टी होने से हमने विवाह के विषय मे जानना चाहा तो उसकी माताजी ने बताया की अभी विवाह नहीं हुआ हैं उसी के विषय हमे आपसे उपाय चाहिए हमने कुंडली देखते हुये उन्हे बताया की इसका प्रेमविवाह होने की प्रबल संभावना हैं तथा कन्या इससे उम्र मे बड़ी हो सकती हैं और जिस जगह यह काम कर रहा हैं कन्या वही होनी चाहिए इस पर माताजी ने कहा की जिस लड़की से यह विवाह करना चाहता हैं वो इसी के ऑफिस मे काम करती हैं पर वो अभी विवाह करना नहीं चाहती हमने उन्हे समझाया की इस लड़के का विवाह 31वे वर्ष मे होना दिखता हैं अत: कोई जल्दबाज़ी ना करे 2018-2019 मे इसका विवाह निश्चित रूप से हो जाएगा |

27/9/1978 11:10 रुड़की मे वृश्चिक लग्न मे जन्मे इस जातक से हमने यह जानना चाहा की पत्नी का क्या हाल हैं तो जातक ने बताया की उसका तलाक हो चुका हैं उसकी कुंडली को ध्यान से देखने पर सारा माजरा समझ मे आ गया तब हमने पूंछा की क्या उस पत्नी को दोबारा से लाना चाहते हो इस पर उसने बताया की कई बार बुलाने पर भी वो अब मेरे साथ रहना नहीं चाहती इस पर हमने कहा की ग़लती भी तो तुम्हारी हैं तुमने अन्य स्त्री के कारण उस को तलाक दिया था तो अभुगतो,इस पर उसने कहा की आचार्य जी मेरे साथ ऐसा अक्सर होता हैं की स्त्रीया मेरे जीवन मे आती रहती हैं जिनसे मेरे संबंध बड़ी आसानी से बन जाते हैं | कुंडली मे इस तरह के योग विधमान थे जो उसकी बात को सही बता रहे थे | हमने उसे बताया की सितंबर 2017 के बाद फिर से अपनी पत्नी को मनाने की कोशिश करना तब बात बन सकती हैं यदि बात ना बने तो एक वर्ष के भीतर दूसरा विवाह प्रस्ताव स्वीकार कर लेना चाहिए |

9/3/1981 6:28 जौनपुर कुम्भ लग्न मे जन्मी जातिका की पत्रिका देखते ही हमने जानना चाहा की क्या उसने वकालत पढी हैं उसने कहा की उसने वकालत बीच मे ही छोड़ दी थी | हमने कहा की तुम्हारा तलाक हो गया की नहीं उसने कहा जी मेरा तलाक हो चुका हैं | अब इससे पहले की हम यह पूंछते की क्या किसी अन्य से संबंध बने हुये हैं उसने स्वयं ही हमे बता दिया की उसका पिछले डेढ़ साल से किसी से प्रेम संबंध चल रहा हैं और वो उससे गुण मिलान करवाने के लिए ही हमारे पास आई हैं |

1/11/1979 11:14 बागपत धनु लग्न मे जन्मे इस जातक से हमने कहा की क्या आप अस्पताल अथवा कोर्ट से संबन्धित काम करते हैं जिसमे आपकी पत्नी भी साथ मे रहती हैं उन्होने हँसते हुये कहा की हम दोनों पति पत्नी डॉक्टर हैं | कुंडली के पंचम भाव व पंचमेश पर दृस्टी डालते ही हमने उनकी संतान के बारे मे जानना चाहा तो उन्होने कहा की संतान अभी तक नहीं हैं विवाह को 6  साल हो गए हैं | इस पर हमने उनकी पत्नी की कुंडली देखनी की इच्छा जताई जो 22/9/1979 2:05 मेरठ कर्क लग्न की थी जिसका पंचमेश मंगल नीच का होकर शनि के नक्षत्र मे था शनि राहू से पीड़ित था तथा संतान कारक गुरु केतू के नक्षत्र मे राहू शनि के साथ ही था हमने उनसे कहा की आप दोनों डॉक्टर हो और आपको नहीं पता की इनकी "ट्यूब्स ब्लॉक" हैं जिससे इनके गर्भ धारण   की संभावना थोड़ी कम दिखती हैं इस पर उन्होने कहा की इलाज चल रहा हैं और वो अब टेस्ट ट्यूब शिशु के बारे मे सोच रहे हैं हमने उन्हे कुछ ज्योतिषीय उपाय तो दिये ही साथ ही कुछ अन्य सावधानिया समझाकर अगले एक वर्ष तक का समय इंतज़ार करने को कहा देखे आगे प्रभु क्या करते हैं |


सोमवार, 3 जुलाई 2017

स्त्री पत्रिका मे लग्नेश का सप्तम मे होना


भारतीय समाज मे महिलाओ को वैवाहिक अथवा काम संबंधो की दृस्टी से मर्यादित व संतुलित जीवन जीने के लिए भारतीयो विद्वानो ने हमारे रहन सहन व रूढ़िवादी सोच के चलते उतने अधिकार प्रदान नहीं किए हैं जितने की पुरुषो को दिये गए हैं जिस कारण समाज मे कुछ विरक्तियाँ भी आई हैं | अक्सर कभी कभार हमें ऐसी घटनाए देखने सुनने को मिल जाती हैं जिसमे स्त्री ने अपने अनुचित व अमर्यादित संबंधो के कारण पुरुष को छोड़ दिया अथवा उसकी हत्या कर दी |

ज्योतिषीय दृस्टी से देखे तो तो ऐसे बहुत से कारण हो सकते हैं जिनसे किसी भी स्त्री को सम्पूर्ण वैवाहिक अथवा काम सुख उसके जीवन साथी से प्राप्त नहीं हो पाता परंतु यहाँ हम केवल उन स्त्रीयो की यौन आदतों का अध्ययन करने का प्रयास इस लेख के माध्यम से करेंगे जिसमे उनका लग्नेश सप्तम भाव मे गया हुआ हैं यह आप सब जानते ही हैं ऐसा होने का अर्थ हैं जातिका स्वयं पुरुष के पास गयी हुई हैं अथवा उसका वरण करना चाहती हैं |

आइए जानते हैं की जब किसी स्त्री की पत्रिका का लग्नेश अथवा लग्न का स्वामी उसके सप्तम भाव मे गया होतो क्या होता हैं |

मेष लग्न मे लग्नेश मंगल का सप्तम भाव मे होना स्त्री जातक को आकर्षक,चुंबकीय व्यक्तित्व देता हैं ऐसी स्त्री खुले विचारो की होने से स्वयं की मर्जी से अपना साथी चुनना पसंद करती हैं यदि मंगल पीड़ित होतो उसका पति क्रूर व घमंडी किस्म का होता हैं जो कानून या विज्ञान के क्षेत्र मे अच्छा हो सकता हैं ऐसी स्त्री स्वयं भी नृत्यगान की शौकीन होती हैं यदि पति का मंगल पीड़ित ना होतो खूब धन संपत्ति पाटी हैं पीड़ित होने पर लड़ाई वाद-विवाद अथवा पति की शीघ्र मृत्यु होती हैं |

वृष लग्न मे लग्नेश शुक्र सप्तम भाव मे होने पर स्त्री कामातुर,विवाह के बाद खर्चीली,विवाह जल्दी करने वाली, शुक्र पीड़ित होने पर विवाह विलंब होता हैं अथवा पति बीमार रहता हैं  तथा ऐसी स्त्री विवाह करने से हानी पाती हैं |

मिथुन लग्न मे लग्नेश बुध सप्तम मे होने से स्त्री दूर के व्यक्ति से विवाह करती हैं,स्वभाव से अच्छी होती हैं लेखक,वकील अथवा अध्यापक हो सकती हैं तथा जातिका स्वयं का व्यापार करने वाली भी हो सकती हैं,बुध के पीड़ित होने पर उसके कार्य मे बाधा,पति से धोखा,सम्बन्धियो से हानी,देश विदेश मे भटकाव जैसे अशुभफल भी प्राप्त होते हैं |

कर्क लग्न मे लग्नेश चन्द्र सप्तम भाव मे होने से ऐसी स्त्री पति के द्वारा संपत्ति की प्राप्ति करती हैं उसे अस्पताल से आकर्षण रहता हैं वह स्वयं डॉक्टर अथवा नर्से भी हो सकती हैं ऐसी स्त्री व्यापारिक सांझेदारी के लिए शुभ,वफादार नौकर पाने वाली,सामाजिक कार्यो मे बढ़ चढकर हिस्सा लेने वाली होती हैं चन्द्र के पीड़ित होने पर पति के गुस्से की शिकार,नौकर की तरह रहनेवाली,पैसे की लोभी पर ये ना जाने की पैसा कैसे कमाए चन्द्र यदि अधिक पाप प्रभाव मे होतो समलैंगिक भी हो सकती हैं |

सिंह लग्न मे लग्नेश सूर्य सप्तम भाव मे होने से स्त्री बड़े बुजुर्गो की चाह रखने वाली,कोई ना कोई आभूषण अवश्य अपने संग रखने वाली,विवाह से पहले देर तक सगाई अथवा पाश्चात्य जगत के अनुसार लिव-इन मे रहने वाली,सूर्य यहाँ स्वाधीनता व दृदता देता हैं जिस कारण स्त्री का झुकना मुश्किल होता हैं इसका हृदय व दिमाग खतरनाक अनुमान लगाने मे दक्ष होता हैं व्यापार मे हानी होती हैं ऐसी स्त्री कला,शिल्प अथवा कानून मे रुचि अवश्य रखती हैं यदि सूर्य अशुभ होतो पति बूढ़ा अथवा नपुंसक प्राप्त होता हैं |

कन्या लग्न मे लग्नेश बुध सप्तम भाव मे होने से स्त्री को संतुष्टि भरा विवाह,वार्ता करने की प्रकृति वाली,कपड़ो की शौकीन अथवा फ़ैशन डिजाइनर,आजकल की मॉडल्स,पति का व्यापार संभालने वाली,स्वयं वाहन चलाने वाली,अपने से जवान पुरुष साथी की चाह रखने वाली होती हैं यदि बुध पीड़ित होतो ऐसी स्त्री आवारा व बदचलन,घर का काम नहीं करने वाली,अपने ग़लत फैसलो से नुकसान करनेवाली तथा जल्दबाज़ व अधीर होने पर गुप्त संबंध बनाने को लालायित रहने वाली होती हैं |

तुला लग्न मे लग्नेश शुक्र सप्तम भाव मे होने पर पति के माले मे भाग्यवान स्त्री बनाता हैं जो जीवन का सही आनंद भोगती हैं,ऐसी स्त्री दूसरों के लिए अनुकरणीय,चित्रकला व संगीत मे दक्ष,सबका साथ चाहने वाली,खूब धन दौलत व तरक्की पाने वाली होती हैं शुक्र के अशुभ प्रभाव होने पर इके विपरीत पति से लड़ने-झगड़ने वाली उससे अलगाव रखने वाली होती हैं |

वृश्चिक लग्न मे लग्नेश मंगल के सप्तम भाव मे होने पर ऐसी स्त्री पुरुषो का संग जल्दी चाहने वाली होती हैं जिस कारण विवाह जल्दी करना चाहती हैं ऐसे मे यदि गुरु अष्टम भाव को ना देख रहे होतो पति की जल्दी मौत हो जाए अथवा स्त्री के अधिकार के प्रभाव कारण तलाक हो जाता हैं शनि की दृस्टी होने पर जातिका अच्छी कलाकार हो सकती हैं जो हमेशा महत्वकांक्षी रहकर ऊपर बढ्ने की इच्छुक रहती हैं यदि मंगल,शनि,सूर्य जैसे ग्रहो से संबन्धित होतो ऐसी स्त्री जुआरी व ठग भी हो सकती हैं |

धनु लग्न मे लग्नेश गुरु सप्तम भाव मे होने पर स्त्री का वैवाहिक जीवन खुशहाल होता हैं जिससे उसकी खूब तरक्की होती हैं,उसके रिश्ते भी बहुत अच्छे होते हैं उसके पास मकान,आभूषण व वाहन सबकुछ होता हैं,ऐसी स्त्री कुछ नया आविष्कार करना चाहती हैं यह लेखक,गणक अथवा प्रकाशक भी हो सकती हैं जिसका शरीर व दिमाग संतुलित होता हैं जो  धर्म व शास्त्र ज्ञाता होती हैं यदि गुरु पीड़ित होतो इन सबके विपरीत स्त्री का अनियोजित व बदलाव वाला स्वभाव होता हैं जो दुर्लभ वस्तु की चाह रखने वाली होती हैं तथा गुस्सा होनेपर खतरनाक साबित होती हैं जिसपर सट्टे आदि का इल्जाम भी लग सकता हैं |

मकर लग्न मे लग्नेश शनि सप्तम होने पर सीधा सरल वैवाहिक जीवन प्राप्त होता हैं कभी कभी विवाह मे देरी भी होती हैं,शुक्र संग होनेपर ऐसी स्त्री का धनी जातक से विवाह होता हैं यह स्त्री प्रकृति अनुसार शांत स्वभाव वाली होती हैं,यदि राजयोग हो अथवा शनि शुभ होतो विवाह बाद स्थिति मे सुधार होता हैं,पति विद्वान,स्थिर व कानून ज्ञाता होता हैं |शनि पीड़ित होने पर घर पर क्लेश,उत्तेजित व्यवहार करने वाली,रिश्तेदारों व मित्रो से भोग सुख चाहने वाली बुरी अवस्था मे समलैंगिक स्त्री भी हो सकती हैं |

कुम्भ लग्न मे लग्नेश शनि सप्तम होने पर जातिका हंसमुख व खुशदिल स्त्री होती हैं जिसके पास नुकसान रोकने की आतुरता होती हैं जो अपने ही दिल व दिमाग की मानने वाली दिखावटी घर चाहने वाली,खेल व कला से पूर्ण,समाज सेवा मे तत्पर,तेल,प्रकृतिक खनिज क्षेत्र मे कामयाब राजदूत होती हैं यदि शनि पीड़ित होतो ग़लत तरीके से धन कमाने वाली,ठगो व लुटेरो की संगत कर उनसे गुप्त संबंध बनाने वाली होती हैं यदि शुक्र अस्त होतो ऐसी स्त्री के कइयो से अनैतिक संबंध होते हैं |

मीन लग्न मे लग्नेश गुरु सप्तम भाव मे होने पर जातिका विदुषी व पढी लिखी,घरेलू विज्ञान मे दक्ष,अध्यापक,ईमानदार व सबमे श्रेस्ठ व सम्मानीय विवाह करने वाली होती हैं जिसके बाद सब इसके नियंत्रण मे चलता हैं,सबकी उम्मीदों पर खरी उतरती हैं यदि बुध शुक्र संबंध होतो कलाकार व संगीतज्ञ,पूर्वाभास की क्षमता वाली,धर्म॰अर्थ॰ काम मे पूर्ण यदि गुरु पीड़ित होतो जातिका घमंडी व अस्थिर प्रकृति वाली होती हैं जो चाहती हैं की लोग उसकी पुजा करे पति से अलग गैर मर्द संग रहे,गुप्त व अविश्वशनिय जीवन जीने वाली,विधवा वैयावृति करवाने की इच्छुक अथवा समलैंगिक के गुण वाली |

आजकल के भौतिकता वादी युग मे जहां तलाकदार ज़्यादा हैं व विवाह खतरे मे हैं 90% स्त्रीया भोग सुख की कमी कारण सुखी नहीं हैं ज्योतिष द्वारा यह जानकर की कौन सा साथी उसे पूर्ण भोग सुख दे सकेगा स्त्रीया सुखी वैवाहिक जीवन पा सकती हैं |