शुक्रवार, 22 मार्च 2013

छम छम करती होली आई


  
छम छम करती होली आई 
सर्दी की अब शामत आई
रंग अबीर संग ओर गुलाल 
मिलकर देखो मचाते धमाल

पानी भरे गुब्बारे पिचकारी 
भीगने की सब कर तैयारी
देख देख कर रंग लगाना

 किसी को न पेंट लगाना
चिप्स पकोड़े मिठाई गुजिया
 खूब मजे से खलो भईया
पर देखो हुडदंग ना करना 

न ही लड़ना न ही झगड़ना
गले मिलकर खेलो होली
 बनकर एक दूजे के हमजोली
होली यही संदेश दे जाती 
जीवन के रंग ही हैं साथी

रविवार, 17 मार्च 2013

माला को शुद्ध करने का संस्कार-


माला को शुद्ध करने का संस्कार-

पीपल के 9 पत्ते ज़मीन मे रखकर एक पत्ता बीच मे तथा शेष 8 कमल की तरह बनाकर बीच वाले मे माला रखे और अं आं इत्यादि सं हं पर्यंत समस्त स्वर व्यंजन का आनुनासिक उच्चारण का पंचगव्य से माला प्रक्षालन करे तथा सघोजात मंत्र पढ़कर उसे जल से धो ले |
ॐ सघो जातं प्रपघामी सघो जाताय वै नमो नमः
भवे भवे नाती भवे भवस्य मां भवोदभवाय नमः ||
फिर वामदेव मंत्र से चन्दन लेप करे ॐ वामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमो रुद्राक्ष नमः कल विकरनाय नमो बल विकरनाय नमः |
बलाय नमो बल प्रमथनाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोनमनाय नमः |
फिर अघोर मंत्र से धूप दान दे |
ॐ अघोरेभ्योsथेरेभ्यो घोर घोर तरेभ्य:म सर्वेभ्य: सर्व शर्वेभ्या नमस्ते अस्तु रुद्ररुपेभ्य: ||
फिर एक एक दाने पर सौ सौ ईशान मंत्र का जाप करे |
ॐ ईशान: सर्व विद्यानामीश्वर: सर्वभूतानां ब्रहमाधिपति ब्राह्मणोsधिपति ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदा शिवोम ||
फिर माला मे अपने इष्ट देवता की प्राण प्रतिष्ठा कर प्रार्थना करे |
माले माले महामालेसर्व तत्व स्वरूपिणी 
चतर्वस्त्वयी- न्यस्तस्तस्मान्मे सिद्दी दाभव: ||

गुरुवार, 14 मार्च 2013

काल सर्प और भारत


काल सर्प और भारत

जब सभी ग्रह राहू व केतू के मध्य मे होते हैं तब काल सर्प नामक योग/दोष का निर्माण होता हैं इस योग या दोष के विषय मे ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथो मे उल्लेख नहीं मिलता हैं परंतु पिछले कुछ सालो मे इसके विषय मे बहुत से ज्योतिषीय प्रचार व संचार माध्यमों के कारण यह तेजी से जाना व माना जाने लगा हैं |वास्तव मे राहू –केतू छाया ग्रह होते हैं जिसमे से राहू का नक्षत्र “भरणी” व केतू का नक्षत्र “अश्लेषा” हैं जिनके स्वामी देवता क्रमश;काल व सर्प माने जाते हैं जिससे इस शब्द “कालसर्प” का निर्माण होता हैं | इस योग अथवा दोष के विषय मे बहुत से मतभेद विद्वान जनो मे हमेशा ही रहे हैं कोई इसे बहुत ही शुभ मानता हैं तो कोई इसे बहुत ही अशुभ मानता हैं और कुछ विदजन तो इसके अस्तित्व को ही नकारते हैं |

15 अगस्त 1947 को जब भारत आज़ाद हुआ तब कालसर्प बना हुआ था जिससे भारत की कुंडली भी कालसर्प से ग्रसित मानी गयी उस समय जो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री (जवाहर लाल नेहरू ) बने तो उन्हे भी कालसर्प था तथा शपथ ग्रहण का मुहूर्त निकालने वाले विख्यात ज्योतिषी “सूर्य नारायण व्यास जी” को भी कालसर्प था |इस प्रकार से देखे तो भारतवर्ष की नियति मे ही कालसर्प दोष बंधा हुआ हैं हमने इसी आधार पर यह जानने का प्रयास किया की क्या वाकई यह योग भारत के लिए कोई खास महत्व रखता हैं या यूही इसको इतना बढ़ा चढ़ा कर बताया जाता हैं और हमे यह सुखद आश्चर्य हुआ की आज़ादी के बाद भारत के किसी भी क्षेत्र मे यदि हम देखे तो ज़्यादातर कालसर्प नामक इस योग मे जन्मे जातक ज़्यादा कामयाब हुए हैं जिससे कालसर्प नामक यह योग भारत हेतु बहुत शुभता दर्शाता हैं | प्रस्तुत लेख मे हम ऐसे ही कुछ व्यक्तियों के विषय मे जानकारी दे रहे हैं |

जवाहर लाल नेहरू,श्री चन्द्रशेखर,पी चिदम्बरम,श्री राजेश पायलट,सुश्री नजमा हेपतुल्लाह,मुलायम सिंह यादव,श्री भैरों सिंह शेखावत,डॉ अब्दुल कलाम,जसवंत सिंह,इन्द्र कुमार गुजराल,रामविलास पासवान,मोहनलाल सुखाडिया,मनोहर जोशी,शीला दीक्षित,सरदार वल्लभ भाई पटेल,गुलज़ारी लाल नन्दा,सुषमा स्वराज,चौधरी चरण सिंह,नारायण दत्त तिवारी,मोरारजी देसाई,सीताराम केसरी,मुरली मनोहर जोशी,शंकर दयाल शर्मा,श्री राम जेठमलानी,डॉ राधाकृष्णन,सर मिर्ज़ा इस्माइल,अब्दुल रहमान अंतुले,माधव राव सिंधिया,धीरु भाई अंबानी,हर्षद मेहता,रामकृष्ण डालमिया,रतन टाटा,शंकर राव चौहान,करुणाकरण,दिलीप कुमार,रेखा,लारा दत्ता,अनिल कपूर,स्मिता पाटिल,मधुबाला,प्रियंका चोपड़ा,शत्रुघ्न सिन्हा,सत्यजित रे,रजनीकान्त,उर्मिला,ऋषिकेश मुखर्जी,आशा भोंसले,वहीदा रहमान,लता मंगेशकर,अशोक कुमार,वी शांताराम,अभिजीत सावंत,सचिन तेंदुलकर,अजहरुद्दीन,सौरव गांगुली,अजय जडेजा,सरदार सिंह (हौकी ),श्री राम शर्मा आचार्य,कैलाश नाथ उपाध्याय(ज्योतिषी),सूर्य नारायण व्यास(ज्योतिषी),शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती,मुरारी बाबू (कथा वाचक),दलाई लामा,आचार्य रजनीश,महाप्रभु वल्लभाचार्य,अमृता प्रीतम,प्रकाशक धूमाल,दीनानाथ व्यास (शिक्षक),डॉ कमलनाथ,आदि इन सबके अलावा और भी बहुत से ऐसे जातक हैं जो भिन्न भिन्न क्षेत्रो मे न सिर्फ अपना बल्कि भारत वर्ष का नाम पूरी दुनिया मे रोशन कर रहे हैं |

शनिवार, 9 मार्च 2013

Nakshatra 2013 experience



क्या हैं सोलह श्रंगार


क्या हैं सोलह श्रंगार

–ऋग्वेद की दसवी पुस्तक की 33 से 85 ऋचाए  सौभाग्य के लिए किए जा रहे सोलह श्रंगारों पर आधारित हैं इनमे कहाँ गया हैं की सोलह श्रंगार घर मे सुख और समृद्दि की पुनर्स्थापना के लिए किए जाता हैं |

बिंदी-माथे पर लाल गोल चिन्ह |

सिंदूर-बालो के बीच सिंदूर की रेखा |

माँगटीका-बालो के बीच की रेखा पर पहने जाने वाला आभूषण |

काजल-पलको के किनारे पर लगने वाली काली रेखा |

नथ-इसे नाक मे पहनते हैं |

मंगलसूत्र-स्त्री विवाह बाद गले पर पहनती हैं |

कर्णफूल – इसे कान मे पहनते हैं |

मेहंदी,चूड़िया,बाजूबंद,कमरबंद,और सुहाग का जोड़ा |

आरसी – अंगूठे की रिंग |

पायल और बिछुए |

केशपाश –बालो मे लगाने का आभूषण |

अत्तर –सुगंधित पदार्थ अथवा परफ्यूम |

गुरुवार, 7 मार्च 2013

काल सर्प उपाए


काल सर्प उपाए-

शिवलिंग पर प्रतिदिन “ॐ नमः शिवाय “ मंत्र की एक माला जाप कर जल चढ़ाये |

काल सर्प सिद्ध यंत्र के सम्मुख नव नाग श्रोत अथवा सर्पसूक्त का पाठ प्रतिदिन करे |

राहू ग्रह की शांति हेतु पंडित से सवा लाख जाप कराये |

मोर पंख अपने घर पर रखे तथा नित्य महामृत्युंजय मंत्र या नाग गायत्री मंत्र का जाप किया करे |

वर्ष मे एक बार वजन बराबर कच्चा कोयला/रांगा धातु/जौ तेज पानी मे प्रवाह करे |

जौ सिरहाने रख कर सोये प्रात; पक्षियो को ड़ाल दे |

कुल देवता का पूजन करे व श्राद कर्म(पूर्वजो हेतु) किया करे |

हर अमावस्या को सत्यनारायण भगवान की कथा करे या कराये |

नाग पंचमी व शिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक करवाए |

काले कपड़े मे एक मुट्ठी काली उड़द बांधकर उस पोटली पर राहू मंत्र का यथा शक्ति जाप कर उसे दक्षिणा सहित दान करे या जल प्रवाह कर दे ऐसा 72 बुधवार तक करने से कालसर्प दोष का निवारण हो जाता हैं |

कालसर्प पीड़ित व्यक्ति यदि समर्थवान हो तो उसके द्वारा नाग मंदिर का निर्माण करवाने अथवा नाग प्रतिष्ठा करवाने से भी कालसर्प दोष की शांति हो जाती हैं |

पित्र -तर्पण के समय नारायण नाग बली श्राद व त्रिपण्डी नामक श्रादकर्म करवाने से भी इस दोष से मुक्ति मिल जाती हैं |

लग्नेश,पंचमेश,नवमेश,तीनों के रत्न अथवा सात,आठ,नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करने चाहिए |

पारद शिवलिंग (आधी किलो से दो किलो तक का) बनवा के उसका विधि विधान द्वारा पूजन अर्चन करना चाहिए |

राहू के यथाशक्ति जाप करने या करवाने चाहिए व नित्य 5 माला पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय का जप करना चाहिए |