शुक्रवार, 22 मई 2026

चरकारक (जैमिनी ज्योतिष)

जैमिनी ज्योतिष में,जन्म कुंडली में ग्रहों की डिग्री (अंश) के आधार पर तय होने वाले परिवर्तनशील संकेतकों को चर कारक कहा जाता है।

‎'चर' का अर्थ है 'चलने वाला' या 'बदलने वाला'। जहाँ सामान्य ज्योतिष में सूर्य हमेशा पिता और चंद्रमा हमेशा माता का सूचक (स्थिर कारक) होता है, वहीं चर कारक व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों के अंशों के अनुसार बदल जाते हैं।

7  प्रकार के चर कारक और उनके कार्य

‎कुंडली में सबसे अधिक अंश (0° से 30° के बीच) वाले ग्रह से लेकर सबसे कम अंश वाले ग्रह के क्रम में कुल 7 चर कारक निर्धारित होते हैं:

‎आत्मकारक सबसे उच्चतम अंश वाला ग्रह। यह आत्मा और स्वयं का प्रतिनिधित्व करता है। इसे कुंडली का राजा माना जाता है, जो जीवन के मुख्य उद्देश्य को दर्शाता है।

अमात्यकारक दूसरा सबसे उच्च अंश वाला ग्रह। यह व्यक्ति के करियर, आजीविका, बुद्धि और सफलता का सूचक है।

‎भ्रातृकारक तीसरा सबसे उच्च अंश वाला ग्रह। यह भाई-बहनों, गुरु और आपके साहस को दर्शाता है।

‎मातृकारक चौथा सबसे उच्च अंश वाला ग्रह। यह माता, संपत्ति, वाहन और मानसिक शांति का प्रतिनिधित्व करता है।

‎पुत्रकारक पाँचवाँ सबसे उच्च अंश वाला ग्रह। यह संतान, शिक्षा, बुद्धि और रचनात्मकता का सूचक है।

‎ज्ञाती कारक छठा सबसे उच्च अंश वाला ग्रह। यह संघर्ष, रोग, ऋण, शत्रुओं और रिश्तेदारों को दर्शाता है।

‎दाराकारक सबसे न्यूनतम अंश वाला ग्रह। यह जीवनसाथी (पति/पत्नी), वैवाहिक जीवन और साझेदारी का सूचक है।

‎कुंडली में इन कारको के संबंधों का अध्ययन कर फलादेश किया जाता है जैसे यदि आत्मकारक और अमात्यकारक का संबंध होतो जातक की अच्छी नौकरी हो सकती हैं,वही यदि पुत्रकारक व दाराकारक का संबंध होतो जातक का प्रेम विवाह  हो सकता है  !


बुधवार, 20 मई 2026

स्वास्थ्य के उत्तम उपाय

 


कोई भी रोग हो शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को दवाइयां शिवलिंग पर रखकर एक माला जाप " जूं सः" मंत्र या महामृत्युंजय का पूरे मंत्र की रुद्राक्ष माला से जाप करें। उसके बाद दवाइयों का सेवन आरंभ करें स्वास्थ्य जल्दी से सुधरने लगेगा।

अपने वजन के बराबर सात अनाज पिसवाएं उस पर गुड़ की एक डली रख दें। यह अनाज गौशाला में जाकर रोगी स्वयं गायों को खिलायें रोगी ठीक होने लगेगा। रोग ज्यादा तीव्र हो तो हर माह ऐसा करें।

मोती शंख में जल भर कर रखें। इसको अपने घर के मंदिर में रखें और दवाइयां मोती शंख में भरे जल से ही लें। रोगी जल्दी-जल्दी ठीक होगा

मंगलवार को गरीबों में गुड़ बांटें। हनुमान जी को लाल गुलाब की माला अर्पित करें।

संध्या के समय "ऊँ क्लीं कृष्णाय नमः" का रोज 1-3-5 माला जाप करें

रोगी के कमरे में एक कटोरी में केसर घोल कर रखें सात दिन बाद पानी बदल दें। पुराना जल पौधों में डाल दें I

 

मंगलवार, 19 मई 2026

दुर्भाग्य से पीछा छुड़ाने का टोटका :

 


सरसों के तेल में सिंके गेहूं के आटे पुराने गुड़ से तैयार सात पूए, सात मदार (आक) के फूल, सिन्दूर, आटे से तैयार सरसों के तेल का दीपक, पत्तल या अरंडी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात में किसी चौराहे पर रखकर कहें- 'हे मेरे दुर्भाग्य, तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूं, कृपा करके मेरा पीछा ना करना सामान रखकर पीछे मुड़कर देखें।

सोमवार, 18 मई 2026

संतान प्राप्ति के उपाय

 



बृहस्पतिवार को गेहूं के आटे की गोलियां बनाकर उसमें चने की दाल और थोड़ी हल्दी मिलाकर गाय को खिलायें

43 शुक्रवार आटे की लोई में पनीर मिलाकर गाय को खिलायें या शुक्रवार से आरंभ कर 43 दिनों तक यह प्रयोग लगातार करें संतान प्राप्ति की बाधा समाप्त होगी।

चांदी की बांसुरी राधा कृष्ण मंदिर में उनके चरणों में समर्पित करें

संतान गोपाल यंत्र की स्थापना करें सवा लाख संतान गोपाल मंत्र का जाप करें। इस प्रयोग के साथ दस मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

गुड़हल का एक फूल रोज खाली पेट 90 दिन तक खायें।

हरिवंश पुराण पति-पत्नी पढ़ें। एक पढें दूसरा सुनें।

श्यामा तुलसी के बीज 200 ग्राम पानी में उबाल कर उसका जल ग्रहण करें। उसमें धागे वाली मिश्री उबालकर ठंडा करके माहवारी के दिनों में लगातार ग्रहण करें।