बुधवार, 31 दिसंबर 2014

भारत का 66वा गणतन्त्र (2015)

भारत का 66वा गणतन्त्र

गणतन्त्र दिवस के 66वे साल की वर्ष कुंडली मे भारत 27 जनवरी 2015 तदानुसार गुरुवार शुक्लपक्ष अष्टमी तिथि वृश्चिक लग्न मे प्रवेश करेगा |

लग्नेश मंगल शुक्र (वर्षेश) सप्तमेश-द्वादशेश संग चतुर्थ भाव मे मुनथा द्वारा दृस्ट हैं मुन्थेश सूर्य तृतीय भाव (पड़ोस व साहस) मे तृतीयेश-चतुर्थेश शनि तथा द्वितीयेश-पंचमेश गुरु द्वारा दृस्ट हैं गुरु नवम,चन्द्र(नवमेश)षष्ठ,शनि लग्न,बुध(अस्ट्मेश–लाभेष) होकर सूर्य कर्मेश संग तृतीय भाव मे हैं तथा राहू केतू पंचम एकादश भाव मे हैं |

मुंथा सिंह राशि दशम भाव मे होने से राजकीय कार्यो मे सफलता,चुनावो मे विजय,कीर्ति तथा स्थान परिवर्तन,राजा से खुशी,कार्यो मे सिद्दी,यश वृद्दि तथ अनेक प्रकार के लाभ प्राप्ति के योग बन रहे हैं वही मुन्थेश सूर्य के तीसरे भाव मे होने से पराक्रम व ऊधमों मे वृद्दि,आय मे बढ़ोतरी,पड़ोसियो से समझौतो द्वारा आर्थिक लाभ,राजकीय पक्ष मे अनुकूलता जैसे फल मिलेंगे |

वर्षेश शुक्र होने से स्त्री वर्ग मे असंतोष,उद्योगो मे खर्च,स्त्रीयों द्वारा अपयश मिलने,स्त्री संबंधी कार्यो मे लाभ व परेशानी होने,सरकार द्वारा स्त्री संबंधी नए कानून बनाए जाने जैसे हालत भी बनेंगे तथा हर क्षेत्र मे महिलाओ की भागिता बढ़ेंगी |

66वे गणतन्त्र की कुंडली देखे तो ग्रह स्थिति भारत वर्ष को काफी अच्छे व सुखद भविष्य की और ले जाती प्रतीत हो रही हैं | शनि (चतुर्थेश-जनताकारक ) का लग्न मे होना तथा लग्नेश मंगल का चतुर्थ भाव (शनि राशि ) मे होना (परिवर्तन योग) जनता व सरकार का एक दूसरे पर पूर्ण भरोसा होना बता रहा हैं जिसके प्रभाव से सरकार जनता के लिए जनता से पुछकर ही हर कार्य करेगी ऐसा दिखता हैं वही सूर्य दशमेश पर भी शनि की दृस्टी यह भी बता रही हैं की जनता का राजा अथवा सरकार पर पूरा प्रभाव रहेगा और ऐसा होता दिख भी रहा हैं शनि की मुंथा,मुन्थेश व दशम भाव पर दृस्टी होने से जनता का प्रभाव हर प्रकार से अपने चुने हुये नेताओ पर रहेगा तथा सरकार द्वारा ज़रा सी ग़लती भी जनता बर्दाश्त नहीं करेगी वही सरकार भी जनता हेतु कुछ मामलो मे सख्त निर्णय लेगी | बुजुर्गो व निम्न वर्ग के लोगो का मान बढ़ेगा (शनि इन सभी का प्रतिनिधित्व करता हैं )

गुरु की लग्न पंचम व तीसरे भाव मे दृस्टी इस पूरे वर्ष भारत वर्ष पर धन,शिक्षा,व पराक्रम की निरंतर वृद्दि करती रहेगी | भारत विश्व भर मे खेल,तकनीक,संचार,रक्षा व शिक्षा के क्षेत्र मे बहुत अच्छा नाम कमाएगा जिससे भारत की नई पहचान पूरी दुनिया मे बनेगी वही रुपये की स्थिति भी काफी मजबूत होगी तथा विश्व भर मे भारत की पड़ोस संबंधी नीतयो का डंका बजेगा | सूर्य बुध का तीसरे भाव मे होना सरकार का लाभ हेतु पराकर्मी होकर साहसी व जोखिम भरे निर्णय लेना जिन पर जनता की सहमति तथा बुद्दिजीवी वर्ग का समर्थन होना निश्चित दिखता हैं |

चतुर्थ भाव मे शुक्र (सप्तमेश) विरोधी व विपक्ष का लग्नेश मंगल संग होना विरोधियो का सरकार द्वारा भयाक्रांत होना दर्शाता हैं व्यभिचार व घोटालो से भरा विपक्ष समय समय पर स्त्री वर्ग द्वारा सरकार को घेरने का प्रयास करेगा जिसमे स्त्री नेता प्रमुख रूप से असंतुष्टि के कारण सरकार अथवा राजा को घेरने का प्रयास करेगी चूंकि शुक्र वर्ष का स्वामी हैं इनमे विपक्ष मे बैठी कोई स्त्री ज़बरदस्त भूमिका निभाएगी | पंचम केतू शिक्षा क्षेत्र मे कुछ अलग नीतियाँ बनवाएगा संभवत: विदेशी शिक्षा का प्रभुत्व बढ़ेगा वही वक्री गुरु (पंचमेश) की दृस्टी पंचम भाव मे होने से पुरानी शिक्षा प्रणाली की वापसी हो सकती हैं (ग्रेडिंग प्रणाली हटाई जा सकती हैं ) भाग्येश चन्द्र का छठे भाव मे होकर व्यय भाव को देखना विदेशो से भाग्यवश लाभ प्राप्त करवाएगा तथा शीर्ष नेताओ की विदेशी यात्राये भी करवाएगा व्ययेश शुक्र लग्नेश मंगल संग चतुर्थ भाव मे होने से विदेशी व विदेश मे बसे भारतीय भारत की भूमि पर अपना काफी धन इत्यादि निवेश करेंगे तथा वापस भारत की और रूख करने की सोचेंगे |

नवम गुरु धर्म व शिक्षा का प्रसार बेहतरीन रूप से भारत वर्ष मे करवाएगा परंतु गुरु के वक्री होने से धर्म संबंधी कुछ ग़लत प्रचार व अफवाहे भी जन्म लेंगी तथा कुछ नए धार्मिक संगठन भी जन्म लेंगे |

लाभ भाव मे राहू का होना तथा लग्नेश बुध का दशमेश सूर्य संग तीसरे भाव मे शनि गुरु द्वारा दृस्ट होना व्यापारी भाइयो हेतु कोई नया कानून व नीतिया सरकार से लागू करवाएगा जिससे देश व व्यापारी वर्ग को आर्थिक लाभ होगा,शेयर बाज़ार नई ऊंचाइयो को छूएगा विदेशी आयात निर्यात समझौते मुख्य रूप से होंगे जिनसे देश को बहुत अधिक लाभ मिलने की समभावनाए बनेंगी | 

खेल जगत मे कई नए खेल व खिलाड़ियो का जन्म होगा परंतु फिल्म जगत मे अश्लीलता बढ्ने जैसे हालात बनेंगे फिल्म जगत से जुड़ा व्यवसाय मिला जुला रहेगा किसी बड़े अभिनेता या अभिनेत्री का कोई स्केण्डल इत्यादि भी खबर बन सकता हैं |          

बुधवार, 24 दिसंबर 2014

द्वादशांस का विचित्र नियम



द्वादशांस का विचित्र नियम

ज्योतिष के सभी छात्र जानते हैं की वर्ग कुंडलियों मे द्वादशांस का प्रयोग माता-पिता की आयु,उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर व उनसे प्राप्त होने वाले सुख आदि जानने के लिए किया जाता हैं महान ज्योतिषी श्री के॰एन राव इस द्वादशांस को जातक के ऊंच चेतना की प्रवृति जानने के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं |

द्वादशांस ज्ञात करने के लिए प्रत्येक राशि को 12 भागो मे बांटा जाता हैं जिसमे प्रत्येक भाग 2-30 अंश का हो जाता हैं इसी प्रकार ग्रहो को भी विभाजित कर जहां वह स्थित होते हैं वहाँ से उतने भाव आगे रख दिया जाता हैं जैसे यदि कोई ग्रह 8-02 अंश का होता हैं तो वह चतुर्थ द्वादशांस मे जाएगा अर्थात स्वयं के भाव से वह ग्रह चार आगे के भाव मे चला जाएगा |

द्वादशांस बनाने की विधि –
प्रथम द्वादशांस 0 से 2-30 अंश
दूसरा द्वादशांस 2-30 से 5-00 अंश
तीसरा द्वादशांस 5-00 से 7-30 अंश
चतुर्थ द्वादशांस 7-30 से 10-00’ अंश

इसी प्रकार पूरे 30-00 अंशो का 12 बराबर भागो मे बंटवारा कर 12 द्वादशांस प्राप्त किए जाते हैं |
इस द्वादशांस वर्ग का अध्ययन करते समय हमने पाया की ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों मे द्वादशांस के विषय मे एक सूत्र लिखा हुआ होता हैं |
“ केन्द्राशु शुभदा राजयोगफलप्रदा “
अर्थात स्वयं से केंद्र मे गया ग्रह ( द्वादशांस मे ) राजयोग प्रदान करता हैं |

हमने इसी सूत्र को आधार बनाकर यह जानने का प्रयास किया कि क्या वास्तव मे ऐसा होता हैं लगभग 300 कुंडलियों मे हमने यह सूत्र अपनी समझ के आधार पर लगाया और इस सूत्र को बिलकुल सही पाया इस सूत्र की सत्यता जानने के लिए हमें इसकी भूमिका को समझना पड़ेगा |

हम सभी जानते हैं की जन्मकुंडली का चतुर्थ व दशम भाव माता-पिता से संबन्धित होते हैं यदि इन दोनों भावो से घर अथवा सुख देखना होतो (चतुर्थ भाव) लग्न व सप्तम भाव पड़ेंगे और यदि इन्ही  भावो से कार्य अथवा कर्म देखना होतो (दशम भाव) क्रमश: सप्तम व लग्न ही पड़ेंगे यानि यह स्पष्ट रूप से कहाँ जा सकता हैं की माता-पिता के घर व कार्य के लिए हमें 4 व 10 के अतिरिक्त 1 व 7 भाव भी देखने चाहिए इन्ही चारो भावो (1,4,7,10) को ही हमारे प्राचीन विद्वानो ने केन्द्रीय भाव कहाँ हैं जिससे यह स्पष्ट होता हैं की इन चारो भावो मे गया ग्रह अवश्य ही शुभफल प्रदान करेगा अथवा करता होगा |

द्वादशांस के इन चारो ( केन्द्रीय  ) भावो को हमारे शास्त्र क्रमश: कुबेर,कीर्ति,मोहन व इंद्र कहते हैं जिनका  शाब्दिक अर्थ संभवत: धन,प्रसिद्दि,आकर्षण व सिंहासन होता हैं | द्वादशांस के विभिन्न भावो मे गए ग्रह इस प्रकार से अपने फल प्रदान करते हैं |
1,4,7,10 भावो मे शुभ,2,6,8,11 भावो मे मध्यम तथा 3,5,8,12 भावो मे निर्बल

अपने शोध मे हमने पाया की कुंडली मे यदि कोई भी ग्रह द्वादशांस मे अपने से इन चार केन्द्रीय भावो मे गया था तो उसने अपनी दशा मे जातक विशेष को बहुत ही सफलता,सम्मान कामयाबी व ऊंचाई प्रदान करी थी जबकि वह ग्रह उस जातक की कुंडली के लिए शुभ नहीं था तथा नैसिर्गिक रूप से अशुभ भी था हमने यह भी पाया की जैसे ही जातक को उस ग्रह की दशा लगी वह एकाएक सफलता की ऊंचाई छूने लगा द्वादशांश सूत्र होने के बावजूद उसकी इस सफलता मे उसके माता-पिता का योगदान अथवा सहयोग नहीं था अथवा नाम मात्र का ही था |

आइए अब कुछ कुंडलियाँ देखते हैं तथा इस सूत्र को जाँचते हैं |

1)भारत 15/8/1947 00:00 दिल्ली वृष लग्न की इस पत्रिका मे लग्नेश शुक्र 22-33अंश का हैं जो दशम द्वादशांस मे आता हैं शुक्र की दशा भारत वर्ष मे 1989 से 2009 तक रही और इस दौरान भारत ने पूरे विश्व मे अपनी पहचान संचार माध्यम,फिल्म व खेल जगत तथा सुंदरता के क्षेत्र मे बनाई जिससे पूरे विश्व मे भारत का डंका बजने लगा | पत्रिका मे शुक्र तीसरे भाव मे अस्त अवस्था मे हैं |

2)नरेंदर मोदी 17/9/1950 12:21 वड्नगर गुजरात मे वृश्चिक लग्न मे जन्मे श्री मोदी जी की पत्रिका मे चन्द्र 9-36 अंश का हैं जो चौथे द्वादशांस मे पड़ता हैं इनकी चन्द्र दशा 2011 से 2021 के मध्य हैं और हम सभी जानते हैं की इसी दौरान ये अभी तक अपने राज्य के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तथा विश्व के शक्तिशाली राजनीतिज्ञ के रूप मे स्थापित हो गए हैं जबकि इनकी अभी लगभग पूरी चन्द्र दशा शेष हैं यहाँ ध्यान रखे की पत्रिका मे चन्द्र भाग्येश नीच राशि का होकर मंगल लग्नेश संग लग्न मे स्थित हैं |

3)आरनौल्ड स्वार्ज्नेगर 30/7/1947 4:10 ग्राज(आस्ट्रिया) मे मिथुन लग्न मे जन्मे आरनौल्ड की पत्रिका मे चंन्द्र 8-40 अंश का हैं जो चतुर्थ द्वादशांस मे आता हैं इनकी चन्द्र दशा 1976 से 1986 तक रही इस दशा मे इन्होने अपनी पहली फिल्म “कौनन द बारबेरियन” करी,1984 मे इनकी “टर्मिनेटर” सीरीज की पहली फिल्म से ये पूर्ण रूप से विश्व सिनेमा पटल पर छा गए इसी चन्द्र दशा मे इन्होने 1986 मे विवाह किया जो कामयाब रहा हैं इनकी पत्रिका मे चन्द्र दूसरे भाव का स्वामी होकर सप्तम भाव मे हैं |

4)रजनीश 11/12/1931 17:13 कुचवाड़ा वृष लग्न मे जन्मे श्री रजनीश उर्फ ओशो की पत्रिका मे राहू 9-04 अंश का हैं जो चतुर्थ द्वादशांस मे आता हैं इन्हे राहू दशा 1961 से 1978 तक रही जिस  दौरान इन्होने अपने दर्शन शास्त्र के चलते अपने केंद्र की स्थापना की तथा विश्व भर मे इनके अनुयाई बनते चलते गए 1969 मे इनके दर्शन ने एक आंदोलन का रूप ले लिया तथा विश्व की जानी मानी हश्तियाँ इनके संपर्क मे आने लगी जिससे ये विख्यात होने लगे | इनकी पत्रिका मे राहू एकादश भाव मे गुरु की राशि मे हैं |

5)हिटलर 20/4/1889 18:30 औस्ट्रिया मे तुला लग्न मे जन्मे हिटलर की पत्रिका मे राहू 22-47 अंश का हैं जो दशम द्वादशांस मे आता हैं राहू की दशा इन्हे 1933 से 1951 के मध्य रही और हम सभी जानते हैं की यह समय हिटलर का स्वर्णिम काल था इसी दौरान उसने पूरे विश्व मे अपनी क्रूरता का परचम लहराया था | इनकी पत्रिका मे राहू नवम भाव मिथुन राशि मे हैं |

6)अब्राहम लिंकन 12/2/1809 7:32 अमरीका मे कुम्भ लग्न मे जन्मे श्री लिंकन की पत्रिका मे गुरु 2-16 अंश का हैं जो प्रथम द्वादशांस मे आता हैं ये अपनी गुरु दशा मे ही अमरीका के राष्ट्रपति बने थे इनकी पत्रिका मे गुरु दूसरे भाव मे हैं |

7)बिल क्लिंटन 19/8/1946 8:30 हॉप अमरीका मे कन्या लग्न मे जन्मे क्लिंटन की पत्रिका मे गुरु 1-35 अंश का होकर प्रथम द्वादशांस मे हैं ये भी अपनी गुरु की दशा मे ही अमरीका के राष्ट्रपति बने थे इनकी पत्रिका मे गुरु दूसरे भाव मे हैं |

8)शाहरुख खान 2/11/1965 2:30 दिल्ली सिंह लग्न की इस पत्रिका मे शनि 17-13 अंश का हैं जो सातवे द्वादशांस मे आता हैं इनकी शनि दशा 2004 से 2023 की हैं और हम सब जानते हैं की 2004 से अब तक इनकी सभी फिल्मे एक से एक बड़ी हिट होती जा रही हैं तथा इसी दौरान इनकी क्रिकेट टीम “कलकत्ता नाइट राइडर “ने भी खिताब जीता हैं ये नित्य नयी बुलंदी छूते जा रहे हैं | इनकी पत्रिका मे शनि सप्तम भाव मे हैं |

9)कपिल देव 6/1/1959 4:50 चंडीगढ़ धनु लग्न की इनकी पत्रिका मे बुध 1-35 अंश का हैं जो प्रथम द्वादशांस मे आता हैं इनकी बुध दशा मे ही यह भारत की क्रिकेट टीम के सदस्य बन फिर कप्तान बने तथा इनकी ही कप्तानी मे भारत ने क्रिकेट का तीसरा विश्व कप जीता था इनकी पत्रिका मे बुध लग्न भाव मे हैं |

10)धीरुभाई अंबानी 28/12/1932 6:37 यमन धनु लग्न मे जन्मे धीरुभाई अंबानी की पत्रिका मे राहू 16-54 अंश का हैं जो सातवा द्वादशांस पड़ता हैं हम सभी जानते हैं की इन्होने अपना व्यावसायिक साम्राज्य इसी  राहू दशा मे ही बनाया था जो बाद मे भारत वर्ष के सबसे बड़े व्यावसायिक घरानो मे से एक बना हैं इनकी पत्रिका मे राहू तीसरे भाव मे हैं |

11) पुतिन 7/10/1952 10:11 मास्को रूस मे वृश्चिक लग्न मे जन्मे श्री पुतिन की पत्रिका मे शनि 24-14 अंश का हैं जो दशम द्वादशांस मे आता हैं इनकी शनि दशा 2001 से 2020 तक की हैं और इसी दौरान ये अपने देश के राष्ट्रपति बने हैं तथा विश्व के राजनीतिक पटल मे इनको काफी शक्तिशाली माना जाता हैं | इनकी पत्रिका मे राहू एकादश भाव मे हैं |

12)महेंदर सिंह धोनी 7/7/1981 19:05 रांची धनु लग्न मे जन्मे धोनी की पत्रिका मे राहू 8-11 अंश का हैं जो चतुर्थ द्वादशांस मे आता हैं इनकी पत्रिका मे राहू की दशा 2001 से 2019 तक की हैं इसी राहू दशा मे इन्होने भारतीय क्रिकेट टीम मे अपनी जगह बनाई फिर यह भारत की क्रिकेट टीम के कप्तान बने तथा भारत को इन्होने 2-2 विश्वकप जिताए और इस समय इनका खेल व विज्ञापन जगत मे ज़बरदस्त डंका बज रहा हैं ये जहां भी हाथ डाल रहे हैं सफलता ही इनके हाथ लग रही हैं इनकी पत्रिका मे राहू अष्टम भाव मे हैं |

13) आमिर खान 14/3/1965 9:21 मुंबई मेष लग्न मे जन्मे आमिर खान की पत्रिका मे शुक्र 22-39 अंश का हैं जो दशम द्वादशांस मे आता हैं इनकी शुक्र दशा 1991 से 2011 तक रही जिस दौरान ये भारतीय फिल्मजगत मे सबसे कामयाब एक्टर,प्रोड्यूसर व डाइरेक्टर के रूप मे प्रसिद्द हुये तथा इनके नाम लगातार कामयाब फिल्मे देने का रिकॉर्ड बना हैं आज इनकी गिनती विश्व के प्रभावशाली व्यक्ति के रूप मे होती हैं | इनकी पत्रिका मे शुक्र एकादश भाव मे हैं |

14)श्री जवाहर लाल नेहरू (14/11/1889 23:03 इलाहाबाद) जी की कर्क लग्न की पत्रिका मे मंगल तीसरे भाव मे 9-58 अंश का होकर चतुर्थ द्वादशांस मे हैं हम सभी जानते हैं की इनकी मंगल दशा 1948 से 1955 के बीच रही और इसी दौरान इनका भारतीय राजनीति मे बहुत कद बढा और यह देश के प्रधानमंत्री बने |

इन सब कुंडलियों के अतिरिक्त अन्य कुंडलियों जैसे गुलज़ारी लाल नन्दा (4/7/1898 00:52 सियालकोट मेष लग्न ) की पत्रिका मे गुरु 9-52 अंश चतुर्थ द्वादशांस,इन्दिरा गांधी (19/11/1917 23:15 इलाहाबाद कर्क लग्न ) की पत्रिका मे गुरु 15-00 अंश सप्तम द्वादशांस,तथा मनमोहन सिंह (26/9/1932 14:00 झेलम धनु लग्न ) की पत्रिका मे राहू 24-08 अंश दशम द्वादशांस का हैं और ये सभी इन्ही ग्रहो की दशा मे देश के ऊंचे पद अर्थात प्रधानमंत्री पद पर सुशोभित हुये थे |

इस प्रकार यह स्पष्ट रूप से कहाँ जा सकता हैं की यदि किसी जातक का कोई भी ग्रह द्वादशांस मे केन्द्रीय भावो अर्थात 1,4,7,10 मे गया हो तो उस ग्रह की दशा मे जातक विशेष को बहुत सफलता प्राप्त होती हैं भले ही वह ग्रह कुंडली मे किसी भी अवस्था मे क्यूँ ना हो | 

सोमवार, 15 दिसंबर 2014

मुक़द्दमे मे विजय हेतु टोटके




मुक़द्दमे मे विजय हेतु टोटके

आजकल की भागती हुयी ज़िंदगी मे कोई भी व्यक्ति कोर्ट कचहेरी अथवा मुक़द्दमे बाजी के चक्कर मे पड़कर अपना धन व वक़्त खराब करना नहीं चाहता परंतु ना चाहते हुये भी किसी ना किसी प्रकार से यदि जातक विशेष अथवा उसका परिवार इन चक्करों मे पड गया हो तो वह नीचे दिये गए कुछ उपायो को कर राहत प्राप्त कर सकता हैं |

1)अपने बच्चे का पहना हुआ पहला कपड़ा लेकर मुक़द्दमे मे जाने से मुक़द्दमा हारने की संभावना नहीं रहती हैं |

2)प्रात: काल बजरंग बाण के सात पाठ करके हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाए साथ ही देसी कपूर पर पाँच अखंडित लौंग जलाकर उसकी भस्म का तिलक अपने माथे पर लगाकर जाने से मुक़द्दमा अपने पक्ष मे होने की संभावना बढ़ जाती हैं |

3)अपने वजन के बराबर कच्चा कोयला जलप्रवाह करने से निर्दोष व्यक्ति मुक़द्दमे से बरी हो जाता हैं 

4)भैरव मंदिर मे 12 किलो इमरती मिठाई का भोग लगाकर गरीबो मे बाँट देने से झूठे मुक़द्दमे से छुटकारा मिल जाता हैं |

5)झूठे आरोप के मुक़द्दमे से बचने के लिए पीली कनेर का फूल घिसकर उसका तिलक लगाकर कोर्ट परिसर मे जाने से मुक़द्दमे मे सफलता मिलती हैं |

6)कोर्ट जाने से पहले 5 अभिमंत्रित गोमती चक्र जेब मे रखने से मुक़द्दमे से राहत मिल जाती हैं |

7)कुंडली के अनुसार द्वादशेश व द्वादश भाव मे स्थित ग्रह की वस्तुए उचित मात्रा मे दान करते रहने से मुक़द्दमे संबंधी योग समाप्त हो जाते हैं |

8)दुर्गा सप्तसती के 108 पाठ करने अथवा शतचंडी पाठ करवाने से भी मुक़द्दमों व बंधनो से मुक्ति मिलती हैं |

9)माता बगलामुखी देवी का जाप,अनुष्ठान किसी योग्य ब्राह्मण के द्वारा कराने से शत्रुओ पर विजय पाकर मुक़द्दमे से राहत पायी जा सकती हैं जातक स्वयं भी बगलामुखी मंत्र के 36000 जाप कर शत्रुओ पर विजय पा सकता हैं |

10)मध्य प्रदेश दतिया मे स्थित माँ पीतांबरा देवी शक्ति पीठ पर अनुष्ठान व हवन कराने से मुक़द्दमों आदि मे राहत प्राप्त होती हैं |

11)हनुमान जी के मंदिर मे हनुमान प्रतिमा के सम्मुख प्रतिदिन एक निश्चित मात्रा मे निम्न मंत्र का सवा लाख जाप करने से निश्चय ही मुक़द्दमे मे विजय प्राप्त होती  हैं |
मंत्र-“हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट “

12)विजय प्राप्ति यंत्र के सम्मुख नियत मुहूर्त के दिन निम्न पूजन मंत्र से पूजन कर इस यंत्र को अपने संग रखने से मुक़द्दमा अपने पक्ष मे हो जाता हैं |
मंत्र-“ ॐ नीली नीली महानीली (शत्रु पक्ष/जज का नाम ) जीभि तालु सर्वखिली,सही खिलो तत्क्षणाय स्वाहा “

13)कोर्ट केस मे जाने से पूर्व अंध आश्रम मे गुलाब जामुन दान करने से कोर्ट केस की तारीख आगे बढती जाती हैं |

डॉ॰ किशोर घिल्डियाल
9818564685 

बुधवार, 10 दिसंबर 2014

व्यवसाय से संबन्धित टोटके



व्यवसाय से संबन्धित टोटके

आज के इस भौतिकतावादी युग मे हर व्यक्ति कम समय मे ज्यादा से ज़्यादा धन अर्जन करना चाहता हैं और इसके लिए हर कोई अपना व्यवसाय आरंभ करता हैं या करना चाहता हैं प्रस्तुत लेख मे हम व्यापार से जुड़े कुछ टोटके दे रहे हैं जिनसे व्यापार मे तरक्की अथवा सफलता प्राप्त होती हैं 

1)शुक्लपक्ष के रविवार को काले घोड़े की दायें पैर की नाल गंगाजल से धोकर व्यापार स्थल के द्वार पर ठोक देने से व्यापार मे तेजी आने लगती हैं |

2)शनिवार को सरसों तेल मे बने गुड के गुलगुले (मीठे पकोड़े) गरीबो को खिलाने से व्यापार बढ़ा समाप्त हो जाती हैं |

3)शुक्लपक्ष के समय किसी भी दिन व्यापार स्थल के मुख्य द्वार के दोनों और चुटकी भर आटा छिड़कने से व्यापार् स्थल पर लगी नज़र समाप्त हो जाती हैं |

4)वर्षभर हर बुधवार को फिटकरी के पानी मे भीगी साबुत मूंग दाल पक्षियो को खिलाने से व्यापार निर्बाध रूप से चलता रहता हैं |

5)केसर से रंगे हुये कच्चे सूत के धागे को व्यापारस्थल मे बांधने से व्यापार बढ्ने लगता हैं |

6)वर्ष मे एक बार कढ़ी-चावल का भंडारा करने से व्यापार मे बहुत वृद्दि होती हैं |

7)व्यापार स्थल मे कमाल गट्टे की माला पर श्रीयंत्र स्थापित करने से व्यापार का भी विस्तार होने लगता हैं |

8)व्यापार स्थल की चौखट पर 12 गोमती चक्र कपड़े मे बांधकर लटकाने से व्यापार वृद्दि होती हैं |

9)एकांक्षी नारियल को गल्ले मे रखने से ग्राहकी बढ़ जाती हैं |

10)काली हल्दी,केसर को गंगाजल मे पीसकर महीने के पहले बुधवार को मशीनों पर लगाने से मशीन खराब नहीं होती |

11) देसी कपूर और रोली को जलाकर उसकी राख़ गल्ले मे रखने से व्यापाय दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता हैं |

12)व्यवसाय स्थल मे प्रतिदिन चाँदी के पात्र का जल छिड़कने से बिक्री बढ़ जाती हैं |

13)शुक्रवार को गुड व चने का प्रसाद बांटने से ग्राहक व्यवसाय स्थल से बंधे रहते हैं |

14)प्रतिदिन दुकान मे लोबान अथवा लौंग,कपूर की धुनि घुमाने से दुकान पर नज़र,टोका इत्यादि नहीं लगती और व्यापार निर्बाध चलता रहता हैं |

15)व्यापारस्थल मे बरगद की जड़ रखने से कीड़े,मकोड़े,चूहे,इत्यादि से व्यापार स्थल मे हानी नहीं होती |

16)दुकान अथवा व्यवसाय स्थल मे आए पहले ग्राहक को कभी भी खाली हाथ ना लौटाए ऐसा करने से व्यापार मे रुकावट आने लगती हैं |

17)सफ़ेद कपड़े की बनी ध्वजा पीपल के पेड़ पर लगाने से व्यापार मे वृद्दि होती हैं तथा बाधाए दूर हो जाती हैं |

18)व्यवसाय स्थल मे नागकेसर व श्रीयंत्र रखने से व्यापार मे वृद्दि होती हैं |

19)दुकान खोलते व बंद करते समय मुख्य द्वार को स्पर्श कर माथे से हाथ लगाना चाहिए इससे व्यापार मे स्थिरता आती हैं |

20)अपने व्यापारस्थल अथवा दुकान के गल्ले मे 3 गोमती चक्रो को तांबे की तार से बांधकर कील द्वारा ठोक देने से गल्ला कभी खाली नहीं होता |

इस प्रकार उपरोक्त छोटे छोटे टोटको को करने से व्यापार मे वृद्दि की जा सकती हैं |

डॉ॰ किशोर घिल्डियाल