बुधवार, 31 जनवरी 2024

शनि की दसवी दृस्टी



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https://youtu.be/aT-GZ86RgCU

ज्योतिष में प्रत्येक व्यक्ति यह जानता है कि शनि को तीन दृष्टियां प्रदान की गई है जिनमें से दशवी दृष्टि के विषय में प्रत्येक ज्योतिषी अथवा विद्वान के अलग-अलग दृष्टि कोण है |

प्रस्तुत आज की पोस्ट में हम जातक विशेष को शनि की दसवीं दृस्टी के फल व्यावहारिक रूप से बताने का प्रयास कर रहे हैं | हमने अपने अनुभवों में पाया है कि शनि की दसवीं दृष्टि मुख्य रूप से 4 तरह के फल प्रदान करती है |

शनि को मुख्य रूप से कर्म कारक माना गया है और कालपुरुष की दसवी राशि होने के स्वामी होने के कारण शनि को 10वी दृष्टि का प्रभाव भी दिया गया है |

हम सब जानते हैं कि काल पुरुष के कुंडली के अनुसार लग्न का मालिक मंगल बनता है तथा कर्म का मालिक शनि बनता है कर्म करने के लिए हमें अपने शरीर को हिलाना अथवा दुख देना होता है जो शनि का ही स्वभाव है हम सभी जानते हैं कि जब हम अपने सुखों का त्याग कर कर्म स्थान में दुख प्राप्ति हेतु जाते हैं तो शनि अपने व्यावहारिक फल देता है परंतु शरीर को इससे हानि ही होती है अथवा शरीर की ऊर्जा का नुकसान होता है जब हम ऐसा करते हैं तभी हमें शनि लाभ प्रदान करते हैं परंतु शनि की दसवी दृष्टि यह निरंतर कार्यशीलता की और हमें धकेलती है और हमें लंबे समय तक काम करने के लिए बाध्य करती है | यदि कोई व्यक्ति निरंतर अभ्यास करता है और कार्यक्षेत्र की और निरंतरता रखता है तो ऐसे जातक को बहुत अच्छा लाभ शनिदेव प्रदान करते हैं |

शनि की दशवी दृष्टि जिस भी भाव पर पड़ती है उसे भाव से संबंधित जातक को लगातार व निरंतर काम करते रहना पड़ता हैं विशेष तौर से अगर हम देखें तो खिलाड़ी एवं फिल्म अभिनेताओं की पत्रिका में शनि का लग्न अथवा दसवें भाव से संबंध देखा ही गया है |

मार्लिन मुनरो,राज कपूर,अमिताभ बच्चन,ऐश्वर्या राय,मडोना,रामकृष्ण डालमिया,नैना देवी,एम एस सुबुलक्ष्मी,अमृता प्रीतम स्वामी विवेकानंद,विराट कोहली,इन्दिरा गांधी,सोनिया गांधी शाम आदि की पत्रिका में देखे तो ऐसा स्पष्ट रूप से नजर आता है यह अपने व्यक्तित्व विकास के लिए निरंतर प्रयास रत रहते हैं तथा इन्हें शनि शारीरिक रूप से बहुत ही मेहनत करवाना पसंद करता है |

आप सभी अपनी पत्रिका पत्रिका में देखें कि शनि किस राशि अथवा किस भाव में बैठा है उससे दसवीं भाव में स्थित ग्रह एवं राशि से संबंधित आप लगातार कोई कार्य करेंगे तो आपको बहुत अच्छा लाभ प्राप्त होगा | यह इस शनि की दसवी दृस्टी का भेद हैं |

2)शनी की दसवीं दृष्टि जी भी भाव पर पड़ती है उसे भाव से संबंधित जीवित कारकों का सुख जातक विशेष को कम प्राप्त होता है अथवा उस भाव के जीवित कारकतत्व से जातक विशेष को दूर रहना पड़ता है |

ऐसा हमने कहीं पत्रिकाओं में देखा उदाहरण के लिए कुछ पत्रिकाएं इस प्रकार से हैं |

26/8/1910 वृश्चिक लग्न में जन्मी मदर टेरेसा की पत्रिका में शनिछठे भाव में बैठकर तीसरे भाव को देख रहा हैं हम सब जानते हैं की मदर टेरेसा अपने देश को छोड़कर भारत आ गयी थी तथा उन्हे अपने भाई बहनो से दूर रहना पड़ा |

1/9/1896 को मकर लग्न में जन्मे स्वामी प्रभुपद जिन्होंने इस्कॉन संस्था की स्थापना की थी उन्होंने 1950 में ग्रस्त जीवन त्याग कर सन्यासी लेने की प्रक्रिया आरंभ करेंगी उनकी पत्रिका में शनि तुला राशि में दशम भाव में बैठकर दशमी दृष्टि से पत्नी स्थान को देख रहा है|

2 अक्टूबर 1869 में जन्मे महात्मा गांधी जी की तुला लग्न की पत्रिका में शनि दूसरे भाव में वृश्चिक राशि पर स्थित है जिसकी दशम दृष्टि 11वें भाव में है हम सब जानते ही हैं गांधी जी को बचपन से ही अपने भाई बहनों से दूर रहना पड़ा था

28/5/1923 को जन्मे श्री एंटी रामा राव की तुला लग्न की पत्रिका में शनि 12वे भाव में स्थित होकर 9वे भाव को दृष्टि दे रहा है सभी जानते हैं कि एंटी रामा राव को पैदा होते ही उनके चाचा को दत्तक पुत्र के रूप में दे दिया गया था तथा उन्हें अपने जैविक परिवार से दूर ही रहना पड़ा था | इसी प्रकार का संबंध हम श्री नरसिंह राव जी की पत्रिका में भी देख सकते हैं जिनको दत्तक संतान के रूप में रहना पड़ा था |

ओशो आचार्य रजनीश जिनका जन्म 11/12/1931 में वृषभ लग्न में हुआ है की पत्रिका में शनि अष्टम भाव में स्थित है जिसकी पंचम भाव पर दृष्टि है हम सब जानते हैं कि आचार्य राजेश ने विवाह नहीं किया तथा उनकी कोई संतान नहीं थी |

ऐसा ही हम लता मंगेशकर जी की वृष लग्न की पत्रिका में भी देख सकते हैं जिनकी पत्रिका में शनि अष्टम भाव में बैठे हैं तथा पंचम भाव को दशम दृष्टि दे रहे हैं इन्होंने भी विवाह नहीं किया था जिस कारण इनकी कोई भी संतान नहीं थी |

18 जुलाई 1918 को धनु लग्न में जन्मे श्री नेल्सन मंडेला जी की पत्रिका में शनि अष्टम भाव से पंचम भाव को देख रहा है हम सब जानते हैं कि इन्हें भी अपनी संतानों से बहुत दिन दूर रहना पड़ा था तथा उनकी दो पुरुष संतानों की आकस्मिक मृत्यु भी हो गई थी |

1/6/1929 वृषभ लग्न में जन्मी नरगिस दत्त की पत्रिका में शनि अष्टम भाव में है उनकी खुद की आयु कम होने के कारण इन्हें संतान का सुख प्राप्त कम हुआ पत्रिका में शनि अष्टम भाव से पंचम भाव को देख रहा है |

 3)शनि की दसवीं दृष्टि का tisra प्रभाव यह बताता है कि जब शनि की अपनी दशा अंतर्दशा आएगी तो उसे भाव से संबंधित जीवित करकत्वों को शनि कष्ट देंगे अथवा उसकी मृत्यु हो जाएगी |

1 दिसंबर 1971 5 बजे वृश्चिक लग्न में जन्मे जातक की पत्रिका में शनि की सप्तम भाव से दशवी दृष्टि चौथे भाव में है फरवरी 2018 में जब गुरु में शनि की दशा थी जातक विशेष की मां की मृत्यु हुई |

इसी प्रकार एक अन्य पत्रिका 3 जुलाई 1964 की कुंभ लग्न की पत्रिका में देखें तो 1995 में जब सूर्य में शनि की दशा थी तो पिता की मृत्यु हुई शनि लग्न में बैठकर दसवी दृस्टी से दसवें घर को देख रहा था |

4)शनि की दशमी दृष्टि का तीसरा फल कुछ इस प्रकार से अनुभव में देखने में आया है |

पुराणों में कहा गया है कि शनि की दसवीं दृष्टि से भगवान गणेश का सिर कट गया था जिसको अगर हम आज के संदर्भ में देखे तो शनि जब भी आपकी पत्रिका में अथवा गोचर में जिस भाव से गुजरते हैं उसे दसवें भाव में जातक विशेष के शरीर पर चोट कट अथवा शल्य चिकित्सा होने का योग बना देते हैं |

जैसे यदि शनि चतुर्थ भाव से गुजर रहे हो तो लग्न पर दृष्टि होने के कारण जातक विशेष के शरीर में शल्य चिकित्सा होने का योग बन सकता है वहीं यदि शनि लग्न से गुजर रहे हो तो जातक विशेष को घुटनों का ऑपरेशन करना पड़ सकता हैं |

महानायक अमिताभ बच्चन 11/10/1942 की कुम्भ लग्न की पत्रिका में 26/7/1982 में जब शनि उनके लग्न से अष्टम भाव से कन्या राशि मे गुजर रहा था तथा अपनी दसवीं दृष्टि पंचम भाव पर दे रहा था उनकी दुर्घटना हुई तथा पेट से संबंधित सर्जरी करानी पड़ी |

28/9/1946 को मीन लग्न व तुला राशि में जन्मे जातक की पत्रिका में जब शनि का गोचर चतुर्थ भाव से हो रहा था तो इनको ओपन हार्ट सर्जरी का सामना करना पड़ा जो कि नवंबर 2022 में हुई |

 

गुरुवार, 25 जनवरी 2024

शनि की तीसरी दृष्टि का भेद


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https://youtu.be/EbjAJoJ8EQ4

शनि की तीसरी दृष्टि को किसी भी शास्त्र में सही तरह से परिभाषित नहीं किया गया है बहुत से ज्योतिष विद्वान अपनी-अपनी शोध एवं अनुभव के आधार पर शनि की दृष्टि को वैराग्य प्रदान करने वाली,संघर्ष करने वाली तथा बहुत ज्यादा मेहनत करने वाली बताते हैं परंतु हमने अपनी शोध में पाया है कि शनि जब तीसरे भाव को दृष्टि देते हैं तो एक अजीब सा दृष्टिकोण बना देते हैं |

शनि जब भी किसी विशेष पुरुषार्थ की राशि में बैठकर दृस्टी डालते हैं तो वह दृष्टि उससे संबंधित अन्य दूसरे पुरुषार्थ वाले भाव को भी प्रभाव में ले लेती है जैसे यदि धर्म राशि में शनि स्थित हो तो वह दो काम भाव वाली राशियो पर तथा एक अर्थ भाव वाली राशि पर दृष्टि देती है | इसी प्रकार यदि शनि अर्थ भाव की राशि में हो तो वह दो मोक्ष राशि वह एक काम भाव वाली राशि पर दृष्टि डालते है ऐसे ही यदि शनि काम भाव की राशियों में हो तो वह दो धर्म राशि एवं एक मोक्ष राशि पर दृष्टि डालते है तथा जब शनि मोक्ष राशि में होते हैं तब वह दो अर्थ भाव वाली राशि व एक धर्मभाव की राशि पर दृष्टि डालते हैं |इस प्रकार हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं की शनि हर प्रकार से दृष्टि बनाते हुए प्रत्येक पुरुषार्थ की एक राशि को ही रिक्त छोड़ते हैं जैसे यदि हम देखें जब शनि धर्म राशि में स्थित होते हैं तो वह अर्थ वह काम को तो प्रभावित करते हैं परंतु मोक्ष राशि को प्रभावित नहीं करते हैं |

शनि की तीनों दृष्टियों को शास्त्र बुरा तो बताते हैं परंतु उसकी वजह बता पाने में शास्त्र अब तक सही प्रकार से साबित नहीं हुए हैं कहानी-कहानी शनि की दृष्टि के नकारात्मक प्रभाव अवश्य बताए गए हैं परंतु किस दृष्टि से क्या प्रभाव पड़ेगा यह नहीं बताया गया है|

प्रस्तुत आज की पोस्ट में मैं अपने अनुभव के आधार पर आपको प्रैक्टिकल अथवा व्यावहारिक रूप से यह बताने की कोशिश करूंगा कि शनि की तीसरी दृष्टि किस प्रकार से काम करती है और वह क्या प्रभाव जातक विशेष को देती है | यहां मैं आपको रटी रटाई एवं किताबी बातें नहीं बताऊंगा बल्कि अपने अनुभव के आधार पर तथा कुछ कुंडलियों के अध्ययन के आधार पर शनि की तीसरी दृष्टि के फल बताऊंगा जिससे आप ज्योतिष को सही प्रकार से समझ पाएंगे | ध्यान रखिएगा कि यह मेरा अपना व्यावहारिक अनुभव है जरूरी नहीं कि ऐसा सभी पत्रिकाओं में हो परंतु अनुभव में ऐसा देखने में आता जरूर है |

तो दोस्तों ज्यादा समय न लेते हुए बताते हैं आपकी शनि की तीसरी दृष्टि के तीन ऐसे फल जो आपको एक अच्छा ज्योतिष सीखने में मदद करेंगे |

पहले फल है दोस्तों शनि 20 से 22 वर्ष के दौरान जहां होता है उस भाव से संबंधित अथवा जहां तीसरी दृष्टि दे रहा होता है उससे संबंधित फल अवश्य प्रदान करता है |

20 से 22 वे वर्ष में अपना प्रभाव दर्शाती है ऐसा कहीं कुंडलियों के उदाहरण में देखा गया है |

कुछ उदाहरण देखने का प्रयास करते हैं |

27/12/1965 को मेष लग्न मे जन्मे सलमान खान ने 1985 में अपने 20 वे वर्ष मे टेलेविजन जगत में अपना पहला विज्ञापन किया जहां से उनको एक नई पहचान मिली | पत्रिका में शनि दशवे और 11वे घर का स्वामी है तथा 11वें भाव में ही स्थित होकर लाभ होना बता रहा है

18/12/1946 18:16 मिथुन लग्न में जन्मे इस जातक की पत्रिका में शनि दूसरे भाव में बैठकर अपनी तीसरी दृष्टि चौथे भाव को दे रहा है जातक के माता-पिता का तलाक उसके 20वे वर्ष में हुआ |

3/5/1978 10:08 मिथुन लग्न में जन्मी इस जातिका की पत्रिका में शनि तीसरे भाव में बैठकर पंचम भाव को अपनी तीसरी दृष्टि दे रहा है जातिका को 20 वर्ष की आयु मे तंत्र करने के कारण जेल में रखा गया |

11/5/1973 9:46 मिथुन लग्न में जन्मे इस जातक की पत्रिका में शनि 12वें भाव से दूसरे भाव को देख रहा है जातक विशेष ने 20 वर्ष में अपना कॉलेज बदल लिया तथा शिक्षा क्षेत्र में बदलाव किया |

30/8/1943 5:10 कर्क लग्न में जन्मे इस जातक ने 20 वर्ष में अपने स्कीईंग के कोच के पास प्रवेश लिया इसकी पत्रिका में शनि 12वे भाव से दूसरे भाव को देख रहा है |

19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में कर्क लग्न में जन्मी इंदिरा गांधी अपने बीस वे वर्ष में समरवैली स्कूल में आधुनिक इतिहास पढ़ने गई तथा एक वर्ष बाद वापस आ गई|

9/2/1956 19:56 सिंह लग्न में जन्मी इस जातिका की इसके 20वे वर्ष में इसके बड़े भाई ने जायदाद के कारण हत्या कर दी थी इसकी पत्रिका में शनि चौथे भाव में बैठकर छठे भाव को दृष्टि दे रहा है |

2/11/1965 को सिंह लग्न मे जन्मे शाहरुख खान ने 1985 में अपने बीसवे वर्ष में बैरी जॉन थिएटर नामक संस्था में एक्टिंग कोर्स में हिस्सा लिया जहां से उनके अभिनय जीवन की नींव पड़ी |

7/8/1876 13:00 बजे तुला लग्न में जन्मी इस जातिका का 20वे वर्ष में अपने से बहुत बड़े व्यक्ति से विवाह कर दिया गया पत्रिका में शनि पांचवे भाव में बैठकर अपनी तीसरी दृष्टि से सातवें भाव को देख रहा है |

महात्मा गांधी 2 अक्टूबर 1869 मे तुला लग्न मे जन्मे श्री गांधी 1889 मे लंदन मे अङ्ग्रेज़ी साहित्य पढ़ने गए | पत्रिका मे शनि चतुर्थेश व पंचमेश होकर दूसरे भाव मे स्थित हैं |

27/2/1932 2:15 वृश्चिक लग्न में जन्मी जातिका का शनि तीसरे भाव से पंचम भाव को दृष्टि दे रहा है जातिका ने 20 वर्ष की आयु में एक तलाकशुदा व्यक्ति से प्रेम विवाह किया |

12/1/1863 को धनु लग्न मे जन्मे विवेकानंद जी ने 20वे वर्ष मे हिमालय भ्रमण शुरू किया जहां से उनकी आध्यात्मिक यात्रा आरंभ हुई |

11/10/1942 को कुम्भ लग्न मे जन्मे अमिताभ बच्चन ने 1962 में अपने बीच में वर्ष में बीएससी की पढ़ाई पूरी करी तथा अपने जीवन का पहला काम जो कि कोयले की खदानों में कोलकाता में किया |

12/7/1937 00:30 मीन लग्न में जन्मे इस जातक की पत्रिका में शनि लग्न में बैठकर तीसरे भाव को देख रहा है जातक विशेष ने 20 वर्ष की आयु में जल सेना में प्रवेश लिया और इसी दौरान उसकी कलाकारी भी आरंभ हो गई

विराट कोहली ने 2008 मे अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय मैच खेला था जब वह 20 वर्ष के थे |

 

दूसरा फल जो शनि की तीसरी दृष्टि का देखने में आता है वह इस प्रकार से है कि जब शनि जहां स्थित होता है वहां से तीसरे भाव में देखता है तो शरीर के उस अंग में जरूर ही कोई ना कोई परेशानी खड़ी करता है अथवा शरीर के उस अंग में कोई ना कोई दिक्कत देता ही है ऐसा हमने सैकड़ो कुंडली में पाया है |

उदाहरण के लिए यदि महानायक अमिताभ बच्चन की पत्रिका को देखें तो उनकी पत्रिका में शनि चतुर्थ भाव से बैठकर छठे भाव को दृष्टि दे रहा है हम सभी जानते हैं कि 1982 मे उनका में पेट से संबंधित भयंकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा था और वह मौत के मुंह से वापस आए थे|

इसी प्रकार यदि सलमान खान की पत्रिका में देखें तो सलमान खान की पत्रिका में शनि तीसरी दृस्टी लग्न पर डाल रहे हैं और हम सभी जानते हैं कि उन्हें एक समय 2017 मे चेहरे से संबंधित बहुत सी दिक्कतो का सामना करना पड़ा था |

शाहरुख खान को 2003 में तथा 2017 में अपनी कमर से संबंधित सर्जरी करानी पड़ी थी शाहरुख खान की पत्रिका में देखें तो शनि सप्तम भाव से तीसरी दृष्टि 9वे भाव अर्थात कमर के हिस्से को दे रहा है |

विराट कोहली को 2017 में कंधे में चोट के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा था उनकी धनु लग्न की पत्रिका में शनि लग्न से बैठकर किसी दृष्टि से कंधे के हिस्से को देख रहा है |

 

तीसरा फल जो शनि की तीसरी दृष्टि से देखने में आया है कि जो भाव शनि की दृष्टि के बीच में आ जाता है वह भाव कमजोर हो जाता है और उसमे बैठा हुआ ग्रह भी अपने फल सही प्रकार से नहीं दे पाता है |

गुरुवार, 18 जनवरी 2024

श्री राम जन्मभूमि उद्घाटन की कुंडली

 



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https://youtu.be/H5U-HzSnrro

उद्घाटन तिथि - 22:01:2024 समय:12:20 दोपहर। (11:10-12:45)

उद्घाटन का पक्ष - शुक्ल पक्ष,द्वादशी तिथि,अभिजित मुहूर्त,मृगशिरा 2 नक्षत्र।

उद्घाटन के समय मेष लग्न बना हैं भाग्येश गुरू लग्न में हैं और लग्नेश मंगल भाग्य स्थान में प्रराक्रमेश एवं षष्ठेश बुध तथा धनेश एवं सप्तमेश शुक्र के साथ विनिमय परिवर्तन योग कर रहा हैं | राज्येश एवं लाभेश शनि अपनी मूल-त्रिकोण राशि कुंभ में लाभ स्थान में है। सुखेश चन्द्रमा द्वितीय भावगत है।पंचमेश सूर्य दशम भाव में मकर राशिगत है जो दिग्बली है।राहु मीन राशिगत द्वादश भावगत है एवं केतु षष्ठ भावगत है।

हम जानते हैं कि मेदिनी ज्योतिष में प्रथम भाव गृह मंत्रालय का प्रतीक होता है जिससे जनसाधारण और देश की सामान्य स्थिति तथा देशवासियों का सामान्य चरित्र पता चलता है,प्रथम भाव में स्थित शुभ ग्रह अच्छा स्वास्थ्य सुख और समृद्धि देते हैं यहां स्पष्ट रूप से हम देख रहे हैं कि अत्यधिक शुभ ग्रह गुरु नवम भाव का स्वामी होकर लग्न में स्थित है,कर्मेश व लाभेष शनि की लग्न पर दृष्टि भी है जो पाप ग्रह होने के कारण थोड़ा बहुत परेशानियों को भी बता रहा है|

गुरू के लग्नगत होने तथा नवम स्थान (त्रिकोणाधिपति) के स्वामी होने से व्ययेश का दोष नहीं लगता है। भाग्येश के लग्नगत होने के कारण से बृहस्पति लग्न में दिग्बली होता है । जो सूर्य के बाद दूसरे नंबर का बली ग्रह है जो षड़बल में बली है इसलिए समस्त दोषों को हरण करने में सक्षम है।

एको जीवो यदा लग्ने,सर्वयोगस्तदा शुभा।

दीर्घजीवी महाप्रज्ञो,जातको नायको भवेत्। । (मानसागरी,श्लोक-32)

इस श्लोकानुसार यह गुरू (बृहस्पति) भारत का नाम सम्पूर्ण विश्व में रोशन करेगा और सबका प्यारा होगा। बृहस्पति की दृष्टि पंचम संतान भाव,सप्तम भाव एवं भाग्य भाव पर पर पड़ रही है इसलिए विश्व की समस्त संतानों पर पूर्ण अमृत वर्षा दर्शन करने से होगी।

दूसरा भाव वित्त मंत्रालय का होता है जो देश की आर्थिक स्थिति मुद्रा स्थिति राष्ट्रीय राजकोष और देश की संपदा को बताता है इसी भाव से हम देश का सामान्य लाभ एवं हानि भी देखते हैं तथा देश का खजाना भी इसी से देखा जाता है इस भाव में चंद्रमा चौथे भाव का स्वामी होकर स्थित है जो कि चौथे भाव मानव संसाधन से संबंधित का स्वामी बनता है जिस भाव से देश की जमीन खनिज तथा उद्योग आदि को देखा जाता है इसी भाव से राजा का सिंहासन वह राजमुकुट भी देखा जाता है क्योंकि इस चतुर्थ भाव का स्वामी उच्च का होकर दूसरे भाव में है जो स्पष्ट रूप से बता रहा है कि जनता अपने राजा से बहुत खुश है तथा देश के प्रति देशभक्ति भी दर्शा रही है क्योंकि यह संसाधन से संबंधित है अतः यह मंदिर एक बहुत ही बेहतरीन धन संबंधी संसाधन के रूप में भविष्य में जाना जाएगा|

तीसरा भाव जो कि संचार मंत्रालय को बताता है जिससे हम यातायात एवं संचार साधु को देखते हैं प्रेस अथवा समाचार आदि को भी इसी भाव से देखा जाता है जिसका स्वामी बुध भाग्य स्थान में बैठकर अपने भाव को दृष्टि दे रहा है तथा यह दर्शा रहा है कि दूर-दूर तक मंदिर का गुणगान एवं संचार होता रहेगा तथा इससे देश में व्यापार भी आएगा| इसी भाव पर मंगल की दृष्टि भी है जो नियमों को कड़ाई से पालन करवाएगी तथा अनुशासन संबंध व्यवहार भी बताएगी

चतुर्थ भाव पर पंचमेश सूर्य की दृष्टि है हम सब जानते हैं की पंचम भाव शिक्षा का भाव माना गया है जिससे आने वाली पीढ़ी अथवा देश के बच्चे मनोरंजन सभी प्रकार का आनंद आमोद प्रमोद इत्यादि देखा जाता है उसका स्वामी सूर्य जब चतुर्थ भाव पर दृष्टि डाल रहा है तो यह स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है की आने वाली पीढ़ी एवं देश की शिक्षा भी इस चतुर्थ भाव को अपना महत्व प्रदान करेगी वह आने वाली पीढ़ी इससे अपने गौरव मित्र इतिहास से रबरी हो पाएगी अवनीश मंगल की भी दृष्टि इस भाव पर होने से गृह मंत्रालय भी इस भाव पर अपनी पहली नजर गड़ा कर रखेगा यह प्रतीत होता है|

पंचम भाव अर्थात शिक्षा भाव पर नवमेश गुरु और कर्मेश शनि की दृष्टि होने से आने वाले समय में सरकार द्वारा राम मंदिर निर्माण से संबंधित जानकारियां शिक्षा में उपलब्ध कराए जाने की ओर इशारा मिलता है|

छठा भाव जो कि देश की रक्षा का भाव होता है षष्ठ भावगत केतु शत्रुओं पर विजय पाने में सक्षम होता है तथा सेवा भावना से ओतप्रोत होता है परंतु समय-समय पर कुछ परेशानियां भी खड़ा करेगी तथा कुछ गुप्त रूप से परेशानियां भी खड़ी करता नजर आ रहा है | भाव के स्वामी बुध का नवे भाव में बैठना स्पष्ट रूप से इस मंदिर के निर्माण में परेशानियों को सर्वोच्च न्यायालय की ओर जोड़ता दिखाई दे रहा है हम सभी जानते हैं कि फैसला न्याय लेकर अनुसार ही आया है|

सप्तम भाव से अंतर्राष्ट्रीय मामले युद्ध इत्यादि को देखा जाता है इस भाव पर गुरु नवमेश की दृष्टि होना तथा भाव स्वामी शुक्र का 9वे भाव में जाना विदेश से व्यापार व्यापार व्यापारिक समझौते एवं धर्म की स्थापना को दर्शा रहा है यही भाव सरकार द्वारा भूमि अधिनियम का प्रयोग भी बता रहा है इस सप्तम भाव पर नवमी शुरू की दृष्टि होना तथा सप्तम भाव के स्वामी का 90 भाव में बैठना विदेश से बहुत से श्रद्धालुओं का आना भी बता रहा है क्योंकि यहां पर गुरुद्वारा भाव का स्वामी भी है अतः पूरे विश्व में इस मंदिर का जबरदस्त प्रभाव देखने में आएगा और यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध होगा |

अष्टम भाव जैसा कि हम सब जानते ही हैं देश के मूलधन पर आए टैक्स छुपी हुई वस्तुएं अथवा प्राकृतिक आपदाओं को बताता है उसका स्वामी शुक्र नवे भाव में है जो छुपी हुई वस्तुओं को धर्म से जोड़ रहा है हम सब जानते हैं कि यह मंदिर प्राचीन समय से छुपा हुआ था जिसे लग्नेश अर्थात गृह मंत्रालय के द्वारा बाहर किया गया है जिसमें भाग्य भाव के स्वामी बृहस्पति का अहम भूमिका रही है इसी भाव पर कामेश एवं एकादश शनि की दृष्टि भी है जो आने वाले समय में इससे संबंधित गुप्त आई के बारे में भी बता रही है

नवम भाव में लग्नेश मंगल का बैठना तथा सप्तमेश एवं तृतीय एवं षष्ठेश भाव के स्वामी के साथ बैठना न्यायालय संधि एवं समझौता तथा विदेशी व्यापार एवं हवाई अड्डे इत्यादि को दर्शाता है यही भाव परिवहन के साधनों को भी दर्शाता है तो हम सब जानते हैं कि अब अयोध्या को पूरे विश्व से हवाई जहाज एवं अन्य वाहन  इत्यादियों से जोड़ दिया गया है और भविष्य में भी इसे और बड़े पैमाने पर किया जाएगा|

शुक्र के नवमस्थ होने से भृगुसूत्र के अनुसार-

"धार्मिकः तपस्वी अनुष्ठान परः सुतदारवान् "

इस मंदिर को अपनी संतानों(भक्तों) का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा एवं सुखी होंगे ।

नवम स्थान में मंगल,शुक्र और बुध की युति इस मंदिर को विश्व में प्रथम स्थान पर ले जाएगी। यह सबसे धनी मंदिर होगा एवं इस मंदिर के द्वारा तमाम व्यवसायिक एवं धार्मिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा ।

भृगुसूत्र के अनुसार नवमस्थ बुध धार्मिक कार्यों में लिप्त तथा तमाम परोपकार के कार्य किए जाएंगे । वेदशास्त्रविशारद् संगीतपाठकः दाक्षिण्यवान् '। जिसके कारण से इस सूत्र के अनुसार यह मंदिर धर्मशास्त्र,नीति,संगीत का ज्ञान देने वाला होगा,तथा अपने भक्तों का प्रिय होगा यहां पर मंगल उच्चाभिलाषी है जिससे महत्वाकांक्षी एवं महापराक्रमी यह ट्रस्ट होगा ।

दसवां भाव राजा अथवा नैतिकता का होता है जिससे हम प्रधानमंत्री भी देखते हैं इसका स्वामी शनि लाभ स्थान से बैठकर लगन को देख रहा है जो राधा की निश्चित जीत की और इशारा करता है तथा पंचमी सूर्य का स्थान पर बैठना जनता एवं जनता के धन एवं शिक्षा का राजा से जुदा होना दर्शा रहा है देशके सभी देश के इस सम्मान में बराबर के हिस्सेदार बनेंगे और सट्टा सीन डाल को इससे बेहद लाभ होगा तथा आने वाली पीढ़ी भी राजा से जुड़ेगी ऐसा दिखाई देता है राजा के रूप में सूर्य का स्थान पर बैठना प्रधानमंत्री एवं सरकार का इस मंदिर के निर्माण में जबरदस्त प्रभाव दर्शा रहा है |

सत्यजातकम् के अनुसार पंचमेश सूर्य यदि दशम भाव में हो तो

पुत्रेशे दशमयाते पुण्यकृतस् भविष्यति।

धर्मशालामन्दिराणां जीर्णोद्धारमाचरेत्। ।

ऐसा जातक किसी मंदिर,धर्मशाला एवं परोपकार के महान कार्य अपने हाथ से करता है। यहाँ पर सूर्य अपनी शत्रु राशि मकर में है किन्तु षड़बल में सबसे बली ग्रह है ।इसलिए अपने शत्रुओं के मध्य में होने के बावजूद लाभकारी ही सिद्ध होगा।

11वां भाव जैसा कि हम सब जानते हैं राष्ट्रीय मुद्रा से संबंधित होता है जहां शनि स्वराशि के होकर बैठा हैं जो आने वाले समय में देश को इससे बहुत अधिक मुद्रा का लाभ होता दर्शा रहे हैं इस शनि के स्वराशि होने से और इस मंदिर से जबरदस्त धन संचय होने से राष्ट्र के लक्ष्य और योजनाएं भी सफलता की और बढ़ेगी ऐसा नजर आता है | शनि कुम्भ राशि (मूल-त्रिकोणी) है जिसके कारण से यह भाग्यशाली एवं किस्मत वाला होगा । अपनी विरासत को बचाकर रखेगा।

भृगुसूत्र के अनुसार,

"बहुधनी विघ्नकरः भूमिलाभः राजपूजकः "

राजा से,सरकार से राज सम्मान,लाभ पाने वाला,भूमिलाभ वाला,लिखे विधाता,स्वंय विधाता। अपनी मूल-त्रिकोण राशि में होने से लाभेश शनि बहुत रूपया कमाएगा एवं बहुत धनी मंदिर होगा।

12वीं भाव में गुप्त योजनाओं के घर पर गुप्त राहु का बैठना भविष्य में थोड़ा बहुत गुप्त शत्रुओं से भय भी इसको दर्शा रहे हैं वहीं एक जाति विशेष वर्ग के असंतुष्ट होना भी दर्शा रहे हैं द्वादशेष गुरु का लग्न में होना बताता है कि देश में विदेशी गुप्तचर भी सक्रिय हैं एवं देश की नीतियों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं |

द्वादश का मीन राशिगत राहु अध्यात्म ज्ञान एवं संन्यास के लिए शुभ होता है । यह राहु बहुत बड़े परिवार को पालने वाला,धनवान व सुखी बनाता है ।

उपरोक्त ग्रहयोगों के कारण यह हमारा मंदिर पूरे विश्व के लिए कल्याणकारी होगा । इस ट्रस्ट के द्वारा सनातन धर्म के मठ,मंदिरों के उद्धार के लिए ऐतिहासिक कार्य किए जाएंगे ।

 

बुधवार, 17 जनवरी 2024

दुनिया मे कुछ प्रसिद्ध शापित राजवंश

अमरीका का कैनडी राजंवश, भारत का नेहरू जी का परिवार ग्वालियर का सिंधिया राजघराना आदि शापित राजवंश है । भारत के सुप्रसिद्ध ज्योतिषी के एन राव ने अपनी पुस्तक नेहरू डायनेस्टी मे लिखा है कि प. मोतीलाल नेहरू को भारतीय धर्म अध्यात्म साधू संतों ज्योतिष और अंय भारतीय विद्याओं मे अगाध श्रद्धा थी उन्होने अपने पुत्र श्री जवाहर लाल के विवाह हेतु आये एक से एक बढ कर धन सम्पन्न और राजघरानों के विवाह प्रस्ताव ठुकरा कर दिल्ली के एक साधारण बर्तन व्यवसायी श्री अमृतलाल की पुत्री कु. कमला नेहरू के विवाह प्रस्ताव को स्वीकार किया क्योंकि कमला की कुंडली देख कर तत्कालीन कई ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि यह लड़की खानदान को तीन प्रधानमंत्री देगी इसका पति पुत्री और नाती देश के भावी प्रधानमंत्री होगें परन्तु वे दुःखान्त मृत्यु का प्राप्त होगे इस अशुभ भविष्यवाणी को उन्होने जान कर छुपा लिया था कहते है कि नेहरू राजवंश पर एक नाग का भी शाप था बताया जाता है । कि मोतीलाल के मकान आनंद भवन मे एक बहुत पुराना नाग रहता था जो किसी को कोई हानि नही पहुश्चाता था ब्रिटिश काल मे ही उस सर्प की हत्या कर दी गई थी जनविश्वास है कि उसी सर्प शाप के कारण नेहरू परिवार मे नेहरू जी की रहस्यमय मौत हुयी,संजय गांधी युवावस्था मे वायुयान दुर्घटना मे मारे गये,इंदिरा जी और राजीव गांधी जी की हत्या हुयी और राहूल गांधी अविवाहित ही रह गये |

ग्वालियर के सिंधिया परिवार मे दो शाप बताये जाते है। पहला यह कि कोई भी राजा 55-56 वर्ष की आयु से अधिक नही जीवित रहता है ।

शापित परिवारों की सूत्रों मे अमरीका का कैनेडी परिवार का नाम सर्वोच्च सूची मे है। 1960 मे चुने गये जॉन एफ कैनेडी अमरीकी इतिहास सर्वाधिक चर्चित और चमत्कारी  राष्ट्रपति थे 1963 मे जब वे लोकप्रियता के शिखर पर थे तो अति नाटकीय ढंग से उनकी हत्या कर दी गई उसके बाद से उनके परिवार मे एक अति रहस्यमय शाप शुरू हुआ उनके भाई अमरीका के अटार्नी जनरल थे राष्ट्रपति पद पर उनकी विजय सुनिश्चित थी तभी उनकी गोली मार कर हत्या कर दी गई उसके बाद उनके एक भाई जुनियर कैनेडी और उनकी बहन कैथलीन की विमान दुर्घटना मे मृत्यु हो गई | कैनेडी की एक अन्य बहन रोजमेरी जन्म जात मानसिक रूप से विक्षिप्त थी उनके चौथे भाई गंभीर कार दुर्घटना के शिकार हुये उनकी प्रेमिका मेरी जो कोपकने मारी गई | कैनेडी के पुत्र डेविड कैनेडी ड्रग्स की ओवरडोज लेने से मर गये उनके दूसरे पुत्र रॉबर्ट कैेनेडी ड्रग्स तस्करी मे पकड़े गये उनके चचेरे भाई को कैंसर हो गया | परिवार के एक सदस्य विलियम कैनेडी स्मिथ पर बलत्कार का आरोप लगा | कैनेडी की विधवा जैकी ने एक धनवान अरिस्टाटल ओनासिस से विवाह किया विवाह करने के बाद ही उसके 24 वर्षीय पुत्र की विमान दुर्घटना मे मृत्यु हो गई उसकी पत्नी टीना भी अचानक मर गई 1975 मे ओनासिस की भी मृत्यु हो गई  |