बुधवार, 30 नवंबर 2022

मंत्रो का वर्गीकरण

समाजिक वर्ण व्यवस्था के अनुसार ही मंत्रों का भी वर्गीकरण किया गया है यह वर्गीकरण मंत्र के आदि अंत में प्रयुक्त बीजमंत्रों के द्वारा निर्धारित किया जाता है |

जाति पर आधारित मंत्र का वर्गीकरण इस प्रकार से हैं |

ब्राह्मण मंत्र - इसमें चार बीजाक्षर होते हैं |

क्षत्रिय मंत्र - इसमें तीन बीजाक्षर मंत्र होते हैं |

वैश्य मंत्र - इसमें दो बीजाक्षर मंत्र होते हैं |

शूद्र मंत्र इसमें एक बीजाक्षर मंत्र होता है |


मंत्रों का वर्गीकरण योनि के आधार पर इस प्रकार से किया गया है |

पुलिंग मंत्र - इस मंत्र के अंत में “हुं फट” का प्रयोग होता है |

स्त्रीलिंग मंत्र - इस मंत्र के अंत में “स्वाहा” प्रयोग होता है |

नपुंसक मंत्र - इस मंत्र के अंत में “नमः” प्रयोग होता है |

 

सोमवार, 28 नवंबर 2022

जन्म कुंडली के चमत्कारी प्रयोग

1)यदि आपको आर्थिक समस्या रहती है तथा आपके कार्यों में प्रकार की रुकावट आती है तो आप प्रातः उठने के साथ ही अपने जन्म मास तथा पक्ष का 21 बार उच्चारण करे |

उदाहरण के लिये यदि आप का जन्म भाद्रपद के शुक्लपक्ष को हुआ है तो आप भाद्रपद शुक्लपक्ष का नियमित उच्चारण करें । इसी प्रकार सोने के लिये बिस्तर पर जाने पर भी यह उच्चारण करें अर्थात दिन में दो बार करें, प्रातः उठते ही तथा सोते समय ऐसा करे । कुछ ही समय में आपको चमत्कार दिखाई देगा ।

यह कार्य आप जितने अधिक विश्वास से करेंगे उतना ही शीघ्र एवं अधिक लाभ दृष्टिगोचर होगा ।

2) यदि आप बेरोजगार हैं तो सूर्यास्त होते समय सूर्यदेव को प्रणाम कर 21 बार अपनी जन्मतिथि व योग का उच्चारण करें ।

3) यदि आप चाहते हैं कि आपको आर्थिक समृद्धि के साथ प्रत्येक सुख की प्राप्ति हो तो आप नियमित रूप से प्रातः उठते ही अपने जन्म नक्षत्र व तिथि का उच्चारण करें ।

4) यदि कोई अधिक अस्वस्थ रहता है तो वह प्रातः उठते ही तथा रात्री सोने के लिये जाते समय अपने दोनों हाथ की हथेलियों को देखते हुये 21 बार जन्म करण व जन्म योग का उच्चारण करे । इससे रोगी को रोग से मुक्ति मिलकर शरीर स्वस्थ बना रहता हैं

5) यदि आपको किसी भी प्रकार का मानसिक कष्ट है तो आप अपने हाथ की दोनों हथेलियों को खोल कर अपने चेहरे पर लगायें अर्थात् दोनों ही हथेलियों से अपना चेहरा ढक लें और 21 बार अपने जन्म नक्षत्र का उच्चारण करें । इसके करते ही आपका कष्ट तुरन्त समाप्त हो जायेगा ।

6) आप यदि प्रातः उठते ही अपने हाथ की दोनों हथेलियों से अपने चेहरे को ढक कर 21 बार अपनी राशि का उच्चारण करेंगे तो आपका सारा दिन अच्छा व्यतीत होगा ।

7) यदि आप प्रातः उठते ही 21 बार “लग्नदेवाये नमो नमः” का जाप करेंगे तो को शारीरिक कष्ट कम प्राप्त होगा तथा आप सदैव स्वस्थ रहेंगे ।

8) यदि आप अस्वस्थ हैं और शीघ लाभ चाहते हैं तो अपने जन्मनक्षत्र के प्रतिनिधि देवता के नाम का 21 बार सुबह - शाम उच्चारण करें । ऐसा करने से आशा से अधिक तथा अतिशीघ्र स्वस्थ होंगे ।

9) दिन में दो बार जन्महोरा के उच्चारण से शारीरिक स्वस्थता के साथ आर्थिक सुख एवं समृद्धि भी प्राप्त होती है ।

10) अपने गण का 21 बार उच्चारण करने से आपको कभी भी कोई शत्रु हानि नहीं दे सकेगा ।

11) दिन में दो बार 21 - 21 बार अपनी नाड़ी का उच्चारण करने से संतान की आयु वृद्धि होती है तथा पूर्ण पारिवारिक सुख भी प्राप्त होता है

12) अपनी जन्मयोनि का 21 बार उच्चारण करने से अचानक होने वाली हानि से बचा जा सकता है

13) यदि आप अपने जीवन में किसी भी समस्या से ग्रस्त हैं तो प्रातः उठते ही शनिदेव के दस नाम,बारह ज्योतिर्लिंग तथा भद्रा के बारह नाम (भैरवी, दधिमुखी, धन्या, भद्रा, महामारी, खरानना, कालरात्रि, महारूद्रा, विष्टि, कुलपुत्रिका, महाकाली व असुरक्षयकरी) का उच्चारण करें । इससे आप अपने जीवन में किसी भी प्रकार के संकट से सदैव मुक्त रहेंगे । भद्रा शनि की सगी बहन है और किसी भी सकंट को उत्पन्न करने में इनकी भी बड़ी भूमिका होती है ।

14) जन्म योनि का 21 बार प्रतिदिन उच्चारण करने से आत्मबल में वृद्धि होती है ।

 

पत्तों के चमत्कारिक प्रयोग



बहुत कम लोग इस बारे में जानते होंगे कि वृक्षों के पत्ते भी विभिन्न प्रयोगों में चमत्कारिक रूप से काम करते है । जो लाभ हमें वृक्ष देते हैं, वही लाभ हमको वृक्ष के पत्ते भी दे सकते है । यहाँ पर म आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे है जिसे आप जान सकेंगे कि हम किस वृक्ष के पत्ते से क्या लाभ ले सकते है |

पत्ता लाने की विधि - किसी शुभ समय में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें । वृक्ष के नाम से सिद्ध कच्ची सुपारी,गुलाल,रोली,चावल,फूल एवं प्रसाद के साथ टीप लेकर वृक्ष के पास जाये । प्रणाम कर वृक्ष का पूजन करें और कहे कि हे वनस्पति देव, मैं आपकी शरण में आया हूं तथा आप मेरा (अपने कार्य को बोलें) कार्य सिद्द करने की कृपा करें । इस निवेदन के बाद पत्ता तोड लायें ।

यहां पर आपको यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि किस पत्ते का किस प्रकार से प्रयोग करके क्या लाभ लिया जा सकता है |

1)आश्लेषा नक्षत्र में बरगद के पत्ते को लाकर भण्डार घर में रखने से भण्डारगृह कभी खाली नहीं होता है ।

2)भरणी नक्षत्र में दर्भ लाकर उसे अनाज के भंडार में रखने से तथा पानी में डालने से अनाज में कमी नहीं आती है । जिस कुयें का जल खारा हो अथवा कम हो तो उसमें दर्भ का पत्ता डालने से पानी मीठा हो जाता है और कुआं भी नहीं सूखता है ।

3)पुष्य नक्षत्र में बरगद के पत्ते का लाकर उस पर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय लिखकर अपने धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक समस्या का समाधान होता है

4)पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में करंज के पत्ते लाकर पास रखने से अदालती कार्य में सफलता मिलती है

5)रोहिणी नक्षत्र में बेल पत्र लाकर जेब में रखने से अथवा आलमारी में रखने से दरिद्रता दूर होती है

6)आर्द्रा नक्षत्र में आम के पत्ते लाकर खेत में दबाने से फसल को हानि देने वाले जीव - जन्तुओं का नाश होता है और फसल भी अधिक होती है

7)यदि आपकी आय में कमी आ गई है तो आश्लेषा नक्षत्र में बहेड़ा का पत्ता लाकर गल्ले अथवा आलमारी में रखने से आय में वृद्धि होती है

8)व्यापार में अधिक लाभ लेने के लिये अनुराधा नक्षत्र में नींबू के पत्ते रखने से व्यापार उन्नति करने लगता है

9)श्रवण नक्षत्र मे अंगूर के पत्ते लाकर अपने पास रखने से सामने वाला व्यक्ति  प्रभावित होता है

 

शुक्रवार, 25 नवंबर 2022

दिसंबर महीने मे बाज़ार

दिसम्बर को सूर्य ज्येष्ठा में दाखिल होगा । इस समय बुध भी ज्येष्ठा में ही है । अत: बुध-सूर्य का मेल अच्छी तेजी का संकेत देता है लेकिन बुध इसी दिन मूल नक्षत्र एवं धनुराशि में आ रहा है एवं पश्चिम में उदित भी हो रहा है । 

अत: सोनाचांदीचावलगेहूंजौचना,अलसीसरसों,एरण्ड,हींग,गुग्गुल,पारागुड़खाण्डघीतेल के व्यापार में जोरदार तेजी के बाद मन्दी का रहेक्योंकि वक्री मंगल की दृष्टि तेजी कारक है । इस समय रुई के व्यापारी तेजी में ही रहें तो लाभ में रहेंगे ।

नोट - इन दिनों किसी प्रान्त-विशेष में प्राकृतिक आपदा से जनधनहानि,खेती को हानि पहुंचने से व्यापार क्षेत्र प्रभावित होगा ।

दिसंबर को वक्री मंगल रोहिणी नक्षत्र में दाखिल होगा एवं दिसम्बर को शुक्र मूल/धनु में प्रविष्ट होगा ।

ध्यान दें - इस समय बुध के साथ शुक्र का एकराशि एवं एक नक्षत्र सम्बन्ध बन रहा हैअत: वायदा एवं हाजर के व्यापारी तेजी से लाभ लेंगे । हमारे विचार से 4/5 दिसम्बर को रेशम,सरसोंतिलतेललाल मिर्चहींगचनाचावल आदि अनाजचांदीसोनातांबा आदि धातु एवं शेयर बाजार तेज रहेंगे । रुईसूतकपास में पहले मन्दी अनाजों में होकर बाद में तेजी रहेगी। 10 दिसम्बर तक बाजारों में तेजी से लाभ लें ।

11 दिसम्बर को बुध पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में दाखिल होगा । इन दिनों अनाजों एवं सोना-चांदी में जोरदार मंदी का झटका आएगा सावधानी से व्यापार बढ़ावें ।

15 दिसम्बर तक उत्तम मध्यम रूप से मन्दी प्रधान रहे,बीच-बीच में तेजी के झटके भी आ सकते हैं ।

16 दिसम्बर को सूर्य मूल नक्षत्र एवं धनुराशि में आ जाता है । इस समय सूर्य बुध-शुक्र के साथ मेल करेगा एवं इन पर मंगल की विशेष दृष्टि भी रहेगी । 16 दिसंबर को शुक्र समान्यत: पू. षा. नक्षत्र में आ जाता है । अतः कहीं पेयजल की समस्या से जनता परेशान रहे एवं दुर्भिक्ष से भी व्यापार प्रभावित होगा । 15 दिन में रुईकपाससूतसोनाचांदीअलसी आदि तिलहन में आदि सारे जोरदार मन्दी या तेजी का संचार होगा,बहुत ही सावधानी का समय है । इन दिनों मूंगमोठउड़दतिलतेलसरसों एवं नमक में मन्दी रहे ।

व्यापारी ध्यान दें - 16 दिसंबर को ही शनि धनिष्ठा के दूसरे चरण में आएगा । गेहूंजौराईमोठचनाचावलमूंगउड़दमसूरबाजराज्वार में शेयर तेजी रहे । गुड़,खाण्डशक्कर में मन्दी रहे ।

नोट - 16 दिसम्बर से 15 दिन में जोरदार तेजी-मन्दी के झटके आएंगे,अत:सावधानी से व्यापार करें ।

19 दिसंबर को राहु भरणी के प्रथम चरण में आएगा, इस समय कपासइन दिनों में गुड़खाण्डघीतेलगेहूंचावल में 21 दिसम्बर तक उत्तम-मध्यम तौर पर दाखिल हो तेजी का रुख रहेगा ।

22 दिसंबर को बुध उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में आकर अनाजों में मन्दी करे ।

25 दिसम्बर को चन्द्र दर्शन होने एवं 26 दिसम्बर को शुक्र के उ. षा. नक्षत्र में आने पर गुड़खाण्डसोनाचांदीअलसीएरण्ड आदि तिलहन एवं अनाजों में कुछ तेजी रहे । रुई में घटाबढी के बाद तेजी रहेगी । इस समय शुक्र बुध का मेल तेजी का संकेत देता है ।

27 दिसम्बर का दिन विशेष महत्त्वपूर्ण है । इस समय बुध मकर राशि में शनि के साथ शनि की राशि में आता है । इस समय रुईसोनाचांदी एवं अनाजों के भाव ऊपर - नीचे रहेंगे ।

28दिसं. को गुरु उ.भा. के दूसरे चरण में आकर बाजारों को मन्दा करेगा। चांदी, सोना, रुई, गेहूं आदि अनाज मन्दे रहें।

29 दिसंबर को सूर्य पूर्वाषाढ़ा में आएगा । इसी दिन शुक्र मकर राशि में दाखिल होकर शनि के साथ एवं वक्री बुध के साथ मेल करेगा । इस प्रकार शनि व बुध एवं शुक्र एक साथ मकर राशि में बैठे हैं । यह योग व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है । 

इस योग का प्रभाव 31 दिसम्बर तक तेलघीसरसोंबिनौला आदि तिलहनगुड़खाण्डहल्दीऊनी वस्त्रगेहूंचना में आदि सारे अनाज तेज रहेंगे। रुई एवं चांदी में घटाबढ़ी के बाद तेजी रहेगी। इस समय ताजा मशवरा करके उत्तम लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

 

बुधवार, 23 नवंबर 2022

ज्योतिष के बारे में अधिक कैसे जान सकते हैं ?

यदि आपकी ज्योतिष में गंभीर रुचि है या आप बस उत्सुक हो गए हैं, तो बहुत सारे संभावित संसाधन हैं कि आप प्रतीत होने वाली अंतहीन आपूर्ति पर एक संक्षिप्त नज़र डाल सकते हैं और भयभीत हो सकते हैं। ज्योतिष के विषय में एक नवागंतुक संभवतः इतनी अधिक जानकारी के माध्यम से नेविगेट कैसे कर सकता है? जवाब है, शुरू करने के लिए, मूल बातें। यदि आप एक नौसिखिया हैं, और इस बारे में अनिश्चित हैं कि "मूल बातें" क्या हैं, तो कुछ स्थान दूसरों की तुलना में आसानी से समझने वाले तरीके से यह जानकारी प्रदान करने के लिए बेहतर तरीके से सुसज्जित हैं।

ऑस्ट्रेलिया के एस्ट्रोलॉजी ऑन द वेब के रॉब टिलेट तीन दशकों से अधिक समय से अभ्यासरत ज्योतिषी हैं। ज्योतिष ऑन द वेब वेबसाइट पर उनके लेख सबसे निरपेक्ष मूल बातों के साथ शुरू होते हैं, सभी स्पष्ट रूप से इस तरह से लिखे जाते हैं जो आसानी से किसी को भी समझ में आते हैं, और विश्लेषण के अधिक विस्तृत तरीकों की ओर बढ़ते हैं। उन लोगों की ओर निर्देशित जो ज्योतिष के विषय में नए हैं,

श्री टायलेट यह स्पष्ट करते हैं कि ज्योतिष किसी व्यक्ति को यह दिखाने का विषय नहीं है कि क्या अपरिहार्य है, बल्कि यह कि कैसे किसी की अपनी स्वतंत्र इच्छा उन घटनाओं में सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है जो अंततः किसी के जीवन में घटित होंगी। यह जानकारी नौसिखियों को आत्मविश्वास और शक्ति की भावना देगी।

मिस्टर टायलेट स्पष्ट भाषा में यह भी बताते हैं कि ज्योतिष कैसे काम करता है। अनावश्यक तकनीकी शब्दों के साथ विषय को उलझाए बिना या नौसिखियों के लिए भ्रम पैदा किए बिना, वह वर्णन करता है कि क्या मौजूद है और कैसे सब कुछ जुड़ा हुआ है। यहां तक ​​कि सबसे गैर-तकनीकी रूप से इच्छुक नवागंतुक भी ज्योतिष के बारे में श्री टायलेट की व्याख्याओं और यह सब कैसे काम करता है, इसके विवरण को समझने में सक्षम होंगे। वेब साइट पर ज्योतिष पर उनके लेख निश्चित रूप से ज्योतिष के बारे में जानकारी के पहले स्रोत के रूप में सबसे अच्छी जगह हैं।

वेब पर ज्योतिष दस लोगों की एक टीम से बना है, जिनमें से सभी सामान्य रूप से ज्योतिष के क्षेत्र में बहुत अच्छी तरह से वाकिफ हैं, साथ ही अंक ज्योतिष और ध्यान जैसे कई संबंधित विषयों के विशेषज्ञ भी हैं। जबकि वेबसाइट स्वयं ज्योतिष के सभी पहलुओं पर सामान्य जानकारी की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करेगी, आप चाहें तो किताबें या व्यक्तिगत रीडिंग भी ऑर्डर कर सकते हैं। एक संदेश मंच भी है जहां आप ज्योतिष और इससे संबंधित क्षेत्रों में समान रुचि रखने वाले अन्य लोगों के साथ जानकारी, प्रश्न और अंतर्दृष्टि साझा कर सकते हैं।

यदि आप भारतीय ज्योतिष और पश्चिमी ज्योतिष के बीच तुलना और अंतर में रुचि रखते हैं, तो वैदिक विश्वकोश इस जानकारी के लिए एक उत्कृष्ट स्रोत है। वैदिक एनसाइक्लोपीडिया से आप सबसे पहले यह जानेंगे कि पश्चिमी ज्योतिष आधुनिक दुनिया से बहुत प्रभावित है, वैदिक ज्योतिष शुरू में जिन जड़ों पर आधारित था, वे आज भी उतनी ही मजबूत और निरंतर हैं, जब ज्योतिष का यह रूप पहली बार शुरू हुआ था।

चीनी ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए, सुज़ैन व्हाइट द्वारा लिखित इस विषय पर पुस्तकों को पढ़ना एक अच्छी शुरुआत होगी। "द न्यू चाइनीज एस्ट्रोलॉजी" और "चाइनीज एस्ट्रोलॉजी प्लेन एंड सिंपल" आपको ज्योतिष के इस विशिष्ट रूप का सर्वश्रेष्ठ अवलोकन प्रदान करेंगे।


रविवार, 20 नवंबर 2022

चीनी ज्योतिष मे ड्रैगन राशि के गुण

 


चीनी राशि चक्र मे 1916,1928,1940,1952,1964,1976,1988,2000,2012 को जन्मे व्यक्तियों को ड्रैगन राशि का कहा जाता हैं | ज्योतिष अनुसार चीनी राशि चक्र में ड्रैगन एकमात्र पौराणिक प्राणी के रूप मे रखा गया है । प्रतीक के रूप में  ड्रैगन चीनी संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है । आम नागरिकों के लिए शक्ति, स्वास्थ्य, भाग्य और सद्भाव लाने के लिए ड्रेगन को छतों और दरवाजों के ऊपर रखा जाता है । मान्यता ये हैं कि ड्रेगन बुरी आत्माओं को दूर भगाते हैं और राक्षसों को भगा देते हैं ।

यह ड्रैगन का चिन्ह परंपरागत रूप से चीन के सम्राट से जुड़ा हुआ है, और इस वजह से इसे सर्वशक्तिमान के रूप में जाना जाता है ।

ड्रैगन राशि में जन्म लेने वाले आकर्षक और भाग्यशाली होते हैं । वे अपने जीवन में धन और सौभाग्य को आकर्षित करने की बेहतरीन संभावना रखते हैं । ड्रेगन शक्तिशाली होते हैं और वे स्वयं ऐसा जानते भी हैं की वे शक्तिशाली हैं

ड्रैगन राशि के लोग आत्मविश्वासी होते हैं और अपनी छाप छोड़ना जानते हैं । वे आम तौर पर आकर्षण ध्यान का केंद्र होते हैं और अपनी उस भूमिका में कामयाब भी होते हैं । उनका स्वाभाविक उत्साह और रुचि अक्सर उन्हें सत्ता और ऊंच पदों तक ले जाती है ।

ड्रैगन लोग समान्यत: बड़े काम करना पसंद करते हैं । वे बुद्धिमान हैं और जब वे अपनी प्रतिभा, बुद्धिमत्ता और अत्यधिक ऊर्जा को संयोजित करना जानते हैं, ड्रैगन लोगो को अपने अति महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करने में कोई समस्या नहीं होती है ।

ड्रैगन राशि मे जन्मा व्यक्ति जब नकारात्मक शक्ति की ओर जाता है, और यह नकारात्मकता, यदि अनियंत्रित हो  जाती है, तो यह नकारात्मकता उससे अन्य लोगों को दूर कर देती हैं तब ड्रेगन राशि मे जन्मे लोग अहं – केंद्रित, असभ्य, अभिमानी और बदमिजाज व्यक्ति के रूप में सामने आते हैं ।

ईर्ष्या ड्रैगन की दुश्मन है । उन्हें हमेशा किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ छल और दुष्टता का उपयोग करने की प्रवृत्ति के प्रति सतर्क रहना चाहिए, जिसे वे महसूस करते हैं कि उसने उनके साथ गलत किया है ।

ड्रैगन एक दृढ़ मित्र है, जो अत्यधिक आवश्यकता के समय अटूट समर्थन प्रदान करता है । एक ड्रैगन के साथ, आप कभी भी अपने को परित्यक्त अथवा छोड़ा हुआ महसूस नहीं करेंगे ।

ड्रेगन सभी चीजों में भव्यता की ओर झुकते हैं चाहे वह धन, भोजन, विलासिता, जुनून या शक्ति ही क्यू ना हो, ड्रैगन के लिए पर्याप्त कभी भी पर्याप्त नहीं होता है लेकिन भोग की ओर इस प्रवृत्ति के साथ, ड्रैगन के पास इस संकेत के सकारात्मक और नकारात्मक लक्षणों को सीखने, प्रबंधित करने और मिश्रण करने की अद्भुत क्षमता भी होती है ।

गुरुवार, 17 नवंबर 2022

ज्योतिष फल रत्न माला (समीक्षा)

प्रस्तुत पुस्तक जैमिनी की ज्योतिषीय प्रणाली पर आधारित है, और जैमिनी-पद्धति को समझने के लिए इसमे महत्वपूर्ण पाठ बनाए गए हैं । कारक या कारकांश लग्न का निर्धारण करते हुए, हमें बताया गया है कि अंशों की गिनती चर राशियो में शुरुआत से, स्थिर राशियो में अंत से  और द्विस्वभाव राशियो मे मध्य से होनी चाहिए । यह सिद्धांत पद अंशो की गणना में प्रकट होता है ।

प्रारंभिक अध्याय में दिए गए चार्ट में विभिन्न ग्रहों की सापेक्ष शक्ति के बारे में रोचक जानकारी है । इस प्रकार मंगल और शनि के बीच, एक दूसरे की तुलना में अधिक शक्तिशाली वह हैं जो लग्न का स्वामी  है । चंद्रमा के साथ स्थित ग्रह अधिक शक्तिशाली है । सूर्य मेष, सिंह, धनु, वृश्चिक और कन्या राशि में शक्तिशाली है, तथा धनु राशि में अधिक शक्तिशाली है |

तीसरा अध्याय जैमिनी के दृस्टी परिणामो को प्रस्तुत करता है । यहाँ लेखक फलित ज्योतिष के सिद्धांत को कारक के रूप में और फिर प्रकृति, शक्ति और स्थिति के रूप मे व्यक्त करता है । सबसे पहले, लग्न की ताकत हेतु शुभ ग्रहो का पता लगाएं । इन सभी को एक दूसरे से जोड़ना एक ऐसा सिद्धांत है जिसे एक सामान्य ज्योतिषी कुछ भी भविष्यवाणी करने से पहले उपेक्षा करता है और इस तरह इस प्रणाली को बदनाम करता है ।

चौथे अध्याय मे योग और उनके प्रभावों को निर्धारित करने में, लेखक बताते हैं कि हम ग्रह पर विचार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हिस्से को छोड़ देते हैं, परिणाम चंद्रमा द्वारा ली गई राशि का स्वामी कैसा है पता लगाया जा सकता है । यह ग्रह शांत है और इसके संबंध में अन्य सभी योगों को भी देखा जाना चाहिए । इस अध्याय में योग का तकनीकी अर्थ ग्रहों की युति से है । विभिन्न संयोजनों के परिणामों को स्पष्ट शब्दों में रेखांकित किया गया है ।

पाँचवाँ अध्याय अर्गला की बहुप्रचारित अवधारणा का एक स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करता है । जैमिनी की प्रणाली के लिए अर्गला बुनियादी है और इसमें हमे महारत हासिल करनी होगी, भले ही हम जैमिनी ज्योतिष का अनुसरण करने की कोशिश न करे क्योंकि अर्गाला ग्रहों की प्रकृति को काफी हद तक सही प्रदर्शित करता है ।

एक चर राशि में ग्रह की ताक़त एक चौथाई होती है,स्थिर राशि में ताकत आधी जबकि द्विस्वभाव राशि में पूरी ताकत होती है, और उच्च में केवल तीन चौथाई । यह एक मूल्यवान प्रत्यक्ष देखा गया सिद्धांत है ।

अगला अध्याय हमें विभिन्न भावो की योजनाओं के परिणामों की ओर ले जाता है । प्रथम में केतु को एक धर्म-गुणभिमानी (धर्म के गुणों की सराहना करने वाला) बनाने के लिए कहा गया है बृहस्पति यहाँ एक दार्शनिक बनाते हैं, और बुध बुद्धिमान और अच्छा वक्ता बनाते हैं |

शिक्षा का परीक्षण चतुर्थ 5वें भाव से करना होता है । बुध मंगल की युति इनमें से किसी भी घर मे आंध्र बनाता है, बृहस्पति संग युति संस्कृत बनाता है और शनि चंद्रमा संग द्रविड़ बनाता है।

दूसरे, चौथे और ग्यारहवें भाव से धन प्राप्ति की भविष्यवाणी की जानी चाहिए

यदि चन्द्रमा छठे भाव में हो (जो की बुध का भाव हैं) या चंद्रमा 5 वें में बुध के साथ होतो लेखक एक दत्तक संतान की भविष्यवाणी करता है, 5 वें भाव में केतु बेटियां देता है, जबकि राहू पुत्र देता है । पंचम भाव में सूर्य व्यक्ति को शिव के प्रति समर्पित बनाता है, बृहस्पति व्यक्ति को शैव और ब्रह्मवादी बनाता हैं । यदि राहु है तो  दुर्गा की पूजा और केतु होतो चण्डेश्वर की पूजा करवाता है यदि शनि अपने राशि का 5 वें स्थान पर होतो वह माधव का अनुसरण करता है । यदि यह शनि गुरु से दृष्ट हो या उससे जुड़ा हो, तो वह रामानुज का अनुसरण करता है और यदि शुक्र से दृष्टि या संगति आती है, तो व्यक्ति श्री वेंकटेश का अनुसरण करता है । यह वास्तव में प्रासंगिक कुंडली के गहन अध्ययन पर आधारित होगा और यह लेखक के वैज्ञानिक दृष्टिकोण के पक्ष में बहुत कुछ बताता है ।

बृहस्पति,शुक्र,चंद्रमा,केतु और बुध ग्रह शुभ हैं, जबकि अन्य चार ग्रह कौल यानी (तांत्रिक) प्रवृत्तियों को इंगित करते हैं जातक अभिचार कर्मो में रुचि रखता है,मंगल और केतु साथ होने पर जातक एक मांत्रिक बन जाता है । सूर्य और चंद्रमा की युति शिवदीक्षा (शिव को समर्पण) देती है,केतु और चंद्रमा की युति देवी सालिनी की पूजा करना बताती है ।

छठे अध्याय में पांच भावों का अध्ययन किया गया है, सप्तम अध्याय की शुरुआत छठे भाव से होती है । आठवें में सामान्य सिद्धांत दिए गए हैं । ये आगे के अध्यायों में कई श्लोकों में हैं जो मूल्यवान हैं और लेखक कृष्ण मिश्रा की अंतर्दृष्टि की गहराई को प्रकट करते हैं ।

दसवें अध्याय की शुरुआत विभिन्न लग्नों के विवरण से होती है । गणितीय गणनाओं की सहायता से लेखक दिखाता है कि हम कैसे और क्या भविष्यवाणी कर सकते हैं ।

जैमिनी ज्योतिष में पाई जाने वाली विभिन्न दशा प्रणालियों की व्याख्या ग्यारहवें अध्याय से की गयी है ।

तेरहवें अध्याय में ग्रहों के गोचर (गोचर) के परिणामों के बारे में बहुमूल्य सुझाव दिये गए हैं ।

तेईसवें अध्याय में फिर से एक विषयांतर है जो जन्म के समय को निर्धारित करता है की एक बच्चे को पूरी तरह से गर्भ से बाहर निकल जाने पर जन्म समय लिया जाता है बताया हैं यह अध्याय बालारिष्ट का एक संक्षिप्त विवरण भी प्रस्तुत करता है ।