1. जन्म कुंडली
के सूर्य पर केतु का गोचर जातक कपट पूर्ण षड़यंत्र से ठगा जाता है । परिश्रम का
पूरा फल नही मिलता,पिता
समान सम्बन्धी बदले की भावना से काम करेंगे ।
2.जन्म कुंडली
के चंद्र पर केतु का गोचर - केतु अलगाव वादी ग्रह है । जन्म कालीन
चंद्र पर केतु का गोचर माता या माता समान स्त्री से वियोग होता है,नई भू-सम्पदा
खरीदने में ठगी हो सकती है । स्वास्थ्य में गड़बड़ी और घर की स्त्रियों का
स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है ।
3. जन्मकुंडली
के बुध पर केतु का गोचर - मन में चिंता मित्रों एवं रिश्तेदारों से मनमुटाव बढ़ेगा । व्यापार में
लापरवाही के कारण हानि होगी ।
4. जन्मकुंडली
के मंगल पर केतु का गोचर क्रोध जल्दी आता है । छोटी-छोटी बात
पर जातक चिन्तित होगा और धैर्य में कमी होगी । इस समय अभिमान
एवं अह के टकराव से बचना चाहिए ।
5. जन्मकुंडली
के गुरू पर केतु का गोचर - अचानक धन व्यय,
आर्थिक संकट, समाज में भारी अपमान व अपयश की संभावना
रहेगी ।
पत्नी सुख में कमी आएगी, निद्रा में डर लगेगा ।
6. जन्म कुंडली
में शुक्र पर केतु का गोचर - दाम्पत्य सुख में रूकावटें, प्रेम-प्रसंग,
रोमांच में बाधाए होगी । मान-सम्मान में कमी होगी ।
7. जन्म कुंडली
में शनि पर केतु का गोचर-आशा-उत्साह में कमी लाता है । परिजनों से
प्रथकता होने का भय रहता है । मित्रों से सम्बन्ध खराब हो जाते है,कार्य में
निर्णय लेने में अनावश्यक देरी होती है ।
8. जन्म कुंडली
में केतु पर केतु का गोचर-याददाश्त पर बुरा असर पड़ता है । केतु की
स्थिति अच्छी हो तो जोश उत्साह में वृद्धि होती है ।
9. जन्मकुंडली
में राहु पर केतु का गोचर-राहु की जन्म कालीन स्थिति यदि अशुभ है तो केतु का गोचर
व्याकुलता और अधीरता बढ़ा देता है । यदि केतु की स्थिति जन्म कालीन ठीक है तो
जातक में जोश व उत्साह की वृद्धि हो जाती है ।
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