बुधवार, 1 मार्च 2023

राजनीति मे सफलता के योग


ज्योतिष विज्ञान में कई तरह के योग बताए गए हैं जिनमें व्यक्ति विशेष के भविष्य हेतु उचित परामर्श व जानकारी प्राप्त की जा सकती है । आज के इस प्रतिस्पर्धात्मक समय में प्रत्येक व्यक्ति कुछ ऐसा करना चाहता है जिसमें उसे भावी जीवन में मान - सम्मान, ताकत, धन दौलत, रूतबा सभी कुछ प्राप्त हो । ऐसे में कुछ ही क्षेत्र ऐसे हैं जहां यह सब कुछ एक साथ मिलता है, जिनमें प्रमुख राजनीति का क्षेत्र है ।

प्रस्तुत लेख में मैंने ऐसे ही कुछ योगों की चर्चा की है जिनसे यह जाना जा सकता है कि कोई व्यक्ति राजनीति के क्षेत्र में कामयाब होगा अथवा नहीं ।

1. मुसल योग - जब जन्म कुण्डली में सभी ग्रह स्थिर राशियों अर्थात् वृष, सिंह, कुंभ व वृश्चिक राशि में हो तब मुसल योग बनता है । इस योग में जन्मा जातक राजाधिकारी, प्रसिद्ध ज्ञानी एवं शासनाधिकारी होता है ।

2. नल योग - जब सभी ग्रह द्विस्वभाव राशियों में हों तो नल योग होता है । जिसमें जन्मा जातक राजनीति में दक्ष, चुनावों में सफलता प्राप्त करने वाला होता है ।

3. जब समस्त ग्रह केन्द्रीय भाव 1,4,7,10 में होते हैं तो कमल योग बनता है जिससे जातक प्रसिद्ध, धनवान, मन्त्री व राज्यपाल बनता है ।

4. यूप योग - लग्न से लगातार चार भावों में समस्त ग्रह होने से यूप योग होता है । इस योग में जन्मा जातक पंचायत एवं नगरपालिका के चुनावों में अवश्य विजय प्राप्त करता है,उसे विवाद निपटाने में दक्षता प्राप्त होती है ।

5. छत्र योग - जन्म पत्रिका में यदि सप्तम भाव में आगे के सभी भावों में सारे ग्रह हों तो छत्र योग बनता है । इसके प्रभाव से व्यक्ति राजकर्मचारी, ईमानदारी एवं उच्च पदाधिकारी होता है ।

6. चक्र योग - लग्न से एक - एक स्थान छोड़कर अर्थात जिस जातक की कुण्डली में ग्रह 1,3,5,7,9,11 वें भावों में हो तो वह जातक चक्र योग में जन्मा कहलाता है । इसके प्रभाव से व्यक्ति राज्यपाल या राष्ट्रपति अथवा राजा बनता है ।

7. गजकेसरी योग - लग्न अथवा चन्द्र से जब गुरू 1, 4, 7,10 वें भाव में हो तथा शुभ ग्रहों से दृष्ट या युत हो तब गजकेसरी योग बनता है । इसके प्रभाव से जातक राजनीति में दक्ष, प्रदेश का मुख्यमंत्री बनता है ।

8. काहल योग - लग्नेश बली हो सुखेश व गुरू परस्पर केन्द्र में हों अथवा सुखेश व दशमेश एक साथ उच्च या स्वराशि में हों तो काहल योग होता है । इस योग के प्रभाव से व्यक्ति राजदूत होता है तथा राजनीति में अच्छी सफलता भी प्राप्त करता है ।

9. शंख योग - लग्नेश बली हो तथा पंचमेश षष्ठेश परस्पर केन्द्र में हो अथवा भाग्येश बली हो लग्नेश, दशमेश चर राशि में हो तो शंख योग बनता है । इस योग के प्रभाव से जातक, दयालु, बुद्धिमान, मंत्री व मुख्यमंत्री पद प्राप्त करता है ।

10. श्री नाथ योग - सप्तमेश दशम में उच्च का हो तथा दशमेश व नवमेश की युति हो तो यह योग बनता है । इस योग के प्रभाव से व्यक्ति एम.पी.,एम.एल.ए.मंत्री आदि होता है ।

11. कुसुम योग - लग्न स्थिर राशि का हो,शुक्र केन्द्र में हो, चन्द्र त्रिकोण में शुभ ग्रहों से युक्त हो तथा शनि दशम में हो तो कुसुम योग बनता है । इस योग में जन्मा प्रभावशाली एम.पी., एम.एल.ए., तथा मंत्री, राज्यपाल, गर्वनर होता है ।

12. लग्नाधि योग - लग्न से 7वें, 8वें भाव में शुभ ग्रह हो और उन पर पाप प्रभाव ना हो तो लग्नाधियोग बनता है । ऐसा व्यक्ति राजनीति में अद्भुत सफलता पाता है ।

13. अधि योग - चन्द्रमा से 6, 7, 8, वें समस्त शुभ ग्रह का होना अधियोग कहलाता है । इस योग में जन्मा जातक सेनाध्यक्ष अथवा राज्यपाल होता है ।

14. महाराज योग - लग्नेश व पंचमेश में परिवर्तन हो अर्थात लग्नेश पंचम में पंचमेश लग्न में हो तो यह योग माना जाता है । इसके अतिरिक्त आत्मकारक व पुत्रकारक दोनों लग्न या पंचम में हों अपनी उच्च राशि, नवांश में हों शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो भी महाराज योग होता है । इस योग से जन्मा जातक राज्यपाल,मुख्यमंत्री होता हैं |

15. दाम योग - जब कुण्डली में समस्त ग्रह किन्ही छह राशियों में हो तब दाम योग बनता है । इस योग में जन्मा जातक राजनीति में अवश्य रूचि रखता है,परन्तु उसे इसमे सफलता थोड़ी कम मिलती है ।

इस प्रकार ऐसे अन्य कई योग हैं जैसे अरविंद योग,वीणा योग,लक्ष्मी योग,चामर योग,पंच महापुरूष योग,पर्वत योग आदि जिनसे जातक के राजनीति में इच्छुक होने व राजनीति में सफलता पाने के विषय में जाना जा सकता है ।

प्रस्तुत लेख सौभाग्य दीप नामक पत्रिका मे जनवरी 2011 मे प्रकाशित हुआ हैं |

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