गुरुवार, 22 नवंबर 2018
नाड़ी ज्योतिष द्वारा कुंडली का विश्लेषण
प्रस्तुत पुरुष जातक की मिथुन लग्न की पत्रिका
में दूसरे भाव में शनि,तीसरे में केतु,पांचवे में सूर्य-बुध,छठे में चंद्र,सातवें में शुक्र,आठवें
मंगल,नवे राहु और 12वे भाव में गुरु है जन्म समय गुरु की महादशा 7 महीने
व 15 दिन शेष थी |
नाड़ी सूत्रो के
अनुसार ऐसा लिखा गया हैं की जातक का पूर्वमुखी मकान मे मंदिर वाली गली
में जन्म हुआ होगा,जिसका पिता बहुत अच्छा,चौपाया जानवर रखनेवाला,स्वव्यवसाय करने वाला,बवासीर का रोगी तथा दूसरों की संपत्ति पर नजर रखने वाला होगा |
जातक के विषय मे
निम्न बातें कही गयी हैं की जातक स्वयं रोगी,पढ़ा-लिखा,बातूनी,वकील,गणितज्ञ अथवा गणित से कमाने
वाला,सहोदरों से दूर रहने वाला होगा जिसके नौ भाई बहन होंगे परंतु
दो भाई व चार बहनें ही जीवित रहेंगे | परिवार का 26 की उम्र में
बटवारा होगा इसका 22वे वर्ष में विवाह उत्तरी
दिशा की महिला से होगा जो दंतरोगी,सुंदर,कामुक व भाग्यवान होगी जिसके बाएं अंग में तिल होगा तथा उससे जातक के कुल
6 बच्चे होंगे जिनमे से एक लड़का व एक लड़की ही बचेंगे 4
बच्चों की मौत पिछले जन्म के बुरे कर्म के कारण हो
जाएगी जहां इसने बलात्कारी की मदद की थी तथा ब्राह्मण की जमीन घूस लेकर दूसरे ब्राह्मण को
दे दी थी |
इसकी पत्नी ने भी पूर्व जन्म
में गरीब बच्चों को दूध नहीं दिया था इस कारण संतान में दिक्कत आएगी जिसका निवारण इस जन्म मे रामेश्वरम जाकर समुद्र स्नानकर शिव पूजा करने तथा बच्चे
की स्वर्ण प्रतिमा,चंदन,फूल फल व कुछ धन समेत पंडित को दान करने से
फिर श्रीरंगम जाकर एकादशी व्रत करने से होगा |
जातक 20 वर्ष की आयु से धनी होने लगेगा,बहनों की संपत्ति भी पाएगा,नवे भाव में शनि
की राशि में राहु पिता गोरा कैसे हो सकता है परंतु शनि नवमेश पर मंगल की दृष्टि है
तथा शुक्र सूर्य से नवम भाव अर्थात लग्न को देख रहा है सूर्य से
चतुर्थ में मंगल तथा नवम भाव से चतुर्थ भाव में गुरु पिता का सुंदर मकान
वाला बताता हैं शनि राहू का 6/8 संबंध तथा नवमेष शनि पिता के भाव से छठे व मंगल से दृष्ट
है जिस कारण पिता बवासीर का रोगी होगा,शुक्र लग्न को
देख रहा है जिस कारण जातक स्वयं बड़ा आकर्षक होगा,चंद्र नीच छठे भाव में,शनि दूसरे भाव
में होने से वात रोगी भी होगा,चंद्र की दृष्टि
गुरु पर होने से इसका लीवर भी खराब होगा,उच्च का मंगल गुरु (सप्तमेश-दशमेश) द्वारा देखा जा रहा है जिससे जातक संपत्तिवान होगा,बुध त्रिकोण में होने से गणितज्ञ हो सकता हैं क्यूंकी सूर्य बुध की
युति गणित से जीवन यापन देती है,सूर्य से दशम
शनि सरकार से लाभ,शुक्र सप्तम भाव
में चंद्र मंगल से घिरा हुआ जातक को रसिया बता रहे हैं आठवें भाव का
मंगल व 3/9 में राहु-केतु सहोदरों
से अलग रहेगा,तीसरे भाव का
केतु होने से इसके सहोदरों की मृत्यु होगी,बुध-केतु दशा मे में 22वे वर्ष विवाह होगा क्यूंकी बुध लग्नेश व केतु सप्तमेश होकर सप्तम भाव को देख रहा है,3,7,11 भावो मे केतु नक्षत्र होने से पत्नी
को दंत रोग होगा |
सोमवार, 19 नवंबर 2018
गोचर मे ग्रह कब कष्ट प्रदान करते हैं |
ऐसा माना जाता हैं की ग्रह अपनी दशा अंतरर्दशा मे ही समान्यत: अपने शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं परंतु अनुभव मे यह
देखने मे आता हैं की प्रत्येक ग्रह अपनी गोचरीय स्थिति के अनुसार
भी जातक विशेष को कष्ट प्रदान करते हैं |
आइए इस लेख के द्वारा यह
जानते हैं की ग्रह गोचर मे कब कष्ट प्रदान करते हैं |
सूर्य भाद्रपद मास मे कष्टदाई होता हैं |
चन्द्र श्रवण मास मे कष्टदाई होता हैं |
मंगल वैशाख व मार्गशीर्ष मास मे कष्टदाई होता हैं |
बुध आषाढ़ व आश्विन मास मे कष्टदाई होता हैं |
गुरु पौष व चैत्र मास मे कष्टदाई होता हैं |
शुक्र ज्येष्ठ व कार्तिक मास मे कष्टदाई होता हैं |
शनि,राहू व केतू माघ व फाल्गुन मास मे कष्टदाई होते हैं |
गुरुवार, 15 नवंबर 2018
मंगल दोष
भारतीय ज्योतिष मे मंगल ग्रह को कुंडली की कुछ विशेष
स्थिति के आधार पर मंगल दोष के रूप मे गिना गया हैं जबकि किसी अन्य ग्रह को ऐसा
नहीं कहाँ गया हैं | मंगल दोष के विषय मे इतनी भ्रांतिया हैं की उसके विषय मे ठीक से कोई भी
विद्वान अथवा ग्रंथ नहीं बता पाते अधिकतर पत्रिकाओ मे मंगल की इन स्थितियो को
देखते ही मंगल दोष बता दिया जाता हैं जबकि ऐसे कई प्रश्न हैं जो बिना उत्तर के रह
जाते हैं | जिनमे कुछ प्रमुख प्रश्न निम्न हैं |
1)मंगल की प्रकृति क्या हैं |
2)मंगल पत्रिका मे जिन भावो का स्वामी हैं वह भाव शुभ हैं या अशुभ हैं
|
3)मंगल का दोष क्या सभी राशियो मे बराबर होता हैं |
4)क्या मंगल का प्रभाव चर,स्थिर व द्विस्वभाव राशियो
मे एक समान होगा |
5)क्या मंगल का अलग अलग भावो मे होने पर भी एक ही प्रभाव होगा |
6)मंगल दोष केवल साथी की मृत्यु ही कराएगा या कुछ और भी हानिकारक हो सकता
हैं |
7)यदि मंगल ऊंच,स्वग्रही,नीच हो
तब क्या होगा |
8)मंगल संग स्थित ग्रह उसका प्रभाव कितना घटा या बढ़ा सकता हैं |
9)क्या मंगल राजयोग कारक होकर भी अशुभता देगा |
10)मंगल की यह स्थिति लग्न,चन्द्र या शुक्र किससे देखे |
11)यदि मंगल दोष हैं भी तो उसकी प्रकृति क्या होगी |
12)मंगल का यह प्रभाव सारी उम्र रहेगा या दशा आने पर होगा |
13)यदि दोनों पत्रिकाए मंगली होतो क्या होगा |
मंगल प्रकृतीनुसार अनुशासनप्रिय,स्वाभिमानी व कठोर ग्रह हैं जिस
कारण इसे पाप ग्रहो को श्रेणी मे रखा गया हैं मनुष्य जीवन मे क्रोध पर इसका
आधिपत्य रखा गया हैं क्रोध आने पर सुख का ह्रास हो जाता हैं जिससे जातक सुख से
वंचित हो जाता हैं | यहाँ ध्यान रखे की सुख का भाव कुंडली मे
चौथा होता हैं और मंगल अपने से चौथे भाव पर दृस्टी रखता हैं क्रोध की स्थिति मे
व्यक्ति की बुद्दि व विवेक शक्ति नष्ट हो जाती हैं जिससे जातक का अहित होना
निश्चित हो जाता हैं |
मेष वृश्चिक राशि का स्वामी होने से इन राशियो मे
जन्मे जातको के लिए मंगल शुभ हुआ परंतु इन्ही लग्नों मे मंगल 6,8 का स्वामी भी बनता हैं तब ऐसे मे
क्या होगा यह एक विचारणीय विषय हैं | वही मंगल 4,5,9,12
लग्नों के लिए राजयोग कारक व शुभ ग्रह बनता हैं जो शांति,उन्नति व संपन्नता प्रदान करता हैं परंतु बुध,शुक्र
के लग्नों हेतु यह अशुभ होता हैं जबकि शनि के लग्नों मे मंगल ज़्यादातर लाभकारी ही
होता हैं जो जातक को सांसारिक व भौतिक संपन्नता देता हैं अनुभव मे देखने पर ऐसा
पाया गया हैं |
मंगल की प्रकृति – शुभभावों का स्वामी होकर मंगल जब
शुभ राशि मे होता हैं तब व साहस,बेबाक व स्पष्टवक्ता बनाकर शत्रुओ पर विजय तथा प्रयासो मे सफलता देता हैं | भाइयो द्वारा मदद,ज़मीनों द्वारा लाभ प्राप्ति के
लिए पत्रिका मे मंगल का शुभ होना ज़रूरी होता हैं | मंगल 6,8,12
का स्वामी हो या इनमे बैठा होतो जातक को घमंडी,अड़ियल व शंकालु बनाता हैं जिससे जातक धैर्यहीन,जल्दबाद
व उग्र होने से हानी पाता हैं उसे शांति प्राप्त नहीं होती वह लड़ता,झगड़ता रहता हैं दुर्घटना,अग्नि द्वारा भय व मृत्यु,जलना व हत्या जैसे दोषो का उसे सामना करना पड़ता हैं | मंगल बच्चो मे लीवर बदोतरी व संक्रामक रोगो के कारण ठीक से वृद्दि नहीं
होने देता,युवावस्था मे यह स्त्री जातको के लिए मासिक धर्म
का कारक बनता हैं जिससे उनके भावी वैवाहिक जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता हैं स्त्रीयों
मे विवाह के बाद मंगल को शुभता ही देनी चाहिए अन्यथा संतान होते समय कष्ट,देवर व ननद संबंधी तनाव,भाइयों से संबंधो मे खराबी,चोट,दुर्घटना,अप्राकृतिक मौत जैसे
प्रभावो का सामना उन्हे करना पड़ता हैं अत: स्त्री पत्रिका मे उसे शुभ ही होना
चाहिए | मंगल ग्रह बिना देर किए ही सज़ा दे देता हैं इस कारण
इसे ज़्यादा भयावह माना व समझा जाता हैं |
विवाह के लिए मंगल का निम्न भावो मे होना मंगल दोष
का निर्माण करता हैं |
1)लग्न जो की जातक का स्वस्थ्य,आयु व व्यक्तित्व बताता हैं चूंकि
यह सप्तम से सप्तम(मारक) होता हैं जो जीवन साथी की मृत्यु भी बताता हैं | यहाँ बैठा मंगल चतुर्थ व सप्तम भाव पर दृस्टी डालता हैं जिससे जातक के
ग्रहस्थ जीवन मे उत्तेजना बनी रहती हैं तथा पति पत्नी मे विचारक मतभेद उत्पन्न
होते रहते हैं |
4) यह भाव घरेलू वातावरण बताता हैं | विद्वान कहते हैं की किसी भी भाव
से 4,8,मे बैठा पाप ग्रह उस भाव की हानी करता हैं इस प्रकार
मंगल यहाँ लग्न भाव की हानी ही करेगा जिससे जातक की सेहत शरीर व आयु प्रभावित होगी
| यहाँ से मंगल जातक के ग्रहस्थ
भाव व कर्म भाव पर दृस्टी डालता
हैं जिससे उसके कार्य व्यवसाय मे स्थिरता नहीं रह पाती |
7)यह भाव वैवाहिक जीवन मे आपसी प्रेम दिखाता हैं जिससे
जीवन साथी की आयु,स्वस्थ्य,तथा अन्य विशेषताएं भी पता चलती हैं अत: इस
भाव मे मंगल का होना शुभ नहीं हैं | यहाँ का मंगल जातक के
शरीर के अतिरिक्त उसके कुटुंब भाव पर भी दृस्टी देता हैं जिससे जातक की अपने
कुटुंब से अनबन रहती हैं और वह घरवालो केद्वारा तिरिस्कृत होता हैं |
8)मंगल भाव होने से यह विवाह की आयु बताता हैं साथ
ही साथ यह भाव पति पत्नी के शारीरिक सुख के अतिरिक्त उन दोनों के भाग्य व वित्तीय स्थिति
का पता भी देता हैं | यहाँ का मंगल जातक के कुटुंब के अतिरिक्त उसके भाई बहनो व मित्रो से भी
उसका मतभेद कराता हैं जिससे जातक जीवन मे अकेला होता चला जाता हैं |
12)यह भाव भोग,आनंद व शयन सुख के साथ साथ धोखा व
हानी भी दर्शाता हैं स्पष्ट हैं की यहाँ मंगल का होना हानी ही करेगा | यहाँ से यह मंगल शत्रुओ के अतिरिक्त पत्नी स्थान पर भी दृस्टी देता हैं
जिससे पति पत्नी एक दूसरे से शत्रुता का व्यवहार करने लगते हैं जिससे उनका जीवन
नर्कमय हो जाता हैं |
आईये अब कुछ पत्रिकाओ मे मंगल दोष का प्रभाव देखते हैं |
1)31/12/1965 18:16 (3)तलाक़शुदा जातक
2)3/12/1976 17:15 (2)जातिका फरवरी 2000 मे विवाह पति
की नपुसंकता के चलते दिसंबर
2003 मे तलाक |
3)30/6/1963 22:30 (11) जातिका जब यह 29 वर्ष की थी
इनके पति की अपहरण बाद हत्या कर दी गयी |
4)28/11/1979 5:36 (7) जातिका का फरवरी 2005 मे
विवाह हुआ था जिसके 9 माह बाद पति की मौत हो गयी |
5)31/12/1969 20:22 (4) जातिका सितंबर 1996 मे
विवाह 2000 मे तलाक |
6)18/10/1982 20:53 (2) जातिका 2006 नवंबर मे विवाह
2009 मे तलाक |
7)14/12/1977 4:16(7)जातक नवंबर 2005 मे विवाह 2012
मे तलाक |
8)7/10/1954 22:00 (2)जातिका अगस्त 1976 मे विवाह
जून 1977 मे पति की मौत |
9)25/3/1964 14:45 (4) जातक नवंबर 2002 मे विवाह
मार्च 2010 मे तलाक |
10)24/10/1973 15:00 (11)जातक जून 2003 मे विवाह
अगस्त 2006 मे पत्नी की मौत |
शुक्रवार, 9 नवंबर 2018
कैसे करे लग्न शुद्धि
लग्न शुद्धि
हमेशा से ही दुष्कर कार्य रहा है ज्योतिष का अध्ययन करते हुए ऐसा कई बार होता है
कि जातक की पत्रिका दशा अनुसार उसका अच्छा समय बता रही होती है परंतु जातक
परेशानियों से घिरा हुआ होता है तब कुंडली का विशेष अध्ययन व अनुभव की जरूरत पड़ती है ऐसे में यदि
लग्न शुरुआती अंशो में या अंतिम अंशों में हो तो यकीनन फलित करना एक कठिन व श्रमसाध्य
कार्य हो जाता है |
आइए इसे एक उदाहरण
द्वारा समझने का प्रयास करते हैं |
प्रस्तुत कुंडली
वाला जातक अपना लग्न मकर बताता है कहता है कि जन्म के समय उसके गांव के पंडित जी ने
उसकी मां पिता को उसका यही लग्न बताया था उसके अनुसार उसकी
कुंडली कुछ इस प्रकार की है लग्न के अनुसार राशि 28 अंश 58 पल लिखे गए हैं तिथि 29/10/1933 14:15 दिल्ली की है मकर लग्न में शनि स्थित है तथा कुंभ राशि में चंद्र राहु,सिंह में केतु,कन्या में गुरु,तुला में सूर्य तथा वृश्चिक में शुक्र मंगल बुध है |
प्रथम सूत्र के
अनुसार यदि शुक्ल पक्ष का जन्म हो तो लग्न की राशि व नवांश राशि वही होनी चाहिए जो
गर्भाधान के समय चंद्रमा की राशि थी लग्न के अंश 9-28-58 है चंद्रमा भी गर्भाधान समय इसी अंश का होना चाहिए यदि हम लग्न 10-0-10 लेते हैं तो चंद्र कुंभ का होना चाहिए | हम गर्भाधान तिथी को देखें जो
कि 281 दिन पहले पड़ेगी यानी 26/1/1933 को देखें तो चंद्र आधी रात के बाद 9-26-01 अंश का होता है तथा 27/1/1933 को प्रातः 8:00 बजे 10-00-01 का होता है जिससे लग्न
के अंश 9-28-58 होते हैं अर्थात
मकर लग्न व धनिष्ठा नक्षत्र आते हैं चंद्रमा 27/1/1933 को प्रातः 8:00 बजे से पहले मकर लग्न व धनिष्ठा नक्षत्र का ही था,अब यदि हम कुंभ लग्न 0-10 का लेते हैं तो चंद्रमा
कुंभ राशि का 27/1/1933 को 8:00 बजे के
बाद होता है तथा उसका नक्षत्र धनिष्ठा ही आता है अर्थात जातक का लग्न कुंभ होना चाहिए
मकर नहीं |
दूसरे सूत्र द्वारा
देखें तो जन्म समय का चंद्र गर्भाधान समय के चंद्र के द्वादशांश राशि का होना चाहिए जन्म
समय का चंद्र कुंभ राशि का है यदि मकर लग्न के अंतिम लिए जाएं तो गर्भाधान
समय चंद्र का द्वादशांश वृश्चिक और धनु का होना चाहिए कुंभ का नहीं,कुंभ का द्वादशांश लाने हेतु मकर लग्न को 3 से 5 अंशों का होना चाहिए जो
संभव नहीं है क्योंकि लग्न स्पष्ट दिया गया है परंतु यदि हम जन्म समय कुंभ लग्न की
2 अंश 30 डिग्री लेते हैं तो गर्भाधान लग्न का चंद्र कुंभ का द्वादशांश दर्शा देता है जो
कुंभ लग्न होने की दोबारा पुष्टि कर देते हैं |
तीसरा सूत्र
पुरुष जन्म हेतु विषम नवांश व विषम होरा होना बताता है यहां मकर का 29 अंश लिया जाए तो नवांश कन्या का आता है जो सम होता है जब कि
यदि कुंभ लग्न 2 डिग्री 30 अंश का लिया जाए तो तुला नवांश बन जाता है तथा होरा सिंह की आती है
जो इस सूत्र से भी कुंभ लग्न होने की पुष्टि कर देती है |
चौथा सूत्र पुरुष
हेतु सूर्य,राहु,लग्न व मंगल की संख्या
का जोड़कर 3 से भाग देने पर 1 या 3 आना चाहिए यहां सूर्य 7 राहु 11 लग्न 10 और मंगल
8 जोड़ने पर हमें 36 प्राप्त होता है जिसे 3 से भाग देने पर 0 आता है जो स्त्री का
जन्म होना बताता है परंतु हमारा जातक पुरुष है अब यदि लग्न कुंभ कर लिया जाए तो शेष
एक आएगा जो पुरुष होने की पुष्टि कर देता है |
मकर और कुंभ
लग्न का पता जातक के साधारण व्यवहार से भी लग जाता है मकर लग्न का जातक बिना किसी
झिझक के शुल्क अदा करना पसंद करते हैं जबकि कुंभ लग्न के जातक जल्दी से पैसा निकालना
पसंद नहीं करते |
बुधवार, 7 नवंबर 2018
हमारा यू ट्यूब चैनल
आप सभी को जानकार खुशी होगी अब आप हमसे यू ट्यूब के माध्यम से भी जुड़ सकते हैं हमारा यू ट्यूब चैनल kishor astrology के नाम से हैं | हमारा पहला विडियो हमने "राशि अनुसार दिवाली के उपाय" नाम से अपलोड किया हैं कृपया कर उसे देखे और हमें बताए की आपको कैसा लगा |
आपका - डॉ किशोर घिल्डियाल
9818564685,9540715969
सोमवार, 5 नवंबर 2018
आपकी राशि का सामान्य परिचय
मेष राशि के जातक मंगल
ग्रह व अग्नितत्व के होने के कारण ऊर्जावान व
गुस्सैल स्वभाव के होते हैं जल्दबाजी मे निर्णय लेकर उस पर कायम रहते हैं | इनकी वाणी मे तेज अथवा
ओज रहता हैं यह एक काम ज्यादा समय तक नहीं का पाते हैं |
वृषभ राशि के
जातक बहुत ज्यादा मेहनती होते हैं तथा जीवन में हर सुख की प्राप्ति करते हैं दिखने में सुंदर
होते हैं जीवन को भरपूर जिया करते हैं ऐसे लोग अपनी गुरु
तथा भगवान की बहुत सेवा करते हैं |
मिथुन राशि के
जातक आकर्षण के कारण सब को अपना बना लेते हैं अपनी उम्र से कम नजर आते हैं द्विस्वभाव होने
के कारण अपने विचारों में खोए रहते हैं स्वार्थी होने के कारण अपने काम को ही
देखा करते हैं |
कर्क राशि वाले चंद्र की भांति अस्थिर दिमाग वाले परंतु हृदय से शुद्ध और साफ होते हैं क्योंकि चंद्रमा समान्यत: घटता बढ़ता रहता है इनके जीवन में भी उठापटक लगी रहती है यह लोग अपनी सोच से बड़ा लक्ष्य लेकर चलते हैं ऐसे लोग सामाजिक सुधारक तथा प्रसिद्ध होते हैं |
सिंह लग्न के
जातक स्वभाव से रोब डालने वाले तथा गुस्सेबाज़ होते हैं इनका
शरीर बड़ा मजबूत होता है प्राकृतिक रूप से यह राज करने वाले,समझदार,चतुर,मेहनती तथा गर्व से भरे हुए होते हैं आर्ट्स और संस्कृति की तरफ इनका रुझान ज्यादा
होता है |
कन्या लग्न में
जन्मे जातक दानी,ज्ञानी,चौकन्ने,चालाक,जिज्ञासु तथा अच्छे स्वभाव के होने के बावजूद धूर्त और स्वार्थी होते हैं जीवन
के दूसरे भाग में ज्यादा कमाते हैं द्विस्वभाव होने के कारण हमेशा परेशान
रहते हैं ऐसे जातक दुकानदार क्लर्क अकाउंटेंट ऑडिटर पब्लिक सेल्स रजिस्टर शेयर ब्रोकर
का काम करते हैं |
तुला राशि वाले
वायु तत्व के होने के कारण परफ्यूम जैसे होते हैं तथा जीवन का हर सुख प्राप्त करना
चाहते हैं इन्हें हर कोई पसंद करता है हालांकि इनकी मानसिक मजबूती कम होती है
फैसला सुनाने में जल्द बाज होते हैं पार्टनरशिप करना पसंद करते हैं स्वयं का कार्य व्यवसाय
ही करना चाहते हैं |
वृश्चिक राशि
वाले स्थिर राशि होने के कारण स्थिर प्रकृति वाले होते हैं जीवन की कई
बातों को छुपा कर रखना पसंद करते हैं स्वभाव से
क्रूर होते हैं ऐसे जातकों का गुप्त लोगों से संबंध होता है दान देना पसंद करते हैं
मजाकिया,मीठी वाणी वाले,चालाक किस्म के होते हैं धोखा देना पसंद करते हैं दुश्मनों के प्रति गुस्से बाज रहते हैं जीतना
चाहते हैं संपूर्ण कार्य जल्द से जल्द करना चाहते हैं लोगों से वाद-विवाद करते रहते
हैं |
धनु राशि वाले
बहुत ही ज्यादा धन अथवा हानि के चक्कर में कैलकुलेटिंग परंतु धनवान होते हैं सबको आकर्षित कर आसानी से जीने
वाले,मित्रता पूर्ण व्यवहार करने वाले,भगवान जप धर्म-कर्म दार्शनिक अथवा वेदांत को मानने वाले होते
हैं जीवन में अच्छे वाहन रखने वाले होते हैं |
मकर राशि वाले
हर मामले में बहुत ही कैलकुलेटिंग होते हैं जब भी वह किसी
की मदद करते हैं तो उसकी और कुछ अपेक्षाएं रखते हैं बिना अपेक्षाओ के कोई भी कार्य करना पसंद
नहीं करते उन्हें पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है
अपने स्वभाव पर अड़े रहते हैं दूसरों पर जल्दी से विश्वास नहीं
करते चोरी के कारण धन की हानि करते हैं कुछ अलग तरह के कार्य करने
के कारण रिश्तेदारों अथवा घरवालों से नफरत का सामना करते हैं |
कुंभ राशि वाले
लोग जनता सीधे बोलने वाले बहुत ज्यादा पढ़े लिखे तथा स्वभाव से विचारक होते हैं यह अपना
कार्य पूरा करना पसंद करते हैं किसी भी कीमत पर अपना कार्य खत्म कर ही बाज आते हैं इन्हें
कला एवं साहित्य से प्रेम होता है वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं होता,स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक रहता है यह समान्यत: बहुत ही अच्छा
जीवन जीते हैं अपने दोस्तों को और रिश्तेदारों को महत्व देते हैं योगा और मेडिटेशन
में खूब ध्यान लगाते हैं |
मीन राशि वाले
सच बोलने वाले बहादुर तथा मासूम होते हैं इन्हें परफ्यूम पसंद होता है तथा यह बहुत
खर्चीले होते हैं इनका दिमाग भटकता रहता है रिश्तेदारों और दोस्तों से प्रेम करते हैं
लोगों की मदद करते हैं यह राशि खर्चे की होने के कारण गलत तरीके से भी खर्चा करना पसंद
करते हैं विदेशों में रहना अथवा विदेश में नौकरी करना पसंद करते हैं |
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