बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

आनंद दोगे तो आनंद मिलेगा

ब्लावटस्की जिसने थियोसोफिकल सोसायटी को जन्म दिया, एक ट्रेन में यात्रा कर रही थी। उसने अपने पास एक झोला रख छोड़ा था बार-बार झोले में हाथ डालती और कुछ बाहर फेंकती। उसे ऐसा करते देख यात्रियों की जिज्ञासा बढ़ी। और उन्होंने कहा कि क्षमा करें ! अकारण आपके कार्य में बाधा देना हम उचित नहीं मानते लेकिन हमारी जिज्ञासा अब सीमा के बाहर हो गई है। इस झोले मैं क्या है? और बार-बार मुट्ठी भर कर आप क्या फेंकती हैं?

ब्लावटस्की ने कहा, मेरे इस झोले में फूलों के बीज हैं । इन्हीं को मैं बाहर फेंक रही हूं ।

उन्होंने कहा, हम अर्थ नहीं समझे ! इसका क्या सार? ब्लावटस्की ने कहा, सार! आकाश में बादल घिरने लगे हैं। आषाढ़ आ गया। जल्दी ही वर्षा होगी। ये बीज फूल बन जाएंगे।

अब उन लोगों ने कहा कि क्या आपको बार-बार इसी ट्रेन में सफर करनी पड़ती है? क्या इसी रास्ते से आप बार-बार गुजरती हैं? ब्लाक्टरकी ने कहा कि नहीं, मैं पहली बार गुजर रही हूं और शायद दुबारा कभी मौका न आए।

तो उन्होंने कहा, हम फिर समझे नहीं ! तो फिर बीज फेंकने से आपको क्या फायदा? बीज अगर फूल बने भी, तो आप तो कभी देख भी न सकेंगी।

ब्लावटस्की ने कहा, यह थोड़े ही सवाल है कि मैं देख सकूं। कोई तो देखेगा! सब आंखें मेरी हैं। किसी के नासापुटों में तो सुगंध भरेगी ! सब नासापुट मेरे हैं। कोई तो प्रसन्न होगा, आनंदित होगा । रोज हजारो यात्री इस ट्रेन से आते-जाते हैं  और भी बहुत सी ट्रेनें निकलती हैं इस रास्ते से लाखों लोग उन फूलों को नाचते देखेंगे हवा में, सूरज में और देखकर प्रसन्न होंगे।

एक ने कहा, लेकिन उनको तो पता भी नहीं चलेगा कि आपने ये फूल बोए हैं!

ब्लावटस्की ने कहा, इससे क्या फर्क पड़ता है कि वे जानें कि किसने फूल बोए हैं; कि वे मेरे नाम का स्मरण करें, कि मुझे धन्यवाद दें। वे प्रसन्न होंगे, इसमें मेरी प्रसन्नता है। वे आनंदित होंगे, मुझे आनंद मिल जाएगा।

आनंद दो तो आनंद मिलता है। आनंद बांटो और तुम्हारे भीतर आनंद के नये नये झरने फूटेंगे।

 

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

ग्रह उपाय

जातक के जन्म कुण्डली में जो ग्रह अरिष्ट फल प्रदान करने के कारक है उनकी उग्रता को शान्त या उनकी कृपा प्राप्त करने के लिये हमारे ज्योतिष विज्ञान में पांच विधानों को प्रस्तुत किया गया है।

‎1. प्रार्थना (देव उपासना), 2. ग्रहों के शान्ति हेतु दान 3. व्रत (ग्रहों के कृपा प्राप्ति हेतु), 4. ग्रहों के प्रसन्नता हेतु मंत्रों का अनुष्ठान 5. ग्रहों से कृपा प्राप्त हेतु यज्ञ अनुष्ठान ।

‎इन पांचों विधानों के प्रयोग का यह उद्देश्य है कि अरिष्ट प्रदाता ग्रह देवता को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्रसाद को प्राप्त करना ।

‎ग्रह देवता से निवेदन करे कि हे प्रभु! मेरे पूर्व जन्म कृत् दुष्कृत्यों के कारण जो हम आपके क्रोध का भाजन बन रहे है, उसके लिये हम इस जन्म में शुभ कृत्य करने का संकल्प ले रहा हूं और शुभ क्रियमाण कर्म के रूप में आपकी सेवा में अपनी प्रार्थना प्रस्तुत कर रहा हूं। अपने चरणामृत और कृपा दृष्टि से प्रारब्ध जनित अरिष्ट फल को कम करते हुये उसे सहन करने की शक्ति हमें प्रदान करें।

‎छांदोग्य उपनिषद का यह मंत्र प्रमाण है कि

‎यदेव श्रद्धया जुहोति तदेव वीर्यवत्तारं भवेति ।

‎श्रद्धापूर्वक की गई प्रार्थना ही फलवती होती है, अतः भावना जितनी सच्ची, गहरी और श्रद्धापूर्ण होगी, उतना ही उसका सत्परिणाम भी होगा । - छांदोग्योपनिषद

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बुधवार, 10 सितंबर 2025

ज्योतिष बिरादरी पर श्राप

ज्योतिष कार्य करने वालों के जीवन को अगर ध्यान से देखा जाए तो उनमें एक समानता देखने मे आती है कि अधिकतर ज्योतिषियो के पुत्र या तो होते ही नहीं हैं या होकर मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं,उनसे दूर रहते हैं,कामयाब नहीं होते,जीवन मे ज़्यादा सफल नहीं होते या उनका वैवाहिक जीवन सही नहीं होता | 

ज्योतिष अनुसार ऐसा शनि का संबंध सूर्य अथवा पंचम भाव से होने से होता हैं गौर से देखा जाए तो इसमें एक बात स्पष्ट रूप से दिखती है कि सूर्य जो कि काल पुरुष की पत्रिका में पंचमेश अथवा संतान कारक बनता है और जातक विशेष का कर्म व लाभ दशमेश व लाभेष शनि से होता हैं जो यह दर्शाता हैं की कहीं कर्म व लाभ हेतु ईश्वर के मार्ग मे बाधा उत्पन्न करने के फलस्वरूप ऐसा होता हो हालांकि ज्योतिष अनुसार पुत्र का कारक गुरु ग्रह को माना गया है जो कालपुरुष पत्रिका मे नवम भाव अर्थात हमारे भविष्य को भी दर्शाता हैं तथा ज्योतिष का कारक सूर्य को ही माना गया है |

अभी पिछले कुछ दिन पहले ही एक ज्योतिषी का पुत्र दुर्घटना में ईश्वर को प्यार हो गया,कुछ समय पहले कानपुर के एक बड़े ज्योतिषी का पुत्र अपने हॉस्टल में मृत पाया गया था,इंदौर के जाने - माने ज्योतिषी का पुत्र युवावस्था में चला गया,विश्व विख्यात ज्योतिषी बीबी रमन का पुत्र युवावस्था में दुर्घटना का शिकार होकर ईश्वर को प्यारा हुआ,एक अन्य ज्योतिषी का पुत्र विवाह सुख से वंचित हैं पत्नी छोड़ कर चली गयी,एक अन्य का पुत्र विवाह करना नहीं चाहता,एक और ज्योतिषी हैं उनके दोनों बेटे उनसे दूर विदेश मे रहते हैं,कुछ ऐसे ज्योतिषी भी मिले हैं जिनके पुत्र अपने कैरियर मे कुछ ज़्यादा नहीं कर सके तो अब पिता के साथ ही ज्योतिष के कार्यक्षेत्र मे आ गए हैं |

हमारे अनुभव में ऐसे बहुत से ज्योतिषी आए हैं जिनकी केवल कन्या संतान ही हैं पुत्र नहीं हैं, पुत्रो का विवाह नहीं हुआ अथवा विवाह खराब हुआ या उनकी पत्नी उनसे अलग रह रही है | क्या यह सिर्फ एक संयोग है या वास्तव में कुछ ऐसा है जो ज्योतिष बिरादरी समझ या देख नहीं पा रही है | आप भी अपने आसपास के ज्योतिषियो को देखिए आपको ऐसे बहुत सारे उदाहरण देखने को मिल जाएंगे | क्या यह सिर्फ एक इत्तेफाक है अथवा ईश्वर हमसे इस रूप में कुछ कहने की कोशिश कर रहा है जो ज्योतिष बिरादरी मानना नहीं चाह रही है |

शुक्रवार, 22 अगस्त 2025

ज्योतिष पर सर्वश्रेष्ठ पाश्चात्य पुस्तकें

 

ज्योतिष पर हजारों पुस्तकें उपलब्ध हैं । ज्योतिष पर आधारित कुछ अच्छी व छोटी पुस्तकें सुपरमार्केट में बेची जाती हैं । अन्य पुस्तकें किताबों की दुकानों में बेची जाती हैं लेकिन आपके दैनिक कामों के दौरान आप जो पुस्तकें देखते हैं, उनमें से अधिकांश ज्योतिष पर सबसे खराब पुस्तकें होती हैं, जिन पर आप सिर्फ अपना पैसा बर्बाद कर सकते हैं और उनसे कुछ हासिल नहीं कर सकते ।

ज्योतिष पर आधारित ये तथाकथित पुस्तकें अक्सर राशिफल से ज़्यादा कुछ नहीं होतीं, जो सूर्य राशियों से ज़्यादा कुछ नहीं पर आधारित होती हैं । इनमें से कुछ पुस्तकें आपके रिश्तों में मदद करने का दावा करती हैं, जबकि इनमे केवल सूर्य राशि की जानकारी प्रदान की हुई होती हैं । ज्योतिष वास्तव में अपनी रीडिंग में कई कारकों को शामिल करता है, और सूर्य राशि की जानकारी देना वास्तव मे कई कारकों में से एक छोटा सा कारक होता है ।

ज्योतिष पर सबसे अच्छी पुस्तकें वे हैं जो आपको अपना ज्योतिषीय चार्ट और रीडिंग समझना सिखाती हैं । ज्योतिष पर ये पुस्तकें यह जानने का सबसे अच्छा तरीका हैं कि ज्योतिष आपके जीवन को कैसे प्रभावित करता है और कैसे आपको सिखाता है कि अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए इस ज्ञान को कैसे लागू किया जाए |

जोआना मार्टिन वूलफोक द्वारा लिखी गई द ओनली एस्ट्रोलॉजी बुक यू विल एवर नीड ज्योतिष के बारे में सीखना शुरू करने के लिए एक बेहतरीन पुस्तक है । यह पुस्तक आपको विभिन्न सूर्य राशियों के साथ-साथ चंद्रमा, आपके लग्न और घरों जैसे अन्य कारकों का अवलोकन प्रदान करती है । इसके अतिरिक्त, ज्योतिष पर यह पुस्तक आपको अपना व्यक्तिगत ज्योतिषीय चार्ट और रीडिंग बनाने में मदद करने के लिए जन्म तिथि के अनुसार व्यापक चार्ट प्रदान करती है |

ज्योतिष पर पिछली पुस्तको में आपके द्वारा एकत्रित की गई जानकारी और आपके द्वारा बनाए गए चार्ट का उपयोग करके, आप ज्योतिष का उपयोग करके अपने भविष्य की भविष्यवाणी करने के लिए इस पुस्तक का उपयोग कर सकते हैं इस पुस्तक का नाम प्रेडिक्टिव एस्ट्रोलॉजी: द ईगल एंड द लार्क है और इसे बर्नडेट ब्रैडी ने लिखा है । यह पुस्तक आपको ग्रहों और घरों की भविष्यसूचक प्रकृति को समझने में मदद करेगी । इस जानकारी और अपने ज्योतिषीय जन्म चार्ट का उपयोग करके आप ज्योतिष का उपयोग करके आसानी से अपने भविष्य की भविष्यवाणी कर सकते हैं |

आप इस जानकारी के अतिरिक्त डेविड विलियम्स द्वारा लिखित वित्तीय ज्योतिष पुस्तक का उपयोग करके इसे अपने दैनिक जीवन में लागू कर सकते हैं । यह ज्योतिष पर सबसे अच्छी पुस्तकों में से एक है जो वास्तव में बताती है कि अपने जीवन के किसी क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए वास्तविक ज्योतिषीय सिद्धांतों का उपयोग कैसे करें । यह पुस्तक पिछली प्रमुख वित्तीय घटनाओं के लिए ज्योतिषीय डेटा प्रदान करती है, साथ ही यह भी बताती है कि भविष्य के वित्तीय अवसरों और अप्रत्याशित लाभ की भविष्यवाणी करने के लिए वास्तविक ज्योतिषीय डेटा का उपयोग कैसे करें ।

ज्योतिष पर सबसे अच्छी पुस्तकों में से एक और जो आपको वास्तविक राशिफल की व्याख्या करना सिखा सकती है, उसका नाम है ज्योतिष में पहलू: कुंडली में ग्रहों के संबंधों को समझने के लिए एक मार्गदर्शिका सू टॉमकिन्स द्वारा लिखित यह पुस्तक बताती है कि क्यों अखबार और पत्रिका की राशिफल ज्यादातर लोगों के लिए शायद ही कभी सटीक होती हैं । सू टॉमकिन्स आपको इस बारे में जानकारी और चार्ट भी प्रदान करती हैं कि ग्रह आपकी सूर्य राशि को कैसे प्रभावित करते हैं । इस जानकारी से लैस होकर आप सांसारिक राशिफल की व्याख्या वास्तव में अपने ज्योतिषीय चार्ट में फिट करने के लिए कर सकते हैं, और उन्हें अपने लाभ के लिए उपयोग कर सकते हैं ।

यदि उपरोक्त पुस्तकों को पढ़ने के बाद भी आप इस बात को लेकर थोड़े अस्पष्ट हैं कि ज्योतिषीय चार्ट के विभिन्न पहलू क्या हैं और वे आपको कैसे प्रभावित करते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है । एडा औबिन और जून रिफ़किन द्वारा ज्योतिष की संपूर्ण पुस्तक सूर्य राशियों, घरों, ग्रहों, ग्रहों की चाल, चंद्रमा और ज्योतिष के अन्य पहलुओं की सर्वोत्तम व्याख्या प्रदान करती है |

शनिवार, 9 अगस्त 2025

वास्तु संबंधी कहावते

 

वास्तु का प्रचलन हमारे देश में दीर्घ काल से चला आ रहा है । लोक अंचल अथवा ग्रामीण क्षेत्रो में इस वास्तु से संबन्धित कई कहावतें प्रचलित हैं, ताकि जन-सामान्य भी उन वास्तु तथ्यों से परिचित हो सके जो हमारे भावी जीवन पर व्यापक प्रभाव डालते हैं । यहाँ प्रस्तुत इस लेख मे उन्हीं में से कुछ कहावतें दी जा रही हैं |

1)जाके उत्तर धोबी सोवे ।

ताहि भवन को मालिक रोवे ।

अर्थात् जिस घर के उत्तर की ओर धोबी रहता अथवा सोता हो, उस भवन के स्वामी को कोई न कोई समस्याएं आती ही रहती हैं ।

2)जाकै पूरब पीपल होवे ।

सो लक्ष्मी पर लक्ष्मी खोवे ।

अर्थात् जिस घर के पूर्व में पीपल होता है, उसे लगातार आर्थिक हानि उठानी पड़ती है ।

3)जेहिं मुंडे पर अशोक वृक्ष बासा ।

शोक रहत उई भवत सुवासा ।।

अर्थात जिस भूमि पर अशोक का वृक्ष होता है, वहां का भवन उत्तम सुखदायक होता है, यानि घर की सीमा में अशोक के पेड़ का होना परम सुखदायक है ।

4)सिंह मुखी जो रहने जावै ।

तन, धन आपन सकल गंवावै ||

अर्थात आगे से चौड़े और पीछे से संकरे अर्थात सिंह मुखी भवन में रहने वाले के शारीरिक स्वास्थ्य एवं धन दोनों की हानि होती है ।

5)बड़ों दुआर भावै ।

आफत बुलावै ।।

अर्थात जो व्यक्ति घर में बड़ा दरवाजा (मुख्य द्वार) लगवाता है, वहां नाना प्रकार की समस्याएं आती हैं ।

6)बीचै कूप न आवै धूप ।

हौवे रंक रहेंगे भूप । ।

अर्थात जिस भवन के बीचों - बीच कुआं हो तथा जिस भवन में धूप न आती हो,वहां के रहने वाले वासी दरिद्रता को प्राप्त करते हैं |

7)ईशान पूजा नैरित भारी, अमिनी अगन जटावै ।

वायु खुल्ला, नाभी खुली, उहि घर राम रखावै ।।

अर्थात जिस घर में ईशान में पूजा होती हो, नैर्ऋत्य क्षेत्र भारी हो, आग्नेय कोण में अग्नि जलती हो, वायु कोण खुला हो तथा जिसका ब्रह्म स्थान (नाभि क्षेत्र) खाली हो, उस भवन के वासियों पर ईश्वर की कृपादृष्टि बनी रहती है ।

8)जिस भवना में गौअन रैवें ।

उनकी नाव मुरारी खेवें ।।

अर्थात जिस भवन में गायों का वास होता है, वहां कृष्ण भगवान की कृपा बनी रहती है ।

9)गर्दभ लौटे, शूकर जन्ने नर को बध हो जाय ।

बिन सुद्धि तापर रहे, उकै वैई रवा जाय ।।

अर्थात जिस भूमि पर गधा लोट लगावे, सुअरी जने तथा जहां किसी की हत्या हो जाये, उस जमीन पर रहने वालों को वहां बिना शुद्धि कराये नहीं रहना चाहिए अन्यथा वहां के निवासियों का शनैः शनैः नाश हो जाता है ।

10)जो पहिले घर-देव खिचावै ।

उहि घर को बहि दैव रखावै ।।

अर्थात जिस घर में पहले वास्तु देवता को आहार दिया जाता हो और बाद में घर के अन्य लोग भोजन करते हो वहां के निवासियों को वही देव सुख, शांति, समृद्धि देता है।

11)नाभि में खंटा ।

मरि जाय सूंठा ।।

अर्थात जिस भवन के केंद्र में खंभा होता है उसके निवासी संतान से परम कष्ट पाते हैं अर्थात मरते समय भी उन्हें संतान का सुख नहीं होता है ।

12)डसना ऊपर अगर जटावै ।

घर को बूढ़ो सुख नहीं पावै ।।

अर्थात जिस घर में ईशान्य कोण पर अग्नि दहन होता हो (रसोई घर होता है) वहां का मुखिया कभी भी सुखी नहीं रहता है ।

13)नेरित गड्ढा इसना भारी ।

वाको का कर पाय मुरारी ।

अर्थात जिस भवन के नैर्ऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम कोण) में गड्ढा हो तथा ईशान बहुत भारी हो, उस भवन के निवासियों का कल्याण भगवान भी नहीं कर सकते ।

14)छोटे दरवाजो मोटी चोर ।

बहों होय तो आफत घोर ।।

अर्थात जिस भवन का द्वार (मुख्य द्वार) बहुत छोटा होता है वहां चोरों के आने की बहुत सम्भावना बनी रहती है तथा जिस भवन का द्वार बहुत बड़ा होता है, वहां अनेक समस्याएं आती हैं ।

15)घर में अंधेरो |

बीमारी को फेरो | |

अर्थात जिस घर में सूर्य का प्रकाश नहीं आता है वहां के वासी बार-बार बीमार होते रहते हैं ।

सोमवार, 4 अगस्त 2025

घर में क्या क्या न करें...

भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार यदि वास्तुसम्मत चीजों को घर में रखा जाये तो घर में धन, समृद्धि तथा खुशियां आती हैं,लेकिन कुछ चीजों को वास्तु के अनुसार घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि वे नकारात्मक ऊर्जा तथा दुर्भाग्य का सूचक होती हैं परंतु ये कैसे निर्धारित किया जाये कि किन चीजों को घर में नहीं रखना चाहिए ।

आज के इस लेख मे कुछ वास्तु टिप्स दिये जा रहे हैं जिनके द्वारा घर में नकारात्मक ऊर्जा को घर में आने से रोका जा सकता है |

ताजमहल

ताजमहल अपितु प्यार की निशानी है लेकिन यह मुमताज, शाहजहां की पत्नी की कब्रगाह भी है। इसकी फोटो या शो पीस घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि यह निष्क्रियता और मृत्यु की निशानी है जोकि घर में नकारात्मक वातावरण पैदा करती है ।

महाभारत

घर में महाभारत, युद्ध से सम्बंधित भी किसी तरह के चित्र या कोई मॉडल नहीं रखना चाहिए क्योंकि यह परिवार के सदस्यों के बीच में कभी न खत्म होने वाली प्रतिद्वन्द्विता को जन्म देता है ।

नटराज

भगवान शिव की नटराज की मूर्ति लगभग प्रत्येक क्लासिकल डांसर के घर में देखने को मिल जायेगी । अन्य लोग भी इसको शो पीस के रूप में पसंद करते हैं। लेकिन इस मूर्ति के पीछे दो तरह की भावनायें शामिल हैं। नटराज की मूर्ति अद्वितीय कला का रूप है लेकिन यह विनाश का भी एक रूप है क्योंकि नृत्य का यह रूप वास्तव में तांडव नृत्य है जिसका अर्थ है विनाश के लिए नृत्य,इसलिए नटराज की मूर्ति को भी घर में नहीं रखना चाहिए ।

पानी का फव्वारा

कुछ लोग घर में पानी का फव्वारा रखना पसंद करते हैं,लेकिन वास्तु के अनुसार इस तरह की वस्तु चलायमान प्रकृति को दर्शाती है अर्थात चीजों की अस्थिरता । इसका मतलब है कि धन व समृद्धि जो आपके जीवन में आती है वह ज्यादा समय तक आपके पास नहीं रहेगी,अतः इसे भी अपने घर में स्थान न दें ।

जंगली जानवर

जंगली जानवर की फोटो या शो पीस को भी घर में नहीं लाना चाहिए क्योंकि यह घर में परिवार के सदस्यों में हिंसात्मक प्रकृति को बढ़ाती है ।

कैक्टस या कांटेदार पौधे

इस तरह के पौधों को घर में नहीं रखना चाहिए । ये काम में बाधाएं आने का सूचक हैं,गुलाब के पौधे को घर में रखा जा सकता है |