शनिवार, 27 मई 2023

मूलांक और रोग उपाय

 

मूलांक व्यक्ति के जीवन को बहुत प्रभावित करते हैं ।

आइए, जानें कि विभिन्न मूलांक वालों को किन रोगों के आक्रमण हो सकते हैं तथा उनसे बचाव के क्या उपाय हैं ।

मूलांक -1

रोग : हृदयाघात, हृदय रोग, सिरदर्द, दांत संबंधी रोग, नेत्र रोग, बुढ़ापे में कम सुनाई देना ।

क्या करें : उगते सूर्य को जल चढ़ाएं । रविवार को व्रत करें बिना नमक का भोजन करें ।

रंग : पीला, सुनहरा, हल्का भूरा, नारंगी, लाल । काले रंग से बचें |

रत्न : ढाई रत्ती या उससे अधिक का माणिक्य सोने या तांबे में रविवार को धारण करें ।

मूलांक - 2

रोग : मंदाग्नि, मानसिक दुर्बलता, अनिद्रा, फेफड़ों संबंधी रोग आदि ।

क्या करें : शिव की नित्य उपासना ।

रंग : हल्का हरा, अंगूरी, दूधिया सफेद, क्रीमी ।

रत्न : 4 रत्ती या उससे अधिक वजन का मोती सोमवार को धारण करें ।

मूलांक - 3

रोग : हड्डियों का दर्द, गले का रोग, शुगर, गैस, घुटनों एवं पीठ का दर्द, आदि ।

क्या करें : विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें । पूर्णिमा और गुरुवार का व्रत करें ।

रंग : पीला, गुलाबी, हल्का, जामुनी, सफेद ।

रत्न : साढ़े 5 रत्ती का पुखराज गुरुवार को पहनें ।

मूलांक - 4

रोग : खून की कमी, सिरदर्द, पीठदर्द, नेत्र रोग, टांग में चोट, अपच आदि ।

क्या करें : गणेश जी की आराधना करें । गणेश चतुर्थी का व्रत करें ।

रंग : नीला, भूरा, धूप-छांव । यदि अंक 4 अशुभ है तो नीले वस्त्र न पहनें ।

रत्न : साढ़े 6 रत्ती का गोमेद पंचधातु की अंगूठी में बुधवार को धारण करें ।

मूलांक - 5

रोग : जुकाम-नजला, याददाश्त बिगड़ना, नेत्र रोग, अपच, हाथों में दर्द, कंधों में दर्द, सिर दर्द, लकवा ।

क्या करें : गणेश जी की उपासना करें ।

रंग : हल्का भूरा, हल्का हरा, सफेद । गहरे रंगों से बचें ।

रत्न : 3 रत्ती से अधिक का पन्ना बुधवार को धारण करें ।

मूलांक - 6

रोग : फेफड़ों के रोग, मूत्र-विकार, गला और नाक के रोग, शुगर, पथरी, गुप्त रोग, गुर्दे संबंधी रोग ।

क्या करें : शुक्रवार का व्रत करें ।

रंग : हल्का नीला, गुलाबी, सफेद । गहरे बैंगनी और काले रंग से बचें ।

रत्न : ढाई रत्ती का हीरा चांदी या प्लेटिनम में शुक्रवार को धारण करें |

मूलांक - 7

रोग : रोग, थकावट, अपच, नेत्र-रोग, उल्टी-दस्त, रक्तचाप सिरदर्द, फेफड़ों संबंधी रोग ।

क्या करें : हनुमान की उपासना करें ।

रंग : सफेद, गुलाबी, हल्का हरा। काले रंग से बचें |

रत्न : सवा 6 रत्ती का लहसुनिया पंचधातु या चांदी में मंगलवार को धारण करें ।

मूलांक - 8

रोग : लीवर संबंधी रोग, मानसिक रोग, दुर्घटनाएं, आंतरिक चोटें, जोड़ों का दर्द, अपच, रक्त-विकार आदि ।

क्या करें : शनि की उपासना ।

रंग : काला, नीला, गहरा भूरा, बैंगनी ।

रत्न : सवा 4 रत्ती का नीलम सोने में शनिवार को धारण करें । पंचधातु या काले घोड़े की नाल की अंगूठी भी पहनी जा सकती है ।

मूलांक - 9

रोग : मांसपेशियों के रोग, दुर्घटनाएं, रक्तविकार, सिरदर्द, दांतदर्द, गुप्त रोग, मूत्र रोग, मस्सा (पाइल्स) ।

क्या करें : हनुमान जी की उपासना ।

रंग : लाल (रक्त जैसा), गहरा गुलाबी । लाल रूमाल रखें ।

रत्न : 5 रत्ती का मुंगा सोने में मंगलवार को पहनें । 

रविवार, 21 मई 2023

25 मई से आरंभ होगा नौतपा



25 मई से नौतपा आरम्भ होने जा  रहा है ! प्रत्येक वर्ष जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तब नौतपा आरम्भ होता है ! इस बार सूर्य देव 25 मई, गुरुवार को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 8 जून तक इसी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में रहने की अवधि 15 दिन की है । इन 15 दिनों के पहले के 9 दिन सर्वाधिक गर्मी वाले होते हैं ! इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के नाम से जाना जाता है ! सूर्य 25 मई गुरुवार को 21.00 बजे रात से रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जहां वह 8 जून को 18.54 बजे तक रहेंगे ! इस बार सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 14 दिन तक ही रहेंगे !

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, चंद्र रोहिणी नक्षत्र के स्वामी हैं और शीतलता के कारक ग्रह हैं। ऐसे में रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से वातावरन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इस दौरान पृथ्वी को पूर्ण रूप से शीतलता नहीं मिलती है और तपमान में सर्वाधिक बढ़ोतरी हो जाती है। नौतपा का वर्णन श्रीमद्भगवद्गीता में भी किया गया है।

वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार जब सूर्य की सीधी किरणें पृथ्वी पर पड़ती हैं तब वातावरण अत्यधिक गर्म हो जाता है, जिससे तापमान में बढ़ोतरी होती हैं । जिससे तटीय क्षेत्रों में बारिश और तूफान की संभावना बढ़ जाती है और आंधी और तूफान आने की स्थिति बन जाती है ! ग्रहों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए देश के पूर्वी पश्चिमी और दक्षिणी भाग में दैवीय आपदाएं आने की सम्भावना है !  

नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर प्रभाव डालती है ! इससे प्रचण्ड गर्मी होती है तो मानसून में अच्छी बारिश होने के आसार बनते हैं ! मान्यता है कि यदि इन नौ दिनों के दौरान ही बारिश होने लगे तो इसे नौतपा का गलना माना जाता है ! फिर अच्छे मानसून की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है ! यदि नौतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है !

इस बार नौतपा से पहले ही कुछ क्षेत्रों में बारिश हो चली है जो कि अच्छा संकेत नहीं है ! सूर्य के वृष राशि में होने से धरती के एक हिस्से में भारी गर्मी पड़ती है ! अब नौतपा से ही आशा है कि यदि यह खूब तपा तो भारी बारिश होगी नहीं तपा तो मानसून बिखरा बिखरा रहेगा ! यह भी कहा जा रहा है कि नौतपा के आखिरी दो दिन तेज हवा-आँधी चलने व बारिश होने के भी योग हैं ! हालांकि कुछ ज्योतिषियों का मानाना है कि इस बार शुरुआती 6 दिनों में गर्मी के साथ ही उमस भी बहुत रहेगी ! नौ दिन में से अंतिम 3 दिन हवाएं खूब तेज चलेगी ! कहीं कहीं मध्यम बारिश की सम्भावना है तो कहीं  बौछारो के साथ अच्छी बारिश होगी ! यानी मानसून अच्‍छा होगा जिससे किसानों को फायदा होगा उन्हें फसल का अच्छा मूल्य मिलेगा !

ज्योतिष शास्त्र की मान्यता के अनुसार सूर्य की ऐसी स्थिति अमंगल और अशुभता का संकेत देती हैं ! ज्योतिष शास्त्र में इस दौरान कई कार्य करने की मनाही की जाती है ! इसलिए इन दिनों में कुछ भी नया कार्य नहीं करने चाहिए, क्योंकि नौतपा के दिनों में किसी भी कार्य में सफलता मिलने की सम्भावना कम हो जाती है !

आइए जानते हैं कि कौन कौन से कार्य नौतपा के दिनों में नहीं करना चाहिए !

1. नौतपा के दौरान सूर्य की भीषण गर्मी, धूल भरी आंधी और वर्षा की सम्भावना आदि को देखते हुए लोगों को शादी, विवाह जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए !

 2. कहीं बाहर की यात्रा पर जाने से बचना चाहिए !

3. धूप में कम से कम बाहर निकलना चाहिए !

4. बाहर निकलते समय सर ढक कर रखना चाहिए !

5. पानी बार बार पीते रहना चाहिए !

6. धूप से चलकर आने के बाद तुरन्त फ्रीज का ठण्डा पानी नहीं पीना चाहिए !

7. इन दिनो आम का पना सेवन करना चाहिए ! 

 

गुरुवार, 18 मई 2023

हमेशा युवा बने रहने के उपाय


हमेशा के लिए युवा अथवा जवान बने रहने की चाहत हम सबको होती है यद्यपि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में परिवर्तन होना प्रकृति का नियम है परन्तु इस प्रक्रिया को तेज या धीमा करना कुछ हद तक हमारे हाथ में है ।

योग इस समस्या का बेहतर समाधान है । योगाभ्यास और संतुलित भोजन से व्यक्ति शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक संतुलन बनाने में सक्षम हो जाता है । योगाभ्यास के अन्तर्गत आसन, प्राणायाम और ध्यान के अतिरिक्त यम-नियम का पालन भी होता है ।

आसन - इसके अभ्यास से रक्त संचार सुचारु हो जाता है, मांसपेशियां, नसें तथा अस्थियां मजबूत बनती हैं, मांसपेशियां ढीली नहीं पड़तीं तथा उनका हड्डियों के साथ सामंजस्य लम्बे समय तक बना रहता है । झुर्रियां नहीं पड़तीं, व्यक्ति वास्तविक उम्र से कम दिखता है । आंख, नाक, कान, दांत, याददाश्त लम्बे समय तक साथ देते हैं । शरीर में लचक बनी रहती है । पाचन - क्रिया दुरुस्त बनी रहती है ।

इस संदर्भ में महत्वपूर्ण योग आसन हैं - अर्धचन्द्रासन, त्रिकोणासन, सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, नावासन, जानुशिरासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, कोणासन, वज्रासन, उष्ट्रासन, मंडूकासन, भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, पादोत्तानासन, पवनमुक्तासन, हलासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, शवासन ।

आसनों का अभ्यास सुबह ब्रह्म मुहूर्त में नित्य क्रियाओं से निवृत्त हो स्नान के पश्चात् खुली हवा में करना चाहिए । आसनों के अभ्यास से समस्त प्रणालियां क्रियाशील होती हैं । थॉयराइड ग्रन्थि प्रभाव में आती है, जिससे यौवन बरकरार रहता है । यह ग्रन्थि सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, सर्वांगासन तथा मत्स्यासन से विशेष रूप में प्रभाव में आती है । पीनियल ग्रन्थि प्रभाव में आती है, जिससे शरीर पर उम्र का प्रभाव कम दिखाई पड़ता है । यह ग्रन्थि सूर्य नमस्कार, शशकासन और ध्यान से प्रभाव में आती है । एड्रीनल ग्रन्थि के प्रभाव में आने से अथक कार्य करने की शक्ति आती है और व्यक्ति अच्छे चरित्र वाला बनता है । यह ग्रन्थि सूर्य नमस्कार, जानुशिरासन, पश्चिमोत्तानासन, कोणासन, उष्ट्रासन, भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, अग्निसार, कपालभाति तथा भस्त्रिका प्राणायाम से प्रभाव में आती है ।

आसनों के पश्चात् कम से कम तीन मिनट का शवासन करें । तत्पश्चात् कुछ मिनट खिलखिला कर हँसें । हँसना एक सम्पूर्ण यौगिक व्यायाम है, जिससे शरीर की सभी नस-नाड़ियां खुलती हैं, थकावट दूर हो ताजगी उत्पन्न होती है । फेफड़े, गले और मुख की अच्छी कसरत होती है । पेट व छाती के स्नायु मजबूत बनते हैं । हँसने से शरीर में कुछ रासायनिक परिवर्तन आते हैं, जिससे तनाव पैदा करने वाले हार्मोन - कार्टिसोल के स्तर में कमी आती है और शरीर तनावमुक्त तथा स्वस्थ बनता है ।

प्राणायाम – इसके अभ्यास से शरीर का प्रत्येक तंत्र तथा शरीर के अंग लम्बे समय तक क्रियाशील रहते हैं, चेहरे पर चमक आती है, त्वचा कांतिमान बनती है, ग्रन्थिस्राव प्रणाली संतुलित होती है, रक्त संचार की गति तीव्र बनती है, रक्त में ऑक्सीजन का अवशोषण होता है, जिससे शरीर ऊर्जावान बनता है और शरीर में एडोर्फिन नामक हार्मोन की मात्रा बढ़ती है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है और व्यक्ति जवां बना रहता है, उम्र का असर कम दिखाई पड़ता है । प्राणायाम का अभ्यास कम से कम 15-20 मिनट अवश्य करें ।

ध्यान - ध्यान के अभ्यास से मन की बिखरी हुई शक्तियां एक स्थान पर केन्द्रित होने लगती हैं । आज हम जिस प्रकार के सामाजिक परिवेश में जी रहे हैं तनाव, व्यर्थ की चिन्ता, छोटी-छोटी बातों की उलझन, गलतफहमी के कारण घरेलू परेशानियों से हम ग्रसित हैं । जिस प्रकार लैंस की सहायता से बिखरी हुई किरणों को एक बिन्दु पर केन्द्रित किया जाता है, उसी प्रकार ध्यान के अभ्यास से मन की बिखरी हुई शक्तियां एकाग्र होती हैं, मनःस्थिति शांत होती है, चित्त शुद्ध होता है, शरीर ऊर्जावान बनता है, शरीर में ऐसे रासायनिक परिवर्तन आते हैं, जो मनुष्य को जवान व तनावमुक्त बनाए रखते हैं ।

भोजन - शरीर को स्वस्थ एवं जवान बनाए रखने के लिए भोजन में सभी पोषक तत्वों का समावेश संतुलित तरीके से होना चाहिए । शरीर के पोषक तत्व हैं - प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और विटामिन प्रोटीन  

प्रोटीन का मुख्य कार्य है नई कोशिकाओं का निर्माण और पुरानी क्षत-विक्षत कोशिकाओं की मरम्मत ।

स्रोत - दूध व दूध से बने पदार्थ, दालें, सोयाबीन व सूखे मेवे ।

कार्बोहाइड्रेट – कार्बोहाइड्रेट वह पोषक तत्व है, जो शरीर की कोशिकाओं को सबसे जल्दी ऊर्जा प्रदान करता है ।

स्रोत – अनाज, दालें, चीनी, गुड़, शहद, आलू, शकरकंदी, चुकंदर, केला, आम, अनानास, अंगूर ।

वसा - शरीर की 10 से 30% ऊर्जा की पूर्ति तेल व वसा से होती है ।

स्रोत - दूध, घी, मक्खन, क्रीम, वनस्पति तेल - सरसों, नारियल, मूंगफली, सोयाबीन का तेल ।

विटामिन – व्यक्ति को बीमारियों से दूर करने के साथ साथ शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी विटामिन नियंत्रित करते हैं । प्रमुख विटामिन हैं - विटामिन ए, बी,सी, डी और ई ।

विटामिन ए - मुख्य कार्य आंखों को स्वस्थ रखना है ।

स्रोत - हरी पत्तेदार सब्जियां, टमाटर, फल, घी, मक्खन, दूध ।

विटामिन बी - मुख्य कार्य हृदय, नाड़ी तंत्र, मस्तिष्क, त्वचा, आंखें व पाचन-तंत्र को सुचारु बनाना ।

स्रोत - साबुत अनाज, दालें, सूखे मेवे, अंकुरित अनाज ।

विटामिन सी - मुख्य कार्य शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाना ।

स्रोत - आंवला, संतरा, टमाटर, नींबू, अंगूर, अमरूद ।

विटामिन डी – मुख्य कार्य हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाना ।

स्रोत सूर्य की किरणें, दूध, मक्खन, घी, तेल ।

विटामिन ई – मुख्य कार्य प्रजनन अंगों को शक्ति प्रदान करना ।

स्रोत - साबुत अनाज, सोयाबीन, मूंगफली, नारियल ।


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बुधवार, 17 मई 2023

कम्प्यूटर जनित व्याधियां और उपाय


आज की सबसे बड़ी चुनौती है मानव की विकृत जीवन शैली को सही स्थिति में लाना । इस तकनीकी समय के दौर में 8 से 12 घंटे का काम कम्प्यूटर के द्वारा पूरा किया जाता है । लम्बे समय तक बैठने से तन और मन दोनों बिगड़ रहा है । ऐसा काफी समय तक करते रहने के कारण प्रत्येक व्यक्ति को मानसिक जकड़न, स्मृति दोष, दृष्टि का कम होना, चिड़चिड़ापन, कंधे व पीठ दर्द, शारीरिक थकान से लेकर मस्तिष्क व नेत्रों की थकान जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता ही है । ऐसे मे कुछ यौगिक उपाय हमे इन सभी परेशानियों से कुछ हद तक बचाव प्रदान करते हैं | आइए आज इन्ही कुछ उपायो के बारे जानते हैं |

कम्प्यूटर पर बैठने से पहले मन को सकारात्मक सुझाव दें ।

कम्प्यूटर को उचित दूरी 18-28 इंच की रखें ।

शरीर को न तो पूरी तरह ढीला छोड़ें, न ही अकड़ाकर बैठें । रीढ़ सीधी रखें ।

एक घंटा काम करके पामिंग करें तथा उठकर आंखों पर पानी के छींटें दें ।

मन में ताजगी होने की अनुभूति लाएं ।

कार्य के दौरान अपने हाथ, पैर व कंधों को थोड़ी देर हिलाते - डुलाते रहें ।

बीच - बीच में गहरे - लम्बे सांस लेते रहें ।

 सूक्ष्म क्रियाएं करें - ताड़ासन, नौकासन, चालन, पीठ थपथपाना, पीठ पीछे से कोहनियां पकड़कर थोड़ा चलना, ग्रीवा चालन करना, कटिचक्रासन, तिर्यक ताड़ासन, अर्धचन्द्रासन, नेत्र सुरक्षा क्रिया करना,शवासन करना ।

प्राणायाम – अनुलोम - विलोम, गहरे-लम्बे सांस लेना तथा कपालभाति करना ।