सोमवार, 24 मार्च 2014

हस्ताक्षर से व्यक्तित्व की पहचान



हस्ताक्षर किसी भी व्यक्ति विशेष के बारे मे बहुत कुछ बताते हैं जातक विशेष की आदते,उसकी सोच,रहन-सहन,मानसिकता,उसके विचार,उसका कार्य करने का तरीका तथा और भी बहुत कुछ हस्ताक्षर द्वारा जाना जा सकता हैं प्रस्तुत लेख मे हमने ऐसे ही कुछ हस्ताक्षर संबंधी सूत्र देने का प्रयास किया हैं जिससे जातक विशेष के बारे मे बहुत कुछ जाना जा सकता हैं | 

1)जो व्यक्ति अपनी क्षेत्रीय भाषा अथवा हिन्दी मे हस्ताक्षर करता हैं वह अपने धर्म व संस्कृति का जानकार होता हैं मिलनसार व रसिक स्वभाव रखते हुये समाज की मदद करने को तत्पर रहता हैं इनके जीवन मे आकस्मिक घटनाए बहुत हुयी होती हैं स्थाई काम करने के शौकीन यह लोग बहुधा अपना पैतृक कार्य ही करना पसंद करते हैं जीवन मे खतरा उठाना नहीं चाहते हैं जिस कारण जीवन सरलता से गुजर जाता हैं |

2)जो व्यक्ति अग्रेज़ी भाषा मे हस्ताक्षर करते हैं वह काम के प्रति जागरूक व दिखावा पसंद होते हैं समाज मे दोहरा चेहरा रखते हैं अपनी कार्य योजनाए किसी को पूर्ण होने तक नहीं बताते उत्तम ढंग से रहना व खाना पसंद करते हैं किसी को भी उधार देना नहीं चाहते अपने काम से काम रखते हैं अपने पास पड़ोस की खबर भी नहीं रखते अच्छे मकान वाहन व सामाजिक स्तर की तलाश मे रहते हैं अत्यधिक तनाव भरा जीवन जीने के कारण लंबी बीमारियो से ग्रस्त होते हैं काफी सोच समझकर कोई भी निर्णय करते हैं |

3)बदल बदल कर कभी हिन्दी कभी अँग्रेजी हस्ताक्षर करने वाले संकोची व रहस्यवादी प्रवृति के होते हैं किसी पर भी भरोषा नहीं करते काफी सोचसमझकर अपने विचार दूसरों के सम्मुख रखते हैं बहुधा जन्मस्थान से दूर कामयाब होते हैं स्त्री पक्ष से विशेष लाभ पाते हैं संतान इनका नाम अवस्य ऊंचा करती हैं पारिवारिक जीवन बहुत अच्छा होता हैं परंतु ऐसे लोग आकाशमिक मृत्यु का शिकार ज़्यादा होते हैं |

4)हस्ताक्षर मे केवल अपना नाम लिखने वाले अपने जीवन,काम व धन से संतुष्ट पाये जाते हैं अपने परिवार अथवा समाज मे मुखिया होते हैं बहुधा चाहते हैं की लोग उन्हे उनके ही नाम से जाने इनको नेत्र रोग अवश्य होता हैं परंतु जीवन मे इन्हे मान सम्मान बहुत मात्रा मे मिलता हैं यह अच्छे लेखक व कवि होते हैं इनकी कन्या संतान ज़्यादा होती हैं |

5)हस्ताक्षर ऊपर की तरफ चढ़ते हुये हो तो व्यक्ति आशावादी,प्रगतिशील और नीचे की और होतो निराशावादी व बेचैन होता हैं सीधे व स्पष्ट हस्ताक्षर व्यक्ति के मिलनसार होने का सूचक होता हैं |
अपनी लिखावट से बड़े व अलग हस्ताक्षर व्यक्ति के घमंडी व आत्म प्रशंसी होने के विषय मे बताते हैं साथ ही साथ यह अपने को स्वयं से अलग दिखाना पसंद करते हैं |

6)प्रथम अक्षर बड़ा लिखने वाला व्यक्ति अपने कुल का नाम रोशन करने वाला,विलक्षण प्रतिभा वाला व अपने समाज मे लोकप्रिय होता हैं परंतु सब पर अपना अधिकार जमाने की भावना इनमे बहुत होती हैं समाज मे अपनी छवि की चिंता इन्हे हमेशा लगी रहती हैं |

7)हस्ताक्षर मे प्रथम अक्षर बड़ा व बाकी अक्षर छोटे लिखने वाले स्वयं को हमेशा उन्नति करते देखना चाहते हैं व बड़े दिल वाले होते हैं सबको अपनी बात कहने का अवसर प्रदान करते हैं बहुधा प्रथम अक्षर संबंधी ग्रह से संबन्धित ही इनका स्वभाव होता हैं |ऐसे जातक राजनीति मे विशेष कामयाब होते हैं |

8)हस्ताक्षर का प्रथम व उपनाम का प्रथम अक्षर बड़ा लिखने वाला समाज मे लोकप्रिय व सिद्धांत प्रिय होता हैं

9)अपने कुल का पूरा नाम लिखने वाले अपने कुल के द्वारा जाने जाना चाहते हैं क्यूंकी इन्हे इस कुल से बहुत लाभ हुआ होता हैं जिससे उन्हे जीवन मे कम संघर्ष से ही सफलता मिलने लग  जाती हैं |

10)छोटे हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति तेज व चालाक होते हैं बहुधा ग़लत तरीके से धन कमाना चाहता हैं अपने लाभ के लिए किसी को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं | जीवन मे शॉर्टकट पर यकीन रखते हैं स्वभाव से कंजूस होते हैं जीवन मे एक दो बार बदनाम भी हुआ करते हैं |

11)हस्ताक्षर के नीचे एक लकीर खिचने वाले लोग भावुक व अपने कार्यो के प्रति सजग रहते हैं ये अपने मे विश्वास से भरे तथा थोड़े से स्वार्थी होते हैं | इन्हे जीवन मे किसी ना किसी का सहयोग मिलता रहता हैं |

12)हस्ताक्षर के नीचे यदि दो लकीर होतो व्यक्ति प्रदर्शन की भावना रखता हैं इनकी शिक्षा अधूरी या कम होती हैं वैवाहिक जीवन अच्छा ना होने से एक से अधिक संबंध रखते हैं सभी को संदेह की नज़र से देखते हैं अपना काम निकालना बखूबी जानते हैं काफी हद तक स्वार्थी भी होते हैं |

13)हस्ताक्षर के नीचे एक बिन्दु लगाने वाले जीवन मे पीछे मुड़कर देखना पसंद नहीं करते यदि इन पर विश्वास ना किया जाए तो यह आक्रामक भी हो जाते हैं इनका ज़्यादा झुकाव पुरानी कलाओ की तरफ  रहता हैं |

14)हस्ताक्षर के नीचे दो बिन्दु लगाने वाले रोमांटिक प्रवृति के होते हैं आसानी से अपने आपको कहीं भी किसी भी परिस्थिति मे ढाल लेते हैं सुंदर दिखना व सुंदरता को प्राथमिकता देना पसंद करते हैं दूसरों को आकर्षित जल्दी ही कर लेते हैं |

15)छपे अक्षरो जैसे हस्ताक्षर करने वाले जातक बड़े दयालु किस्म के होते हैं अपने परिजनो को बचाने के लिए अपना बलिदान तक करने को तैयार रहते हैं बहुत अधिक सोच विचार करने वाले तथा जल्दी ही क्रोध मे आ जाने वाले होते हैं

16)नाम से अलग हस्ताक्षर करने वाले लोग अपने विषय मे कई तथ्य छुपाते हैं ठीक से किसी से बात नही करते दूसरों कि बात पर भी ध्यान नहीं देते अपने को औरों से तेज व चालाक दिखाना चाहते हैं |

17)प्रथम अक्षर सांकेतिक व उपनाम पूरा लिखने वाले ईश्वर पर विश्वास करने वाले भाग्यवादी प्रवृति के होते हैं | अपनी पहचान को छिपाना चाहते हैं हमेशा अपने को औरों से बेहतर मानते हैं |

18)स्पष्ट हस्ताक्षर कर उसके नीचे लकीर खिच अंत मे बिन्दु लगाने वाले सामाजिक दिल के साफ तथा समाज मे सम्मानित होते हैं | ऐसे व्यक्ति अध्यापक,वैज्ञानिक,संपादक आदि होते हैं हमेशा आगे बदने की ललक लिए ऊंच अभिलाषा रखते हैं बहुधा आलसी स्वभाव के होने से कपड़ो इत्यादि पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते जो मिलता हैं उसी से गुजारा कर लेते हैं |

19)हस्ताक्षर के नीचे लकीर खींच कर दो बिन्दु लगाने अपने पारिवारिक जीवन से नाखुश होते हैं
बहुधा इन्होने प्रेमविवाह किया होता हैं जिससे इनकी पत्नी इनसे बड़ी या दूसरी जाती की होती हैं यह कई तरह के व्यापार व नौकरी करते हैं एक स्थान पर इनका मन नहीं लगता |

20)बीच मे टूटा हुआ हस्ताक्षर व्यक्ति के असफल जीवन के बारे मे बताता हैं इसलिए हस्ताक्षर कभी भी टूटे हुये नहीं करने चाहिए |

21)उलझे हुये अक्षर वाले हस्ताक्षर व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशान,चिंतयुक्त व उलझनभरा जीवन जीने वाला बताते हैं  |

22)अपने हस्ताक्षरो मे किसी भी प्रकार का निशान लगाना व्यक्ति के मष्तिस्क मे बसे किसी ठोस विचार के विषय मे बताते हैं बहुधा यह लोग अपने जीवन मे किसी वस्तु की कमी महसूस करते हैं यदि निशान सही या ग़लत के चिन्ह के हो व्यक्ति अपने कार्यो से खुश या नाराज रहता हैं

23)गोलाकार हस्ताक्षर करने वाला अपने कई सारे कामो मे लगा हुआ बताने का प्रयास करता हैं जबकि वास्तव मे वह अपनी समस्याओ से घिरा रहता हैं |

24)नुकीले हस्ताक्षर करने वाला अत्यधिक महत्वाकांक्षी होता हैं व अपनी महत्वकांक्षा के लिए कुछ भी करने को तत्पर रहता हैं |

25)दवाबपूर्ण हस्ताक्षर व्यक्ति के बहिर्मुखी व हल्के दवाब वाले हस्ताक्षर व्यक्ति के अंतर्मुखी होने के विषय मे बताते हैं 

26)तेजी से लिखे हस्ताक्षर व्यक्ति की लापरवाही का प्रतीक होते हैं वह यह बताते हैं की व्यक्ति स्वयं की भी परवाह नहीं करता हैं |

27)हस्ताक्षर के शब्दो को कला का रूप देने वाले किसी ना किसी प्रकार से कला से जुड़े होते हैं यह लोग गायक,चित्रकार,नर्तक इत्यादि होते हैं बहुत जल्द ही जीवन मे धन कमाने लग जाते हैं जिस आसानी से धन कमाते हैं उतनी ही आसानी से खर्चते भी हैं बहुत ज़्यादा भावनात्मक होते हैं जिस कारण कभी कभी आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं इन्हे जमाने से वह अपने जीवन साथी से हमेशा शिकायत रहती हैं |

28)हस्ताक्षर मे केवल अपने नाम का पहला अक्षर लिख बाकी सिर्फ लकीर खिचने वाले बहुत ज़्यादा आत्मविश्वासी होते हैं इन्हे नए नए वस्त्रो का बहुत लगाव होता हैं यह बहुत ज़्यादा धन कमाना चाहते हैं प्राय; इन्हे अपनी संतान से कष्ट प्राप्त होता हैं जीवन मे कम से कम एक बार इन्हे राष्ट्रिय स्तर का सम्मान अवश्य प्राप्त होता हैं ज़्यादातर यह लोग अपना व्यवसाय ही करते हैं

29)अपने हस्ताक्षर व सरनेम को बड़ा बड़ा लिखने वाले हमेशा कुछ ऐसा करने वाले होते हैं जिनसे लोग इनसे हैरान रह जाये जीवन को पूर्णता की और ले जाने के प्रयास मे लगे रहते हैं समाज व दुनिया मे बहुत लोकप्रिय होते हैं बहुधा ऊंचस्तरीय कलाकार अथवा खिलाड़ी होते हैं |

30)अपने हस्ताक्षर के बाद लकीर खिचने वाले अपने मे मस्त तथा कई सारी नौकरी छोड़ने वाले होते हैं अपने निवास स्थान को साफ रखना पसंद करते हैं स्वयं से श्रेष्ठ पत्नी की सोच रखते हैं अपने सहयोगीयो पर ज़्यादा भरोसा रखते हैं |

31)हस्ताक्षर के आखरी शब्द को नीचे की और खिचने वाले लोग समाज के विभिन्न क्षेत्रो मे रहकर लोगो को जोड़ने का कार्य करते हैं ज़्यादातर मैनेजर सरीखा व्यवसाय करते हैं पत्नी से परेशान हमेशा बॉस की जी हुज़ूरी करना इन्हे पसंद रहता हैं हमेशा कुछ ना कुछ विवादो मे घिरे रहते हैं | अच्छे वस्त्र व भोजन के शौकीन रहते हैं |

32)जो व्यक्ति हस्ताक्षर के नीचे गोला बनाकर बिदु रखते हैं वह विलक्षण प्रतिभा के धनी होते हैं जो भी काम करते हैं उसमे अपनी जबर्दस्त पकड़ रखते हैं जिस कारण अपने क्षेत्र मे काफी लोकप्रिय होते हैं इनसे हर कोई सहयोग की अपेक्षा रखता हैं पूर्ण शिक्षित यह लोग काफी धनी जीवन गुजारते हैं अनेक मकान व वाहन रखना पसंद करते हैं |

इस प्रकार हम व्यक्ति के हस्ताक्षर द्वारा उसके विषय मे बहुत सी बातें ज्ञात कर सकते हैं |
l
डॉ॰ किशोर घिल्डियाल

शनिवार, 22 मार्च 2014

दशाफल देखने के नियम –



दशा ही फल कथन का आधार होती हैं | प्रत्येक ग्रह अपने स्वभाव और स्थिति के अनुसार दशा आने पर निम्न 18 तरीको से फल प्रदान करता हैं |

(01) परम ऊंच-इस अवस्था का ग्रह अपनी दशा मे श्रेष्ठ फल देता हैं |

(02) ऊंच –ऊंच राशि का ग्रह अपनी दशा मे प्रत्येक प्रकार का सुख प्रदान करता हैं |

(3) आरोही-अपनी ऊंच राशि से एक राशि पहले का ग्रह अपनी दशा आने पर धन्य धान्य की     वृद्दि एवं आर्थिक दृस्ती से संपन्नता देता हैं |

(04) अवरोही-अपनी ऊंच राशि से अगली राशि पर स्थित ग्रह अपनी दशा मे रोग,परेशानी,मानसिक व्यथा व धन हानी प्रदान करता हैं |

(05) नीच- नीच राशि का ग्रह अपनी  दशा मे मान व धन हानी करवाता हैं |

(06) परम नीच –इस अवस्था का ग्रह अपनी दशा मे ग्रह क्लेश,परिवार से अलगाव,दिवालियापन,चोरी व अग्नि का भय प्रदान करता हैं |

(07) मूल त्रिकोण –इसमे स्थित ग्रह अपनी दशा आने पर भाग्यवर्धक एवं धन लाभ कराने वाला होता हैं |

(08) स्वग्रही-इसमे स्थित ग्रह अपनी दशा आने पर विद्या प्राप्ति,यश बढ़ोतरी व पदोन्नति करवाता हैं |

(09) अति मित्र-अति मित्र ग्रह स्थित ग्रह अपनी दशा मे वाहन व स्त्री सुख देने वाला तथा विभिन्न मनोरथ पूर्ण करवाने वाला होता हैं |

(10) मित्र ग्रह-इसका ग्रह अपनी दशा मे सुख,आरोग्य व सम्मान प्रदान करने वाला होता हैं |

(11) सम ग्रह- इसमे बैठा ग्रह अपनी दशा मे सामान्य फल प्रदान करने वाला व विशेष भ्रमण करवाने वाला होता हैं |

(12) शत्रु ग्रह-इसमे बैठे ग्रह की दशा मे स्त्री से झगडे के कारण मानसिक अशांति प्रदान करता हैं |

(13) अति शत्रु- इसमे बैठा ग्रह अपनी दशा मे मुकद्दमेबाजी,व्यापार मे हानी,व बंटवारा करवाने वाला होता हैं |

(14) ऊंच ग्रह संग ग्रह –यह ग्रह अपनी दशा मे तीर्थ यात्रा वा भूमि लाभ करवाने वाला होता हैं |

(15) पाप ग्रह संग ग्रह- यह ग्रह अपनी दशा मे घर मे मरण,धन हानी प्रदान करता हैं |

(16) शुभ ग्रह के साथ ग्रह –यह ग्रह अपनी दशा आने पर धन धन्य की वृद्धि,धनोपार्जन व स्वजन प्रेम आदि का लाभ देता हैं |

(17) शुभ द्रस्ट ग्रह-यह ग्रह अपनी दशा मे विधा लाभ,परीक्षा मे सफलता,तथा ख्याति प्राप्त करवाता हैं |

(18) अशुभ द्रस्ट-इस ग्रह की दशा मे संतान बाधा,अग्निभय,तबादला तथा माता पिता मे से एक की मृत्यु होती हैं |

इनके अलावा कुंडली मे दशाओ का फलादेश करते समय कई अन्य बातों का भी ध्यान रखना चाहिए जिनमे कुछ बाते निम्न हैं |

1)लग्न से 3,6,10,व 11वे भाव मे स्थित ग्रह की दशा उन्नतिकारक व सुखवर्धक होती हैं |

2)दशानाथ यदि लग्नेश,नवांशेश,होरेश,द्वादशेश व द्रेष्कानेश हो तो उसकी दशा जीवन मे मोड या बदलाव लाने मे सक्षम होती हैं |

3)मांदी जिस स्थान मे हो उस राशि के स्वामी की दशा रोग प्रदान करने वाली होती हैं |

4)अस्त/वक्री/युद्ध मे सम्मिलित ग्रह की दशा अशुभ फल प्रदान करती हैं

5)संधिगत ग्रह,6,8,12 वे भाव के स्वामी की दशा अनिश्चय प्रधान होने से पतन की ओर ले जाती हैं |

6)नीच और शत्रु ग्रह की दशा मे परदेश मे निवास,शत्रुओ व व्यापार से हानी तथा मुकदमे मे हार होती हैं परंतु नीच कार्यो से लाभ मिलता हैं |


7)राहू व केतू यदि कुंडली मे 2,3,6 या 11 वे भावो मे हो ना तो इनकी दशा मे अशुभता ही मिलती हैं |

गुरुवार, 20 मार्च 2014

निशुल्क समस्या समाधान मार्च 2014

निशुल्क समस्या समाधान

1)क्या मैं कभी धनवान बन पाऊँगा,नौकरी करू या व्यवसाय ? संदीप 10/8/1984 22:30 दिल्ली ?
संदीप जी हमारी गणनानुसार आपको नौकरी ही करनी चाहिए | आपके धन भाव का स्वामी यात्रा भाव मे हैं व लाभेष लाभ भाव को देख रहा हैं अत; निश्चित रहे आपकी धन की स्थिति अच्छी रहेगी आप पन्ना रत्न धारण करे शुभ रहेगा |


2)कौन सा रत्न धारण करू जिससे लाभ मिले ?रवि कुमार 23/10/1995 14:34 पटना ?
हमारी गणनानुसार आपको पन्ना व ओपल रत्न धारण करना चाहिए जिससे आपको लाभ मिले,ध्यान रखे वर्तमान समय आपको राहू की महादशा चल रही हैं राहू शुभावस्था मे नहीं हैं अत; गोमेद रत्न कदापि ना पहने |


3)किस विषय मे पढ़ाई करू ?निशा 3/4/1997 19:20 दिल्ली ?
आपके लिए जीव विज्ञान (बायोलोजी) लेना शुभ रहेगा आप मेडिकल क्षेत्र मे जा सकती हैं |


4)गले मे अक्सर एलर्जी व खांसी रहती हैं ? राखी 3/3/1985 8:00 ऋषिकेश ?
आपके दूसरे व तीसरे भाव व कारक बुध तथा लग्नेश गुरु के पीड़ित होने से यह समस्याए लगी रहती हैं | आप गुरुवार के दिन पीली वस्तुए प्रयोग ना करे बल्कि दान करे साथ ही साथ बुध व शनि मंत्र के जाप किया करे 

नक्षत्र व कार्य सिद्दी



किसी भी कार्य को करने से पहले यदि उस दिन के नक्षत्र अनुसार उपाय कर लिए जाए तो कार्य होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती हैं प्रस्तुत लेख मे हमने प्रत्येक नक्षत्र के अनुसार भोजन सामग्री का सेवन करने से होने वाली कार्य सिद्दी को बताने का प्रयास किया हैं जिनको प्रयोग मे लाकर कोई भी व्यक्ति अपने कार्यो मे सफलता पा सकता हैं |

1)अश्विनी-इस नक्षत्र मे गुड से बने पदार्थ,उड़द की दाल,सीताफल की सब्जी खाकर कार्य करने से कार्यो मे सफलता मिलती हैं |

2)भरणी-तिल के बने पदार्थ तथा चावल का भोजन करने से कार्यसिद्दि होती हैं |

3)कृतिका-इस नक्षत्र मे दही,उड़द तथा मिश्री खाकर काम करने से सफलता मिलती हैं |

4)रोहिणी-इस नक्षत्र मे शुद्ध घी का बना पदार्थ खाने व गोरोचन का तिलक करने से कार्य मे सफलता मिलती हैं |

5)मृगशिरा-इस नक्षत्र मे लाल मसूर की दाल का सेवन करने तथा कस्तुरी अपने पास रखने से कार्य सिद्दी होती हैं |

6)आद्रा-इस नक्षत्र मे मक्खन खाकर कार्य करने से कार्य पूर्ण होता हैं |

7)पुनर्वसु-इस नक्षत्र मे शुद्ध घी का सेवन करने व कस्तुरी को पास रखने से कार्य सिद्दी होती हैं |

8)पुष्य-इस नक्षत्र मे कार्य सिद्दी हेतु दूध व दुग्ध पदार्थो का सेवन करना चाहिए |

9)अश्लेषा-इस नक्षत्र मे गुड तथा शक्कर का सेवन करने से व केसर का प्रयोग पुजा मे करने से कार्य सिद्द हो जाते हैं |

10)मघा-इस नक्षत्र मे कार्य सिद्दी के लिए भोजन मे केसर का प्रयोग करना चाहिए

11)पूर्वाफाल्गुनी-इस नक्षत्र मे कार्य सिद्दी के लिए आलू से बने पदार्थ व हरी इलायची खाने चाहिए |

12)उत्तराफाल्गुनी-इस नक्षत्र मे उड़द,लहसुन तथा आलू के बने भोज्य पदार्थ खाने से कार्य सिद्दी होती हैं |

13)हस्त-सिंघाड़े का सेवन इस नक्षत्र मे करने से कार्य सिद्दी होती हैं |

14)चित्रा-इस नक्षत्र मे मूंग की दाल से बने भोज्य पदार्थ का सेवन करने से कार्य सिद्दी होती हैं |

15)स्वाति-इस नक्षत्र मे कार्यसिद्दि के लिए केले व सेब का सेवन करना चाहिए |

16)विशाखा-इसमे कार्य पूर्ति के लिए आवले का सेवन करना चाहिए |

17)अनुराधा-इस नक्षत्र मे कार्य सिद्दी के लिए मिश्री व किशमिश खानी चाहिए |

18)ज्येष्ठा-इस नक्षत्र मे सफलता के लिए शककरकंद तथा मिश्री खानी चाहिए 

19)मूल-इसमे सफलता के लिए मुली का सेवन करना चाहिए |

20)पूर्वाषाढ़ा-इस नक्षत्र मे सफलता के लिए नींबू,आवला व मिश्री का सेवन करना चाहिए |

21)उत्तराषाढ़ा-इस नक्षत्र मे कार्यसिद्दि के लिए बेलपत्र व नींबू का सेवन करना चाहिए |

22)श्रवण-इस नक्षत्र मे सफलता के लिए दूध का सेवन करना चाहिए |

23)धनिष्ठा-इस नक्षत्र मे कामयाबी हेतु करेले व मूंग की दाल के बने भोजन पदार्थ का सेवन करना चाहिए |

24)शतभीषा-तुम्बे के बीज का सेवन इस नक्षत्र मे करने से कार्य पूर्ण होता हैं |

25)पूर्वाभाद्रपद-इस नक्षत्र मे सफलता के लिए करेला व दही का सेवन करना चाहिए

26)उत्तराभाद्रपद-इस नक्षत्र मे कार्य सिद्दी के लिए उड़द की दाल का सेवन करना चाहिए |

27)रेवती-इस नक्षत्र मे सफलता के लिए पानी मे उपजे फल का सेवन करना चाहिए 

बुधवार, 19 मार्च 2014

आपकी सूर्य राशि व रंग



सूर्य हर माह लगभग 15 तारीख के करीब राशि परिवर्तन करता हैं जिसके अनुसार उस राशि मे जन्मे जातको को कुछ विशेष रंग प्रयोग करने की सलाह दी जाती हैं इस लेख मे हमने इसी विषय पर प्रकाश डाला हैं |

मेष राशि(15 अप्रैल से 15 मई )-इस राशि जातको को लाल,पीला व हल्का नीला रंग ज़्यादा प्रयोग करना चाहिए |

वृष राशि–इस राशि के लोगो को गुलाबी व सफ़ेद रंग ज़्यादा प्रयोग करना चाहिए |

मिथुन राशि-हरा,गुलाबी व सफ़ेद रंग इनके लिए लाभकारी रहता हैं |

कर्क राशि-सफ़ेद तथा हल्का व समुद्री हरा रंग इनके लिए ज़्यादा शुभ रहता हैं |

सिंह राशि-नारंगी,सुनहेरा व पीला रंग इनके लिए शुभ रहता हैं |

कन्या राशि-हरा,हल्का नीला व हल्का गुलाबी रंग इनके लिए शुभ रहता हैं |

तुला राशि-नीला,सफ़ेद व गुलाबी रंग इनके लिए शुभ रहता हैं |

वृश्चिक राशि-लाल,बैंगनी व कत्थई रंग इनके लिए शुभ रहता हैं |

धनु राशि-पीला,सुनहेरी व नीला रंग इनके लिए शुभ रहता हैं |

मकर राशि-गहरा नीला,कत्थई व काला रंग इनके लिए शुभ रहता हैं |

कुम्भ राशि- बैंगनी,काला व गहरा नीला रंग इनके लिए शुभ रहता हैं |

मीन राशि-पीला,सफ़ेद,हल्का बैंगनी रंग इनके लिए शुभ रहता हैं

संगीत से रोग भगाये


आजकल संगीत द्वारा बहुत सी बीमारियो का इलाज किया जाने लगा हैं | चिकित्सा विज्ञान भी यह मानने लगा हैं की प्रतिदिन 20 मिनट अपनी पसंद का संगीत सुनने से रोज़मर्रा की होने वाली बहुत सी बीमारियो से निजात पायी जा सकती हैं जिस प्रकार हर रोग का संबंध किसी ना किसी ग्रह विशेष से होता हैं उसी प्रकार संगीत के हर सुर व राग का संबंध किसी ना किसी ग्रह से अवश्य होता हैं यदि किसी जातक को किसी ग्रह विशेष से संबन्धित रोग हो और उसे उस ग्रह से संबन्धित राग,सुर अथवा गीत सुनाये जाये तो जातक विशेष जल्दी ही स्वस्थ हो जाता हैं प्रस्तुत लेख मे हमने इसी विषय को आधार बनाकर ऐसे बहुत से रोगो व उनसे राहत देने वाले रागो के विषय मे जानकारी देने का प्रयास किया हैं जिन शास्त्रीय रागो का उल्लेख किया किया गया हैं उन रागो मे कोई भी गीत,संगीत,भजन या वाद्य यंत्र बजा कर लाभ प्राप्त किया जा सकता हैं | यहाँ हमने उनसे संबन्धित फिल्मी गीतो के उदाहरण देने का प्रयास भी किया हैं |

1)हृदय रोग –इस रोग मे राग दरबारी व राग सारंग से संबन्धित संगीत सुनना लाभदायक हैं इनसे संबन्धित फिल्मी गीत निम्न हैं- तोरा मन दर्पण कहलाए (काजल),राधिके तूने बंसरी चुराई (बेटी बेटे ),झनक झनक तोरी बाजे पायलिया ( मेरे हुज़ूर ),बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम (साजन),जादूगर साइया छोड़ो मोरी (फाल्गुन),ओ दुनिया के रखवाले (बैजु बावरा ),मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोये (मुगले आजम )

2)अनिद्रा –यह रोग हमारे जीवन मे होने वाले सबसे साधारण रोगो मे से एक हैं इस रोग के होने पर राग भैरवी व राग सोहनी सुनना लाभकारी होता हैं जिनके प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं 1)रात भर उनकी याद आती रही(गमन),2)नाचे मन मोरा (कोहिनूर),3)मीठे बोल बोले बोले पायलिया(सितारा),4)तू गंगा की मौज मैं यमुना (बैजु बावरा),5)ऋतु बसंत आई पवन(झनक झनक पायल बाजे),6)सावरे सावरे(अंनुराधा),7)चिंगारी कोई भड़के (अमर प्रेम),छम छम बजे रे पायलिया (घूँघट ),झूमती चली हवा (संगीत सम्राट तानसेन ),कुहु कुहु बोले कोयलिया (सुवर्ण सुंदरी )

3)एसिडिटी –इस रोग के होने पर राग खमाज सुनने से लाभ मिलता हैं इस राग के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं 1)ओ रब्बा कोई तो बताए प्यार (संगीत),2)आयो कहाँ से घनश्याम(बुड्ढा मिल गया),3)छूकर मेरे मन को (याराना),4)कैसे बीते दिन कैसे बीती रतिया (ठुमरी-अनुराधा),5)तकदीर का फसाना गाकर किसे सुनाये ( सेहरा ),रहते थे कभी जिनके दिल मे (ममता ),हमने तुमसे प्यार किया हैं इतना (दूल्हा दुल्हन ),तुम कमसिन हो नादां हो (आई मिलन की बेला)

4)कमजोरी –यह रोग शारीरिक शक्तिहीनता से संबन्धित हैं इस रोग से पीड़ित व्यक्ति कुछ भी काम कर पाने मे खुद को असमर्थ महसूस करता हैं इस रोग के होने पर राग जय जयवंती सुनना या गाना लाभदायक होता हैं इस राग के प्रमुख गीत निम्न हैं मनमोहना बड़े झूठे(सीमा),2)बैरन नींद ना आए (चाचा ज़िंदाबाद),3)मोहब्बत की राहों मे चलना संभलके (उड़न खटोला ),4)साज हो तुम आवाज़ हूँ मैं (चन्द्रगुप्त ),5)ज़िंदगी आज मेरे नाम से शर्माती हैं (दिल दिया दर्द लिया ),तुम्हें जो भी देख लेगा किसी का ना (बीस साल बाद )

5)याददाश्त –जिन लोगो की याददाश्त कम हो या कम हो रही हो उन्हे राग शिवरंजनी सुनने से बहुत लाभ मिलता हैं इस राग के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं,ना किसी की आँख का नूर हूँ(लालकिला),2)मेरे नैना(महबूबा),3)दिल के झरोखे मे तुझको(ब्रह्मचारी),4)ओ मरे सनम ओ मरे सनम(संगम ),5)जीता था जिसके (दिलवाले),6)जाने कहाँ गए वो दिन(मेरा नाम जोकर )

6)खून की कमी –इस रोग से पीड़ित होने पर व्यक्ति का चेहरा निस्तेज व सूखा सा रहता हैं स्वभाव मे भी चिड़चिड़ापन होता हैं ऐसे मे राग पीलू से संबन्धित गीत सुनने से लाभ पाया जा सकता हैं | 1)आज सोचा तो आँसू भर आए (हँसते जख्म),2)नदिया किनारे घिर आए बदरा(अभिमान),3)खाली हाथ शाम आई हैं (इजाजत),4)तेरे बिन सुने नयन हमारे (लता रफी),5)मैंने रंग ली आज चुनरिया (दुल्हन एक रात की),6)मोरे सैयाजी उतरेंगे पार(उड़न खटोला),

7)मनोरोग अथवा डिप्रेसन –इस रोग मे राग बिहाग व राग मधुवंती सुनना लाभदायक होता हैं इन रागो के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं | 1)तुझे देने को मेरे पास कुछ नहीं(कुदरत नई),2)तेरे प्यार मे दिलदार(मेरे महबूब),3)पिया बावरी(खूबसूरत पुरानी),4)दिल जो ना कह सका (भीगी रात),तुम तो प्यार हो(सेहरा),मेरे सुर और तेरे गीत (गूंज उठी शहनाई ),मतवारी नार ठुमक ठुमक चली जाये(आम्रपाली),सखी रे मेरा तन उलझे मन डोले (चित्रलेखा)

8)रक्तचाप-ऊंच रक्तचाप मे धीमी गति और निम्न रक्तचाप मे तीव्र गति का गीत संगीत लाभ देता हैं ऊंच रक्तचाप मे “चल उडजा रे पंछी की अब ये देश ( भाभी ),ज्योति कलश छलके ( भाभी की चूड़ियाँ ),चलो दिलदार चलो ( पाकीजा ),नीले गगन के तले (हमराज़) जैसे गीत व निम्न रक्तचाप मे “ओ नींद ना मुझको आए (पोस्ट बॉक्स न॰ 909),बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना (जिस देश मे गंगा बहती हैं ),जहां डाल डाल पर ( सिकंदरे आजम ),पंख होती तो उड़  आती रे (सेहरा ) | शास्त्रीय रागो मे राग भूपाली को विलंबित व तीव्र गति से सुना या गाया जा सकता हैं |

9)अस्थमा –इस रोग मे आस्था–भक्ति पर आधारित गीत संगीत सुनने व गाने से लाभ होता हैं राग मालकोंस व राग ललित से संबन्धित गीत इस रोग मे सुने जा सकते हैं जिनमे प्रमुख गीत निम्न हैं तू छुपी हैं कहाँ (नवरंग),तू हैं मेरा प्रेम देवता(कल्पना),एक शहँशाह ने बनवा के हंसी ताजमहल (लीडर),मन तड़पत हरी दर्शन को आज (बैजु बावरा ),आधा हैं चंद्रमा ( नवरंग )


10)सिरदर्द –इस रोग के होने पर राग भैरव सुनना लाभदायक होता हैं इस राग के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं मोहे भूल गए सावरियाँ (बैजु बावरा),राम तेरी गंगा मैली (शीर्षक),पूंछों ना कैसे मैंने रैन बिताई(तेरी सूरत मेरी आँखें),सोलह बरस की बाली उम्र को सलाम (एक दूजे के लिए )

मंगलवार, 18 मार्च 2014

चैत्र विक्रम संवत 2071


foØe laor~ 2071
pS= foØe loar~ 2071 31 ekpZ 2014 dks jkf= 00%15 cts ls vkjEHk gksxk] bl loar~ dk uke Iyoax gS tks o`f'pd yXu o ehu jkf'k ls vkjaHk gksxkA
yXus'k eaxy ,dkn'k Hkko esa dU;k jkf'k dk ¼o½ gksdj cSBk gS tks nwljs] iape o "k"B Hkko dks n`f"V ns jgk gS ftlds izHkko ls /kudks"k esa vkfFkZd ladV] ljdkj dh uhfr;ksa ds fojks/k esa gM+rky] lsuk ij T;knk [kpZ] ns'k dk m/kkj c<+uk ,oa eqnzk dk Lrj fxjuk :i;k MkWyj ds eqdkcys detksj gksuk bR;kfn gksxk ijUrq rjDdh fQj Hkh gksxhA

yXus'k eaxy "k"Bs'k Hkh gS tks dsUnz esa fdlh ,d fuf'pr ljdkj dks iznf'kZr ugha dj jgk gS lHkor% vxyh dsUnz ljdkj Hkh feyhtqyh gh gksxh] pw¡fd bl o"kZ eaxy jktk Hkh gS rks ;g o"kZ fdlh cM+s usrk dh e`R;q ns'k esa dbZ txg vfXudkaM] nq?kZVuk,a o Qlyksa dk uqdlku] chekjh ,oa de o"kkZ dk gksuk tSls izHkko T;knkrj feysaxsA
   
nwljs o iape Hkko dk Lokeh xq: v"Ve esa gksus ls T;knkrj iSlk ljdkj dks chek daifu;ksa o VSDl ls gh izkIr gksxk lHkor% bu nksuksa {ks=ksa esa c<+ksÙkjh Hkh gksxh ogha pquko esa NksVs&NksVs jkT; ljdkj viuk izHkko Hkh n'kkZ jgh gSa lIres'k o }kn'ks'k 'kqØ r`rh; Hkko esa fons'k ls ykHk o lapkj lk/kuksa esa cnyko ds Li"V ladsr ns jgk gS dEI;wVj laLFkkuksa esa cgqr ykHk gksxk] 'kqØ {ks= o lkfgR; {ks= esa fons'kh izHkko vk,xk ijUrq bUgha {ks=ksa ls lEcaf/kr O;fDr;ksa dh e`R;q Hkh gksxhA L=h tkrdksa dk vkijkf/kd xzkQ c<+sxkA jk"Vªh; vkink,a Hkh gksaxh ftuesa HkwdEi] ck<+] lw[kk bR;kfn Hkh gks ldrh gS ogh ebZ ekg ckn tehu o tehu ls tqM+h ifj;kstukvksa esa fxjkoV vk,xhA
   
prqFkZ Hkko esa cq/k fdlh cM+s usrk dh gR;k djok ldrk gS rFkk Qlyksa esa deh Hkh jgsxh rFkk ns'k ds ;qok pqukoksa esa vPNk izn'kZu djsaxsA
lw;Z dk iape esa eaxy ls n`"V gksuk ljdkj gsrq v'kqHkrk ns jgk gS] dgha&dgha Hk;kud foLQksV bR;kfn ls tugkfu Hkh gks ldrh gSA
   
NBs Hkko esa dsrq fons'kh ns'kksa }kjk xqIr "kM+;a= o geyk djus tSls gkyr iSnk djok jgk gS fo'ks"k vDVwcj&uoEcj esa] turk esa tgj lEca/kh jksxksa dk gksuk c<+ ldrk gSA QkSt ds fdlh cM+s vf/kdkjh dh e`R;q laHko gSA
   
lIres'k 'kqØ dk r`rh; Hkko esa gksuk fons'kh O;kikj dk fxjuk lkFkh ns'kksa }kjk /kks[kk djuk lapkj lk/kuksa ls tqM+s yksxksa dk vlarks"k tkfgj djuk jsy o vU; lk/kuksa esa vijk/k c<+uk rFkk foi{k dk izHkko c<+uk tSls gkyr crk jgk gSaA
   
xq: dk v"Ve esa gksuk fdlh cM+s usrk] vf/kdkjh dks nsgkar gksuk crk jgk gSA Hkwdai o laØfer chekfj;ksa dk c<+uk nq?kZVuk,a bR;kfn fo'ks"kdj vizSy ds var esa ,slk gksus dh iqf"V dj jgs gSaA
   
uoes'k panz iape esa 'ks;j ekdsZV] [ksy o euksjatu ls tqM+s yksxksa ds fy;s u, dkuwu cuok,xk] bu {ks=ksa esa lQyrk,a Hkh c<+sxh tyh; {ks=ksa fo'ks"kdj ty lsuk esa] vkanksyu tSlh fLFkfr cusxh /kkfeZd o U;k; ls tqM+s foHkkxksa ls lEcaf/kr ?kksVkys o "kM~;a= mtkxj gksaxsA
   
n'kes'k lw;Z dk iape esa gksuk f'k{kk] euksjatu [ksy txr esa T;knk izHkko Mkysxk ogh jktdh; ikVhZ;ka viuk viuk mYyw lk/kus dk iz;kl djsaxhA
   
jkgq dk }kn'k esa 'kfu r`rh;s'k o prqFkZs'k lax gksuk lekt fojks/kh dk;ksZa esa c<+kok djsxk fo'ks"k ;kSu vijk/kksa o leySafxdrk ds {ks= esa u,&u, dkuwu ykus dk ncko cusxk vLirkyksa esa bl izdkj ds dsl ik, tk,axs turk esa vkØks'k c<+sxk laHkor% fdlh jkT; dk lÙkk ifjorZu Hkh gks ldrk gS dqN ukephu o turk ds fiz; usrkvksa dk vlyh :i Hkh mtkxj gksxkA