गुरुवार, 25 जून 2026

गर्मी से ऐसे बचे

तेज गर्मियों के दौरान लू लगना सबसे बडी समस्या है। लू लगने पर शरीर का तापमान अचानक से बहुत बढ़ जाता है। जब शरीर का तापमान कंट्रोल करने वाला सिस्टम (थर्मोस्टेट सिस्टम) शरीर को ठंडा रखने में नाकाम हो जाता है तो पानी किसी-न-किसी रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है। इससे शरीर की ठंडक कम हो जाती है और लू लग जाती है। लू लगने पर तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी और चक्कर आना, दस्त, सिरदर्द, शरीर टूटना, बार-बार मुंह सूखना, बार-बार प्यास लगना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं। कभी-कभी बुखार, लो बीपी से लेकर ब्रेन या हार्ट स्ट्रोक तक भी हो सकता है !

‎ऐसे बचें लू लगने से

‎तेज गर्म हवाओं में बाहर जाने से बचें। नंगे बदन और नंगे पैर धूप में न निकलें।

‎घर से बाहर जाते हुए शरीर को पूरी तरह ढकनेवाले हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें ताकि हवा लगती रहे।

‎सूती कपड़े पहनें। सिंथेटिक और पॉलिएस्टर के कपड़े न पहनें।

‎खाली पेट बाहर न जाएं और ज्यादा देर भूखे रहने से बचें। घर से निकलने से पहले एक गिलास पानी, नींबू पानी, छाछ, आम पना, खस का शर्बत या नारियल पानी पिएं।

‎धूप से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, धूप में सिर पर गीला या सादा कपड़ा रखकर चलें।

‎चश्मा पहनकर बाहर जाएं। चेहरे को कपड़े से ढक लें।

‎घर को ठंडा रखने की कोशिश करें। खस के पर्दे, कूलर, एसी आदि का इस्तेमाल करें।

‎अगर लग जाए लू

‎सबसे पहले मरीज को ठंडी और छायादार जगह में बिठाएं, कपड़े ढीले कर दें, पानी पिलाएं और ठंडा कपड़ा उसके शरीर पर रखें। शरीर के तापमान को कम करने की कोशिश करें । लगातार लिक्विड चीजें पिलाएं, जैसे कि शिकंजी, छाछ, पतली लस्सी, जूस, इलेक्ट्रॉल आदि। साथ ही, हाथ-पैरों की हल्के हाथों से मालिश करें । गुलाब जल में रुई भिगोकर आंखों पर रखें। बुखार है तो मरीज के शरीर पर सामान्य पानी की पट्टियां रखें। मरीज को एसी या कूलर में रखें और हर 6 घंटे में पैरासिटामॉल की एक गोली दे सकते हैं। यह मार्केट में क्रोसिन, कालपोल आदि नाम से मिलती है । दो दिन तक बुखार ठीक न हो तो मरीज को डॉक्टर के पास जरूर ले जाएं।

‎घरेलू नुस्खे आजमाएं

‎छह छोटे चम्मच सौंफ का रस, दो बूंद पुदीने का रस और दो चम्मच ग्लूकोज पाउडर करीब एक-एक घंटे बाद देते रहें।

‎गर्मियों में प्याज को जेब में रखने से लू नहीं लगती क्योंकि उसमें पानी की मात्रा होती है। पानी न मिलने पर उसे ही चूस लें।

‎कच्चे आम को भूनकर, पानी में मसलकर, छानकर उसमें स्वादानुसार चीनी और जीरा मिलाकर रोज लेने से लू लगने का खतरा कम हो जाता है।

‎आंवले का चूर्ण एक ग्राम, मीठा सोडा आधा ग्राम और तीन ग्राम मिश्री सौंफ के रस के साथ मरीज को दें।

‎पुदीने के करीब 30-40 पत्ते लेकर, दो ग्राम जीरा और दो लौंग को पीसकर आधे गिलास पानी में मिलाकर मरीज को हर चार घंटे बाद पिलाएं।

स्किन से जुड़ी समस्याएं

‎गर्मियों में स्किन की समस्याएं जैसे कि सनबर्न, टैनिंग, रैशेज, घमौरियां आदि बहुत परेशान करती हैं। जो लोग लगातार बैठे रहते हैं या घंटों गाड़ी चलाते रहते हैं, उन्हें दिक्कतें ज्यादा आती हैं। गर्मियों की कॉमन स्किन प्रॉब्लम हैं:

‎सनबर्न और टैनिंग

‎गर्मियों में अक्सर सनबर्न (स्किन का झुलसना) और टैनिंग (स्किन का रंग गहरा होना) का सामना करना पड़ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, टैनिंग खराब चीज नहीं है इसलिए उसके लिए किसी तरह का उपाय करने की जरूरत नहीं है। सनबर्न और पिगमेंटेशन (जगह-जगह धब्बे पड़ना) होने पर स्किन में जलन और खुजली होती है। यह समस्या गोरे लोगों को ज्यादा होती है। जो लोग सनबर्न होने के बाद भी धूप में घूमते रहते हैं, अगर वे पानी न पिएं तो उन्हें हीट स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है।

‎क्या करें:

‎एसपीएफ 30 या उससे ज्यादा का सनस्क्रीन लोशन लगाएं। ढीले, पूरी बाजू के, हल्के रंग के कॉटन के कपड़े पहनें। बाहर जाते हुए छाते का इस्तेमाल जरूर करें। सुबह 10 बजे से शाम 3 बजे तक धूप में निकलने से बचें। खूब पानी पिएं। कैलेमाइन लोशन या एंटी-इन्फ्लेमेट्री यानी सूजन और जलन से राहत दिलानेवाले लोशन हाइड्रोकोर्टिसोन लगा सकते हैं। यह जेनेरिक नेम है और मार्केट में अलग-अलग ब्रैंड नेम से लोशन व क्रीम मिलते हैं। ज्यादा खुजली हो तो डॉक्टर एंटी-एलर्जिक गोली सिट्रिजिन खाने की सलाह देते हैं। यह भी जेनेरिक नाम है। जब तक सनबर्न ठीक न हो, धूप से बचें। घरेलू उपाय भी आजमा सकते हैं। आधा कप दही में आधा नींबू निचोड़ कर अच्छी तरह मिला लें। फ्रिज में रख लें और रात को सोने से पहले क्रीम की तरह लगा लें। पांच मिनट बाद इसके ऊपर से हल्का मॉइस्चराइजर भी लगा सकते हैं। इससे काफी राहत मिलेगी।

‎रैशेज और घमौरियां

‎गर्मियों में पसीना निकलने से स्किन में ज्यादा मॉइस्चर रहता है, जिसमें कीटाणु (माइक्रोब्स) आसानी से पनपते हैं। इस दौरान ज्यादा काम करने से स्वैट ग्लैंड्स (पसीने की ग्रंथियां) ब्लॉक हो जाते हैं। ऐसा होने पर पसीना स्किन की अंदरूनी परत के अंदर जमा रह जाता है। रैशेज और घमौरियां ज्यादातर ऐसी जगहों पर होती हैं, जहां स्किन फोल्ड होती है, जैसे जांघ या बगल आदि। घमौरियां और रैशेज होने पर स्किन लाल पड़ जाती है और खुजली व जलन होती है। रैशेज से स्किन में दरारें-सी नजर आती हैं और स्किन सख्त हो जाती है, वहीं घमौरियों में लाल-लाल दाने निकल आते हैं। बाहर की स्किन की परत ब्लॉक होने पर दानेवाली घमौरियां निकलती हैं और इनमें खुजली होती है।

‎क्या करें:

‎खुले, हल्के और हवादार कपड़े पहनें। टाइट और ऐसे कपड़े न पहनें जिनसे रंग निकलता हो। ध्यान रहे कि कपड़े धोते हुए उनमें साबुन न रहने पाए। ठंडे तापमान में रहें यानी एसी और कूलर में रहें। घमौरियों वाले हिस्से पर दिन में एकाध बार बर्फ लगा सकते हैं। साथ ही, घमौरियों पर कैलेमाइन लोशन लगाएं। खुजली ज्यादा है तो डॉक्टर की सलाह पर खुजली की दवा ले सकते हैं।

‎मुंहासे और दाने

‎गर्मियों में आमतौर पर नुकीले दाने निकलते हैं। व्हाइटहेड, ब्लैकहेड के अलावा पस वाले दाने भी हो सकते हैं। इसी तरह फोड़े-फुंसी और बाल तोड़ भी हो सकते हैं। असल में, जब कीटाणु स्किन के नीचे पहुंच जाते हैं और पस बनाना शुरू कर देते हैं तो यह समस्या हो जाती है। यह स्थिति काफी तकलीफदेह होती है। कई बार बुखार भी आ जाता है। यह मॉइस्चर में पनपनेवाले बैक्टीरिया की वजह से होता है।

‎जमकर पिएं लिक्विड / कौन-से फल फायदेमंद

‎जमकर पिएं लिक्विड

‎पानी:गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए रोजाना 10-15 गिलास पानी पीना चाहिए। गुनगुना, नॉर्मल या हल्का ठंडा पानी पिएं। मटके का पानी पीना बेहतर है। एक्सरसाइज या मेहनत के काम के बाद बिल्कुल भी ठंडा पानी न पिएं। ऐसा करने से पिघला फैट फिर से जम जाता है। खाने से पहले जितना चाहे पानी पी सकते हैं, लेकिन खाने के बाद आधे घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए। खाने के साथ पानी पीने से पाचन खराब होता है। जिन्हें किडनी प्रॉब्लम है, वे डॉक्टर से पूछकर पानी पिएं।

‎नींबू पानी:गर्मियों में खूब नींबू पानी पीना चाहिए। नींबू पानी में थोड़ा नमक या थोड़ी चीनी और थोड़ा नमक मिलाना बेहतर है। इससे शरीर से निकले सॉल्ट्स की भरपाई होती है।

‎नारियल पानी:नारियल पानी को मां के दूध के बाद सबसे बेहतर और साफ पेय माना जाता है। नारियल पानी प्रोटीन और पोटैशियम (अच्छा सॉल्ट) का अच्छा सोर्स है। इसका कूलिंग इफेक्ट भी काफी अच्छा है, इसलिए एसिडिटी और अल्सर में भी कारगर है यह। शुगर के मरीज भी नारियल पानी पी सकते हैं।

‎छाछ:छाछ में प्रोटीन खूब होते हैं। ये शरीर के टिश्यूज को हुए नुकसान की भरपाई करते हैं । छाछ जितनी चाहे पी सकते हैं। खाने के साथ छाछ लेना भी फायदेमंद है। छाछ में काला नमक, काली मिर्च, भुना जीरा डालकर पीना चाहिए।

‎ठंडाई:अगर शुगर लेवल ठीक है तो यह एक अच्छा पेय है, लेकिन इसमें ड्रायफ्रूट्स और शुगर काफी ज्यादा होने से यह मोटापा बढ़ाती है। हार्ट, हाइपर टेंशन और शुगर के मरीज ठंडाई से परहेज करें।

‎वेजीटेबल जूस:जो लोग सब्जियों का जूस पीना चाहते हैं वे घिया, खीरा, आंवला, टमाटर आदि का जूस मिलाकर पी सकते हैं।

‎फ्रूट जूस:जूस में सिर्फ फ्रक्टोज होते हैं जबकि साबुत फल में फाइबर होता है, इसलिए साबुत फल खाना हमेशा बेहतर है। जूस जब भी पिएं ताजा ही पिएं। गर्मियों में मौसमी, संतरा, माल्टा या तरबूज का जूस काफी फायदेमंद है।

‎रेडीमेड शरबत : मार्केट में बने बनाए तमाम शरबत आते हैं जैसे कि रसना, रूह-अफजा, खस और गुलाब आदि।  ये सॉफ्ट ड्रिंक से बेहतर होते हैं, खासकर हर्बल शरबत।

‎आम पना:आम पना गर्मियों का खास ड्रिंक है। कच्चे आम की तासीर ठंडी होती है। आम पना विटामिन-सी का अच्छा सोर्स है। यह स्किन और पाचन, दोनों के लिए अच्छा है।

‎बेल का शरबत: यह एसिडिटी और कब्ज, दोनों में असरदार है। कच्चे बेल का शरबत लूज मोशंस को रोकता है तो पके बेल का शरबत कब्ज को ठीक करता है। कूलिंग इफेक्ट भी अच्छा है।

‎कौन-से फल फायदेमंद

‎मौसमी फल खाना सेहत के लिहाज से हमेशा बढ़िया होता है। खाने और फलों के बीच 2-3 घंटे का गैप रखें। खाने से एक घंटा पहले भी फल खा सकते हैं, लेकिन भरे पेट न खाएं और न ही खाने के साथ खाएं क्योंकि फल खाने के मुकाबले जल्दी पचते हैं।

‎आम: घर में पकाकर आम खाना बेहतर है। घर पर पकाने के लिए आम को अखबार में लपेटकर तीन-चार दिन के लिए छोड़ दें। बाजार से आम खरीदते हैं तो उसका छिलका अच्छी तरह धोएं। डंठल निकालकर आम को पानी में तीन-चार घंटे के लिए छोड़ दें। आम में कैलरी और शुगर काफी होती है। जिन्हें वजन या शुगर की प्रॉब्लम है उन्हें आम बहुत कम खाना चाहिए। आम खाने के बाद ठंडा दूध या छाछ पीना अच्छा है। इससे आम शरीर में जाकर गर्मी नहीं करता। मैंगो शेक से भी आम की तासीर ठंडी हो जाती है।

‎तरबूज: गर्मियों के लिए तरबूज बहुत अच्छा है, लेकिन तरबूज के साथ पानी न पिएं। तरबूज को दूसरे फलों के साथ नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें काफी पोटैशियम, प्रोटीन, पानी और फाइबर होता है। इससे या तो पेट फूला लगेगा या लूज मोशंस हो सकते हैं। खरबूज में कार्ब और शुगर ज्यादा होती है।

‎बेर और चेरी:गर्मियों में बेर और चेरी भी खूब आते हैं। बेर में बोरोन और सल्फर जैसे माइक्रो न्यूट्रिएंट काफी होते हैं। एसिडिक लोगों को इन्हें कम ही खाना चाहिए। लीची में शुगर ज्यादा होती है। बड़ों की बजाय यह बच्चों के लिए अच्छी है।

‎अंगूर:डिहाइड्रेशन होने पर अंगूर से काफी मदद मिलती है। अंगूर फेफड़ों की सेहत के लिए भी बहुत अच्छे होते हैं। लो बीपी या लो शुगर वालों को इन्हें खाना चाहिए।

‎मौसमी: मौसमी का कूलिंग इफेक्ट काफी अच्छा है। यह डाइजेशन में मदद करती है। खाना खाने से घंटा भर पहले मौसमी खाने से खाना अच्छी तरह पचता है।





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