किसी भी कुंडली का विश्लेषण करने के लिये तीन मुख्य स्तंभ माने जाते हैं। इन्हें आसान शब्दो मे (भाव) जो स्थिर रहता है !
(कारक) जो निश्चित माना जाता है
(भावेश) नियत भाव का स्वामी ग्रह से समझा जा सकता है।
1. भाव यह कुंडली का एक विशिष्ट घर होता है। उदाहरण के लिए, चौथा घर (सुख, माता, घर), सातवां घर (विवाह, जीवनसाथी)। यह वह क्षेत्र है जो आपको प्राप्त होने वाला है।
2. भावेश (घर का स्वामी )कुंडली के जिस घर में जो राशि होती है, उस राशि का स्वामी ग्रह उस घर का 'भावेश' कहलाता है जिसकी जिम्मेदारी होती है कि वह अपने (भाव) की रक्षा करे और उसे आगे बढ़ाए।
3. कारक हर घर का एक स्थायी कारक ग्रह होता है जो कभी नहीं बदलता। जैसे—चौथे भाव के कारक चंद्रमा,नवे भाव के कारक सूर्य (पिता के लिए) हैं।
इन तीनों का आपसी मेल हमे जातक के भावी जीवन के मुख्य उद्देश्य व संभावनाए बताता है
पूर्ण सुख जब भाव, भावेश और कारक तीनों मजबूत और शुभ हों, तो उस घर से जुड़े पूरे शुभ परिणाम मिलते हैं !
मध्यम फल यदि इनमें से कोई एक कमजोर है, तो फल सामान्य हो जाता है !
समस्या यदि इनमें से दो की स्थिति खराब है, तो उस सुख को पाने में संघर्ष करना पड़ता है !
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