गुरु ग्रह का गोचर अपनी उच्च राशि कर्क में 2 जून 2026 मंगलवार को पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे चरण से हो रहा है । इस गोचर में गुरु उच्च राशि में होकर हंस राजयोग बनाएंगे । जो पंच महापुरुष योग में से एक है ज्योतिषशास्त्र में इस योग को बहुत ही प्रभावशाली और उत्तम माना गया है जो ज्ञान और बौद्धिक क्षमता से उन्नति प्रदान करता है ।
गुरु 2 जून से लेकर 31 अक्टूबर तक कर्क राशि में विराजमान रहेंगे । इस बीच गुरु 15 जुलाई को कर्क राशि में अस्त होंगे और 9 अगस्त को उदित हो जाएंगे ।
गुरु को ज्ञान,विवाह,समृद्धि और संतान का कारक माना गया है । इनके अपनी उच्च राशि में प्रवेश करने से इस गोचर का सकारात्मक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
गुरु ग्रह को ब्रह्मांड में सबसे ज्यादा सकारात्मक अथवा शुभ ग्रह माना गया है जिसे ग्रह मंडल में मंत्री का स्थान प्रदान किया गया है गुरु ग्रहों को देवताओं का गुरु भी माना जाता है जो हमेशा पृथ्वी पर जीवन को बढ़ाने का प्रयोजन रखते हैं |
भारतीय परिपेक्ष में कोई भी कार्य इन गुरु ग्रह की उपस्थिति व अनुमति के बिना संभव ही नहीं माना जाता |
आईए बृहस्पति संहिता अनुसार जानते हैं कि विभिन्न राशियों पर गुरु के इस उच्च राशि परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ेगा |
मेष
इस राशि से है बृहस्पति का यह चौथा गोचर होगा इसके
प्रभाव से घर संपत्ति माता से जुड़े मामले सक्रिय हो जाएंगे तथा इनसे संबंधित कार्य
अवश्य ही होंगे परंतु सावधान रहें 12वें भाव का स्वामी होने के कारण धन का व्यय चुपचाप होता रहेगा।
वृषभ
इस राशि से बृहस्पति का यह तीसरा गोचर होगा जिससे संचार भाई बहन छोटी यात्राएं संबंधित घटनाएं होंगी और उनसे लाभ की संभावना भी रहेगी परंतु बृहस्पति के 8वें भाव का स्वामी होने के कारण अचानक बाधाएँ आ सकती हैं सावधान रहें :
मिथुन
इस राशि से बृहस्पति का दूसरे भाव से गोचर होगा
जिस कारण जातक विशेष के परिवार की वृद्धि तथा
धन का संचय होगा विवाह में हो रही तेरी दूर होगी करियर का भरपूर सहयोग भी मिलेगा यह
राशि बृहस्पति के इस गोचर से सबसे बेहतरीन राशियों में से एक रहेगी |
कर्क
कर्क राशि के पहले भाव से बृहस्पति का गोचर होगा
जो व्यक्तिगत रूप से सबसे शक्तिशाली गोचर है।
स्वास्थ्य, निर्णय लेने की क्षमता और अवसर प्रदान कर सभी क्षेत्र में सुधार करेगा परंतु सावधान रहें: 6वें भाव का स्वामी होने के कारण स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
सिंह
सिंह राशि से बृहस्पति का यह 12वें भाव का गोचर होगा जो जातक विशेष की खर्चों में वृद्धि करेगा तथा आध्यात्मिक विकास की और रुझान जातक विशेष को देगा परंतु सावधान रहें धन का नुकसान लगातार होता ही रहेगा |
कन्या
कन्या राशि से 11वें भाव से बृहस्पति का गोचर होने
से आय में वृद्धि होगी संतुष्टि की भावना पड़ेगी अपने लक्ष्य पूरे होंगे संपत्ति और
विवाह से जुड़े मामले सक्रिय होंगे बड़े भाई बहन मददगार साबित होंगे इस राशि के लिए
भी यह बृहस्पति का गोचर अति सुविधा प्रदान करने वाला होगा |
तुला
तुला राशि से दसवें भाव में बृहस्पति का गोचर होने से कैरियर और प्रतिष्ठा में चार चांद लगेंगे पद उन्नति और नेतृत्व करने के अवसर प्राप्त होंगे तथा अब तक जो भी कार्य आपने किया है उसका उचित फल आपको प्राप्त होगा परंतु छठे भाव का स्वामी होने के कारण रोग ऋण शत्रुओं से सम्मिलित कुछ परेशानियां भी आ सकती हैं |
वृश्चिक
वृश्चिक राशि से 9 भाव में बृहस्पति का यह गोचर
बहुत ही लिए हुए हैं जिस कारण भाग्य धर्म पिता और उच्च शिक्षा संबंधित सभी भाव सक्रिय
होंगे जो जातक विशेष को बहुत तरक्की देंगे | इसके अतिरिक्त, धन और संतान सुख का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा।
इस राशि को भी बृहस्पति के इस उच्च राशि गोचर से
बहुत ही लाभ प्रदान होगा |
धनु
धनु राशि से आठवीं भाव में बृहस्पति का गोचर पैतृक
संपत्ति विरासत ससुराल पक्ष और अचानक होने वाली घटनाओं को बता रहा है जिसे अचानक लाभ
अथवा नुकसान भी हो सकता है | सावधान रहें: स्वास्थ्य की सक्रिय रूप से निगरानी करने की आवश्यकता है।
मकर
मकर राशि से सातवें भाव में बृहस्पति का गोचर विवाह और व्यावसायिक उन्नति या साझेदारी करवा सकता है जिनके विवाह में देरी हो रही है यह गोचर इस विषय पर सीधे तौर पर प्रभाव डालकर विवाह में आ रही देरी को दूर कर देगा |
कुंभ
कुंभ राशि से बृहस्पति का छठा गोचर होगा जिससे प्रतिस्पर्धा एवं शत्रु पर विजय प्राप्त करने के योग बनेंगे कानूनी विवादों का समाधान होगा नौकरी में नए प्रस्ताव मिलेंगे और वेतन में वृद्धि भी हो सकती है ध्यान रहे कि इस राशि के लिए बृहस्पति धन और लाभ दोनों घर के मालिक बनते हैं |
मीन
मीन राशि से पंचम भाव में बृहस्पति के इस गोचर से संतान प्रेम संबंध विद्यार्थी जीवन और रचनात्मक जैसे क्षेत्र प्रभावित होंगे जो कि करियर के क्षेत्र में भी विशेष आशीर्वाद प्रदान करेंगे तथा जातक विशेष का लाभ प्राप्त होगा क्योंकि बृहस्पति इसी राशि के स्वामी भी हैं
17 जुलाई – 11 अगस्त: बृहस्पति अस्त रहेंगे। इस दौरान किसी भी नए कार्य या शुभ समारोह की शुरुआत करने से बचें।
12 अगस्त के बाद... बृहस्पति पुनः अपनी पूर्ण शक्ति और शुभता के साथ प्रभावी हो जाएँगे।
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