गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025

किन को मिलता हैं मकान का सुख


जब कोई भी व्यक्ति घर बनाना जब चाहता है तो सबसे पहले उसे भूमि की आवश्यकता होती है । भूमि का कारक ग्रह मंगल और चतुर्थ भाव बलवान होने पर व्यक्ति भूमि क्रय कर सकता है । चतुर्थ भाव या मंगल पीड़ित होने पर व्यक्ति किराये के मकान में ही रहता है और यदि भाग्यवश अपना मकान बन भी जाए तो उसमें वास्तु दोष जरूर होता है,बने बनाए मकान को देखने के लिए जन्मपत्री में चौथे भाव के साथ शनि की स्थिति पर भी विचार किया जाता है ।

जन्मपत्री में कौन - कौन से योग बनने पर व्यक्ति भूमि या भवन प्राप्त कर सकता है, आइए उन पर विचार करते हैं |

यदि चतुर्थेश केंद्र या त्रिकोण में हो ।

यदि चतुर्थेश स्वगृही, वर्गोत्तम, स्वनवांश या उच्च का हो तो भूमि, वाहन व घर का सुख मिलता है ।

यदि लग्नेश चतुर्थ में हो या लग्नेश और चतुर्थेश का स्थान परिवर्तन हो तो घर, आवास आदि का पूर्ण सुख मिलता है ।

यदि चतुर्थेश व दशमेश की युति केंद्र या त्रिकोण में हो तो जातक का घर सुंदर, बड़ा या महलनुमा होता है।

यदि चतुर्थेश बलवान हो और लग्नेश से उस का संबंध हो ।

यदि चतुर्थ भाव पर दो शुभ ग्रहों की दृष्टि हो ।

यदि चतुर्थेश व पंचमेश में परिवर्तन योग हो ।

यदि चतुर्थेश व नवमेश में परिवर्तन योग हो ।

यदि चतुर्थेश व एकादशेश में परिवर्तन योग हो ।

लग्नेश, चतुर्थेश व द्वितीयेश जितने शुभ ग्रहों से दृष्ट हों, उतने मकान मिलते हैं ।

केंद्र व त्रिकोण में बैठे ग्रहों में जितने ग्रह बलवान हों, व्यक्ति के उतने ही मकान बनेंगे ।

सप्तमेश उच्च का हो या सप्तम भाव में शुक्र हो तो व्यक्ति को पत्नी पक्ष से मकान का लाभ मिलता है ।

जब व्यक्ति को पता चलता है कि उसकी कुंडली में भूमि या भवन का सुख है तो उसका अगला प्रश्न होता है कि यह सुख कब मिलेगा? इसके लिए योगकारी ग्रह की दशा अंतर्दशा में व्यक्ति को यह सुख मिल सकता है ।

जिन ग्रहों के कारण यह योग बन रहा है उनकी दशा या अंतर्दशा में व्यक्ति भवन या भूमि को प्राप्त करता है ।

चंद्रमा की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा होने पर भूमि व भवन का लाभ होता है ।

मंगल की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा होने पर भूमि व भवन का लाभ होता  है । .

गुरु की महादशा में गुरु, शनि, शुक्र या मंगल की अंतर्दशा में व्यक्ति भूमि व भवन का सुख प्राप्त करता है |

गुरु की महादशा में शनि की अंतर्दशां में व्यक्ति को पुराना मकान मिलता है या उसका जीर्णोद्धार होता है ।

चतुर्थेश, मंगल या शनि की महादशा या अंतर्दशा में व्यक्ति मकान का सुख प्राप्त करता है ।

 

 

बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

आनंद दोगे तो आनंद मिलेगा

ब्लावटस्की जिसने थियोसोफिकल सोसायटी को जन्म दिया, एक ट्रेन में यात्रा कर रही थी। उसने अपने पास एक झोला रख छोड़ा था बार-बार झोले में हाथ डालती और कुछ बाहर फेंकती। उसे ऐसा करते देख यात्रियों की जिज्ञासा बढ़ी। और उन्होंने कहा कि क्षमा करें ! अकारण आपके कार्य में बाधा देना हम उचित नहीं मानते लेकिन हमारी जिज्ञासा अब सीमा के बाहर हो गई है। इस झोले मैं क्या है? और बार-बार मुट्ठी भर कर आप क्या फेंकती हैं?

ब्लावटस्की ने कहा, मेरे इस झोले में फूलों के बीज हैं । इन्हीं को मैं बाहर फेंक रही हूं ।

उन्होंने कहा, हम अर्थ नहीं समझे ! इसका क्या सार? ब्लावटस्की ने कहा, सार! आकाश में बादल घिरने लगे हैं। आषाढ़ आ गया। जल्दी ही वर्षा होगी। ये बीज फूल बन जाएंगे।

अब उन लोगों ने कहा कि क्या आपको बार-बार इसी ट्रेन में सफर करनी पड़ती है? क्या इसी रास्ते से आप बार-बार गुजरती हैं? ब्लाक्टरकी ने कहा कि नहीं, मैं पहली बार गुजर रही हूं और शायद दुबारा कभी मौका न आए।

तो उन्होंने कहा, हम फिर समझे नहीं ! तो फिर बीज फेंकने से आपको क्या फायदा? बीज अगर फूल बने भी, तो आप तो कभी देख भी न सकेंगी।

ब्लावटस्की ने कहा, यह थोड़े ही सवाल है कि मैं देख सकूं। कोई तो देखेगा! सब आंखें मेरी हैं। किसी के नासापुटों में तो सुगंध भरेगी ! सब नासापुट मेरे हैं। कोई तो प्रसन्न होगा, आनंदित होगा । रोज हजारो यात्री इस ट्रेन से आते-जाते हैं  और भी बहुत सी ट्रेनें निकलती हैं इस रास्ते से लाखों लोग उन फूलों को नाचते देखेंगे हवा में, सूरज में और देखकर प्रसन्न होंगे।

एक ने कहा, लेकिन उनको तो पता भी नहीं चलेगा कि आपने ये फूल बोए हैं!

ब्लावटस्की ने कहा, इससे क्या फर्क पड़ता है कि वे जानें कि किसने फूल बोए हैं; कि वे मेरे नाम का स्मरण करें, कि मुझे धन्यवाद दें। वे प्रसन्न होंगे, इसमें मेरी प्रसन्नता है। वे आनंदित होंगे, मुझे आनंद मिल जाएगा।

आनंद दो तो आनंद मिलता है। आनंद बांटो और तुम्हारे भीतर आनंद के नये नये झरने फूटेंगे।

 

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

ग्रह उपाय

जातक के जन्म कुण्डली में जो ग्रह अरिष्ट फल प्रदान करने के कारक है उनकी उग्रता को शान्त या उनकी कृपा प्राप्त करने के लिये हमारे ज्योतिष विज्ञान में पांच विधानों को प्रस्तुत किया गया है।

‎1. प्रार्थना (देव उपासना), 2. ग्रहों के शान्ति हेतु दान 3. व्रत (ग्रहों के कृपा प्राप्ति हेतु), 4. ग्रहों के प्रसन्नता हेतु मंत्रों का अनुष्ठान 5. ग्रहों से कृपा प्राप्त हेतु यज्ञ अनुष्ठान ।

‎इन पांचों विधानों के प्रयोग का यह उद्देश्य है कि अरिष्ट प्रदाता ग्रह देवता को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्रसाद को प्राप्त करना ।

‎ग्रह देवता से निवेदन करे कि हे प्रभु! मेरे पूर्व जन्म कृत् दुष्कृत्यों के कारण जो हम आपके क्रोध का भाजन बन रहे है, उसके लिये हम इस जन्म में शुभ कृत्य करने का संकल्प ले रहा हूं और शुभ क्रियमाण कर्म के रूप में आपकी सेवा में अपनी प्रार्थना प्रस्तुत कर रहा हूं। अपने चरणामृत और कृपा दृष्टि से प्रारब्ध जनित अरिष्ट फल को कम करते हुये उसे सहन करने की शक्ति हमें प्रदान करें।

‎छांदोग्य उपनिषद का यह मंत्र प्रमाण है कि

‎यदेव श्रद्धया जुहोति तदेव वीर्यवत्तारं भवेति ।

‎श्रद्धापूर्वक की गई प्रार्थना ही फलवती होती है, अतः भावना जितनी सच्ची, गहरी और श्रद्धापूर्ण होगी, उतना ही उसका सत्परिणाम भी होगा । - छांदोग्योपनिषद

‎

बुधवार, 10 सितंबर 2025

ज्योतिष बिरादरी पर श्राप

ज्योतिष कार्य करने वालों के जीवन को अगर ध्यान से देखा जाए तो उनमें एक समानता देखने मे आती है कि अधिकतर ज्योतिषियो के पुत्र या तो होते ही नहीं हैं या होकर मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं,उनसे दूर रहते हैं,कामयाब नहीं होते,जीवन मे ज़्यादा सफल नहीं होते या उनका वैवाहिक जीवन सही नहीं होता | 

ज्योतिष अनुसार ऐसा शनि का संबंध सूर्य अथवा पंचम भाव से होने से होता हैं गौर से देखा जाए तो इसमें एक बात स्पष्ट रूप से दिखती है कि सूर्य जो कि काल पुरुष की पत्रिका में पंचमेश अथवा संतान कारक बनता है और जातक विशेष का कर्म व लाभ दशमेश व लाभेष शनि से होता हैं जो यह दर्शाता हैं की कहीं कर्म व लाभ हेतु ईश्वर के मार्ग मे बाधा उत्पन्न करने के फलस्वरूप ऐसा होता हो हालांकि ज्योतिष अनुसार पुत्र का कारक गुरु ग्रह को माना गया है जो कालपुरुष पत्रिका मे नवम भाव अर्थात हमारे भविष्य को भी दर्शाता हैं तथा ज्योतिष का कारक सूर्य को ही माना गया है |

अभी पिछले कुछ दिन पहले ही एक ज्योतिषी का पुत्र दुर्घटना में ईश्वर को प्यार हो गया,कुछ समय पहले कानपुर के एक बड़े ज्योतिषी का पुत्र अपने हॉस्टल में मृत पाया गया था,इंदौर के जाने - माने ज्योतिषी का पुत्र युवावस्था में चला गया,विश्व विख्यात ज्योतिषी बीबी रमन का पुत्र युवावस्था में दुर्घटना का शिकार होकर ईश्वर को प्यारा हुआ,एक अन्य ज्योतिषी का पुत्र विवाह सुख से वंचित हैं पत्नी छोड़ कर चली गयी,एक अन्य का पुत्र विवाह करना नहीं चाहता,एक और ज्योतिषी हैं उनके दोनों बेटे उनसे दूर विदेश मे रहते हैं,कुछ ऐसे ज्योतिषी भी मिले हैं जिनके पुत्र अपने कैरियर मे कुछ ज़्यादा नहीं कर सके तो अब पिता के साथ ही ज्योतिष के कार्यक्षेत्र मे आ गए हैं |

हमारे अनुभव में ऐसे बहुत से ज्योतिषी आए हैं जिनकी केवल कन्या संतान ही हैं पुत्र नहीं हैं, पुत्रो का विवाह नहीं हुआ अथवा विवाह खराब हुआ या उनकी पत्नी उनसे अलग रह रही है | क्या यह सिर्फ एक संयोग है या वास्तव में कुछ ऐसा है जो ज्योतिष बिरादरी समझ या देख नहीं पा रही है | आप भी अपने आसपास के ज्योतिषियो को देखिए आपको ऐसे बहुत सारे उदाहरण देखने को मिल जाएंगे | क्या यह सिर्फ एक इत्तेफाक है अथवा ईश्वर हमसे इस रूप में कुछ कहने की कोशिश कर रहा है जो ज्योतिष बिरादरी मानना नहीं चाह रही है |