सोमवार, 4 जून 2018

कर्म सिद्धांत


नित्य कर्म -रोज किए जाने वाले कर्म जो मन शरीर में प्राण की शुचिता शुद्धि व पर्यावरण सुरक्षा हेतु किए जाते हैं |

नैमित्तिक कर्म -विशेष कार्य क्षमता के लिए किए जाने वाले कर्म जैसे पुंसवन कर्णछेदन व समस्त सोलह संस्कार |

काम्य कर्म -लौकिक पारलौकिक कामना हेतु किए जाने वाले कर्म काम्य कर्म कहलाते हैं जैसे कि रुद्राभिषेक आदि |

निषिद्ध कर्म -वर्जित कर्म जो समाज विरोधी होते हैं जैसे सगोत्रीय विवाह |


प्रायश्चित कर्म -पश्चाताप के रूप में किए जाने वाले कर्म जो ग्लानि व अपराध बोध से किए जाते हैं |

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