सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

नवरात्रि के दिव्य उपाय


वर्ष 2023 की शरद नवरात्रि का पावन पर्व 15 अक्तूबर रविवार से प्रारम्भ हो चुके है ! नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ अवतार स्वरूपों की पूजा आराधना होती है ! शास्त्रों में मां दुर्गा को शक्ति की देवी कहा गया है ! इसलिए नवरात्रो को शक्ति की उपासना का पर्व भी कहा जाता है !

नवरात्र में नौ दिनों तक व्रत किये जाते हैं मान्यता है कि नवरात्र के व्रत रखने वालों को मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है और उनके सभी संकट दूर हो जाते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं ! नवरात्र के समय कुछ कार्यों को करने से माता रानी प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का वरदान देती हैं ! यह कार्य इस प्रकार हैं

1 - नवरात्रि पर्वों पर व्रत रखने पूजा उपासना और कलश स्थापन से माँ दुर्गा पूरे वर्ष अपनी कृपा बरसाती हैं |

2 - नवरात्रि पर माता रानी को प्रतिदिन अर्पित करें ताजे पुष्प - हर दिन नवरात्रि में देवी को ताजे फूल चढ़ाना चाहिए और पूजा घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान देना चाहिए |

3 - नवरात्रि पर प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए - नवरात्रि पर हर रोज दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से आपके सभी तरह के बिगड़े हुए काम पूरे होने लगते हैं |

4 - नवरात्रि पर गाय को रोटी अवश्य खिलाएं - नवरात्रि पर गाय को रोटी अवश्य खिलाना चाहिए | हर तरह की मनोकामना को पूरा करने के लिए नवरात्रि पर गाय को रोटी अवश्य खिलाएं, नवरात्रि के नौ दिन तक ऐसा करने पर भाग्य का साथ मिलने लगता है |

5 - नवरात्रि पर घर के ईशान कोण में तुलसी का पौधा अवश्य लगाए - नवरात्रि पर घर के ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं और आरोग्य सुख प्राप्त होता है !

6 - शरद नवरात्रि पर माता रानी को चढ़ाएं कमलगट्टा - अपने हर काम में सफल होने के लिए और धन-सम्पदा प्राप्त करने के लिए नवरात्रि की अष्टमी के दिन माता महागौरी को कमल गट्टा अवश्य चढ़ाएं,कमलगट्टे के साथ माता का सबसे प्रिय लाल गुड़हल का फूल भी चढ़ाएं |

7 - नवरात्रि पर अष्टमी के दिन झाड़ू अवश्य खरीदें - अष्टमी और शुक्रवार के दिन झाडू जरूर खरीदकर घर लाना चाहिए | ऐसा करने से आपके ऊपर और परिवार के बाकी सदस्यों पर माता लक्ष्मी की कृपा बरसेगी

शनि की दृस्टी का प्रभाव

 

शनि लग्न को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक श्याम वर्णी, नीच स्त्रीरत, स्वस्त्री से विमुख, और लम्पट होता है ।

शनि दूसरे भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक 36 वर्ष तक धननाशक, कुटुम्ब विरोधी, 19 वे वर्ष मे शारीरिक कष्ट, नाना रोगो का शिकार होता है ।

शनि तीसरे भाव  को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक पराक्रमी, अधार्मिक, भाइयो के सुख से रहित, नीच संगती प्रिय, बुरे कार्य करने वाला होता है ।

शनि चौथे भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक को प्रथम वर्ष मे शारीरिक कष्ट पाने वाला, 35-36 उम्र मे  मे राज्याधिकार मे वृद्धि प्राप्त करने वाला और लाभ पाने पाने प्रतिष्ठित व्यक्ति होता है ।

शनि पांचवे भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक नीचविद्या विशारद, नीच जनप्रिय, और नीच कार्य करने वाला, संतान हानि वाला होता है ।

शनि छठे भाव  को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक शत्रु नाशक, मातुल कष्टकारक, नेत्र रोगी, मधुमेह रोगी, धर्म से विमुख, कुकर्मरत होता है ।

शनि सप्तम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो कलहप्रिय, 36 आयु वर्ष मे मृत्युतुल्य कष्ट, धन नाशक और मलिन स्वभाव का होता है ।  

शनि अष्टम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो कुटुम्ब विरोधी, राज्य हानि उठाने वाला, 36 वर्ष की उम्र तक पिता का धन नाशक, रोगी होता है ।

शनि नवम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक देशाटन करने वाला, भाइयो से विरोध, प्रवासी, धन प्राप्त करने वाला, नीच कर्म रत, पराक्रमी, धर्महीन, निंदक होता है ।

शनि दशम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक पिता के सुख से वंचित, माता को कष्टकरक, भूमिपति, राजमान्य, सुखी होता है ।

शनि एकादश भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक पुत्र से सुखी, अनेक भाषाओ का ज्ञाता, साधारण व्यापार से लाभ प्राप्त करने वाला होता है ।

शनि द्वादश भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक अशुभ कार्यो मे धन खर्च करने वाला, माता को कष्टकारक, शत्रु नाशक, सामान्य लाभ प्राप्त करने वाला होता है । 

रविवार, 15 अक्टूबर 2023

शुक्र की दृस्टी का प्रभाव



शुक्र की पूर्ण दृष्टि प्रथम भाव पर हो तो जातक सुन्दर शौक़ीनमिज़ाज,परस्त्रीरत,भाग्यशाली चतुर होता है ।

शुक्र की पूर्ण दृष्टि द्वितीय भाव पर हो तो जातक धन तथा कुटुम्ब से सुखी, धनार्जन करने वाला, परिश्रमी और विलासी प्रवृति वाला होता है ।

शुक्र की पूर्ण दृष्टि तृतीय भाव पर हो तो जातक शासक, अधिक भाई-बहन वाला, अल्पवीर्य और 25वे वर्ष मे भाग्योदय वाला होता है ।

शुक्र की पूर्ण दृष्टि चतुर्थ भाव पर हो तो जातक सुन्दर, सुखी, समाजसेवी, भाग्यशाली, आज्ञाकारी और राजसेवी होता है ।

शुक्र की पूर्ण दृष्टि पंचम भाव पर हो तो जातक विद्वान्, धनी, एक कन्या और तीन या पांच पुत्र का पिता, प्रेमी और बुद्धिमान होता है ।

शुक्र की पूर्ण दृष्टि छठे भाव पर हो तो जातक पराक्रमी, शत्रुनाशक, कुमार्गगामी, वीर्य विकारी, श्वेतकुष्ठ युक्त और वाचाल स्वभाव का होता है ।

शुक्र की पूर्ण दृष्टि सातवे भाव पर हो तो जातक कामी, व्यभिचारी, लम्पट, सुन्दर भार्या वाला, 25 वर्ष से स्वाधीन जीवन व्यतीत करने वाला होता है ।

शुक्र की पूर्ण दृष्टि आठवे भाव पर हो तो जातक प्रमेह या मधुमेह रोगी, दुःखीनिर्धन, कुटुम्ब रहित, साधु सेवारत, कफ व वात रोगी होता है ।

शुक्र की पूर्ण दृष्टि नवम भाव पर हो तो जातक कुलदीपक, ग्रामाधिपति, शत्रुजयी, धर्मात्मा, कीर्तिवान, और विलक्षण होता है |

शुक्र की पूर्ण दृष्टि दसवे भाव पर हो तो जातक भाग्यशाली, प्रवासी, राजसेवी, भूमिपति होता है ।

शुक्र की पूर्ण दृष्टि ग्यारहवे भाव पर हो तो जातक नाना प्रकार से लाभ प्राप्त करने वाला, नेता, प्रमुख, परस्त्रीरत और कवि हृदय वाला होता है ।

शुक्र की पूर्ण दृष्टि द्वादश भाव पर हो तो जातक वीर्य रोगी, विवाहादि कार्यो पर धन खर्च करने वाला, शत्रुओ से पीड़ित, चिंतित और स्त्रीद्वेषी होता है । 


शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2023

गुरु की दृस्टी का फल


लग्न भाव को बृहस्पति पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक धर्मात्मा, कीर्तिवान, विद्वान् पतिव्रता शुभ आचरण वाली स्त्री का पति होता है ।

दूसरे भाव को गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक पितृ धन नाशक, धनार्जन करने वालाकुटुम्बी और मित्रो मे श्रेष्टराजमान्य होता है ।

तीसरे भाव को गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक भाग्यवान पराक्रमीभ्रातृ सुखयुक्त, प्रवासी और शुभ आचरण करने वाला होता है ।

चौथे भाव को गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक श्रेष्ट विद्याव्यसनी, भूमिपति, वाहन सुखयुक्त, माता-पिता से सुखी होता है ।

पांचवे भाव को गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक धनवान, ऐश्वर्यवान, विद्वान्, व्याख्याता, पांच पुत्र वाला और कलाप्रिय होता है ।

छठे भाव को गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक व्याधिग्रस्त, धन नष्ट करने वाला, क्रोधी और धूर्त होता है ।

सप्तम भाव को गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक सुन्दर, धनवान, कीर्तिवान, भाग्यशाली होता है । 

अष्टम भाव को गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक चिन्तित, आठ वर्ष की अवस्था मे मृत्यु तुल्य कष्ट, 26 वर्ष की अवस्था मे कारागारजन्य  कष्ट, राजभय होता है ।

नवम भाव को गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक कुलीन, भाग्यवान, शास्त्रज्ञ, धर्मात्मा, स्वतंत्र, संतानयुक्त, दानी, व्रतोपवास करने वाला होता है ।

दशम भाव को गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक राजमान, सुखी, धन पुत्रादि युक्त, भूमिपति, ऐश्वर्यवान होता है ।

एकादश भाव को गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक बुद्धिमान, पुत्रवान, विद्वान्, स्नेही, 70 वर्ष से अधिक जीवित रहने वाला होता है ।

द्वादश भाव को गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक रजोगुणी, दुःखी धन खर्च करने वाला, निर्बुद्धि होता है ।
                                                                                                                                                        

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2023

बुध की दृस्टी का फल


बुध की प्रथम भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो जातक गणितज्ञ, सुन्दर, व्यापारी, व्यव्हार कुशल, मिलनसार, लब्धप्रतिष्ठित होता है ।

द्वितीय भाव पर पूर्ण दृष्टि होतो जातक व्यापार मे धन लाभी, कुटुम्ब विरोधी, स्वतंत्र विचारक, हठी  और अभिमानी होता है ।

तृतीय भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो जातक भाग्यवान, प्रवासीभ्रातृसुख युक्तसत्संगी, धार्मिक होता है ।

चतुर्थ भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो  राज्य से लाभी, भूमि व वाहन सुख, श्रेष्ठ बुद्धि वाला, विद्वान् होता है ।

पंचम भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो जातक गुणवान, धनवान, विद्वान्, शिल्पकार, पहली संतान पुत्र होती है ।

छठे भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो जातक वात रोगी, कुमार्ग पर व्यय करने वाला, शत्रुओ से पीड़ित और वृद्धावस्था मे धन संचय करने वाला होता है ।

बुध की सातवे भाव पर पूर्ण दृष्टि होतो जातक सुन्दर, सुशील भार्या वाला, व्यापारी, गणितज्ञ,चतुर,कार्यदक्ष होता है ।

आठवे भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो जातक भ्रमणशील, दुखी, कुटुम्ब विरोधी, प्रवासी होता है ।

नौवे भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि हो तो जातक हँसमुख, धनोपार्जनी, भ्रातृ द्वेषी, राजाओ से मिलने वालागायन प्रिय और विलासी होता है ।

दसवे भाव पर बुध की दृष्टि हो तो जातक राज्यमान, कीर्तिमान, सुखी, कुलीन, कुलदीपक होता है ।

ग्यारहवे भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि हो तो जातक धनोपार्जन करने वाला, संतान युक्त, विद्वान् और कलाविशारद होता है ।

बारहवे भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि हो तो जातक मिथ्याभाषी,कुलकलंकी,शराबी,नीचप्रकृति का होता है ।                                                                                                                                                                       

बुधवार, 11 अक्टूबर 2023

मंगल की दृस्टी का फल


लग्न पर पूर्ण दृष्टि हो तो जातक उग्र प्रकृति,प्रथम भार्या का 21 या 28 उम्र वर्ष में वियोग जन्य दुःख,राजमान्य, भूमि से धन लाभ होता है

द्वितीय भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि हो तो बवासीर रोगी, स्वल्प धनी, कुटुम्ब से पृथक, परिश्रमी, खिन्नचित्त होता है

तृतीय भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो जातक बड़े भाई के सुख से वंचित, पराक्रमी, भाग्यवान, और एक विधवा बहन वाला होता है ।

चतुर्थ भाव पर दृष्टि हो तो माता-पिता के सुख से हीन, शारीरिक कष्ट, 28 उम्र वर्ष तक दुःखी, पश्चात् सुखी, परिश्रम से जी चुराने वाला होता है ।

पंचम भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो जातक अनेक प्रकार की भाषाओ का ज्ञाता, विद्वान्, संतान कष्ट वाला, उपदंश रोगी और व्यभिचारी होता है ।

षष्ट भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो शत्रुनाशक,मातुल कष्टकारक,रुधिर विकारी,कीर्तिवान होता है ।

सप्तम भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो परस्त्रीरत, कामी, पहली स्त्री का 21 या 28 उम्रवर्ष मे वियोग, शराबी होता है ।  ये ही परिणाम चौथी या आठवी दृष्टि के भी होते है ।

आठवे भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो धन-कुटुंब नाशक, ऋणग्रस्त, परिश्रमी, दुःखी, भाग्यहीन होता है ।

नवे भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो जातक बुद्धिमान, धनवान, पराक्रमी, धर्म मे अरूचिवान होता है ।

दसवे भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो राजसेवी, मातृ-पितृ कष्टकारक, सुखी, भाग्यवान होता है ।

ग्यारहवे भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो धनवान, संतान कष्ट से दुःखी, कुटुंब से दुःखी होता है ।

बारहवे भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो कुमार्गी, मातुल नाशक, वासीर व भगन्दर रोगी, शत्रु नाशक और उग्र स्वभाव वाला होता हैं |