प्रत्येक बाधक राशि का दूसरा भाव अथवा दूसरी राशि,चौथे या दसवें भाव में पड़ता है |
मेष लग्न में कुंभ राशि बाधक होती है जो ग्यारहवें भाव में पडती है जिसका दूसरा भाव मकर राशि (दसवे भाव) में पड़ता है |
वृषभ लग्न में
भारत की मुख्य राशि मकर राशि नवे घर में पढ़ती है तथा इसकी दूसरी राशि कुंभ दसवें
भाव में पढ़ती है |
मिथुन लग्न में
धनु राशि सातवें भाव में बाधक बनती है इसकी दूसरी राशि दसवें भाव में मीन राशि पर
पड़ती है |
कर्क राशि लग्न
में वृषभ राशि 11 भाव में पढ़ती है उसकी अगली राशि चतुर्थ भाव में पडती है
सिंह लग्न में
नवा भाव अर्थात मेष राशि बाधक बनती है इसकी अगली राशि चौथे भाव में पडती है |
इसी प्रकार हम
सब राशि के दूसरी राशि को भी देख सकते हैं जो कि हमेशा 10वीं और चौथे भाव अथवा
राशि में ही पड़ेगी |
लग्न के आधार पर बाधक स्थान इस प्रकार निर्धारित होता है:
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