मंगलवार, 29 जुलाई 2025

ज्योतिष अनुसार गुस्सा किनको आता है


गुस्सा अथवा क्रोध हर किसी व्यक्ति मे होता है,ज्योतिष अनुसार दुनिया मे ऐसा कोई लग्न अथवा राशि नही है जिसमे क्रोध ना हो या ऐसा कोई व्यक्ति नही जो क्रोधित ना होता हो |

ज्योतिष अनुसार देखे तो लग्न,लग्नेश या चन्द्र से मंगल का सम्बंध हो जाये तो जात्तक बेहद क्रोधित स्वभाव का  होगा जो अपने इस क्रोध के कारण किसी की जान भी ले सकता है |

आईए लग्न/राशि अनुसार क्रोध की प्रवृति को जानने की कोशिश करते हैं |

1) मेष राशि राशि चक्र की सबसे पहली राशि है ये राशि जल्दबाज स्वभाव,गुस्से वाली तथा भयंकर क्रोध वाली राशि होती हैं क्योंकि यह अग्नि तत्व के मंगल ग्रह की राशि है,अगर इस मंगल का संबंध लग्न लग्नेश और चन्द्र से हो जाए तो इस राशि वाले अपने क्रोध के आवेश मे किसी की जान भी ले सकते हैं |

2) वृषभ राशि पृथ्वी तत्व की राशि हैं और इस राशि वाले जातक समान्यत: शांत प्रवृति के होते है परंतु जब इनको छेडा जाता हैं तो ये बेहद आक्रामक हो जाते हैं क्योंकि वृषभ राशि का चिन्ह बैल है अगर यह एक बार गुस्से में आ जाये तो ये कुछ भी कर जाते हैं |

3) मिथुन वालो का गुस्सा बच्चों जैसा है जितनी जल्दी आता उतनी जल्दी खत्म भी हों जाता है,गुस्से के बाद यह बस कल्पना करता है मुझे यह कहना था यह बोलना था, मौका मिलने पर बोलेगा भी मगर जल्दी मरने मारने पर उतारू नही होगा अगर इसमे मंगल का संबंध लग्न,लग्नेश,और चन्द्र से हो जाए तो परिणाम कुछ अलग हो सकता हैं ।

4) कर्क लग्न बहुत भावुक लग्न माना जाता हैं जो बहुत कुछ अंदर दबाके रखता हैं अपना गुस्सा पी जाता है  अंदर से घुटता है क्रोध इनको अंदर से मारता हैं अगर इस लग्न का मंगल से संबंध हो जाए तो क्रोध में हानी पहुंचा सकते हैं |

5) सिंह लग्न जब भी क्रोध करता है तो उसका कोई तर्क होता है, यह मूलभूत स्वभाव से क्रोधित है इनको जब क्रोध आता बहुत जबरदस्त आता है,यह दिल के अच्छे,स्वतंत्र व अनुशाशित होते है अगर इनको दबाया जाए तो इनका  गुस्सा बवाल मचाता है,अगर इसमे मंगल का संबंध हो जाए तो क्रोध में किसी की भी जान भी ले सकते हैं

6) कन्या लग्न बुध का लग्न होने से मिथुन जैसा ही है,यह गुस्सा शीघ्र नही दिखाता है यह व्यंग्यात्मक तरीके से गुस्सा दिखायेगा,यह सीधा क्रोध न दिखाकर बातो से क्रोध दिखाते हैं अगर लग्न लग्नेश अथवा चन्द्र से मंगल का संबंध हुआ परिणाम अलग होगा

7) तुला लग्न इनमे भी गुस्सा होता है मगर वक़्त आने पर ही ये दिखाते हैं हो सकता आज जो अपमान हुआ उसका जवाब वो आज न दे पाया हो मगर समय आने पे वो अपना क्रोध और बदला जरूर लेगा, उसका चिन्ह तराजू है जो एक पुरूष ने पकड़ा है वक़्त आने पर हिसाब बराबर जरूर करेगा है अगर लग्न,लग्नेश या चन्द्र से मंगल हो तो रिजल्ट बदेलगा ।

8) वृश्चिक लग्न इस लग्न को गुस्से का लग्न कहना बिलकुल सही साबित होता हैं क्यूंकी ये बिच्छू की तरह डंक मारते है,यह भी वैसे गुस्सा पीते ही है ये गुस्सा अपने शब्दों से ही निकालते हैं,मान लो लड़ाई जहा हुई है और गुस्से में कही और जाकर बोलेंगे, अगर मंगल का संबंध इनके लग्न,लग्नेश या चन्द्र से हो जाए तो क्रोध में जान भी लेते हैं |

9) धनु लग्न वाले पूरी तरह जाग्रित होते हैं उनका गुस्सा वाणी, मे वक़्त आने पर सोच समझ कर ही निकलता हैं इनका गुस्सा केवल दिखाने के लिए ही नही होता बल्कि नुकसान वाला भी होता हैं,अगर इसमे मंगल का संबंध हो जाए तो बात कुछ अलग ही हो जाती है ।

1) मकर लग्न यह लोग अपने गुस्से का पता ही नही चलने देते है गुस्सा पीते भी है निकालते भी है,बदला भी लेते है यह आकस्मिकता लिए होते है मगरमच्छ की तरह अचानक हमला कर देते हैं इनके शत्रु सोचते रह जाते है की यह इसने किया क्या यह गुस्से की अवस्था मे केवल हमला ही नही बल्कि सामने वाले का नुकसान भी बहुत करते है ।

11) कुंभ वायू तत्व की राशि का है सामान्य तौर पर धीर गम्भीर स्वभाव वाला होने के बाद भी मौका आने पर ह गुस्सा दिखाते है,अगर लग्नेश, लग्न या चन्द्र से मंगल का संबंध होतो अलग बात है ।

12) मीन लग्न सबसे अंत का लग्न होता हैं यह सबसे समझदार लग्न माना जाता हैं,यह क्रोध पीते है पूरी रात बेचैन रहेंगे,मुझे यह बोलना चाहिए था, क्यों नही बोला बोल भी सकता है मगर लडता नही है कड़वा बोलेगा मगर लड़ेगा नही अगर मंगल का संबंध बना तो क्रोध उग्रता वाला होगा ।ज्योतिष अनुसार गुस्सा किनको आता है

गुस्सा अथवा क्रोध हर किसी व्यक्ति मे होता है,ज्योतिष अनुसार दुनिया मे ऐसा कोई लग्न अथवा राशि नही है जिसमे क्रोध ना हो या ऐसा कोई व्यक्ति नही जो क्रोधित ना होता हो |

ज्योतिष अनुसार देखे तो लग्न,लग्नेश या चन्द्र से मंगल का सम्बंध हो जाये तो जात्तक बेहद क्रोधित स्वभाव का  होगा जो अपने इस क्रोध के कारण किसी की जान भी ले सकता है |

आईए लग्न/राशि अनुसार क्रोध की प्रवृति को जानने की कोशिश करते हैं |

1) मेष राशि राशि चक्र की सबसे पहली राशि है ये राशि जल्दबाज स्वभाव,गुस्से वाली तथा भयंकर क्रोध वाली राशि होती हैं क्योंकि यह अग्नि तत्व के मंगल ग्रह की राशि है,अगर इस मंगल का संबंध लग्न लग्नेश और चन्द्र से हो जाए तो इस राशि वाले अपने क्रोध के आवेश मे किसी की जान भी ले सकते हैं |

2) वृषभ राशि पृथ्वी तत्व की राशि हैं और इस राशि वाले जातक समान्यत: शांत प्रवृति के होते है परंतु जब इनको छेडा जाता हैं तो ये बेहद आक्रामक हो जाते हैं क्योंकि वृषभ राशि का चिन्ह बैल है अगर यह एक बार गुस्से में आ जाये तो ये कुछ भी कर जाते हैं |

3) मिथुन वालो का गुस्सा बच्चों जैसा है जितनी जल्दी आता उतनी जल्दी खत्म भी हों जाता है,गुस्से के बाद यह बस कल्पना करता है मुझे यह कहना था यह बोलना था, मौका मिलने पर बोलेगा भी मगर जल्दी मरने मारने पर उतारू नही होगा अगर इसमे मंगल का संबंध लग्न,लग्नेश,और चन्द्र से हो जाए तो परिणाम कुछ अलग हो सकता हैं ।

4) कर्क लग्न बहुत भावुक लग्न माना जाता हैं जो बहुत कुछ अंदर दबाके रखता हैं अपना गुस्सा पी जाता है  अंदर से घुटता है क्रोध इनको अंदर से मारता हैं अगर इस लग्न का मंगल से संबंध हो जाए तो क्रोध में हानी पहुंचा सकते हैं |

5) सिंह लग्न जब भी क्रोध करता है तो उसका कोई तर्क होता है, यह मूलभूत स्वभाव से क्रोधित है इनको जब क्रोध आता बहुत जबरदस्त आता है,यह दिल के अच्छे,स्वतंत्र व अनुशाशित होते है अगर इनको दबाया जाए तो इनका  गुस्सा बवाल मचाता है,अगर इसमे मंगल का संबंध हो जाए तो क्रोध में किसी की भी जान भी ले सकते हैं

6) कन्या लग्न बुध का लग्न होने से मिथुन जैसा ही है,यह गुस्सा शीघ्र नही दिखाता है यह व्यंग्यात्मक तरीके से गुस्सा दिखायेगा,यह सीधा क्रोध न दिखाकर बातो से क्रोध दिखाते हैं अगर लग्न लग्नेश अथवा चन्द्र से मंगल का संबंध हुआ परिणाम अलग होगा

7) तुला लग्न इनमे भी गुस्सा होता है मगर वक़्त आने पर ही ये दिखाते हैं हो सकता आज जो अपमान हुआ उसका जवाब वो आज न दे पाया हो मगर समय आने पे वो अपना क्रोध और बदला जरूर लेगा, उसका चिन्ह तराजू है जो एक पुरूष ने पकड़ा है वक़्त आने पर हिसाब बराबर जरूर करेगा है अगर लग्न,लग्नेश या चन्द्र से मंगल हो तो रिजल्ट बदेलगा ।

8) वृश्चिक लग्न इस लग्न को गुस्से का लग्न कहना बिलकुल सही साबित होता हैं क्यूंकी ये बिच्छू की तरह डंक मारते है,यह भी वैसे गुस्सा पीते ही है ये गुस्सा अपने शब्दों से ही निकालते हैं,मान लो लड़ाई जहा हुई है और गुस्से में कही और जाकर बोलेंगे, अगर मंगल का संबंध इनके लग्न,लग्नेश या चन्द्र से हो जाए तो क्रोध में जान भी लेते हैं |

9) धनु लग्न वाले पूरी तरह जाग्रित होते हैं उनका गुस्सा वाणी, मे वक़्त आने पर सोच समझ कर ही निकलता हैं इनका गुस्सा केवल दिखाने के लिए ही नही होता बल्कि नुकसान वाला भी होता हैं,अगर इसमे मंगल का संबंध हो जाए तो बात कुछ अलग ही हो जाती है ।

1) मकर लग्न यह लोग अपने गुस्से का पता ही नही चलने देते है गुस्सा पीते भी है निकालते भी है,बदला भी लेते है यह आकस्मिकता लिए होते है मगरमच्छ की तरह अचानक हमला कर देते हैं इनके शत्रु सोचते रह जाते है की यह इसने किया क्या यह गुस्से की अवस्था मे केवल हमला ही नही बल्कि सामने वाले का नुकसान भी बहुत करते है ।

11) कुंभ वायू तत्व की राशि का है सामान्य तौर पर धीर गम्भीर स्वभाव वाला होने के बाद भी मौका आने पर ह गुस्सा दिखाते है,अगर लग्नेश, लग्न या चन्द्र से मंगल का संबंध होतो अलग बात है ।

12) मीन लग्न सबसे अंत का लग्न होता हैं यह सबसे समझदार लग्न माना जाता हैं,यह क्रोध पीते है पूरी रात बेचैन रहेंगे,मुझे यह बोलना चाहिए था, क्यों नही बोला बोल भी सकता है मगर लडता नही है कड़वा बोलेगा मगर लड़ेगा नही अगर मंगल का संबंध बना तो क्रोध उग्रता वाला होगा ।

रविवार, 20 जुलाई 2025

ज्योतिष के पहलू



ज्योतिष के कई पहलू हैं जिन पर अक्सर उन लोगों द्वारा विचार नहीं किया जाता जो वास्तव में इस विषय का अध्ययन नहीं करते हैं,ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि ज्योतिष में सूर्य राशियाँ शामिल हैं हालाँकि, ज्योतिष के कई अन्य पहलू भी हैं जिन पर इसके सही मायने में सटीक और उपयोगी होने के लिए विचार किया जाना चाहिए ।

ग्रह

ज्योतिष में दस ग्रहों का अध्ययन किया जाता है । सूर्य और चंद्रमा को जोड़कर दस की संख्या प्राप्त की जाती है । पृथ्वी की गिनती नहीं की जाती है, क्योंकि हमारा दृष्टिकोण पृथ्वी से है ।

प्रत्येक ग्रह सूर्य राशि और ज्योतिषीय चार्ट में जिस भाव में वह स्थित होता है,दोनों को प्रभावित करने के अतिरिक्त जिस भाव पर वह शासन करता है, उस पर अपने प्रभाव का प्रतिनिधित्व करता है । उदाहरण के लिए, शनि मनुष्य की सीमाओं का प्रतिनिधित्व करता है । बृहस्पति नेतृत्व और समृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है । अन्य ग्रहों के अपने अपने प्रतिनिधित्व और प्रभाव होते हैं ।

ज्योतिष में ग्रहों की चाल और संरेखण भी बहुत महत्वपूर्ण हैं । विभिन्न ग्रहों की चाल और चाल हमारे जीवन के सभी पहलुओं पर अत्यधिक प्रभाव का संकेत दे सकती है । उदाहरण के लिए, जब मंगल वक्री होता है, तो हमारे जीवन में संघर्ष अधिक प्रबल होंगे ।

भाव

राशि चक्र या ज्योतिषीय चार्ट में बारह भाव होते हैं । प्रत्येक भाव हमारे जीवन के किसी पहलू जैसे रोमांस, करियर या परिवार का प्रतिनिधित्व करता है । ज्योतिष की व्याख्या में भाव बहुत महत्वपूर्ण होते हैं । जिस भाव में कोई ग्रह रहता है, वह दर्शाता है कि हमारे जीवन के उस पहलू पर क्या प्रभाव पड़ेगा ।

चूँकि बारह भाव होते हैं, लेकिन केवल दस ग्रह होते हैं, इसलिए प्रत्येक ज्योतिषीय चार्ट में दो खाली भाव होंगे । ये खाली भाव जीवन के उन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो इस जीवन में महत्वहीन हैं । ऐसा माना जाता है कि या तो आप अपने जीवन के उस पहलू में किसी दूसरे जीवन में सफल रहे हैं, या जीवन के अन्य पहलुओं पर खाली भावों द्वारा दर्शाए गए पहलुओं की तुलना में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है ।

राशि चक्र के सूर्य चिह्न ज्योतिष का सबसे आम पहलू होता हैं । मोटे तौर पर, वर्ष के महीनों के आधार पर बारह सूर्य राशि चिह्न होते हैं । प्रत्येक सूर्य चिह्न लगभग 30 दिनों तक शासन करता है ।

राशि चक्र के बारह चिह्न अधिकांश लोगों को अच्छी तरह से ज्ञात हैं । इनमें मकर, धनु, कुंभ, वृश्चिक, मिथुन, तुला, सिंह और मेष शामिल हैं । सूर्य राशियों का उपयोग अक्सर सामान्य कुंडली बनाने के लिए किया जाता है ।

चंद्र राशियाँ

चंद्रमा में भी बारह राशियाँ हैं जिनका उपयोग ज्योतिष की व्याख्या में किया जाता है, साथ ही चंद्रमा के चरण भी हैं जो आम तौर पर जाने जाते हैं । चंद्रमा की बारह राशियों का नाम सूर्य की बारह राशियों के नाम पर रखा गया है हालाँकि, ये राशियाँ अक्सर नहीं मिलती हैं ।

चंद्रमा की बारह राशियाँ सालाना के बजाय मासिक रूप से घूमती हैं इसलिए, राशि चक्र का प्रत्येक चिन्ह हर महीने एक बार चंद्रमा की अपनी राशि में होता है यह एक से तीन दिनों के लिए हो सकता है । यह तब होता है जब सूर्य राशि और चंद्र राशि एक ही होती है, तब व्यक्ति की मानसिक स्पष्टता अपने चरम पर होती है ।

जब चंद्रमा की राशि व्यक्ति की सूर्य राशि के विपरीत होती है, तो संघर्ष शुरू हो जाएगा । चंद्रमा के कुछ चरण व्यक्ति की सूर्य राशि की परवाह किए बिना निर्णय लेने के लिए हानिकारक होते हैं । किसी भी मामले में, चंद्रमा की ऊर्जा और भावनाएँ ज्योतिष के बाकी पहलुओं की समग्र रीडिंग को प्रभावित करती हैं ।

 

शुक्रवार, 18 जुलाई 2025

गुण मिलान अथवा मैच मेकिंग


भारतीय परिपेक्ष मे देखे तो अधिकतर लोगों द्वारा अपनी कुंडली दिखाने का एक मुख्य आकर्षण मैचमेकिंग अथवा गुण मिलान होता है और ऐसा होना सही भी हैं क्यूंकी अगर किसी व्यक्ति की राशि से उसका व्यक्तित्व स्पष्ट रूप से पता चलता है, तो यह बताना बहुत आसान हो जाता हैं कि वह व्यक्ति हमारे लिए सही है या नहीं ।

यहाँ ध्यान दे की यह बताना किसी के लिए भी इतना आसान नहीं होता है । किसी व्यक्ति की कुंडली में अन्य कारक उन बुनियादी नियमों को प्रभावित कर सकते हैं, या उन्हें पूरी तरह से उलट भी सकते हैं सिर्फ़ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी राशि में आता है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह उस राशि के सामान्य चित्रण के लिए एकदम सही रहेगा । फिर भी, जन्म कुंडली के ज़रिए आपसी संबंधो की जाँच करना मज़ेदार और दिलचस्प विषय तो हैं ।

एक सामान्य नियम के रूप में देखे तो किसी का भी "परफ़ेक्ट मैच" आपकी राशि के विपरीत दिशा में होने की प्रबल संभावना है यानी, मेष राशि तुला के साथ,वृषभ राशि वृश्चिक के साथ,मिथुन राशि धनु के साथ, कर्क राशि मकर के साथ, सिंह राशि कुंभ के साथ, कन्या राशि मीन के साथ, धनु राशि मिथुन के साथ आदि । राशि चक्र में एक दूसरे का विरोध करने वाली ये राशियाँ एक दूसरे की ताकत का समर्थन करते हुए और एक दूसरे की कमज़ोरियों का मुकाबला करते हुए उन्हे संतुलित बनाती हैं |

उदाहरण के लिए, कर्क राशि वालों में बहुत मजबूत "पारिवारिक प्रवृत्ति" होती है इस राशि वाले लोग एक मजबूत और सुरक्षित घरेलू जीवन चाहते हैं,इनकी ऐसी मानसिकता इनसे कई अन्य राशियों वालो को दूर भगा सकती है, जैसे कि मेष राशि या यात्रा चाहने वाली धनु राशि वालो से हालाँकि, मकर राशि वालों का घर के प्रति ऐसा ही रवैया होता है और आमतौर पर, दोनों एक-दूसरे के साथ बहुत अच्छे से रहते हैं बशर्ते, कर्क राशि वाले मकर राशि वालों की उदासी और अवसाद की प्रवृत्ति से निपटना सीख लें ।

जो राशियाँ निश्चित रूप से एक दूसरे के साथ नहीं रहती हैं और जिनमें एक मुख्य अंतर होता है । धनु राशि वाले यात्रा करने के लिए जाने जाते हैं, और घर पर ध्यान केंद्रित करने वाले कर्क राशि वालों को ऐसे लोग परेशान व विचलित कर सकते हैं । इसी प्रकार विस्तार उन्मुख और आलोचनात्मक कन्या राशि वाले आत्मकेंद्रित होते हैं और मेष राशि वालों अपनी दबंगता के लिए जाने जाते हैं,ऐसा ही उज्ज्वल और हंसमुख तुला राशि वाले कभी भी छायादार, रहस्यमय वृश्चिक राशि वालों द्वारा अँधेरे में जीवन को संभालने में सक्षम नहीं होंगे ।