मधुमेह (Diabetes) और उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) को 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि ये वर्षों तक शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाते हैं। गुर्दे इनके प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं।
गुर्दे कैसे काम करते हैं:
गुर्दे में लाखों छोटी फिल्टरिंग इकाइयाँ होती हैं जिन्हें नेफ्रॉन कहा जाता है। मधुमेह में, उच्च रक्त शर्करा (Blood Sugar) इन नाजुक फिल्टरों को नुकसान पहुँचाती है, जिससे गुर्दों की विषाक्त पदार्थों को निकालने की क्षमता कम हो जाती है। इसे डायबिटिक किडनी डिजीज कहते हैं।
उच्च रक्तचाप का प्रभाव:
यह गुर्दे की रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है, जिससे वे संकरी या सख्त हो जाती हैं। इससे गुर्दे की कार्यक्षमता कम हो जाती है।
लक्षण और पहचान:
शुरुआती चरणों में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते। जब तक पैर में सूजन, थकान या पेशाब में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक गुर्दे गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके होते हैं।
बचाव के उपाय:
नमक और परिष्कृत चीनी (Refined Sugar) का कम सेवन।
नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ वजन बनाए रखना।
तंबाकू का त्याग और निर्धारित दवाओं का नियमित सेवन।
पेशाब की जांच (प्रोटीन/माइक्रोएल्ब्यूमिन के लिए) और रक्त परीक्षण (क्रिएटिनिन और eGFR) के माध्यम से शुरुआती पहचान।
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