शनिवार, 18 अप्रैल 2026

मन को शांत करने के लिए सांस लेने की ये 5 तकनीकें आजमाएं

लंबे समय तक तनाव शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ाता है, जिससे उच्च रक्तचाप, टाइप-2 मधुमेह और अनिद्रा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सचेत होकर सांस लेने (Conscious Breathing) से शरीर "सिम्पैथेटिक ओवरड्राइव" (तनाव की स्थिति) से निकलकर "पैरासिम्पैथेटिक काम" (शांति की स्थिति) में जाता है।

सांस लेने की 5 तकनीकें:

डायाफ्रामिक (पेट से) सांस लेना: नाक से सांस लें ताकि पेट फूले। यह हृदय गति और रक्तचाप को कम करता है। इसे 'बेली ब्रीदिंग' भी कहते हैं।

बॉक्स ब्रीदिंग (Box Breathing): इसमें 4 सेकंड तक सांस अंदर लें, 4 सेकंड तक रोकें, 4 सेकंड में बाहर छोड़ें और फिर 4 सेकंड तक रुकें। यह नर्वस सिस्टम को शांत करता है।

वैकल्पिक नथुने से सांस लेना (अनुलोम-विलोम): एक नथुने से सांस लें और दूसरे से छोड़ें। यह मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में तालमेल बिठाता है।

‎4-7-8 तकनीक: 4 सेकंड सांस लें, 7 सेकंड रोकें और 8 सेकंड में छोड़ें। यह वेगस नर्व (Vagus Nerve) को सक्रिय कर गहरी राहत देता है।

गुंजन (भ्रामरी) ब्रीदिंग: सामान्य रूप से सांस लें और धीरे-धीरे 'हूँ' (Hum) की आवाज के साथ सांस छोड़ें। यह साइनस और गहरी शांति के लिए बेहतरीन है।

अभ्यास का समय:

सुबह सोकर उठने पर (5 मिनट)

रात को सोने से पहले (5 मिनट)

तनावपूर्ण क्षणों के दौरान (2-3 मिनट)

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