लंबे समय तक तनाव शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ाता है, जिससे उच्च रक्तचाप, टाइप-2 मधुमेह और अनिद्रा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सचेत होकर सांस लेने (Conscious Breathing) से शरीर "सिम्पैथेटिक ओवरड्राइव" (तनाव की स्थिति) से निकलकर "पैरासिम्पैथेटिक काम" (शांति की स्थिति) में आ जाता है।
सांस लेने की 5 तकनीकें:
डायाफ्रामिक (पेट से) सांस लेना: नाक से सांस लें ताकि पेट फूले। यह हृदय गति और रक्तचाप को कम करता है। इसे 'बेली ब्रीदिंग' भी कहते हैं।
बॉक्स ब्रीदिंग (Box Breathing): इसमें 4 सेकंड तक सांस अंदर लें, 4 सेकंड तक रोकें, 4 सेकंड में बाहर छोड़ें और फिर 4 सेकंड तक रुकें। यह नर्वस सिस्टम को शांत करता है।
वैकल्पिक नथुने से सांस लेना (अनुलोम-विलोम): एक नथुने से सांस लें और दूसरे से छोड़ें। यह मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में तालमेल बिठाता है।
4-7-8 तकनीक: 4 सेकंड सांस लें, 7 सेकंड रोकें और 8 सेकंड में छोड़ें। यह वेगस नर्व (Vagus Nerve) को सक्रिय कर गहरी राहत देता है।
गुंजन (भ्रामरी) ब्रीदिंग: सामान्य रूप से सांस लें और धीरे-धीरे 'हूँ' (Hum) की आवाज के साथ सांस छोड़ें। यह साइनस और गहरी शांति के लिए बेहतरीन है।
अभ्यास का समय:
सुबह सोकर उठने पर (5 मिनट)।
रात को सोने से पहले (5 मिनट)।
तनावपूर्ण क्षणों के दौरान (2-3 मिनट)।
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