शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

कुंडली में आजीविका का निर्धारण

 

आजीविका का निर्धारण हमारे समाज एवं ज्योतिष जगत के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है । वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हमारी युवा पीढ़ी और उनके अभिभावक भी इसी चिंता में दर-दर भटक रहे हैं कि उनके होनहार बेटे या बेटी को आजीविका का कोई साधन मिल जाए

आइए ज्योतिषीय दृष्टि से इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए कुंडली में आजीविका का निर्धारण कैसे करते हैं, इसके सूत्रों को देखते हैं

सर्वप्रथम किसी जातक की जन्म कुंडली में आजीविका के निर्धारण पर विचार करते समय हमें अपने वैदिक शास्त्रों में वर्णित नियमों के अनुसार लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली तथा सूर्य कुंडली का विस्तृत अध्ययन करना होगा । तत्पश्चात् इन तीनों कुंडलियों में अंशात्मक दृष्टि से कौन सी कुंडली अधिक बलवान है, उसे सर्वश्रेष्ठ मानकर उसके आधार पर ही हम आजीविका का निर्धारण कर सकते हैं

अब दूसरा चरण आता है, जिसमें हम सर्वश्रेष्ठ कुंडली के दशम भाव पर विचार करते हैं तथा दशम भाव में जो ग्रह स्थित होता है, उसी के अनुसार हम जातक की आजीविका निर्धारित करते हैं एवं जातक को उस ग्रह सम्बंधी कारक कार्यों में ही धनोपार्जन होता है ।  

अब तीसरे चरण की ओर बढ़ते हैं । यहाँ पर एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण प्रश्न उभर कर सामने आता है कि यदि दशम भाव में कोई भी ग्रह स्थित न हो, तो ऐसी स्थिति में क्या करना होगा ?

इस बारे में वृहत पाराशर होरा शास्त्र, आचार्य वाराहमिहिर द्वारा विरचित बृहज्जातकम, श्री कल्याण वर्मा द्वारा रचित सारावली श्री मंत्रेश्वर द्वारा रचित फलदीपिका जैसे प्रामाणिक ग्रंथों का एक ही मत है कि यदि सर्वश्रेष्ठ चुनी गई कुंडली के दशम भाव में कोई भी ग्रह स्थित न हो तो उस स्थिति में दशम भाव में विद्यमान राशि का विचार करते हैं और फिर उस राशि के स्वामी का विचार करते हैं |

अब यहां से इसका चतुर्थ चरण प्रारंभ होता है । यहां से हमें जातक की नवांश कुंडली का आकलन करना होगा । नवांश कुंडली का आकलन करते हुए हमें पुनः सर्वश्रेष्ठ कुंडली के दशम भाव में स्थित राशि का स्वामी नवमांश कुंडली में किस राशि में स्थित है तथा उस राशि का स्वामी कौन है, इस पर विचार करना होगा । यदि कुंडली के दशम भाव में कन्या राशि है और उसमें कोई ग्रह विद्यमान नहीं है, तो हम उस राशि के स्वामी बुध पर विचार करेंगे और देखेंगे कि नवमांश कुंडली में बुध किस राशि में स्थित है?  मान लीजिए बुध नवमांश कुंडली में तुला राशि में स्थित है, तो तुला राशि का स्वामी शुक्र हैं । इस प्रकार आजीविका का कारक ग्रह शुक्र हुआ । अतः इस प्रकार हम जातक अथवा जातिका की आजीविका का निर्धारण शुक्र से सम्बंधित कार्यों को आजीविका के लिए चुन सकते हैं |

अब हमें यदि महर्षि पाराशर द्वारा प्रतिपादित नियमों के अंतर्गत कारक ग्रहों के आधार पर आजीविका का निर्धारण करना हो तो कैसे करेंगे, इस पर भी विचार कर लेते हैं । पाराशर जी कहते हैं कि दशमेश जिस राशि के नवांश में हो, उस नवांशेश में भी मनुष्य की आजीविका का विचार किया जाना चाहिए |

1. यदि सूर्य दशमेश का नवांशेश हो, तो दवाई की बिक्री एवं निर्माण, स्वर्ण बिक्री, पेय पदार्थों की बिक्री, सरकारी नौकरी तथा उच्च पद की प्राप्ति, सम्पर्क अधिकारी, ऊन का उत्पादन, धन विनियोग आदि कार्य लाभकारी होते हैं । अतः इन कार्यों पर भी आजीविका के संदर्भ में विचार किया जा सकता है ।

2. चन्द्रमा के बारे में पाराशर जी का मत है कि यदि दशमेश का नवांशेश चन्द्रमा हो तो पानी से उत्पन्न पदार्थ जैसे शंख, मोती, मंगा व मछली आदि का व्यापार, कृषि कार्य, प्लास्टर आफ पेरिस,क्रॉकरी, मनोविनोद के कार्य, निजी सचिव, जन सम्पर्क अधिकारी आदि कार्य पर विचार किया जा सकता है |

3. मंगल यदि दशमेश मंगल के नवांशेश में हो, तो पाराशर जी का कहना है कि ऐसे जातक के लिए धातु व्यवसाय अर्थात् ताँबा सोना आदि का कार्य, मुकदमों में गवाही देने का कार्य, वकालत, दंडाधिकारी, पुलिस, मजिस्ट्रेट, युद्ध में सैनिक का कार्य, अग्नि कर्म से संबंधित व्यवसाय, अति साहसिक कार्य आदि विचारणीय हैं ।

4. बुध के बारे में पाराशर जी का कहना है कि यदि दशमेश बुध के नवांशेश में हो, तो जातक वेद शास्त्रों में, वेद का अध्यापन कार्य, जप तप का कार्य, पुरोहित का कार्य, काव्य रचना, लेखन एवं प्रकाशन कार्य, ज्योति शास्त्र, वैद्य चिकित्सा तथा पूंजी निवेश आदि का कार्य करने में निपुण होता है ।

5. बृहस्पति देव के बारे में पाराशर जी का कहना है कि यदि बृहस्पति उक्त नवांशेश में हो, तो देवता, ब्राह्मणों की उपासना, अध्यापन, शास्त्र विशेषज्ञता, पुराण शास्त्र, नीति आदि का अध्ययन, धार्मिक कार्य, ग्रह निर्माण, फर्नीचर सजावट आदि के कार्य तथा अन्य मांगलिक कार्यों आदि से जातक अपनी आजीविका चलाता है ।

6. दानव गुरु शुक्राचार्य के बारे में पाराशर जी एवं मंत्रेश्वर जी का कहना है कि यदि नवांशेश शुक्र हो तो स्त्री के आश्रय द्वारा अर्थात् उन्हें बहला - फुसला कर दुरुपयोग करना, सोना - चाँदी, माणिक और हीरों का व्यवसाय वा इनके तकनीकी ज्ञान से जीविका, हाथी घोड़ों द्वारा, गाने-बजाने के उपायों द्वारा तथा सुगंधित वस्तुओं के द्वारा भी जातक धन अर्जित करता है ।

7. शनि के बारे में वृहत पाराशर होरा शास्त्र तथा मंत्रेश्वर जी द्वारा रचित फलदीपिका में भी यही स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि नवांशेश शनि हो तो जातक निम्न स्तरीय कार्य, शिल्प कला, दस्तकारी, मरम्मत टूट-फूट के कार्य, शारीरिक परिश्रम, दुष्टों के धन से धनी, रिश्वत लेकर कार्य करना, अनपढ़ होगा, जमीन खोदेगा, यदि पढ़ा-लिखा होगा, तो दिन भर कुर्सी पर परिश्रम कराएगा ।

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