रविवार, 9 मई 2021

शनि का प्रभाव और शांति


शनि का प्रभाव और शांति

"शनिश्चर" अर्थात शनै: शनै: गति करने वाला,ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है जो एक राशि पर 30 माह तक रहता है तथा संपूर्ण 12 राशियों में घूमने पर इसे लगभग 30 वर्ष लगते हैं, यह ग्रह जितना विवादित माना जाता हैं शायद ही कोई अन्य इतना विवादित माना जाता हो कारण इस शनि ग्रह का न्याय प्रिय,कठोर और निष्ठुर होना है |

शनि का नाम सुनते ही लोग भयभीत हो जाते हैं जबकि शनि ग्रह के प्रभाव में दुनिया की चौथाई जनसंख्या हमेशा रहती है क्योंकि व्यक्ति विशेष पर जब शनि दशा/साढ़ेसाती का प्रभाव पड़ता है तब शनि ग्रह एक स्थान आगे पीछे की राशियों को भी प्रभावित करते हैं तथा दृस्टी द्वारा अपने भाव से चौथे सातवें और दसवे भाव को भी प्रभावित करते हैं जिनसे व्यक्ति विशेष के जीवन के कई हिस्सों में एक साथ परिवर्तन अथवा हलचल होती है और व्यक्ति स्वयं को परेशानियों में घिरा हुआ महसूस करता है |

आइए देखते हैं शनि किस प्रकार हमें प्रभावित करते हैं |

किसी भी व्यक्ति की चंद्र राशि से गोचर में परिभ्रमण करते समय जब शनि 12वे घर (चंद्रमा से) आता है तब उस व्यक्ति को साढ़ेसाती आरंभ हो जाती है | 30 माह अर्थात 2 वर्ष 6 माह तक शनि उसी भाव (चंद्रमा से बारहवे)  रहता है जिसे जातक के मन स्वामी (चंद्रमा) पर शनि का प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है (शरीर में ऑक्सीजन की कमी होना,चिडचिडापन होना,फैसले गलत होना आदि प्रभाव) दूसरे 30 माह में शनि चंद्र राशि पर ही प्रवेश करता है जिससे दूसरे 2 वर्ष 6 माह की साढ़ेसाती आरंभ होती है जो कि वियोग का निर्माण कर देता है इस अवस्था में व्यक्ति की (माता को कष्ट,स्वयं उदर रोग,कामो का बिगड़ना,स्थान का बदलाव होना जैसे प्रभाव मिलते हैं) इसके बाद तीसरे 30 माह (अंतिम ढाई वर्ष) में शनि चंद्र राशि से अगली राशि पर चला जाता है जिसे साढ़ेसाती की उतरन अर्थात पैरों पर शनि का आना कहते हैं जिसमें व्यक्ति हर काम में शीघ्रता करने लगता है,व्यर्थ भाग दौड़  करता है,संपत्ति आदि का बंटवारा करता है) इस प्रकार इन तीन ढाई वर्ष के चरणों को साढ़ेसाती (3*2.5=7.5) नाम दिया जाता है |

यह तो हुई सिर्फ उन भाव की जानकारी जिन पर शनि की चंद्रमा से संबंध या युति बनी इनके अलावा प्रत्येक भाव में बैठकर शनि दृष्टि द्वारा भी अन्य भावो (स्वयं से चौथे कंटक शनि,7वे तथा 10वे) को भी प्रभावित करता है जो कि ज्यादा भयानक माना गया है कारण शनि जहां बैठते है उस भाव की वृद्धि करते हैं तथा जिस भाव को देखते हैं उसकी हानी करते हैं |

वर्तमान में शनि ग्रह मकर राशि में भ्रमण कर रहे हैं जिससे कुंभ राशि को पहली ढैया मकर राशि को दूसरी था धनु राशि को तीसरी ढैया चल रही है जिसे हम आम शब्दों में कुंभ राशि की साढ़ेसाती का आरंभ था धनु राशि की साढ़ेसाती की उत्तरण कह सकते हैं | वर्तमान में शनि इन इन राशियों पर अपना प्रभाव डाल रहे हैं यहां ध्यान रखना जरूरी है कि जन्मपत्री में शनि की क्या स्थिति है और वह किस राशि में है तथा व्यक्ति विशेष के लग्न चंद्र हेतु शुभ है या नहीं |

आइए अब शनि की साढ़ेसाती के 2700 दिनों का फल व्यक्ति विशेष हेतु देखते हैं | यह माना जाता है कि शनि शरीर के विभिन्न स्थानों पर इस प्रकार से भ्रमण करते हैं |

1)100 दिन मुख पर जो की हानिकारक माना गया है |

2)101 से 500 दिन (400 दिन) दायी बाह पर जो कि लाभदायक व विजय दायक माना गया है |

3)501 से 1100 दिन (600 दिन) पावों में जो की यात्राएं करवाता है |

4)1101 से 1600 दिन (500 दिन) पेट पर जिससे सफलता सिद्धि व लाभ मिलता है |

5)1601 से 2000 दिन (400 दिन) बाएं भुजा पर जो दुख,रोग,कष्ट व हानि का समय होता है |

6)2001 से 2300 दिन (300 दिन) मस्तक पर जिससे लाभ व सरकारी कामों में सफलता मिलती है |

7)2301 से 2500 दिन (200 दिन) नेत्र पर यह उन्नति सुख व सौभाग्य का समय होता है |

8)2501 से 2700 दिन (200 दिन) गुदा पर जो की कष्ट व दुख का समय होता है |

शनि गोचर में जब भी परिवर्तन करते हैं धरती पर अवश्य ही उठापटक होती है,जिनमें प्रमुख रूप से अन्याय इंसाफ और घोटालों का पर्दाफाश अधिक होता है | यह भी देखा जा रहा है कि वर्तमान में मकर राशि वालों की माताओं को विशेष कष्ट मिल रहे हैं |

शनि शांति के कुछ सरल उपाय

1)शनि की वस्तुएं तिल,उड़द,नारियल,बादाम,तेल,काला कपड़ा,लोहा नीलम आदि यथाशक्ति दान करें |

2)रात्रि को दूध व दूध की वस्तुए सेवन ना करें |

3)दशरथ शनि स्त्रोत शनि मंत्र का पाठ करें |

4)भोजन जमीन पर बैठकर करें तथा घर की साफ-सफाई स्वयं करें |

5)कौवे,भैंसे,मछली तथा सांपों को भोजन कराएं दूध पिलाएं |

6)वजन बराबर सतनाजा दान करें अथवा पक्षियों को खिलाएं |

7)मांस,शराब,अंडे व परस्त्री/पुरुष से दूर रहें |

8)शनि मंदिर में तेल चढ़ाएं |

9)शनिवार को बंदरो व कुत्तो को लड्डू खिलाए |

10)अपाहिजो,बुजुर्गो व अन्धो की सेवा करें |

11)ज्योतिषी से परामर्श लेकर नीलम,नीली या लोहे की मुद्रिका धारण करें |

12)शनिवार को अपने हाथ के नाका 19 हाथ लंबा काला धागा माला बनाकर गले में धारण करें |

विशेष - चांदी की थाली में गंगाजल भरकर चांदी के चार चकोर टुकड़े डालकर अपने शयनकक्ष में रखें ध्यान रखें कि गंगाजल उड़ने ना दे भरते रहे |

शनि की 8 पत्नियों के नाम जपे |

स्वामिनी ध्वंसिनी चैव,कंकाली च महाबला कलही कंटकी चैव दुर्मुखी च अजामुखी एतत शनिचरा भार्या |

प्रात: साय: मे – पठेत तस्य शनिचर: पीड़ा भवंतु कदाचन |


शनिवार, 8 मई 2021

आज का दिन कैसा गुजरेगा ?

 

आज का दिन कैसा गुजरेगा ?


प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में यह जानना चाहता है कि आज का दिन कैसा गुजरेगा कभी वह राशिफल अखबारों में देखता है कभी टीवी के कार्यक्रमों से यह जानना चाहता है कि आने वाला समय उसके  लिए कैसा रहेगा हमारे पास भी रोजाना कई लोग फोन व मेल्स भेजते रहते हैं | 

प्रस्तुत लेख में मैं आपको ऐसी ही एक विधि बता रहा हूं जो आपको आने वाले दिन के विषय में सटीक फलादेश बताती है यह विधि मुझे मेरे पंजाब प्रांत के एक ज्योतिषी मित्र ने बताई थी | 

इस विधि में सबसे पहले आपको 108 से कम कोई भी संख्या लेनी है फिर उसमें 35 जोड़कर दिन अथवा वार की संख्या को घटाना है अब जो संख्या आए उसमें 21 से भाग दे जो संख्या आए वह दिए गए उत्तर में से ज्ञात कर ले वही आपके उस दिन का फलादेश होगा | 

दिन अथवा वार संख्या इस प्रकार से देखें | 

सोमवार - 1 

मंगलवार - 2  

बुधवार - 3 

गुरुवार - 11 

शुक्रवार - 7 

शनिवार - 13 

रविवार - 5 

प्राप्त संख्या अनुसार फल इस प्रकार रहेंगे| 

1)किसी अच्छे सज्जन व्यक्ति का दर्शन होगा | 

2)मन में शांति के विचार उठेंगे,कर्ज़ पूर्ण होगा | 

3)दिन अच्छा गुजरेगा | 

4)चिंता व्यथा रहेगी | 

5)दौड़-धूप अधिक परंतु लाभ भी होगा | 

6)सुख और प्रसन्नता रहेगी | 

7)गुप्त चिंता होगी और नुकसान होगा | 

8)चिंता के कारण नींद नहीं आएगी | 

9)आज खर्च अधिक होगा और लाभ कम मिलेगा | 

10)चिंता व्यथा परिवार वाले परेशान करेंगे | 

11)सोचा काम पूरा होगा | 

12 काम सफल,नई आशा का संचार होगा | 

13)झगड़ा व झंझट होगा | 

14)इज्जत मान प्रतिष्ठा बदेगी तथा धन लाभ होगा | 

15)परेशानी और खर्चे ज्यादा रहेगा | 

16)बढ़िया दिन रहेगा | 

17)खराब दिन रहेगा | 

18)सुख-शांति वाला दिन रहेगा | 

19)चिंतित दिन रहेगा | 

20)शुभ लाभ होगा | 

21)पैसे की चिंता रहेगी | 

ध्यान रखे यदि शेष 0 आता हैं तब उसका फल भी 21 की भांति ही देखा जाएगा |

आइए अब इसे उदाहरण से समझते हैं | 

1)मान लीजिए आपने सोची संख्या 96 इसमें 35 जोड़ने पर समय 131 आया तथा आप शनिवार का दिन कैसा गुजरेगा यह जानना चाहते हैं तो इसमें से शनिवार का अंक 13 घटा दे तो शेष बचेगा 131-13=118 अब इस 118 को 21 से भाग देने पर 13 शेष बचता हैं जिसका फल सारणी अनुसार "झगड़ा झंझट होना" बताया गया है | 

अगले उदाहरण मे हम हमारा आने वाला रविवार का दिन कैसे जाएगा ये जानते हैं | माना हमने संख्या सोची 75 इसमे 35 जोड़ा तो आया 110 अब इसमे से 5 घटाया तो आया 105 इसे 21 से भाग देने पर शेष शून्य बचेगा जिसका फल "पैसे की चिंता रहेगी"

इसी प्रकार आप प्रत्येक आने वाले दिन का फल जान सकते हैं |

लाल किताब मे भाव स्थित ग्रहो का फल

शुक्रवार, 7 मई 2021

पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग कैसे करे |


 

पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग कैसे करे |


कोविड 19 अर्थात कोरोना बीमारी की दूसरी लहर महामारी के रूप मे पूरे भारत पर अपना कहर बरसा रही है, इस बार इसने हमारे शरीर मे ऑक्सीज़न की कमी को पकड़ा हैं जिससे बहुत ही कम समय मे प्रभावित व्यक्ति की मौत हो जा रही हैं ऐसे मे सभी के लिए अपने शरीर मे ऑक्सीजन के स्तर पर नज़र रखना ज़रूरी हो गया है । यदि कोई भी व्यक्ति इसमे किसी भी प्रकार से कमी को पाते हैं, तो उन्हे परीक्षण के लिए जाना आवश्यक होगा क्योंकि निम्न ऑक्सीजन का स्तर अथवा ऑक्सीज़न की कमी  कोरोना के संकेत या लक्षण हो सकते है ।

ऑक्सीज़न की कमी को जाँचने के लिए एक पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग बहुत ही आसान और दर्द रहित है। यह शरीर मे हृदय से दूर के स्थानों में रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा की भी गणना कर सकता है । एक पल्स ऑक्सीमीटर एक छोटी क्लिप - जैसी यंत्र है जो उँगलियो, कान या पैर की उंगलियों मे शरीर के एक हिस्से से जोड़ी जाती है ।

कोरोना के लक्षण की निगरानी के अलावा, एक पल्स ऑक्सीमीटर बहुत से काम में आ सकता है, क्योंकि यह अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी पता लगा सकता है जो रक्त ऑक्सीजन के स्तर से संबंधित होती हैं । इन स्थितियों में अस्थमा, फेफड़े का कैंसर, निमोनिया, पुरानी फेफड़े की बीमारी,टीबी और बहुत सी बीमारियाँ शामिल हैं ।

एक पल्स ऑक्सीमीटर कैसे काम करता है?

जब आपकी उंगली,कान या पैर की अंगुली से जुड़ी पल्स ऑक्सीमीटर छोटी छोटी बहुत सी प्रकाशीय किरणे पैदा करता है, तो यह किरणे शरीर के सभी हिस्सो से गुजरती है, उनमे वो हिस्सा भी होता हैं जो ऑक्सीमीटर से जुड़ा होता है, इस प्रकार आपके रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा मापी जाती है। यह यंत्र ऑक्सीजन युक्त या ऑक्सीजन रहित रक्त में प्रकाश अवशोषण पैटर्न को मापकर ऐसा करने में सक्षम होता है।

जैसे ही आप इस पल्स ओक्सीमीटर को जांच हेतु शरीर मे लगाते हैं कुछ ही सेकंड के भीतर, पल्स ऑक्सीमीटर आपके दिल की गति और पी आई के साथ-साथ आपके ऑक्सीजन संतृप्ति स्तर को बताएगा। पीआई एक पल्स ऑक्सीमीटर से पल्सेटाइल सिग्नल की सापेक्ष शक्ति का सूचक होता है।

एक पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग कैसे करें

* क्लिप स्टाइल पल्स ऑक्सीमीटर को आपकी उंगली, कान या पैर की अंगुली पर लगाया जाता है जो आपको बस नियत स्थान मे थोड़ी सी मात्रा में दबाव महसूस कराती हैं

* अंगुली या शरीर का नियत हिस्सा सीधे प्रकाश के नीचे रखना पड़ता हैं

* आपको किसी भी नेल पॉलिश को हटाना पड़ सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की पल्स ऑक्सीमीटर खरीद रहे हैं।

* जांच आरंभ करें।

* कुछ ही सेकंड के अंदर जांच आपके रक्त ऑक्सीजन संतृप्ति स्तर के बारे में सटीक जानकारी रिले करना शुरू कर देती हैं

* परीक्षण समाप्त होने के बाद और आपके पास अपने परिणाम हैं, बस जांच को हटा दें और यह स्वचालित रूप से अपने आप बंद हो जाता हैं |

पल्स ओक्सीमीटर की 95 के अंदर कोई भी गणना एक समस्या दिखाती है और वह यह है कि जब आपको किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर से सलाह ले लेनी चाहिए |

पल्स ऑक्सीमीटर पल्स दर को दर्शाता है और पांच-सेकंड की अवधि में एक ही रियलटाइम और कल्पना करता है। डिवाइस के एक बटन का उपयोग डिस्प्ले के ओरिएंटेशन को चार्ज करने के लिए किया जा सकता है।

आप वर्तमान में 1,000 और 3,000 रुपये के बीच एक अच्छा ऑक्सीमीटर प्राप्त कर सकते हैं । 

आगामी अमेज़ॅन प्राइम डेज़ बिक्री के दौरान आप इसे बहुत कम कीमत पर निम्न लिंक के माध्यम से भी खरीद सकते हैं ।

https://amzn.to/33nb953

https://amzn.to/3hc5TJE


बुधवार, 5 मई 2021

स्त्री रोग - कोल्ड युटेरस

 


स्त्री रोग - कोल्ड युटेरस 

महिलाओ मे समान्यत: पायी जाने वाली “कोल्ड युटेरस से संबंधित बीमारी” को आज भी परंपरागत दवाई से ही सही किया जाता है  इस बीमारी मे स्त्रीयों को मासिक धर्म से संबंधित परेशानियां मिलती है परंतु इस बीमारी को ठीक से समझा नहीं जा सकता है | इस बीमारी के होने से जातिका  में बांझपन भी देखा गया है साधारणतय: इसके कुछ लक्षण हाथ पैरों का ठंडा रहना,कमर के निचले हिस्से में दर्द रहना,संबंधों की इच्छा ना रहना,काले खून के धब्बे मासिक धर्म में आना,शरीर का तापमान बढ़ा रहना,बार-बार पेशाब की आदत होना तथा शरीर में पानी को रोक पाने की परेशानी होना आदि देखे जाते हैं |

इन सभी कारणो से महिला जातको में बांझपना,एंडो मेट्रिओसिस,अड़ेनोंम्योसिस और फाइब्रोईडस की परेशानी होती है डॉक्टर इसमें केवल पेन किलर खाने की ही सलाह देते हैं ऐसे मे यदि हीट पैड का इस्तेमाल किया जाए तो वह भी सिर्फ बाहरी गर्मी ही दे पाता  है जबकि आंतरिक गर्मी के ना मिल पाने के कारण इसका कोई सही से उपाय नहीं हो पाता है परंतु प्राकृतिक उपायों से इस बीमारी में काफी राहत देखी गई है तथा दर्द आदि में कमी भी होने लगती है | इस (कोल्ड) अथवा ठंडी युटेरस की परेशानी के कारण स्त्रियों को मासिक धर्म संबंधी परेशानी के अलावा पीसीओडी नामक बीमारी होती है |

ज्योतिषीय दृष्टि से देखे तो यह बीमारी निम्न कारणों से होती है |

चूंकि यह परेशानी मुख्य रूप से स्त्री जातकों में ही पाई जाती है और मासिक धर्म आदि से संबन्धित होती हैं जो कि ज्योतिष मे मंगल ग्रह से संबंधित  है (मासिक धर्म का कारक मंगल होता हैं) आज के परिपेक्ष में हम निम्न सूत्र देख सकते हैं |

मंगल जो कि रक्त का कारक तथा अग्नि ग्रह होता है (जिसे मेष एवं वृश्चिक राशि का स्वामित्व दिया गया है )यदि स्त्री की पत्रिका मे मंगल (अग्नि ग्रह)  जलीय राशि में हो तो इस प्रकार की परेशानी देता है |

चंद्रमा जल का कारक होकर खून में गाढापन पैदाकर  जातक विशेष को ठंड से संबंधित परेशानी देता है चंद्रमा ठंडा ग्रह है जब यह मंगल के साथ जलीय राशि में होतो परेशानी और भी ज्यादा हो जाती है जिस कारण स्त्रियों में वमन,उत्सुकता,बुखार तथा पीसीओडी की बीमारी दिखाई देने लगती है | ऐसे मे शरीर मे खून में गर्मी ना होने के कारण युटेरस को सही प्रकार से गर्मी नहीं मिल पाती जिस कारण उपरोक्त परेशानियां होने लगती हैं विशेष तौर से जब इन दोनों ग्रहों कन्दरा व मंगल की दशा/ अंतर्दशा चल रही हो |

इस प्रकार की बीमारी को मंगल तत्व को बढ़ाकर सही किया जा सकता है,इसके लिए कुछ प्रकृतिक उपाय इस प्रकार से हैं |

1)दिन के वक्त थोड़ा सा गुड़ ज़रूर खाया जाए |

2)मासिक धर्म के समय एक गिलास पानी में गुड,अदरक और दालचीनी को बाल कर सुबह और शाम जब भी परेशानी महसूस हो पिये |

3)जड़ वाली सब्जी का सेवन ज़्यादा से ज़्यादा किया जाए |

ज्योतिष के अनुसार जड़ वाली सब्जी को मंगल ग्रह से देखा जाता है क्योंकि मंगल को भूमि का पुत्र माना गया है जो सभी सब्जियों पर अपना आधिपत्य रखते हैं विशेष तौर से वो सब्जियाँ जो लाल रंग की होती है  मंगल से ही देखी जाती है |

ठंडी वस्तुओं का सेवन करना अथवा ठंडा पानी पीना इस रोग में खराबी देता देखा गया है |

इस प्रकार से आप निम्न उपाय कर  स व इससे संबन्धित सभी बीमारियों से बच सकते हैं |

for medicine related click the link below 

https://amzn.to/3eY8u7c