गुरुवार, 11 मई 2023

फेंगशुई और हमारा जीवन 2

हर अंक की अपनी गुणवत्ता और अवगुण का है जीवन में लुप्त संख्या से संबंधित ग्रहों तत्वों और दिशाओं धातुओं कार्य को और रंगों को शामिल कर कर दुष्प्रभाव कम किए जा सकते हैं |

यदि अंक चक्र में एक का अंक ना हो तो जीवन में आगे बढ़ने के लिए दूसरे व्यक्ति का परामर्श या सहारा चाहिए होता है | ऐसे व्यक्ति अपनी बात दूसरों को कह नहीं पाते तथा अभिव्यक्त करने की शक्ति इनमें नहीं होती है | इन्हे चाहिए की ये सूर्य की उपासना करें सूर्य को जल दें,सूर्य यंत्र पहने तथा मोती धारण करें |

अंक दो के ना होने पर जातक अधीर और अविकसित होते हैं | इन लोगों की प्रवृत्ति अपने किए कार्य को सही ठहराने की होती हैं इन लोगों को जीवन में संतुलन हासिल करना चाहिए | इनमें संवेदनशीलता ना होने कारण यह दूसरे की मदद नहीं कर पाते, अंतर्ज्ञान शक्ति की कमी होती है,भावनाओं की कदर नहीं करते, छोटी मोटी गलतियां करते रहते हैं | इन्हें क्रिस्टल का ब्रेसलेट पहनना चाहिए |

अंक 3 वाले लोगों में आत्मविश्वास की कमी होती है स्थिर बुद्दि के होने पर यह ठीक से सोच नहीं पाते, इन्हें स्वयं को स्वीकार करने की कला सीखनी चाहिए ,इन की कल्पना शक्ति दूरदर्शिता नहीं होती, जल्दी परेशान हो जाते हैं, यह मानसिक शारीरिक और आर्थिक तंगी से लड़ नहीं पाते | इन्हे तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहननी चाहिए |

अंक 4 के बिना वाले लोगों को निर्धारित दिनचर्या में काम करना मुश्किल होता है | यह अक्सर अव्यवस्थित होते हैं प्रेरणा की कमी होती है जैसे-जैसे ये धैर्य धारण करते हैं इनका जीवन आसान होने लगता है |यह समय की उपयोगिता को समझ नहीं पाते,इस कारण इनको जितनी सफलता मिलनी चाहिए उतनी नहीं मिलती | इन्हे भी रुद्राक्ष और तुलसी की माला पहननी चाहिए  |

अंक 5 ना होने पर व्यक्ति मे इच्छा शक्ति और बहुमुखी प्रतिभा की कमी होती है यह जल्द ही धैर्य छोड़ देते हैं | सफलता जल्दी नहीं मिलती, बात करने का ढंग अच्छा नहीं होता | इन्हे बुध यंत्र धारण करना, गाय को हरा चारा डालना तथा ओनेक्स का ब्रेसलेट पहनना चाहिए |

अंक 6 ना होने पर लोग खुद को और अधिक खोजने और व्यक्त करने में लगे रहते हैं आंतरिक भावनाओं को छुपाते हैं | मां-बाप मे से किसी एक के साथ संबंध खराब होते हैं ,बच्चों के प्रति इनका लगाकम होता है | सबकी मदद करते हैं पर इनको मदद नहीं मिलती,इनको कभी भी विदेश से संबंधित काम नहीं करना चाहिए | इन्हे चाहिए की ये शुक्र यंत्र धारण करें गोल्डन रंग की पट्टी में घड़ी ना पहने |

अंक साना हो तो व्यक्ति के काम और पढ़ाई में रुकावट आती है यह किसी की भी भावनाओं के प्रति खास ध्यान नहीं रखते आध्यात्मिक जीवन में कोई भी दिलचस्पी नहीं होती, इनको शांत रहना सीखना चाहिए | ये बस अपने ही बारे में सोचते रहते हैं इन्हें सिल्वर पट्टी वाली घड़ी पहननी चाहिए |

नंबर 8 यदि उपस्थित ना हो तो व्यक्ति में निर्णय शक्ति की कमी एवं भौतिक साधनों का अभाव रहता है |वित्तीय मामलों में यह बिल्कुल भी अच्छे नहीं होते, लापरवाह और बहुत भरोसेमंद हो सकते हैं, आर्थिक रूप से पीड़ित रहते हैं, प्रेरणा की कमी होती है कार्यों को अधूरा छोड़ देते हैं,अनुशासित बिल्कुल नहीं होते,पैसों का हिसाब नहीं रख पाते,मेहनत करने में विश्वास नहीं रखते,जीवन में जल्दी पैसा कमाना चाहते हैं | इन्हे चाहिए की ये क्रिस्टल ब्रेसलेट हमेशा पहनकर रखे |

अंक 9 ना हो तो व्यक्ति में साहस की कमी होती है, संघर्ष अधिक करना पड़ता है तथा सुख साधन आसानी से प्राप्त नहीं होते |इस अंक के बिना वाले लोग दूसरों की भावनाओं और जरूरतों को नजरअंदाज करते हैं, दूसरों के जीवन में क्या चल रहा है यह गौर या ध्यान नहीं देते, दूसरों की भावनाओं की कदर नहीं करते, कर्म करने की प्रवृत्ति इनमें नहीं होती, संघर्ष की कमी होती है |इन्हें लाल मौली धारण करनी चाहिए तथा हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए |

 

फेंगशुई और हमारा जीवन 1

फेंगशुइ के अनुसार निम्न पांच तत्व लकड़ी, धातु, पृथ्वी, जल तथा अग्नि हमारे जीवन के प्रत्येक हिस्से को प्रभावित करते हैं । इन पांचों तत्वों के समुचित प्रयोग व सिद्धांतों को अपनाकर हम ना सिर्फ अपना जीवन सफल बना सकते हैं बल्कि अपने प्रभाव को भी अपने सामाजिक दायरे में बढ़ाकर मान-सम्मान प्राप्त कर सकते हैं ।

जन्म तिथि द्वारा तत्वों की पहचान कर हम उस तत्व का पता लगा सकते हैं जिसकी हमें आवश्यकता या कमी रहती है संख्या व तत्व इस प्रकार से है ।

1- जल तत्व

2, 5, 8 - पृथ्वी तत्व

3, 4 - लकड़ी तत्व

6, 7 - धातु तत्व

9 – अग्नि तत्व

इन संख्याओं को एक वर्ग में इस प्रकार रखा गया है ।

4 – 9 - 2

3 - 5 - 7

8 – 1 - 6

इस वर्गानुसार जन्म तिथि  रखकर वह अंक प्राप्त करे जो कि हमारी जन्मतिथि में नहीं होता है । उसका तत्व हमें ज्ञात हो जाता है जिससे उस तत्व को बढ़ाकर हम उसकी कमी को पूर्ण कर लेते हैं ।

अंक संख्या व उसका प्रभाव इस प्रकार देखा जाता है ।

(1) कैरियर व शिक्षा, यात्रा व योजनाये,नौकरी व्यापार,सफलता,संचार,व्यक्तित्व   |

नंबर 1 दिखाता है कि व्यक्ति दूसरों के साथ कैसी प्रतिक्रिया एवं वार्तालाप करता है यह पानी के तत्व उत्तर की दिशा व काले गहरे नीले रंग को बताता है शरीर में गुर्दे और कानों को नियंत्रित करता है परिवार में बीच वाले पुत्र के बारे में बताता है |

(2) व्यवसाय,सांझेदार, ज़मीन, दाम्पत्य जीवन,विवाह, प्रेम संबंध,संवेदनशीलता,अंतर्ज्ञान

अंक दो विवाह प्रेम संबंध संवेदनशीलता अंतर्ज्ञान और माता के विषय में जानकारी देता है यह यह बताता है कि किसी व्यक्ति के पास कितनी खुशी एवं क्षमताएं हैं शरीर में पेट के स्वास्थ्य से संबंधित होता है और माता के विषय में जानकारी देता है |

(3) दैनिक खर्च व उन्नति,स्वास्थ्य योजना,कल्पना शक्ति,परिवार,बुद्धि और अतीत

नंबर 3 में याद दाश्त शक्ति व  सोचने की क्षमता का वर्णन है यह स्वास्थ्य और पैरों रखना और घुटनों से संबंधित है इससे परिवार के रिश्ते और बड़े बेटे की स्थिति के बारे में पता चलता है यह यह भी बताता है कि व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता कितनी है लकड़ी का तत्व होने के कारण यह पूर्व की दिशा हरे और नीले रंगों के बारे में बताता है |

(4) सचित धन व लाभ ।

अंक 4 किस्मत पैसा अनुशासन शक्ति के विषय में बताता है यह धन लाभ और समृद्धि से भी संबंधित होता है यह बताता है कि किसी व्यक्ति में आत्म नियंत्रण संतुलन और कड़ी मेहनत की प्रकृति कितनी अच्छी या बुरी है इसका स्वामी राहु है जो बताता है कि किसी व्यक्ति के पास वित्तीय जीवन में कितना व्यवहारिक तरीका है लकड़ी का तत्व होने के कारण दक्षिण पूर्व की दिशा लाल हरे नीले बेंगली और सुनहरे रंगों को बताता है शरीर में जान और जिगर के स्वास्थ्य के विषय में जानकारी इससे प्राप्त की जा सकती है परिवार में सबसे बड़ी बेटी के विषय में किस अंग से जाना जाता है

(5) आत्मविश्वास, पेट व पीठ । 

अंक 5 संतुलन स्थिरता भाग्य मानसिक स्वास्थ्य एवं सफलता का प्रतीक है जो यह बताता है कि किसी की व्यक्ति के पास व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के बीच शक्ति कार्य ऊर्जा का संतुलन कितना अच्छा या बुरा है स्वामी बुध होने के कारण यह किसी व्यक्ति को स्वतंत्रता और सौभाग्य की कितनी इच्छाएं हैं यह बताता है पृथ्वी तत्व होने के कारण केंद्र की दिशा पीले बुरे और नारंगी रंग के विषय में जानकारी देता है शरीर के आंतरिक अंगों का पता इससे चलता है पूरे परिवार के विषय में जानकारी भी इसी अंक से पता चलती है |

(6) परिवार, मित्र, संगीत, ऐश्वर्य, लौह तत्व, भौतिक साधन । 

अंक 6 मित्र यात्रा नई शुरुआत आध्यात्मिकता के लिए जाना जाता है यह घर और परिवार विशेषकर बच्चों के प्यार और सुरक्षा से संबंधित होता है यह बताता है कि एक व्यक्ति कितना रचनात्मक और दोस्तों के लिए कितना उपयोगी है स्वामी शुक्र होने के कारण यह व्यक्ति को यात्रा मित्रता एवं आध्यात्मिकता की इच्छाएं कैसे और कितनी मात्रा में होगी है बताता है धातु तत्व के होने के कारण उत्तर पश्चिम की दिशा काली और सफेद रंगों को बताता है शरीर में सिर के स्वास्थ्य के विषय में जानकारी देता है तथा व्यक्ति के पिता के बारे में इससे जाना जा सकता है|

(7) पारिवारिक सम्बंध, बच्चे, कलात्मकता, संघर्ष, कार्यबाधा । 

अंक सात रचनात्मकता निराशा मनोरंजन एवं भविष्य बताता है नंबर 7 भविष्य की चिंता महाकौशल का वर्णन करता है इसका स्वामी केतु होने से यह व्यक्ति की निराशा और नुकसान उसे कैसे सीखना है सिखाता है धातु तत्व होने के कारण पश्चिम की दिशा सफेद चांदी और तांबे के रंगों के बारे शरीर में मुख्य और फेफड़ों से संबंधित है परिवार में सबसे छोटी बेटी के बारे में से जाना जा सकता है |

(8) कार्य कुशलता, तकलीफ । 

अंक 8 ज्ञान प्रेरणा अंतर्ज्ञान संगठित अध्यात्म अध्ययन के विषय में जानकारी देता है जो ज्ञान शिक्षा और स्मरण शक्ति से संबंधित है स्वामी शनि होने के कारण यह बताता है कि कोई व्यक्ति अध्यात्मिक प्रेरक और कितना समृद्ध हो सकता है पृथ्वी तत्व होने के कारण उत्तर पूर्व की और नीले काले हरे रंगों को बताता है शरीर में हाथ और शरीर के वजन के विषय में से जाना जा सकता है इस अंक से सबसे छोटे बेटे के बारे में जाना जाता है |

(9)अंक 9 समृद्धि मानवता सामाजिक जीवन प्रसिद्धि एवं प्रतिष्ठा बताता है |

यह अंक मानवता आदर्शवाद और महत्वाकांक्षाओं का वर्णन करता है स्वामी मंगल होने से कारण किसी भी व्यक्ति की वीरता और ऊर्जा कितनी होगी यह अंक बताता है अग्नि तत्व होने के कारण दक्षिण दिशा और लाल रंग बताता है शरीर में हृदय रक्त और आंखों से संबंधित है इस अंक से परिवार की बीच वाली बेटी के बारे में जाना जाता है |

 

 

मंगलवार, 2 मई 2023

अद्भुत व महान सफलता प्रदान करता हैं - गुरु शनि का सम सप्तक योग

 

न्मपत्रिका में शनि और गुरु आमने-सामने स्थित होकर एक-दूसरे को देखते हैं अर्थात् 180 अंश की दूरी पर स्थित हो, तो जातक अपने जीवन मे अद्भुत व महान सफलता प्राप्त करता हैं इस शनि गुरु के सम सप्तक योग को शास्त्रो मे कही कही क्षेत्र सिंहासन योग भी कहा गया हैं ।

इन दोनों के सम सप्तक होने के योग वाला जातक उच्च शिक्षित, शक्तिशाली और धनी होता है । ऐसा बहुत सी कुंडलियों मे पाया गया हैं |

ब्रह्माण्ड के सौरमण्डल के ग्रह परिवार में गुरु सर्वाधिक बड़ा ग्रह है । शनि पृथ्वी से सर्वाधिक दूरी पर स्थित ग्रह है । ये दोनों ग्रह धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं । इस कारण इनका प्रभाव पृथ्वी के जीवन पर सर्वाधिक पड़ता है और दीर्घकालीन होता है।

अतः इन दोनों का आमने- सामने स्थित होने पर गुरु की पूर्ण दृष्टि से शनि में शुभता आ जाती है । वैसे भी शनि गुरु की राशि में शुभ माना गया है ।

यदि दोनों आमने-सामने स्थित होकर केन्द्र, त्रिकोण के भी स्वामी हों, तो निर्णायक राजयोगकारक होते हैं जैसे; मेष लग्न एवं सिंह लग्न की जन्मपत्रिका में ।

आगे हम अपना मत और स्पष्ट करने हेतु प्रत्येक लग्न की एक-एक जन्मपत्रिकाएँ उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर विवेचना सहित लिखेंगे ।

बी.एस.पी. सुप्रीमो कांशीराम 12 अप्रैल, 1932 07:00 बजे रोपड़ (पंजाब) मेष लग्न

कांशीराम ने विज्ञान विषय में स्नातक डिग्री लेने के बाद गुरु की महादशा में सरकारी नौकरी प्रारम्भ की । कुछ वर्षों तक नौकरी करने के बाद इन्होंने राजनीति में प्रवेश किया । अपनी अद्भुत संगठन क्षमता के बल पर सन् 1984 में शनि में गुरु की अन्तर्दशा में बहुजन समाज पार्टी का गठन कर 1991 में ये लोकसभा के सदस्य चुने गए । फिर मायावती को साथ लेकर उत्तरप्रदेश की सत्ता पर बहुजनवादी समाज का शासन शुरू किया । 9 अक्टूबर, 2006 को केतु में राहु की अन्तर्दशा में इनका निधन हो गया । जन्मपत्रिका में गुरु चतुर्थ भाव में उच्च का होकर शनि के सामने स्थित है । यह धर्मकर्माधिपति योग का भी निर्माण कर रहा है ।

सन्त ज्ञानेश्वर 09 अगस्त, 1275 जन्म समय : 00:05 बजे पैठान (महाराष्ट्र) वृष लग्न

सन्त ज्ञानेश्वर का जन्म एक जीवन में गुरु महादशा में की राहु गरीब परिवार में हुआ था । इनके माता-पिता शास्त्रविज्ञ और गुणी थे इनके बचपन में ही माता-पिता का निधन हो गया था। अनाथ होकर इन्हें भिक्षा माँगकर अपना जीवन गुजारना पड़ा था । आठ वर्ष की आयु में ही इनके जीवन में गुरु की महादशा गुरु प्रारम्भ हो गई थी । मात्र 15 वर्ष की आयु में ही इन्होंने श्रीमद्भगवतगीता कण्ठस्थ कर ली थी । इन्होंने 'ज्ञानेश्वरी गीता' नामक टीका की रचना की थी । शास्त्रों का इन्हें अच्छा वर्ष ज्ञान प्राप्त हो गया था । मात्र 21 की आयु में 1296 ई. में इनका देहान्त हो गया था । उस समय इनके जीवन मे गुरु मे राहू की अन्तर्दशा चल रही थी । जन्मपत्रिका में पंचम भाव में योगकारक शनि और उसके सामने एकादश भाव मे गुरु वक्री होकर स्थित है । गुरु ज्ञानकारक, किन्तु मारक भी बना है ।

अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन 22 फरवरी, 1732 12:10 बजे वर्जीनिया (अमेरिका)

अमेरिका का जन्म 1783 में विद्रोह युद्ध और फिर स्वतन्त्रता की सन्धि के बाद हुआ था । सन् 1776 - 1781 तक अमेरिका ब्रिटेन से युद्धरत रहा था । स्वतन्त्रता के बाद 1783 में गुरु महादशा में चन्द्रमा की अन्तर्दशा में जॉर्ज वाशिंगटन अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति बने थे । मूल रूप से ये अमेरिका की संयुक्त सेना के कमाण्डर इन चीफ थे । 14 दिसम्बर, 1799 में शनि में चन्द्रमा की अन्तर्दशा में इनका देहान्त हो गया था । जन्मपत्रिका में चतुर्थ भाव में गुरु वक्री होकर स्थित है और इसके सामने दशम भाव में शनि स्थित है । इस प्रकार क्षेत्र सिंहासन योग ने इन्हें सर्वोच्च सिंहासन पर बिठाया ।

श्री रामानुजाचार्य 04 अप्रैल, 1017 12:00 बजे पैरम्बदूर (तमिलनाडु) .

दर्शन की द्वैत धारणा के पोषक रहे श्री रामानुजाचार्य के अनेक लोग शिष्य बने और पूरी उड़ीसा मे इन्होंने अपना मठ स्थापित किया । श्री रामानुजाचार्य ने गुरु महादशा में राहु की अन्तर्दशा में गृहस्थ जीवन त्यागकर संन्यास ग्रहण किया । शनि महादशा में इन्होंने अध्यात्म को पूर्ण रूप से आत्मसात कर उच्च धार्मिक पद प्राप्त किया । गुरु और शनि की दशा में इनकी हत्या के प्रयास हुए । सन् 1137 में 120 वर्ष की आयु पूर्ण कर इन्होंने अपना शरीर त्यागा । जन्मपत्रिका में गुरु और शनि क्रमशः द्वादश और षष्ठ भाव में स्थित होकर आमने-सामने स्थित हैं ।

अभिनेता सुनील दत्त 06 जून, 1931 11:30 बजे सियालकोट (पाक.)

सुनील दत्त ने सन् 1955 (गुरु में गुरु की अन्तर्दशा) से फिल्मों में काम करना प्रारम्भ किया था । 1957 में बनी फिल्म 'मदर इण्डिया' में इनके अभिनय को सराहा गया । उसी समय नर्गिस से इनके सम्बन्ध बने और शादी हो गई । बाद में उन्होंने अनेक यादगार फिल्मों में काम किया और अपनी फिल्म भी बनाई ।

शनि की महादशा में राजनीति में प्रवेश कर सांसद और फिर मन्त्री बने । इस प्रकार गुरु और शनि की दशा ने इन्हें शिखर तक पहुँचाया । केतु की महादशा में केतु की अन्तर्दशा में 25 मई 2005 में इन्होंने शरीर त्याग दिया ।

जन्मपत्रिका में शनि पंचम भाव में और उसके सामने गुरु एकादश भाव में स्थित होकर एक-दूसरे को देख रहे हैं । ये केन्द्र-त्रिकोण स्वामी का सम्बन्ध राजयोगकारक है ।

एलिजाबेथ टेलर 27 फरवरी, 1932 19:25 बजे लन्दन (इंग्लैण्ड)

अपने जमाने की सर्वाधिक सुन्दर, लोकप्रिय और ऐश्वर्यशाली अभिनेत्री रही एलिजाबेथ टेलर ने 13 वर्ष की आयु से ही फिल्मों में काम करना प्रारम्भ कर दिया था । इन्हें दो बार ऑस्कर अवार्ड भी दिया गया था । शनि की महादशा जीवन का स्वर्णिम काल रही थी । इन्होंने आठ विवाह किए और जिन्दगी को अपनी शर्तों पर जिया । जन्मपत्रिका में शनि पंचम भाव में स्वगृही है और इसके सामने एकादश भाव में उच्च का गुरु स्थित है ।

सी.एन. अन्नादुराई 15 सितम्बर, 1909 09:30 बजे काँचीपुरम (तमिलनाडु)

जस्टिस पार्टी प्रमुख पेरियार से मतभेद होने पर अन्ना ने सन् 1948 में गुरु की महादशा में गुरु की अन्तर्दशा मे पार्टी छोड़ दी थी | सन 1949 मे इनहोने अपनी नई पार्टी डीएमके बनाई सन 1962 मे राज्यसभा के सदस्य बने सन 1967 में विधानसभा चुनावों में शानदार सफलता पाकर मुख्यमन्त्री बने । ये एक श्रेष्ठ लेखक और पत्रकार भी रहे। थे । इन्होंने अनेक पुस्तकें लिखी हैं । गुरु और शनि की महादशा में शानदार राजयोग भोगते हुए 3 फरवरी, 1969 को शनि में केतु की अन्तर्दशा में इनका निधन हो गया । जन्मपत्रिका में गुरु द्वादश भावस्थ है और शनि श्रेष्ठ योगकारक होकर षष्ठ भाव मे गुरु के सामने वक्री होकर स्थित है । इस श्रेष्ठ क्षेत्र सिंहासन योग ने इन्हें मुख्यमन्त्री बनवाया ।

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी 17 सितम्बर, 1950 12:00 बजे बढ़नगर (गुजरात)

नरेन्द्र मोदी सन् 2014 में चन्द्रमा की महादशा में गुरु की अन्तर्दशा में देश के प्रधानमन्त्री बने थे। चन्द्रमा दशम भावस्थ शनि के नक्षत्र में स्थित है और गुरु-शनि आमने-सामने क्रमशः चतुर्थ- दशम भाव में स्थित होकर द्वितीयेश - चतुर्थेश होकर प्रबल राजयोग बना रहे हैं। जन्मपत्रिका में गुरु-शनि आमने-सामने स्थित हैं और दशाकारक भाग्येश चन्द्रमा शनि के नक्षत्र में स्थित है। इस श्रेष्ठ क्षेत्र सिंहासन योग ने नरेन्द्र मोदी को सिंहासन पर बिठाया।

सुब्रह्मण्यम चन्द्रशेखर 19 अक्टू., 1910 12:00 बजे लाहौर (पाकिस्तान)

भौतिक शास्त्र के विद्वान् रहे चन्द्रशेखर ने शिकागो विश्वविद्यालय मे  प्रोफेसर के रूप मे मृत्युपर्यंत 1937-1995 तक सेवा की,इनहोने अमरिका की नागरिकता लेकर वही अपना निवास बनाया |

गुरु महादशा सन् 1972 से इनके जीवन में प्रारम्भ हुई थी। इन्होंने इस दशा में अनेक शोधकार्य किए और पुस्तकें लिखीं । इनको इनके शोध कार्यों के लिए सन् 1983 में गुरुमें सूर्य की अन्तर्दशा में नोबेल पुरस्कार दिया गया । 21 अगस्त, 1995 में 84 वर्ष की आयु में इनका निधन हो गया था । जन्मपत्रिका में शनि पंचम भाव में नीच का (नीचभंग प्राप्त ) गुरु के सामने स्थित है । गुरु एकादश भाव में सूर्य-केतु युति करता हुआ स्थित है । शनि में शुक्र की अन्तर्दशा में इनका देहान्त हो गया था ।

शहीद भगत सिंह 28 सितम्बर, 1909 16:06 बजे बंगा (पाकिस्तान)

भगत सिंह देश के स्वतन्त्रता संग्राम से जुड़े क्रान्तिकारियों से बचपन से ही जुड़ गए थे। इन्होंने देश की युवा पीढ़ी जो जगाने के लिए फाँसी के फन्दे को गले लगाया था | 23 मार्च, 1931 को इन्हें फाँसी दे दी गई थी । इन्होंने अंग्रेज सरकार से ना तो माफी माँगी और न ही फैसले के विरुद्ध अपील की । एक समय तो ऐसा भी आया था कि भगतसिंह की लोकप्रियता गाँधीजी से भी ऊँची हो गई थी । जन्मपत्रिका में तृतीय भाव शनि वक्री होकर वक्री मंगल के साथ स्थित है और इसके ठीक सामने भाग्य भाव में गुरु स्थित है। यह भी एक श्रेष्ठ क्षेत्र सिंहासन योग की रचना कर रहा है ।

बी. वी. रमन 08 अगस्त, 1912 19:36 बजे बंगलुरू (कर्नाटक)

बी.वी. रमन ने अपने दादा सूर्य नारायण राव के साथ रहकर ज्योतिष विषय का ज्ञान प्राप्त किया था। गुरु महादशा इनके जीवन में 1937 से प्रारम्भ हुई। इसके शुरू होते ही इन्होंने एस्ट्रोलॉजिकल मैगजीन को पुनः प्रारम्भ किया। धीरे-धीरे मैगजीन प्रकाशन का कार्य चालू रखा। अनेक ज्योतिष ग्रन्थों की इन्होंने रचना की थी। अमेरिका के विश्वविद्यालय ने इन्हें 'डॉक्टर ऑफ साइंस' का सम्मान प्रदान किया । शनि की महादशा में इन्होंने अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों में ज्योतिष पर कई व्याख्यान दिए । शनि की महादशा में इनको धनलाभ और ख्याति मिली। खूब जन्मपत्रिका में शनि लग्नेश होकर चतुर्थ भाव में चन्द्रमा के साथ स्थित है और उसके सामने दशम भाव में गुरु स्थित है ।

डॉ. होमी जहाँगीर भाभा 30 अक्टू., 1909 17:00 बजे मुंबई (महाराष्ट्र)

पारसी परिवार में जन्मे भाभा भारत के आणविक कार्यक्रम के जन्मदाता और एटम बम विकास को शुरू करने वाले वैज्ञानिक थे । गुरु की महादशा के प्रारम्भ में इन्होंने टाटा इन्स्टीट्यूट ऑफ फण्डामेंटल रिसर्च के शोध संस्थान और फिर एटॉमिक एनर्जी कमीशन (1948) की स्थापना की थी । गुरु और शनि की महादशा में भारत ने आणविक क्षेत्र में खूब प्रगति की थी । 24 जनवरी, 1966 को शनि में बुध की अन्तर्दशा में इनका एक हवाई दुर्घटना में देहान्त हो गया था ।

जन्मपत्रिका में शनि लग्न में और गुरु सप्तम भाव में स्थित होकर आमने-सामने स्थित है। यह एक श्रेष्ठ क्षेत्र सिंहासन योग बना रहा है।

इस आलेख में हमने गुरु और शनि के आमने-सामने स्थित होने पर बनने वाले महत्त्वपूर्ण ज्योतिषीय योग क्षेत्र सिंहासन योग पर चर्चा की है। यह एक अति महत्त्वपूर्ण योग है। अनेक लग्नों के लिए तो यह केन्द्र- त्रिकोण अथवा अन्य भाव स्वामियों के सम्बन्ध से भी राजयोगकारक होते हैं जैसे; मेष लग्न नवम - दशम का सम्बन्ध, मिथुन लग्न नवम-दशम का सम्बन्ध, सिंह लग्न केन्द्र-त्रिकोण का सम्बन्ध, कन्या लग्न केन्द्र- त्रिकोण का सम्बन्ध, वृश्चिक लग्न केन्द्र-त्रिकोण का सम्बन्ध, कुम्भ लग्न लग्नेश-द्वितीयेश का सम्बन्ध आदि।

हमने अपने अध्ययन के दौरान ऐसा पाया है कि इस योग वाले जातक अपने-अपने क्षेत्र में अपने कार्य विशेष में निपुणता रखते हैं। यह उन्हे सफलता और लोकप्रियता दिलवाता है। भावार्थ रत्नाकर तुला लग्न के लिए गुरु और शनि दोनों को राजयोगकारक मानता है । इसका प्रमुख उदाहरण है महात्मा गाँधी की जन्मपत्रिका ।