1. जन्मकुंडली के राहु पर राहु का गोचर अचानक संकट, अकारण लोगों का विरोध, व्यवसाय नौकरी में हानि की संभावना, दांत आंत व उदर सम्बन्धी रोगों से कष्ट, घर में बीमारी, परदेश यात्रा, ज्तंदेमित से कष्ट होता है ।
2. जन्म कुंडली
के सूर्य पर राहु का गोचर शारीरिक कष्ट, व्यापार - व्यवसाय में
रूकावटें क्योंकि सूर्य राज सरकार, मान व सत्ताबल का प्रतीक है । सूर्य पर राहु
संक्रमण के तीन महीने पहले तथा तीन महीने बाद तक जातक को कष्ट हो सकता है । ये फल
2,4,5,8,12 वें भावों में ज्यादा होता है ।
3. जन्मकुंडली
के चंद्र पर राहु का गोचर मन में अशान्ति, व्यवसाय में
नुकसान, मान हानि की संभावना, ये
फल 3,6,7,8, 10, 12वें भावों में
ज्यादा होगे ।
4. जन्मकुंडली
के मंगल पर राहु का गोचर - परिजनों में झगड़े एवं व्यर्थ के खर्चे में वृद्धि होती
है ।
दुर्व्यसनों से हानि एवं अदालती मामलों में नुकसान, बुरे कामों में
रूचि, मंगल यदि 2,4,7,8,12वें भावों में हुआ तो कष्ट
ज्यादा होता है ।
5. जन्म कुंडली
के बुध पर राहु का गोचर - बुद्धि में विकृति आकर गलत निर्णय होते है । स्मरण शक्ति
कम हो जाती है ।
बुध यदि पुरूष राशि में 2, 3, 5,6,8,12 वें
भावों में हो तो विशेष कष्ट होता है ।
6. जन्मकुंडली
के गुरू पर राहु का गोचर - भ्रमण, अचानक विवाह नौकरी में तरक्की, व्यवसाय
व्यापार में लाभ, पुत्र संतान की प्राप्ति, राजनैतिक
लाभ, धर्म कार्य में रूचि होती है । गुरू का शुभफल
1,3,6,9,10 व 11वें भावों में मिलेगा ।
7. जन्मकुंडली
के शुक्र पर राहु का गोचर - स्त्री -पुत्र को बीमारी देता है। धन हानि, शारीरिक
बाधा, गुप्त रोगो में वृद्धि होती है। शुक्र यदि
2,4,6,8वें भाव में हो तो फल तीव्रता से मिलते है। शुक्र पर राहु का गोचर कामुकता
बढ़ाता है ।
8. जन्मकुंडली के
शनि पर राहु का गोचर - केन्द्र या त्रिकोण में हो तो चलता व्यापार बन्द हो जाता है,
मृत्यु तुल्य कष्ट, लाभ में कमी, शनि
यदि पुरूष राशि में हो तो अशुभ फलो में वृद्धि हो पुत्र को जाती है ।
9. जन्मकुंडली
में केतु पर राहु का गोचर-केतु की जन्म कालीन स्थिति यदि अशुभ है तो राहु का गोचर
व्याकुलता व अधीरता बढ़ा देगा । यदि राहु की स्थिति जन्मकालीन ठीक है तो जातक रहेगा
।