मीन राशि
दी, दू,
थ, झ, ञ, दे,
दो, चा, ची
मीन राशि वाले
जातकों के लिए शनि का गोचर एक चुनौतीपूर्ण समय का संकेत है, जो
उनकी राशि में 'मध्य की साढ़ेसाती' के
रूप में रहेगा । अपनी जन्मराशि के ऊपर से शनि के गोचर के प्रभाव से शारीरिक,
मानसिक, पारिवारिक और आर्थिक स्थितियों के
सम्बन्ध में कुछ समस्याएँ एवं चुनौतियाँ प्राप्त हो सकती हैं |
जन्मराशि के ऊपर
से गोचर करता हुआ शनि अपनी तीसरी दृष्टि से तृतीय भाव को देखता है, जिसके
परिणामस्वरूप जातक के आत्मविश्वास में कमी देखने को मिलती है । पहल करने की क्षमता
कम हो जाती है । साथ ही, आलस्य एवं कार्यों को टालने की
प्रवृत्ति रहती है भाई-बहिनों से सम्बन्धित कोई समस्या भी
परेशान कर सकती है सर्वाइकल,
ईएनटी एवं हाथों से सम्बन्धित कोई समस्या भी उत्पन्न हो सकती है ।
चन्द्र लग्न में
गोचर करता हुआ शनि अपनी सप्तम दृष्टि से सप्तम भाव को देखता है, जिसके
परिणामस्वरूप वैवाहिक सुख एवं दाम्पत्य सुख में कमी का अनुभव होता है । जीवनसाथी
के स्वास्थ्य को लेकर भी चिन्ता का अनुभव हो सकता है । इसके अतिरिक्त बिजनेस
पार्टनर के साथ सम्बन्धों में भी तनाव उत्पन्न हो सकता है । उदर एवं मूत्र
उत्सर्जन तन्त्र से सम्बन्धित रोग परेशान कर सकते हैं ।
चन्द्र लग्न में
गोचर कर रहा शनि अपनी दशम दृष्टि से दशम भाव को देखता है, जो कि कॅरिअर से
सम्बन्धित कुछ समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है । योग्यता एवं परिश्रम के अनुरूप
प्रतिफलों की प्राप्ति नहीं होने से निराशा हो सकती है । इसके अतिरिक्त मिल रहे
अक्सरों का सही उपयोग करने में भी लापरवाही हो सकती है
। कार्यस्थल से सम्बन्धित समस्याएँ भी परेशान कर सकती हैं ।
शारीरिक एवं
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव : शनि का गोचर मीन राशि में शारीरिक और मानसिक
स्वास्थ्य के लिए शुभ संकेत नहीं है । इस अवधि में शारीरिक समस्याएँ उत्पन्न हो
सकती हैं । यदि आप पहले से ही किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ
रहे हैं, तो
इस अवधि में उसके सम्बन्ध में अधिक सतर्कता की आवश्यकता रहेगी । इसके अलावा तनाव, चिंता और अवसाद
जैसी मानसिक समस्याएँ उभर सकती हैं । वाहन, मशीनादि चलाते समय भी सावधानी बरतने की
आवश्यकता है ।
पारिवारिक जीवन
पर प्रभाव : मीन राशि के जातकों के लिए पारिवारिक सुख में इस गोचर के दौरान
उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है । घर में गुस्से, झगड़े और विवाद
की स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं । रिश्तेदारों और कुटुम्बियों से मतभेद, कलह और मुकदमे
की संभावनाएँ बन सकती हैं । परिवार के किसी सदस्य की चिंता भी इस अवधि में आपके मन
को परेशान कर सकती है । सामाजिक प्रतिष्ठा की दृष्टि से यह समय थोड़ा अनुकूल नहीं
है, इसलिए
आपको अपने शब्दों और व्यवहार पर नियंत्रण रखना चाहिए ।
आर्थिक स्थिति
पर प्रभाव: मध्य की साढ़ेसाती की इस गोचरावधि में आर्थिक समस्याएँ एवं संकट रहने
की आशंका है । इन दिनों खर्चों में वृद्धि, आय में कमी और वित्तीय समस्याएं परेशान कर सकती
हैं । यह गोचरावधि ऋण लेने या किसी भी प्रकार के जोखिमपूर्ण निवेश करने के लिए
उपयुक्त नहीं है । सम्पत्ति के मामलों में भी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं यदि आप
पहले से किसी भूमि या संपत्ति संबंधी मामले में फँसे हुए हैं, तो शनि की
वर्तमान स्थिति उसे और जटिल बना सकती है । इस अवधि में आपको अपनी वित्तीय स्थिति
को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है । वित्तीय लेनदेन में भी अतिरिक्त सतर्कता
बरतें ।
नौकरी और कॅरिअर
पर प्रभाव : नौकरी
और कॅरिअर के मामले में मीन राशि के जातकों के लिए यह समय मिश्रित फल देने वाला हो
सकता है । इस अवधि में कार्यभार में वृद्धि के कारण मानसिक और शारीरिक थकान महसूस
हो सकती है । स्थानांतरण की संभावनाएं बन सकती हैं और उच्च अधिकारियों से मतभेद
उत्पन्न हो सकते हैं सहकर्मियों से सहयोग की कमी हो सकती है, जिससे आपका मन
खिन्न हो सकता है । रिश्वत या गबन के आरोप भी लग सकते हैं । कार्य स्थल पर विवाद
और संघर्ष हो सकता है, इसलिये
मानसिक शांति बनाए रखना जरूरी होगा |
कैसा रहेगा मीन
राशि वाले जातकों का व्यवसाय ?
मीन राशि के
व्यवसायियों के लिए शनि का गोचर उनके व्यावसायिक जीवन पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव
डालेगा, क्योंकि
आपकी जन्मराशि के ऊपर से ही शनि का गोचर होगा । इस अवधि में व्यवसाय में सतर्कता
और सोच-समझकर निर्णय लेने की जरूरत है । इस दौरान आपको पुराने कार्यों पर ध्यान
केंद्रित रखना चाहिए और नई शुरूआत को टालना चाहिए |
इस गोचर के
प्रभाव से व्यवसाइयों मे
आलस्य और कार्यों को टालने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है । इसलिए यह आवश्यक है कि आप इन प्रवृत्तियों पर नियंत्रण
रखने का प्रयास करें । अगर आप व्यवसाय में कोई नया कदम उठाना चाहते हैं या किसी नए काम की शुरुआत करना चाहते हैं तो ये
समय सही नहीं हैं |
तृतीय भाव पर
शनि की दृष्टि के परिणामस्वरूप व्यवसाय में आत्मविश्वास एवं निर्णय लेने की क्षमता
में कमी देखने को मिल सकती है । इसके अतिरिक्त इन दिनों उचित सलाह मिलने में भी
कमी का अनुभव हो सकता है,साथ ही ऐसी
भी परिस्थितियाँ बन सकती हैं, जिसमें मिल रही उचित सलाह पर न चलने से नुकसान
हो सकता है ।
शनि के इस
प्रभाव से कभी-कभी आपको ऐसा महसूस होगा कि आपके द्वारा किए गए प्रयासों का परिणाम
उम्मीद के अनुसार नहीं आ रहा है । इसके अलावा व्यवसाय में आपकी मेहनत के बावजूद
सफलता में कमी हो सकती है,
क्योंकि शनि की दृष्टि आपके कर्म भाव पर पड़ रही है । शनि के इस
प्रभाव से सरकारी निर्णयों और नियमों से भी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. जो आपके
व्यवसाय के संचालन पर असर डाल सकती हैं ।
शनि की दृष्टि
चन्द्रकुण्डली के सप्तम भाव पर होने से आपके व्यवसाय में समस्याएँ आ सकती हैं,इसलिए इस समय
आपको साझेदारों से रिश्तों को सुधारने और सामंजस्यपूर्ण बनाए रखने की कोशिश करनी
चाहिए । इसके अलावा अधिक उधार देने से तथा उधार लेने से बचना चाहिए । कानूनी और
सरकारी मामलों में भी सतर्क रहना चाहिए । टैक्स रिटर्न आदि के सम्बन्ध में
लापरवाही नहीं करें।
शनि के गोचर के
दौरान राहतकारी उपाय : शनि के उपाय निम्नलिखित हैं:
सातमुखी रुद्राक्ष
माला सोमवार वा किसी शुभ मुहूर्त में गले में पहनना चाहिए ।
ॐ प्रां प्रीं
प्रौं स: शनये नमः मन्त्र का जप करें ।
प्रतिदिन पीपल
के पेड़ पर जल अर्पित करें ।
भगवान् शिव और
हनुमान जी की पूजा करें और विशेषकर मंगलवार और शनिवार को तुलसीकृत सुंदरकांड का
पाठ करें ।