गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

शनि गोचर का मीन राशि पर प्रभाव

 मीन राशि

दी, दू, , , , दे, दो, चा, ची

मीन राशि वाले जातकों के लिए शनि का गोचर एक चुनौतीपूर्ण समय का संकेत है, जो उनकी राशि में 'मध्य की साढ़ेसाती' के रूप में रहेगा । अपनी जन्मराशि के ऊपर से शनि के गोचर के प्रभाव से शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और आर्थिक स्थितियों के सम्बन्ध में कुछ समस्याएँ एवं चुनौतियाँ प्राप्त हो सकती हैं |

जन्मराशि के ऊपर से गोचर करता हुआ शनि अपनी तीसरी दृष्टि से तृतीय भाव को देखता है, जिसके परिणामस्वरूप जातक के आत्मविश्वास में कमी देखने को मिलती है । पहल करने की क्षमता कम हो जाती है । साथ ही, आलस्य एवं कार्यों को टालने की प्रवृत्ति रहती है भाई-बहिनों से सम्बन्धित कोई समस्या भी परेशान कर सकती है सर्वाइकल, ईएनटी एवं हाथों से सम्बन्धित कोई समस्या भी उत्पन्न हो सकती है ।

चन्द्र लग्न में गोचर करता हुआ शनि अपनी सप्तम दृष्टि से सप्तम भाव को देखता है, जिसके परिणामस्वरूप वैवाहिक सुख एवं दाम्पत्य सुख में कमी का अनुभव होता है । जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर भी चिन्ता का अनुभव हो सकता है । इसके अतिरिक्त बिजनेस पार्टनर के साथ सम्बन्धों में भी तनाव उत्पन्न हो सकता है । उदर एवं मूत्र उत्सर्जन तन्त्र से सम्बन्धित रोग परेशान कर सकते हैं ।

चन्द्र लग्न में गोचर कर रहा शनि अपनी दशम दृष्टि से दशम भाव को देखता है, जो कि कॅरिअर से सम्बन्धित कुछ समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है । योग्यता एवं परिश्रम के अनुरूप प्रतिफलों की प्राप्ति नहीं होने से निराशा हो सकती है । इसके अतिरिक्त मिल रहे अक्सरों का सही  उपयोग करने में भी लापरवाही हो सकती है । कार्यस्थल से सम्बन्धित समस्याएँ भी परेशान कर सकती हैं

शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव : शनि का गोचर मीन राशि में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए शुभ संकेत नहीं है । इस अवधि में शारीरिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं । यदि आप पहले  से ही किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, तो इस अवधि में उसके सम्बन्ध में अधिक सतर्कता की आवश्यकता रहेगी । इसके अलावा तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याएँ उभर सकती हैं । वाहन, मशीनादि चलाते समय भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है ।

पारिवारिक जीवन पर प्रभाव : मीन राशि के जातकों के लिए पारिवारिक सुख में इस गोचर के दौरान उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है । घर में गुस्से, झगड़े और विवाद की स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं । रिश्तेदारों और कुटुम्बियों से मतभेद, कलह और मुकदमे की संभावनाएँ बन सकती हैं । परिवार के किसी सदस्य की चिंता भी इस अवधि में आपके मन को परेशान कर सकती है । सामाजिक प्रतिष्ठा की दृष्टि से यह समय थोड़ा अनुकूल नहीं है, इसलिए आपको अपने शब्दों और व्यवहार पर नियंत्रण रखना चाहिए ।

आर्थिक स्थिति पर प्रभाव: मध्य की साढ़ेसाती की इस गोचरावधि में आर्थिक समस्याएँ एवं संकट रहने की आशंका है । इन दिनों खर्चों में वृद्धि, आय में कमी और वित्तीय समस्याएं परेशान कर सकती हैं । यह गोचरावधि ऋण लेने या किसी भी प्रकार के जोखिमपूर्ण निवेश करने के लिए उपयुक्त नहीं है । सम्पत्ति के मामलों में भी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं यदि आप पहले से किसी भूमि या संपत्ति संबंधी मामले में फँसे हुए हैं, तो शनि की वर्तमान स्थिति उसे और जटिल बना सकती है । इस अवधि में आपको अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है । वित्तीय लेनदेन में भी अतिरिक्त सतर्कता बरतें

नौकरी और कॅरिअर पर प्रभाव : नौकरी और कॅरिअर के मामले में मीन राशि के जातकों के लिए यह समय मिश्रित फल देने वाला हो सकता है । इस अवधि में कार्यभार में वृद्धि के कारण मानसिक और शारीरिक थकान महसूस हो सकती है । स्थानांतरण की संभावनाएं बन सकती हैं और उच्च अधिकारियों से मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं सहकर्मियों से सहयोग की कमी हो सकती है, जिससे आपका मन खिन्न हो सकता है । रिश्वत या गबन के आरोप भी लग सकते हैं । कार्य स्थल पर विवाद और संघर्ष हो सकता है, इसलिये मानसिक शांति बनाए रखना जरूरी होगा |

कैसा रहेगा मीन राशि वाले जातकों का व्यवसाय ?

मीन राशि के व्यवसायियों के लिए शनि का गोचर उनके व्यावसायिक जीवन पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालेगा, क्योंकि आपकी जन्मराशि के ऊपर से ही शनि का गोचर होगा । इस अवधि में व्यवसाय में सतर्कता और सोच-समझकर निर्णय लेने की जरूरत है । इस दौरान आपको पुराने कार्यों पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए और नई शुरूआत को टालना चाहिए |

इस गोचर के प्रभाव से व्यवसाइयों मे आलस्य और कार्यों को टालने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है । इसलिए यह  आवश्यक है कि आप इन प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें । अगर आप व्यवसाय में कोई नया कदम उठाना चाहते हैं या किसी                                                                                                ए काम की शुरुआत करना चाहते हैं तो ये समय सही नहीं हैं |

तृतीय भाव पर शनि की दृष्टि के परिणामस्वरूप व्यवसाय में आत्मविश्वास एवं निर्णय लेने की क्षमता में कमी देखने को मिल सकती है । इसके अतिरिक्त इन दिनों उचित सलाह मिलने में भी कमी का अनुभव हो सकता है,साथ ही ऐसी भी परिस्थितियाँ बन सकती हैं, जिसमें मिल रही उचित सलाह पर न चलने से नुकसान हो सकता है ।

शनि के इस प्रभाव से कभी-कभी आपको ऐसा महसूस होगा कि आपके द्वारा किए गए प्रयासों का परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं आ रहा है । इसके अलावा व्यवसाय में आपकी मेहनत के बावजूद सफलता में कमी हो सकती है, क्योंकि शनि की दृष्टि आपके कर्म भाव पर पड़ रही है । शनि के इस प्रभाव से सरकारी निर्णयों और नियमों से भी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. जो आपके व्यवसाय के संचालन पर असर डाल सकती हैं ।

शनि की दृष्टि चन्द्रकुण्डली के सप्तम भाव पर होने से आपके व्यवसाय में समस्याएँ आ सकती हैं,इसलिए इस समय आपको साझेदारों से रिश्तों को सुधारने और सामंजस्यपूर्ण बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए । इसके अलावा अधिक उधार देने से तथा उधार लेने से बचना चाहिए । कानूनी और सरकारी मामलों में भी सतर्क रहना चाहिए । टैक्स रिटर्न आदि के सम्बन्ध में लापरवाही नहीं करें।

शनि के गोचर के दौरान राहतकारी उपाय : शनि के उपाय निम्नलिखित हैं:

सातमुखी रुद्राक्ष माला सोमवार वा किसी शुभ मुहूर्त में गले में पहनना चाहिए ।  

ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नमः मन्त्र का जप करें ।

प्रतिदिन पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें ।

भगवान् शिव और हनुमान जी की पूजा करें और विशेषकर मंगलवार और शनिवार को तुलसीकृत सुंदरकांड का पाठ करें । 

बुधवार, 2 अप्रैल 2025

शनि गोचर का कुम्भ राशि पर प्रभाव

कुम्भ राशि

गू, गे, गो, सा, सि, सु, से, सो, दा

कुम्भ राशि वालों के लिए शनि का गोचर उनकी जन्मराशि से द्वितीय भाव में रहेगा अभी भी आप साढ़ेसाती के प्रभाव में हैं, परन्तु उतरती साढ़ेसाती होने के कारण कुछ राहत का अनुभव भी देखने को मिलेगा । शनि के इस गोचर का प्रभाव मिश्रित हो सकता है, जिसमें कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में सतर्कता और ध्यान की आवश्यकता रहेगी । कॅरिअर में राहत देखने को मिलेगी, परन्तु स्वास्थ्य एवं पारिवारिक सुख के सम्बन्ध में कुछ विपरीत परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं ।

जन्मराशि से द्वितीय भाव में गोचर कर रहा शनि अपनी तीसरी दृष्टि से चतुर्थ भाव को देखेगा, जिसके परिणामस्वरूप पारिवारिक सुख में कमी देखने को मिल सकती है । परिवार की शान्ति रखने के लिए अधिक धैर्य और संयम का परिचय देना होगा । किसी परिजन के स्वास्थ्य को लेकर भी चिन्ता हो सकती है । स्थायी सम्पत्ति सम्बन्धी मामलों में सतर्कता रखें,लेनदेन में सावधानी बरते |

त्तरती साढ़ेसाती के रूप में द्वितीय भाव में गोचर कर रहा शनि अपनी सप्तम दृष्टि से अष्टम भाव को देखता है, जिसके परिणामस्वरूप कार्यों में अवरोध, आर्थिक हानि दुर्घटना एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के प्रति आप संवेदनशील रहेंगे । पहले से चली आ रही बीमारियों को भी समय-समय पर दिखा रहना चाहिए । जोखिमपूर्ण निवेश से बचना चाहिए । नियमों एवं कानूनों का उल्लंघन न करें अन्यथा परेशानी हो सकती है ।

शनि की एकादश भाव पर भी दृष्टि रहेगी, जिसके परिणामस्वरूप एक ओर जहाँ कॅरिअर में उन्नति से सम्बन्धित मामलों में अवरोध उत्पन्न हो सकते हैं, तो वहीं दूसरी ओर परिश्रम एवं प्रयासों के अनुरूप प्रतिफलों की प्राप्ति न होने से भी निराशा हो सकती है । आय में अपेक्षित वृद्धि न होने की भी आशंका दिखाई दे रही है । मित्रों एवं कुटुम्बियों के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाए रखने में कठिनाई का अनुभव होगा |

स्वास्थ्य पर शनि का प्रभाव : शनि का यह गोचर स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से मिश्रित परिणाम देने वाला हो सकता है हालांकि पूर्व में जो बीमारियाँ चल रही थीं, उनमें कुछ राहत का अनुभव होगा, परन्तु अभी भी स्वास्थ्य का पाया कमजोर बना हुआ है । वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी, क्योंकि पैरों में चोट या किसी अन्य प्रकार की चोट का खतरा हो सकता है । इसके अलावा, जीवनसाथी के स्वास्थ्य की भी आपको विशेष रूप से चिंता करनी चाहिए |

पारिवारिक सुख : पारिवारिक दृष्टिकोण से यह गोचर अवधि पिछले समय की तुलना में राहतकारी रह सकती है। फिर भी परिवार में सुख-शान्ति का माहौल ना के लिए अधिक प्रयासों की जरूरत रहेगी । घर में परिजनों से अच्छे रिश्ते बनाए रखने का अवसर मिलेगा । मांगलिक कार्यों के योग बन रहे हैं और लव रिलेशनशिप भी विवाह संबंधों में बदल सकते हैं । विवाह और संतान के इच्छुक जातकों के लिए यह समय अच्छा हो सकता है ।

आर्थिक सुख - धन और संपत्ति के दृष्टिकोण से शनि का यह गोचर राहत देने वाला है । इस गोचरावधि काम की शुरूआत करना चाहते हैं, तो यह में आकस्मिक खर्चों में कुछ कमी आएगी । भूमि या समय इसके लिए उपयुक्त नहीं है भवन संबंधी कोई नया निवेश करने के योग बन सकते हैं, लेकिन इस मामले में सतर्कता बरतना जरूरी होगा,जमीन-जायदाद के दस्तावेज़ों को ध्यान से जाँचकर ही निर्णय लें और यदि जरूरत हो, तो किसी विशेषज्ञ से राय-मशविरा अवश्य लें ।

नौकरी और करियर नौकरी पेशा जातकों के लिए शनि का यह गोचर मिश्रित परिणाम दे सकता है । कार्यस्थल पर परिस्थितियाँ सामान्य रूप से अनुकूल रहेंगी, लेकिन आपको अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सतर्क रहना होगा । उच्चाधिकारियों और सहकर्मियों से रिश्ते बेहतर हो सकते हैं और कार्यभार में कमी आ सकती है । अपने कामों को जिम्मेदारी से करें और नियमों का उल्लंघन करने से बचें ।

कैसा रहेगा कुम्भ राशि वाले जातकों का व्यवसाय?

कुम्भ राशि वाले व्यवसायियों के लिए शनि का मीन राशि में गोचर उनकी जन्मराशि से द्वितीय भाव में रहेगा, जो कि सामान्यतः शुभ फलदायक नहीं माना जाता है । इस दौरान व्यवसाय में आ रही बाधाएँ धीरे-धीरे कम होने की संभावना है और विस्तार की योजनाएँ बनाने के लिए अधिक अवसर मिल सकते हैं | द्वितीय भाव में शनि का गोचर चतुर्थ, अष्टम और एकादश भावों को भी प्रभावित करता है, जिससे इन क्षेत्रों में कुछ सकारात्मक परिवर्तन हो सकते हैं |

शनि का गोचर व्यापार में आमदनी को बढ़ाने में सहायक हो सकता है । इस अवधि में व्यवसाय का टर्नओवर बढ़ सकता है, जिससे लाभ की संभावना भी अधिक हो सकती है | इसके साथ ही, आकस्मिक खर्चों पर भी नियंत्रण स्थापित होगा, जिससे कुल मिलाकर लाभ में वृद्धि होने की उम्मीद की जा सकती है ।

द्वितीय भाव में शनि के गोचर से चतुर्थ भाव पर दृष्टि पड़ने से स्थायी सम्पत्ति से संबंधित कुछ विवाद उभर सकते हैं । यदि आपका व्यवसाय खान- खनिज या इससे सम्बन्धित क्षेत्र में है, तो इस अवधि में लाभ की संभावना अधिक है । यह भी संभव है कि पैतृक व्यवसाय में कुछ विवाद उत्पन्न हों, लेकिन वे समय के साथ हल हो सकते हैं ।

अष्टम भाव पर शनि की दृष्टि से विदेश व्यापार, विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग, एजेंसी या अन्य व्यावसायिक अवसरों के रास्ते खुल सकते हैं । यदि आप इन क्षेत्रों में प्रयास करेंगे, तो आपके लिए यह लाभकारी हो सकता है । इस गोचरावधि के दौरान आप अपने व्यापार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैला सकते हैं, जिससे नए अवसर और लाभ प्राप्त हो सकते हैं ।

एकादश भाव पर शनि की दृष्टि से आपकी मेहनत और योजनाओं से आय में वृद्धि की संभावना बनती है । यह गोचरावधि उन व्यवसायियों के लिए खास तौर पर लाभकारी है जिनके पास अटके हुए धन की कोई स्थिति है। शनि का यह प्रभाव आपके आर्थिक संकट को दूर करने में मदद करेगा और व्यवसाय में धन निवेश की परिस्थितियाँ भी उत्पन्न करेगा, जिससे आप अपेक्षानुसार लाभ की प्राप्ति कर सकेंगे | इसके अलावा, कार्यों में आ रही बाधाएँ दूर होंगी और व्यवसाय में सफलता की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होगा । इस सकारात्मक प्रभाव के कारण उत्साह और पराक्रम में भी वृद्धि होगी, जो आपके व्यवसाय के लिए शुभ रहेगा |

उपाय: कुम्भ राशि वालों के लिए शनि के अशुभ फलों से बचने के लिए कुछ उपायों को अपनाना चाहिए |

सातमुखी रुद्राक्ष माला सोमवार या किसी शुभ मुहूर्त में गले में पहनना चाहिए ।

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः' मन्त्र का प्रतिदिन एक माला जाप करना चाहिए ।

शनैश्चरी अमावस्या पर तिली का तेल लोहे के चौड़े पात्र में सूर्योदय से पूर्व या सूर्यास्त के बाद भरकर में अपना मुख देखें और किसी असहाय व्यक्ति को दान करें ।

मंगलवार, 1 अप्रैल 2025

शनि का मीन राशि गोचर प्रभाव - मकर राशि

मकर राशि

भो, जा, जी, जू, खी, खू, खो, गा

मकर राशि वालों के लिए शनि का मीन राशि में गोचर एक सुखद परिवर्तन लेकर आया है । इस गोचर का प्रभाव विशेष रूप से शनि की साढ़ेसाती के समाप्त होने के साथ जुड़ा हुआ है । शनि के साढ़ेसाती के बाद अब मकर राशि वालों के लिए यह समय न केवल राहतकारी रहेगा, वरन् नवीन अवसर भी प्रदान करेगा । भाग्य का साथ मिलेगा तथा कार्यों में आ रहे अवरोध दूर होंगे,सकारात्मक दृष्टिकोण में वृद्धि देखने को मिलेगी । इन सबके परिणामस्वरूप परिश्रम एवं प्रयासों के अनुरूप प्रतिफलों की प्राप्ति होगी।

जन्मराशि से तृतीय भाव में गोचर कर रहे शनि की तीसरी पूर्ण दृष्टि पंचम भाव पर पड़ेगी, जिसके चलते मकर राशि वाले जातकों को यश और प्रसिद्धि के नवीन अवसर प्राप्त होंगे । सन्तति से सम्बन्धित शुभ समाचारों की प्राप्ति होगी,साथ ही, इतिहास, पुराण, ज्योतिष एवं पराविद्याओं के अध्ययन में अभिरुचि बढ़ेगी

तृतीय भाव में गोचर कर रहे शनि की सप्तम दृष्टि नवम भाव पर रहेगी, जिसके प्रभाव से भाग्य का साथ मिलने लगेगा तथा कॅरिअर में बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे,माता-पिता से कुछ मतभेद रह सकते हैं

शनि का द्वादश भाव पर भी दृष्टि प्रभाव रहेगा, जिसके परिणामस्वरूप विगत गोचरावधि में जो अनाश्यक खर्चों में वृद्धि हुई थी, उस पर प्रभावी नियन्त्रण सम्भव होगा। स्वास्थ्य बेहतर होगा तथा सामाजिक एवं परोपकार से सम्बन्धित गतिविधियों में सक्रियता बढ़ेगी |

स्वास्थ्य का सुधार : शनि के मीन राशि में गोचर के दौरान मकर राशि वालों के स्वास्थ्य में सुधार होगा । आपका आत्मविश्वास और मनोबल मजबूत होगा । दीर्घकालिक बीमारियों में राहत का अनुभव होगा  |

पारिवारिक सुख में वृद्धि पारिवारिक जीवन में : तृतीय भाव में शनि के गोचर का प्रभाव सामान्य रूप से सकारात्मक रहेगा,पिछले कुछ समय से जो पारिवारिक समस्याएँ और गृहक्लेश की परिस्थितियाँ चल रही थीं, उनमें अब राहत देखने को मिलेगी । आपसी सामंजस्य और समझ बढ़ेगी हालाँकि भाई-बहिनों के साथ आपके सम्बन्धों में थोड़ी चिंता हो सकती है, लेकिन यह गोचर आपके लिए पारिवारिक सम्बन्धों में सुधार लाने में सहायक रहेगा । घर में मांगलिक कार्यों के होने के योग बन रहे हैं और विवाह तथा सन्तान सम्बन्धी इच्छाएँ पूरी हो सकती हैं । सामाजिक मान-सम्मान में भी वृद्धि होगी

आर्थिक स्थिति में सुधार : आर्थिक दृष्टि से शनि का मीन राशि में गोचर आपके लिए शुभ रहेगा । इस अवधि में आपकी आय के स्रोतों में जो रुकावटें आई थी, वे समाप्त हो सकती हैं । नए आय के स्रोत उत्पन्न होंगे और पुराने निवेश से लाभ प्राप्त होगा । इस अवधि में उधारी की समस्याएँ भी कम हो सकती हैं,खर्चों पर नियंत्रण रहेगा और आपको अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने का अच्छा अवसर मिलेगा । इसके अलावा, अचल संपत्ति के मामलों में भी शुभ समाचार मिल सकते हैं । नए निवेश की योजना बन सकती है और शेयर, म्यूचुअल फण्ड आदि से लाभ होने के योग बन रहे हैं |

नौकरी और कॅरिअर : इस गोचर का प्रभाव नौकरी और कॅरिअर पर भी सकारात्मक होगा । नौकरीपेशा मकर राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। पदोन्नति, वेतन वृद्धि, और उच्च अधिकारियों से सकारात्मक समाचार मिलने की संभावना है । आपके कार्यों की समय पर सफलता से आपको मानसिक संतोष मिलेगा और आप अपने लक्ष्यों को शीघ्रता से पूरा कर पाएँगे । यदि आप बेरोजगार हैं, तो इस अवधि में आपको नौकरी प्राप्त होने के योग बन रहे हैं |

कैसा रहेगा मकर राशि वाले जातकों का व्यवसाय?

मकर राशि के व्यवसायियों के लिए शनि का मीन राशि में गोचर शुभ समाचार लेकर आ रहा है। अब आपकी साढ़ेसाती समाप्त हो गई है और शनि आपके लिए इस गोचरावधि में शुभ फलप्रद रहेंगे । यह गोचर आपके लिए नए लाभकारी अवसर लेकर आएगा। इस अवधि में व्यवसायियों को अपने कारोबार को विस्तार देने के लिए नए अवसर मिलेंगे और वे अपनी योजनाओं को सफलतापूर्वक क्रियान्वित कर पाएँगे । धनलाभ में वृद्धि साथ ही बिक्री में भी वृद्धि होने के आसार हैं । इसके अलावा, साझेदारों और सप्लायरों से अच्छा सहयोग मिलेगा

शनि का यह गोचर व्यवसायियों के अंदर न केवल उद्यमशीलता को बढ़ाएगा, वरन् उनके कार्यों में दृढ़ निश्चय और पहल करने की प्रवृत्ति को भी जाग्रत करेगा। इस दौरान व्यवसायी नए अवसरों को पहचानने में सक्षम होंगे और उनका समुचित लाभ भी उठा पाएँगे। इस अवधि में सम्पत्ति में वृद्धि की संभावना है साथ ही, जो धन निवेश पहले किया गया था, उस पर अच्छे लाभ की प्राप्ति हो सकती है । इस अवधि में जो उधारी अटकी हुई थी, उसकी वसूली के योग भी बन रहे हैं, जिससे व्यवसायियों को आर्थिक लाभ होगा

तृतीय भाव में गोचर कर रहे शनि की तीसरी दृष्टि पंचम भाव पर पड़ेगी, जिसके फलस्वरूप व्यवसायी वर्ग अपने व्यवसाय की ब्राण्डिंग एवं इमेज बनाने की ओर प्रवृत्त होगा। डिजीटल मार्केटिंग एवं अन्य तरीकों से व्यवसाय में वृद्धि प्रयास होंगे |

शनि की दृष्टि नवम भाव पर होने से समाजसेवा, धर्म और परोपकार से जुड़े कार्यों में वृद्धि होती है । व्यवसायियों को इस अवधि में सामाजिक कार्यों में सक्रियता दिखाने का अवसर मिलेगा । वे अपने व्यवसाय से जुड़े सामाजिक दायित्वों को करने में भी सफल पूरा होंगे । द्वादश भाव पर शनि की दृष्टि से दान और परोपकार सम्बन्धी मामलों में सक्रियता रहेगी । इस गोचरावधि में विदेश से व्यापार के अवसर भी मिल सकते हैं और विदेशी कंपनियों के साथ व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित होने की संभावना है

शनि के गोचर का राहतकारी उपाय : शनि की इस गोचरावधि से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं |

पाँच कैरेट अथवा उससे अधिक वजन का नीलम शनिवार या किसी शुभ मुहूर्त में दाहिने हाथ की मध्यमा अँगुली में धारण करना चाहिए |

ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का नियमित रूप से जप करें

वृद्धों और रोगियों की सेवा करना चाहिए |

शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाने से शनि के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाया जा सकता है । 

रविवार, 30 मार्च 2025

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 2025 - नववर्ष प्रवेश लग्न

29 मार्च, 2025 को 16:28 बजे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ नव संवत्सर का आरम्भ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र एवं ब्रह्मयोग में और सिंह लग्न (दिल्ली के अक्षांश-रेखांश पर) में होगा । लग्नेश सूर्य अष्टम भाव में चन्द्रमा, बुध, शुक्र और राहु के साथ मिलकर पंचग्रही युति बना रहा है,जो कि शुभ नहीं कहा जा सकता । यह एक ओर जहाँ राजनीतिक अस्थिरता एवं कानून व्यवस्था के सम्बन्ध में अशुभ फलों का संकेत दे रहा है,वहीं दूसरी ओर अनुसंधान,विज्ञान एवं तकनीकी तथा अन्तरिक्षीय अनुसंधान के क्षेत्र में बेहतर फल प्राप्ति का योग भी बना रहा है ।

आयेश - धनेश बुध की अष्टम भाव में अस्तंगत स्थिति काले धन की अर्थव्यवस्था में वृद्धि का संकेत दे रही है, तो वहीं देश की आर्थिक विकास दर एवं प्रतिव्यक्ति आय में अपेक्षानुरूप वृद्दि ना होने के संकेत भी दे रही हैं |

इस प्रकार अर्थव्यवस्था की दृष्टि से अच्छे संकेत नहीं मिल रहे हैं । इस अवधि में विदेशी व्यापार में भी उतार-चढाव देखने को मिल सकते हैं । अन्तरराष्ट्रीय परिदृश्य में बदलाव के चलते भी अर्थ व्यवस्था प्रभावित हो सकती है । इस वर्ष शेयर मार्केट में भी अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं । महँगाई में वृद्धि भी वर्ष पर्यन्त रहने की सम्भावना है, तो वहीं भ्रष्टाचार आदि में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है ।

तृतीयेश-दशमेश शुक्र का लग्नेश सूर्य के साथ युति सम्बन्ध अच्छा माना जाता है, परन्तु यह युति सम्बन्ध अष्टम भावगत होने से तथा शुक्र के अस्तंगत होने से इसके अपेक्षानुरूप प्रतिफलों की प्राप्ति होना कठिन ही है । सरकार की पहल करने की क्षमता उसके साहस एवं निर्णय लेने की क्षमता में कमी देखने को मिल सकती है |सरकार से अपेक्षानुरूप शासन-प्रशासन नहीं होने से भी व्यवस्थाएँ असंतुलित हो सकती है ।

अष्टम भाव में पंचग्रही युति के चलते सीमाओं पर तनाव एवं घुसपैठ की घटनाएँ देखने को मिल सकती हैं | सप्तम भाव में कुम्भ राशि और उसमें शनि की उपस्थिति पड़ोसी देशों के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाए रखने में बाधक दिखाई दे रही है ।

चतुर्थेश मंगल की एकादश भाव में उपस्थिति रिअल सेक्टर के लिए कुछ अच्छा संकेत माना जा सकता है । इस सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है । साथ ही, प्रॉपर्टी की कीमतों में भी वृद्धि दिखाई दे सकती है । बिजली एवं अन्य आधारभूत संरचनाओं में यह सुदृढ़ता का भी संकेत है | दशम भाव में गुरु की उपस्थिति सरकार की लोककल्याणकारी नीतियों में वृद्धि का संकेत भी कर रही है।

अष्टम भाव में पंचग्रही युति प्राकृतिक आपदाओं का भी संकेत कर रही है । इसके अतिरिक्त सरकार को सीमाओं पर ध्यान रखने की भी चेतावनी दे रही है । साथ ही, कानून और व्यवस्था के समक्ष बड़ी चुनौतियों तथा साइबर क्राइम में वृद्धि, सीमा पार से आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि तथा नशा एवं मादक द्रव्यों की तस्करी और सीमापार से अपराधों में वृद्धि देखने को मिल सकती है ।

कुलमिलाकर नवसंवत्सर की यह कुण्डली राजनीति, अर्थव्यवस्था, महँगाई, कानून और व्यवस्था तथा सीमा के सम्बन्ध में चेतावनी दे रही है, तो वहीं आधारभूत संरचना एवं लोककल्याणकारी नीतियों के सम्बन्ध अच्छा संकेत दे रही है ।