मंगलवार, 20 सितंबर 2022

कुआं नंबर 2

सबसे पहले आपको ज्योतिषीय चार्ट बनाकर उसकी विशेषताओं,घटनाओं की प्रकृति,शुभ रंगों और सर्वोत्तम दिशाओं का विस्तृत अध्ययन प्राप्त करने के लिए इसका विश्लेषण करना चाहिए । कुआ अंक किसी व्यक्ति और उसके व्यक्तित्व की शुभ दिशाओं को विस्तार से बताता है । कुआ संख्या की गणना केवल जन्म के वर्ष का उपयोग करके की जाती है । जादू और भाग्यशाली और शुभ संख्या की गणना पूर्ण जन्म तिथि (तिथि माह और वर्ष के साथ) का उपयोग करके की जाती है ।

प्रत्येक कुआ संख्या राशि चक्र द्वारा सुझाई गई एक विशेष प्रकार की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है । हर कोई इस पर अपना नंबर पा सकता है और अपनी ऊर्जा की खोज कर सकता है ।

संख्याओं द्वारा दी गई ऊर्जा नीचे दी गई है ।

नंबर एक - पानी, सर्दी, स्वतंत्र, प्रकृति और सहज ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है |

नंबर दो - पृथ्वी, देर से गर्मियों और प्रकृति में मेथडिकल तरीको का प्रतिनिधित्व करता है ।

नंबर तीन - प्रकृति में गड़गड़ाहट,वसंत और प्रगतिशीलता का प्रतिनिधित्व करता है ।

नंबर चार - हवा का, देर से वसंत, अनुकूलनीयता का प्रतिनिधित्व करता है |

संख्या पांच - पृथ्वी, केंद्रीय बल और प्रकृति में मुखरता का प्रतिनिधित्व करती है ।

नंबर छह - स्वर्ग, देर से शरद ऋतु और अडिगता का प्रतिनिधित्व करता है ।

अंक सात - झील का शरद ऋतु, व्यवहार्य, स्वभाव से घबराया व्यक्तिव आदि का प्रतिनिधित्व करता है |

आठवां अंक – पर्वतमाला,सर्दियों में जिद्दी,प्रकृति में ऊर्जावान होने का प्रतिनिधित्व करता है ।

नंबर नौ - स्वभाव से सामान्य,गर्मी मे आवेगी प्रवृति और बुद्धिमान होने का प्रतिनिधित्व करता है |

इन 9 नंबरों से दो समूह बनाये जाते हैं पूर्व समूह और पश्चिम समूह ।

पूर्व समूह कुआ संख्या 1, 3, 4, 9 और शुभ दिशाओ N,E,SE,S का प्रतिनिधित्व करता है ।

पश्चिम समूह कुआ संख्या 2, 5, 6, 7, 8 और शुभ दिशाएँ SW,NW,W,NE CENTRE का प्रतिनिधित्व करता है |

फेंगशुई निश्चित रूप से आपको समृद्ध बनने में मदद कर सकता है लेकिन इसके विषय मे आपको पहले से जानकारी होनी चाहिए । वैसे भी यदि आप अपने कुआ संख्या के अनुसार कार्यालय में अपनी सीट की स्थिति, दरवाजे की दिशा और बैठने की स्थिति बदलते हैं तो आप निश्चित रूप से अपने जीवन में सद्भाव,संपन्नता  और शांति प्राप्त कर सकते हैं ।

सोमवार, 19 सितंबर 2022

छठी इंद्रिय कैसे जाग्रत होती हैं |


हमारे शरीर मे मस्तिष्क के भीतर, कपाल के नीचे एक छिद्र होता है,जिसे ब्रह्मरन्ध्र कहा जाता है । वहां से सुषुम्ना नाड़ी रीढ़ के अन्दर से होती हुई मूलाधार तक जाती है । मुख्य दो नाड़ियां होती हैं । इड़ा (चन्द्र, ठंडी) नाड़ी शरीर के बायीं तरफ स्थित है तथा पिंगला (सूर्य,गर्म) नाड़ी शरीर के दायीं ओर स्थित है । ये हर घंटे में बदलती रहती हैं । जब श्वास दोनों नासिकाओं से बहता है, तब चेतना अन्तर्मुखी होती है । तब ध्यान करना उपयोगी होता है जिससे मन शांत बना रहता हैं शून्यता का अनुभव होने लगता हैं हम इसे दिव्य दृष्टि प्राप्त करना भी कह सकते हैं ।

छठी इन्द्रिय की उपयोगिता -

1)अतीत में जाकर घटना की सच्चाई का पता लगाया जा सकता है

2)व्यक्ति को भविष्य में झांकने की क्षमता प्राप्त हो जाती है

3)मीलों दूर बैठे व्यक्ति की बात सुनी जा सकती है

4)किसके मन में क्या चल रहा है, वह आसानी से जाना जा सकता है

5)किसी के मन में अपने अनुकूल विचार उत्पन्न किए जा सकते हैं

6)दूर से ही रोगी को ठीक किया जा सकता है

7)स्मृति तेज बनी रहती है

 

छठी इन्द्रिय जागरण विधिः

1) सुषुम्ना चलाना पश्चिमोत्तानासन, जानुशिरासन, सिद्धासन के अभ्यास से दोनों नासिकाओं से श्वास प्रवाहित होने लगता है । काकी मुद्रा अर्थात् दाएं हाथ के अंगूठे को बायीं काख में तथा बाएं हाथ के अंगूठे को दायीं काख (बगल) में रखने से भी सुषुम्ना चलने लगती है । भस्त्रिका, कपालभाति तथा अनुलोम - विलोम प्राणायाम करने से भी सुषुम्ना सक्रिय हो जाती है

2) ध्यान - आज्ञाचक्र ज्ञान का केन्द्र है । भ्रूमध्य (दोनों भौहों के बीच ध्यान) प्रातः - सायं ध्यान करें । सहस्रार चक्र भी छठी इन्द्रिय जागरण में सहायक है । ध्यान का नियमित अभ्यास करते रहें । श्वासप्रश्वास पर भी ध्यान कर सकते हैं । श्वास के साथ सोऽहं मंत्र का जाप कर सकते हैं । प्रकाश या नाद प्रकट होगा । मन को स्थिर व नीरव करना आवश्यक है । अभ्यास 40 मिनट तक करें ।

3) त्राटक - एकाग्रता व मन को स्थिर करने के लिए आन्तरिक व बाहरी त्राटक काफी मददगार सिद्ध होता है । किसी त्राटक यंत्र या सर्दी में दीपक मोमबत्ती पर अथवा शाम्भवी मुद्रा पर त्राटक करने का अभ्यास करें । दो मिनट से 45 मिनट तक बढ़ाएं । मेरा शाम्भवी मुद्रा का अभ्यास 45 मिनट रहा । जिसके नेत्र कमजोर हों, वे बाहरी त्राटक न करें

4)गायत्री मंत्र का जाप - यह महामंत्र प्रज्ञा - प्रदायक है, सुप्त शक्तियों को जगाता है । साधना व सिद्धियों को प्राप्त करने में सहायक है । मन की शक्ति को बढ़ाता है । तीन से तीस माला तक जपें

5)दिनचर्या के उल्टे क्रम का चिंतन करें - सोने से पहले नींद आने से लेकर सवेरे तक की घटनाओं का स्मरण करें। इसी तरह पीछे ही पीछे स्मरण करें । यहां तक कि पिछले जन्म के संकेत मिलने लगेंगे । सोई शक्ति व प्रज्ञा जागेगी

जब सपनो मे अनायास ही पूर्वाभ्यास होने लगे, तरल कंठ से स्वतः ही कोई बात मुख से फूटना चाहे, तो जानें कि जो कुछ अनुभव हो रहा है, यदि वह सच हो रहा है तो आपकी छठी इन्द्रिय जाग रही है

यदि लगे कि संकल्प मन में उठते ही मनचाही बात पूरी हो रही है तो मानें कि आपकी सिक्स्थ सेंस जाग्रत होने वाली है

साधना शुद्ध वातावरण में, नियमित, दृढ़ संकल्प के साथ निष्ठापूर्वक सम्पन्न करें ।

 

 

शनिवार, 17 सितंबर 2022

ज्योतिषीय भविष्यवाणियां

ज्योतिषीय भविष्यवाणी के बारे में आम तौर पर लोगो की राय विभाजित सी रहती हैं । वास्तव में, ये विचार प्रकृति की गलतफहमी पर आधारित हैं कि ज्योतिष वास्तव में कैसे काम करता है । हालांकि यह सच्चे आस्तिक के लिए एक आश्चर्य के रूप में आ सकता है |

कई ज्योतिषियों का मानना ​​​​है कि ज्योतिष आपके भविष्य के बारे में सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकता है, हालांकि ज्योतिष वास्तव में आपके भविष्य की प्रवृत्तियों को प्रकट कर सकता है ।

यदि कोई ज्योतिषी आपको बताता है कि अगले मंगलवार को आप सड़क पर चल रहे होंगे, और गलती से गिर कर आपकी बायीं कलाई टूट जाएगी क्योंकि कुंडली मे ऐसा दिखाई दे रहा है, तो यह एक बहुत सटीक भविष्यवाणी होगी, लेकिन कोई भी ज्योतिषी कभी भी ऐसी भविष्यवाणी नहीं करता । ज्योतिषी कुछ इस प्रकार से कहेगा : अगले मंगलवार को दुर्घटना होने का कुछ खतरा है; सामान्य से अधिक सावधान रहने की कोशिश करें । यह निश्चित रूप से एक सटीक भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि कुछ ज्योतिषीय तकनीकों के आधार पर एक निश्चित प्रकार की घटना की संभावना में वृद्धि के बारे में एक बयान है । यह ज्योतिष की असली ताकत है: आपको यह बताने के लिए नहीं कि क्या होने वाला है (क्योंकि वह अपनी क्षमताओं से परे है) बल्कि आपको कुछ प्रकार की घटनाओं के होने की संभावना के बारे में सूचित करने के लिए हैं

भविष्यवाणी करने के लिए ज्योतिष का उपयोग नहीं किया जाता है । इसका उपयोग आपके जीवन के पैटर्न और दिशाओं में अंतर्दृष्टि और समझ हासिल करने में आपकी सहायता के लिए किया जाता है । यह निरपेक्ष नहीं है, लेकिन यह एक संकेतक मात्र है । यदि आपको वह पसंद नहीं है जो आपके ज्योतिषी या जन्म के चार्ट आपको बताते हैं, तो निश्चित रूप से इसे बदलना आपकी शक्ति आपके भीतर है । ज्योतिष आपको एक संभावित भाग्य के बारे में जानकारी दे सकता है, लेकिन भविष्य में क्या होगा, इसकी किसी भी डिग्री की सटीकता के साथ भविष्यवाणी करने के लिए आपके द्वारा किए गए निर्णयों सहित बहुत सारे अन्य तरीके भी  हैं ।

राशि चक्र में कुंभ राशि के बाद महान वर्ष (लगभग 2000-4000 सीई) मकर राशि का युग आएगा । तब तक मानव की स्थिति क्या होगी, इसका अनुमान लगाना कठिन है । क्या हम अन्य ग्रहों और सौर मंडल में चले गए होंगे । यदि कुम्भ के युग को मानवतावाद और पृथ्वी पर लोगों के बीच अधिक समझ से चिह्नित किया जाना है  तो मकर राशि के युग को क्या परिभाषित करेगा । क्या हम कुंभ राशि के लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे। बहुत से लोग नई सहस्राब्दी और महान वर्ष में एक नए युग की शुरुआत को इस उम्मीद के साथ देखते हैं कि हमने अतीत की गलतियों से सीखा होगा । उम्मीद है कि हम सीखना जारी रखेंगे और मकर राशि के युग में और भी अधिक मानवीय क्षमता के लिए विकसित होंगे ।

 

गुरुवार, 15 सितंबर 2022

चीनी राशि चक्र के नक्षत्र

प्राचीन चीनी ज्योतिषियों ने बाहरी दुनिया के लोगों के साथ बहुत कम या बिना संपर्क के काम किया । इस  का मतलब है कि पश्चिमी दुनिया में हम जिन नक्षत्रों को जानते हैं, वे चीनी ज्योतिष में अनसुने हैं । उनके पास पूरी तरह से अपना ही एक ज्योतिषीय सिस्टम है ।

प्राचीन चीन के ज्योतिषियों ने अपने आकाश को 31 वर्गों या क्षेत्रों में विभाजित किया । उत्तरी आकाशीय ध्रुव को बनाने वाले तीन खंडों को थ्री एनक्लोजर कहा जाता है । इन क्षेत्रों में तारे पूरे वर्ष में हर समय देखे जा सकते हैं । तीन बाड़ों में से प्रत्येक का एक नाम है और रात के आकाश के एक विशिष्ट क्षेत्र का नियम है । पहले एनक्लोजर को पर्पल फॉरबिडन एनक्लोजर कहा जाता है । यह खंड आकाश के सबसे उत्तरी क्षेत्र को नियंत्रित करता है । प्राचीन चीन में, यह आकाश का मध्य होता था । इसके बाद सुप्रीम पैलेस एनक्लोजर है, जो पर्पल फॉरबिडन एनक्लोजर के पूर्व और उत्तर में स्थित है । अंत में, सुप्रीम पैलेस एनक्लोजर हैं जो पश्चिम और दक्षिण के क्षेत्र पर हावी है ।

शेष अट्ठाईस क्षेत्र एक साथ हैं, जिन्हें अट्ठाईस हवेली कहा जाता है । साथ में, ये खंड एक चंद्र महीने में चंद्रमा की चाल को दर्शाते हैं । आकाश में प्रत्येक दृश्यमान तारे को 283 क्षुद्रग्रहों में से एक को सौंपा गया है । किसी तारे के नाम का निर्माण नियत तारे के नाम और तारे की संख्या को मिलाकर किया जाता है ।

अट्ठाईस हवेली को चार प्रतीकों के रूप में जाना जाता है । प्रत्येक प्रतीक में समान संख्या में हवेली होती है । ये प्रतीक हैं द एज़्योर ड्रैगन ऑफ़ द ईस्ट, द ब्लैक टोर्टोइज़ ऑफ़ द नॉर्थ, द व्हाइट टाइगर ऑफ़ द वेस्ट, और द वर्मिलियन बर्ड ऑफ़ द साउथ ।

अट्ठाईस हवेली में से प्रत्येक का नाम पारंपरिक चीनी और पिनयिन दोनों में रखा गया है । जबकि नामों के अर्थ का अंग्रेजी में जो अनुवाद किया जा सकता है, वो वास्तविक नाम नहीं हैं ।

मंगलवार, 13 सितंबर 2022

अपने कुआं नंबर से ऐसे लाभ लीजिये

फेंग शुई में बहुत सारी अवधारणाएं प्रचलित हैं जिनमें से एक है एट मैन्सन | एट मैन्सन की अवधारणा के अनुसार हममें से प्रत्येक व्यक्ति का एक अति महत्वपूर्ण नंबर होता है जिससे हमारे जीवन की दशा-दिशा निर्धारित होती है । इस नंबर को फेंग शुई में कुआ नम्बर की संज्ञा दी गई है ।

कुआ नम्बर का निर्धारण हमारी जन्म तिथि के आधार पर होता है । कुआ नम्बर की गणना करने के उपरांत हमें पता चलता है कि कौन सी दिशाएं एवं रंग हमारे लिए सौभाग्यशाली हैं तथा अगर हम उन दिशाओं एवं रंगों को महत्व प्रदान कर अपनी जीवन शैली को उसी के अनुरूप ढालें तो ऐसा करना हमारे जीवन में असीम सफलता का मार्ग प्रशस्त कर सकता है । इसी प्रकार कुआ नम्बर के अनुसार हमारे लिए कुछ नकारात्मक दिशाएं होंगी जिनका त्याग करना हमारे सुखी जीवन के लिए अति आवश्यक है ।

कुआँ नंबर की गणना जन्म तिथि के आधार पर की जाती है, हालांकि पुरूषों एवं महिलाओं के लिए गणना की विधि में थोड़ी भिन्नता है । मान लीजिए कि आप एक पुरुष हैं तथा आपकी जन्मतिथि 15 फरवरी 1967 है । आपके कुआ नम्बर की गणना निम्न प्रकार से होगी :

चरण 1 : अपने जन्मवर्ष के अंतिम दो अंकों को जोड़ें तथा यदि पुनः दो अंक बने तो उसे जोड़कर एकल अंक में परिवर्तित करें ।

उदाहरण: यहां जन्मवर्ष 1967 है । अतः अंतिम दो अंक अर्थात् 6+7 = 13, इसे एकल अंक में परिवर्तित करने पर बना अंक 1+3=4

चरण 2 : चरण 1 में जो अंक प्राप्त हुआ है उसे 10 में से घटा दें । जो अंक प्राप्त होगा वही आपका कुआ नम्बर है । इस उदाहरण मे कुआँ नंबर होगा 10-4=6

अब प्रश्न ये उठता हैं की जब जन्म वर्ष की अंतिम दो अंको से गणना हो जाती हैं तो पूरी जन्मतिथि के क्या आवश्यकता है । हा इसकी आवश्यकता है । यदि जन्म किसी भी वर्ष के फरवरी या उसके उपरांत हुआ है तो यह नियम हूबहू लागू होगा किंतु यदि जन्म 4 फरवरी के पूर्व हुआ है तो गणना के पश्चात इसमें 1 और जोड़ना होगा ।

मान लीजिए कि इसी उदाहरण में जन्म तिथि 5 जनवरी 1967 होता तो ऐसी स्थिति में कुआ अंक की में गणना करने के उपरांत 1जोड़ना पड़ता । अतः यदि जन्म 4 फरवरी के पूर्व का होगा तो कुआ अंक की गणना के बाद उसमे एक जोड़ना होगा |

अब मान लीजिए कि आप एक महिला है तथा आपकी भी जन्म तिथि 15 फरवरी 1967 ही है महिला होने के कारण आप का कुआं नंबर की गणना निम्न प्रकार से की जाएगी |

चरण 1- अपने जन्म वर्ष के अंतिम 2 अंकों को जोड़कर उसे एकल अंक में परिवर्तित करें उदाहरण है 6+7=13 तथा 1+3 = 4

चरण 2 : जो अंक चरण 1 में प्राप्त हुआ उसमें 5 और जोड़ दें । उदाहरण 4+5 = 9। इस प्रकार - प्राप्त अंक 9 आपका कुआ नम्बर हुआ ।

ध्यातव्य : महिलाओं के लिए भी नियम वही है । यदि आपका जन्म 4 फरवरी से पहले हुआ हो तो गणना में प्राप्त हुए कुआ नम्बर में 1 और जोड़ दें ।

शुभ अथवा अशुभ दिशाएं

कुआ अंकों को दो विभागों में विभाजित किया गया है । वे हैं पूर्वी समूह एवं पश्चिमी समूह ।

पूर्वी समूह : पूर्वी समूह के अंतर्गत अंक 1, 3, 4, एवं 9 को रखा गया है । जिन व्यक्तियों के कुआ नम्बर पूर्वी समूह के अंतर्गत उपर्युक्त अंकों में से एक है, उनके कुआ नम्बरों के लिए शुभ एवं अशुभ दिशाएं निम्न प्रकार से होंगी जिनका सही तरह से अनुपालन करने पर जीवन में इच्छित फल की प्राप्ति हो सकती है तथा सफलता कदम चूम सकती है ।

कुआँ नंबर 1 (शुभ दिशाए)

दक्षिण पूर्व – सर्वश्रेष्ठ

पूर्व – उत्तम  

दक्षिण – मध्यम

उत्तर – सामान्य

अशुभ दिशाए

दक्षिण – पश्चिम – अत्यंत शुभ

उत्तर पूर्व – अशुभ

उत्तर-पश्चिम – अशुभ

पश्चिम – अशुभ

सौभाग्यशाली रंग – काला एवं गहरा नीला

 

कुआँ नंबर 3 (शुभ दिशाएं)

दक्षिण - सर्वश्रेष्ठ

उत्तर – उत्तम

दक्षिण पूर्व – मध्य

पूर्व - सामान्य

अशुभ दिशाएं

पश्चिम - अत्यंत अशुभ

उत्तर पश्चिम - अशुभ

उत्तर पूर्व – अशुभ

दक्षिण-पश्चिम – अशुभ

सौभाग्यशाली रंग - हरा


कुआं नंबर 4 (शुभ दिशाए)

उत्तर - सर्वश्रेष्ठ

दक्षिण - उत्तम

पूर्व – मध्य 

दक्षिण पूर्व - सामान्य

शुभ दिशाएं

उत्तर पूर्व - अत्यंत अशुभ

दक्षिण पश्चिम – अशुभ

पश्चिम – अशुभ

उत्तर – अशुभ

सौभाग्यशाली रंग - गहरा हरा


कुआँ नंबर 9 (शुभ दिशाएं)

पूर्व - सर्वश्रेष्ठ

दक्षिण पूर्व – उत्तम

उत्तर - मध्यम

दक्षिण – सामान्य

अशुभ दिशाएं

उत्तर पश्चिम - अत्यंत अशुभ

पश्चिम – अशुभ

दक्षिण पश्चिम – अशुभ

उत्तर पूर्व – अशुभ

सौभाग्यशाली रंग - लाल एवं बैंगनी |  


पश्चिमी समूह के अंतर्गत अंक 2,5,6 एवं 8 को रखा गया है | पश्चिमी समूह के अंतर्गत हुआ नंबरों के लिए शुभ एवं अशुभ दिशाएं तथा सौभाग्यशाली रंग निम्न प्रकार से हैं |

कुआं नंबर दो (शुभ दिशाएं)

उत्तर-पूर्व – सर्वश्रेष्ठ

पश्चिम - उत्तम

उत्तर पश्चिम - मध्यम

दक्षिण पश्चिम – सामान्य

अशुभ दिशाए

दक्षिण पूर्व अत्यंत अशुभ

दक्षिण-पूर्व/दक्षिण/पूर्व –अशुभ  

सौभाग्यशाली रंग - भूरा पीला एवं पीला भूरा |


कुआँ नंबर 5 के शुभ तथा अशुभ दिशाओं का कारकत्व पुरुष एवं महिला के अलग-अलग होता है |

पुरुष के लिए शुभ दिशाएं

उत्तर पूर्व - सर्वश्रेष्ठ

पश्चिम – उत्त

उत्तर पश्चिम -  मध्यम

दक्षिण पश्चिम – सामान्य

पुरुष के लिए अशुभ दिशाएं

उत्तर - अत्यंत अशुभ

दक्षिण पूर्व/दक्षिण/पूर्व अशुभ

सौभाग्यशाली रंग - हल्का पीला एवं बिस्कूटी पीला

महिलाओं के लिए शुभ दिशाएं

दक्षिण पश्चिम – सर्वश्रेष्ठ

उत्तर पश्चिम – उत्त

पश्चिम - मध्यम

उत्तर पूर्व - सामान्य

महिला के लिए अशुभ दिशाएं

दक्षिण पूर्व - अत्यंत अशुभ

उत्तर – अशुभ

पूर्व – अशुभ

दक्षिण पश्चिम – अशुभ

सौभाग्यशाली रंग - हल्का पीला बिस्कुटी एवं पीला |


कुआँ नंबर 6 (शुभ दिशाएं)

पश्चिम - सर्वश्रेष्ठ

उत्तर पूर्व -उत्तम

दक्षिण पश्चिम - मध्यम

उत्तर पश्चिम – सामान्य

अशुभ दिशाएं

दक्षिण - अत्यंत अशुभ

पूर्व/उत्तर एवं दक्षिण पूर्व – अशुभ

सौभाग्यशाली रंग - सुनहरा चांदी की तरह सफेद एवं कास्य


कुआ नंबर 7 (शुभ दिशाएं)

उत्तर पश्चिम – सर्वश्रेष्ठ

दक्षिण पश्चिम -उत्तम

उत्तर पूर्व -मध्यम

पश्चिम -सामान्य

अशुभ दिशाएं

पूर्व - अत्यंत अशुभ

दक्षिण/दक्षिण पूर्व/उत्तर – अशुभ

सौभाग्यशाली रंग - सुनहरा चांदी सफेद एवं कास्य


कुआ नंबर 8 (शुभ दिशाएं)

दक्षिण पश्चिम – सर्वश्रेष्ठ

उत्तर पश्चिम - उत्तम

उत्तर पूर्व – सामान्य

अशुभ दिशाएं

दक्षिण पूर्व - अत्यंत अशुभ

उत्तर/पूर्व/दक्षिण – अशुभ

सौभाग्यशाली रंग - भूरा पीला एवं हल्का भूरा

कुआं अंक के अनुसार दिशाओं का शुभत्व एवं अशुभत्व अवरोही क्रम में समझा जाना चाहिए । जो शुभ दिशा सबसे पहले है वह उस व्यक्ति के लिए अतिश्रेष्ठ दिशा होगी तथा नीचे की अन्य दिशाओं का शुभत्व क्रमशः थोड़ा कम होता जाएगा । इसी प्रकार से अशुभ दिशाओं के मामले में विचार करना आवश्यक है । अब प्रश्न यह उठता है कि एक ही परिवार में अनेक लोग रहते हैं तो उनके कुआ अंक भी अलग-अलग होंगे । इस प्रकार उनके शुभ तथा अशुभ दिशाओं में भी भिन्नता होगी तो घर के हर चीज का संयोजन कैसे किया जाय । ऐसी स्थिति में घर के प्रधान व्यक्ति को जो आजीविका कमाता है उसे तरजीह दी जानी चाहिए तथा लिविंग एरिया, उसके बेडरूम आदि का संयोजन उस अनुसार किया जाना चाहिए । अन्य सदस्य अपने बेडरूम में अपने कुआ अंक के अनुरूप व्यवस्था कर सकते हैं । पति-पत्नी के कुआ अंक अलग होने पर दोनों के लिए जो उपयुक्त शुभ दिशा हो उसका चयन कर संयोजन करे |