गुरुवार, 19 अगस्त 2021

लाल किताब के अनुसार कालसर्प योग के उपाय

 लाल किताब के अनुसार कालसर्प योग के उपाय

लग्न में राहु,सप्तम केतु हो तो चांदी की ठोस गोली संग रखें यहां राहु का उपाय किया जाएगा |

दूसरे भाव में राहु,अष्टम में केतु हो तो दोरंगा कंबल मंदिर में दें यहां केतु का उपाय किया जाएगा |

तीसरे में राहु तथा नवे में केतु हो तो केतु के उपाय के लिए सोना पहन कर रखें |

चौथे भाव में राहु दशम में केतु हो तो केतु के उपाय के लिए चांदी में शहद घर के बाहर दबाकर रखें |

पंचम राहु,ग्यारहवें केतु होने पर चांदी का हाथी घर में रखें यहां राहु का उपाय किया जाएगा |

छठे भाव में राहु,12वे में केतु हो तो राहु के उपाय के लिए बहन की सेवा करें/ फुल साथ रखें |

सातवें भाव में राहु,लग्न में केतु हो तो लोहे की लाल रंग की गोली हमेशा साथ रखें यहां पर राहु केतु दोनों के उपाय किए जाएंगे इसके अतिरिक्त चांदी की डिब्बी में गंगाजल मे चांदी का चौकोर टुकड़ा डालकर ढक्कन लगाकर रखें पानी सूखने ना दें |

आठवें भाव में राहु,दूसरे में केतु हो तो 800 ग्राम सिक्का धातु 8 टुकड़ों में जल प्रवाह करें यहां राहु का उपाय होगा |

नवे भाव में राहु,तीसरे भाव में केतु हो तो 3 दिन चने की दाल जल प्रवाह करें यह केतु का उपाय होगा |

दसवें भाव में राहु,चौथे में केतु हो तो केतु के उपाय के लिए पीतल में गंगाजल ढक्कन समेत घर पर रखे |

ग्यारहवें भाव में राहु,पांचवे भाव में केतु हो तो 400 ग्राम सिक्का धातु 10 टुकड़ों में तेज पानी मे बहाये यहां राहु का उपाय होगा |

बारहवें भाव में राहु छठे भाव में केतु हो तो चकोर लाल कपड़े में सौफ सिरहाने रखें यहां राहु का उपाय होगा तथा कान में सोना पहने केतु का उपाय होगा |

मंदिर जाना अशुभ क्यू

मंदिर जाना अशुभ   

1)दूसरे बारहवें भाव में शुभ ग्रह हों तथा आठवें और ग्यारहवें भाव में आपस में शत्रु ग्रह हो तो मंदिर जाने से अशुभता  मिलती है इसी प्रकार 8 और 12 भाव में शत्रु ग्रह हो और दूसरा भाव खाली हो तो भी मंदिर जाने में अशुभता मिलती है |

जबकि 8 और 12 भाव में मित्र ग्रह हो, छठे भाव में शुभ ग्रह हो और दूसरा भाव खाली हो तो मंदिर जाना अति शुभता  देता है | 

लाल किताब - कुंडली व ग्रह

 लाल किताब - कुंडली व ग्रह

1)अंधा टेवा - जब दसवें भाव में दो या अधिक शत्रु ग्रह बैठ जाए तो टेवा अंधा देवा कहलाता है,जैसे बुध गुरु अथवा शुक्र मंगल राहु दसवें भाव में हो तो यह देवा अंधा टेवा होगा |

उपाय के तौर पर 10 अंधों को हर वर्ष भोजन कराएं |

2)रतांध ग्रह -  सूर्य चौथे भाव में हो तथा शनि सातवें भाव में हो तो ऐसे में शनि को सोया हुआ माना जाता है |

लग्न खाली होता है इसके लिए मिट्टी के लोटे में शहद जमीन में दबाए |

यदि शनि जागा हुआ हो (लग्न मे ग्रह होतो)  तो बांसुरी में देसी खांड जमीन में दबाए |

3)धर्मी ग्रह - चौथे भाव में राहु केतु ,ग्यारहवें भाव में शनि, गुरु शनि (5 9 11 12) भाव में हो तो टेवा धर्मी ग्रह का टेवा कहलाता हैं |

4)टकराव के ग्रह 1/8 में बैठे हुए ग्रह अशुभ फल देते हैं |

5)बुनियादी ग्रह - 1/5 भाव में ग्रह बैठे हो तो शुभ फल प्रदान करते हैं |

6)मुकाबले का ग्रह - दो मित्र के संग शत्रु ग्रह (एक चाहे दोनों का ) बैठ जाए तो मुकाबले का ग्रह बन जाता है जैसे सप्तम भाव में शुक्र बुध संसूर्य  हो तो पत्नी बीमार रहती है |

7)साथी ग्रह -  अपने-अपने घर पर राशि बदलकर बैठे हुए ग्रह को कहा जाता है |

8)चौथे भाव में जो ग्रह होंगे वह चंद्र समान तासिर देंगे चंद्र शुभ तो शुभ अशुभ तो अशुभ परंतु असर शनि जहां होगा उस भाव का होगा जैसे चौथे भाव में शुक्र,2रे भाव मे चन्द्र हो या आ जाये तो शुभ परंतु यदि चन्द्र 6ठे भाव मे होतो अशुभ होगा |

इसी प्रकार ग्यारहवें भाव में जो ग्रह होगा वह भी शनि जैसा माना जाएगा असर गुरु वाले घर पर होगा  |

9)वर्षफल में दूसरे भाव में आया ग्रह भाग्य जगाता है परंतु दसवें भाव खाली नहीं होना चाहिए ,यदि दूसरे, दसवें भाव में ग्रह हो और शत्रु ना हो तो शुभ फल मिलेंगे |

इसी प्रकार 8वे भाव का ग्रह वर्षफल में दूसरे भाव में आए और 8वा भाव खाली हो तो शुभ फल प्राप्त होते हैं|